लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बिजली चोरी और बकाएदारों के खिलाफ राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने अब तक का सबसे बड़ा और सख्त अभियान छेड़ दिया है। प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर (Smart Prepaid Meter) योजना लागू होने के बाद अब विभाग पूरी तरह से डिजिटल और सख्त मोड में आ गया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में निगेटिव बैलेंस (Negative Balance) यानी मीटर में पैसे खत्म होने के कारण लगभग 5.25 लाख स्मार्ट प्रीपेड उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन सिस्टम द्वारा ऑटोमैटिक रूप से काट दिए गए हैं।READ ALSO:-ऑपरेशन 'आई-स्पाई': गाजियाबाद में ISI के खौफनाक जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, मेरठ का सुहेल और संभल की महक कर रहे थे 'दिल्ली दहलाने' की तैयारी
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सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि कनेक्शन कटने के बाद भी इनमें से करीब 2.1 लाख उपभोक्ताओं ने अपना मीटर रिचार्ज नहीं कराया है। इस आंकड़े ने बिजली विभाग के अधिकारियों के कान खड़े कर दिए हैं। विभाग को शक है कि ये 2.1 लाख लोग अंधेरे में नहीं बैठे हैं, बल्कि 'कटिया' डालकर या अवैध तरीके से बिजली का उपभोग कर रहे हैं। इसी आशंका को देखते हुए पावर कॉर्पोरेशन ने डिस्कॉम (Discom) की विजिलेंस और विभागीय टीमों के साथ मिलकर पूरे प्रदेश में एक सघन 'चेकिंग और धरपकड़' अभियान शुरू कर दिया है।
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'ख़बरीलाल' की इस बेहद खास और विस्तृत रिपोर्ट में आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर यूपी में बिजली विभाग का यह पूरा एक्शन प्लान क्या है, विजिलेंस की टीम कैसे काम कर रही है, पकड़े जाने पर कौन सी धाराएं लगेंगी और आम उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर के क्या नए नियम और राहत की खबरें हैं।
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5.25 लाख कनेक्शन कटे, 2.1 लाख रडार पर
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में लाखों घरों में पुराने एनालॉग या डिजिटल मीटरों को हटाकर 'स्मार्ट प्रीपेड मीटर' लगाए गए हैं। इन मीटरों की खासियत यह है कि ये मोबाइल फोन की तरह काम करते हैं— 'जितना पैसा, उतनी बिजली'। जब आपके मीटर का बैलेंस खत्म हो जाता है और वह 'निगेटिव' में चला जाता है, तो कंट्रोल रूम से ऑटोमैटिक कमांड के जरिए आपके घर की बिजली काट दी जाती है।
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हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पूरे उत्तर प्रदेश में लगभग 5 लाख 25 हजार ऐसे उपभोक्ता थे जिनका बैलेंस शून्य से नीचे (Negative) चला गया था, जिसके परिणामस्वरूप उनकी बिजली कट गई। इनमें से करीब 3 लाख से अधिक लोगों ने तो समझदारी दिखाते हुए तुरंत अपना मीटर रिचार्ज कर लिया और उनकी बिजली चालू हो गई। लेकिन असली समस्या बाकी बचे 2.1 लाख उपभोक्ताओं की है।
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विभाग को क्यों हुआ शक? बिजली विभाग के अधिकारियों का तर्क साफ है। आज के आधुनिक दौर में कोई भी परिवार बिना पंखे, फ्रिज, कूलर या रोशनी के 24 घंटे से ज्यादा नहीं रह सकता। ऐसे में यदि 2 लाख से ज्यादा घरों का मीटर कई दिनों से रिचार्ज नहीं हुआ है, तो इसका सीधा सा अर्थ है कि वहां वैकल्पिक रूप से जनरेटर/इनवर्टर चल रहा है, या फिर (जिसकी संभावना सबसे ज्यादा है) मीटर को बाईपास करके सीधे केबल से 'कटिया' डालकर अवैध रूप से बिजली चोरी की जा रही है।
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इसी 'अवैध उपभोग' की आशंका को जड़ से खत्म करने के लिए UPPCL प्रबंधन ने सख्त रुख अपना लिया है।
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विजिलेंस की सघन जांच और दर्ज हो रही FIR
\r\n\r\nपावर कॉर्पोरेशन के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पूरे प्रदेश में डिस्कॉम की प्रवर्तन (Enforcement) और विजिलेंस (Vigilance) टीमों को अलर्ट कर दिया गया है। जिन 2.1 लाख उपभोक्ताओं ने रिचार्ज नहीं कराया है, उनकी सूची (List) संबंधित थानों और विजिलेंस प्रभारियों को सौंप दी गई है। अब ये टीमें औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) कर रही हैं।
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जनसंपर्क अधिकारी का बयान और कार्रवाई के आंकड़े: UPPCL के जनसंपर्क अधिकारी अखिलेश सिंह ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि विभाग अब किसी भी तरह की बिजली चोरी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। उन्होंने बताया कि अभियान शुरू होने के बाद से अब तक 1211 परिसरों (Premises) की सघन जांच की जा चुकी है।
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18 परिसरों में पकड़ी गई चोरी, हुई FIR: जांच के दौरान जो आशंका थी, वही सच साबित हुई। 1211 में से 18 परिसरों में उपभोक्ता निगेटिव बैलेंस होने के बावजूद अवैध रूप से सीधे तार डालकर बिजली का इस्तेमाल करते हुए रंगे हाथों पकड़े गए। विभाग ने इन सभी 18 लोगों के खिलाफ बिना किसी रियायत के सीधे तौर पर बिजली चोरी की प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी है।
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कानूनी प्रावधान: लग रही हैं धारा 135 और 138-बी: विभाग ने आम जनता के लिए स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि निगेटिव बैलेंस के कारण यदि स्मार्ट मीटर का कनेक्शन कट जाता है और उपभोक्ता बिना मीटर रिचार्ज किए, मीटर को बाईपास करके या केबल काटकर बिजली जलाता है, तो यह भारतीय विद्युत अधिनियम (Electricity Act) की धारा 135 (विद्युत चोरी) और धारा 138-बी (विद्युत लाइनों/मीटरों के साथ छेड़छाड़) के तहत एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। इन धाराओं के तहत पकड़े जाने पर:
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- \r\n भारी-भरकम जुर्माना (Penalty) लगाया जाता है, जो चोरी की गई बिजली के आकलन के आधार पर लाखों में हो सकता है।\r\n \r\n
- \r\n गिरफ्तारी और जेल की सजा का भी कड़ा प्रावधान है।\r\n \r\n
- \r\n भविष्य में नया कनेक्शन मिलने में भी कानूनी अड़चनें आती हैं।\r\n \r\n
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अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से सख्त लहजे में अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की शॉर्टकट या अवैध गतिविधि से बचें और अपने स्मार्ट मीटर के अकाउंट में हमेशा पर्याप्त धनराशि (Balance) बनाए रखें।
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क्या है स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रणाली और कैसे भेजती है अलर्ट?
\r\n\r\nकई बार उपभोक्ताओं की शिकायत होती है कि उन्हें बिना बताए बिजली काट दी गई। इस भ्रम को दूर करते हुए बिजली विभाग ने स्पष्ट किया है कि 'स्मार्ट प्रीपेड मीटर' प्रणाली देश की सबसे पारदर्शी और सुरक्षित प्रणालियों में से एक है। इसमें उपभोक्ता को अंधेरे में नहीं रखा जाता, बल्कि उसे एडवांस में सूचना दी जाती है।
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अलर्ट सिस्टम (SMS Alerts): स्मार्ट प्रीपेड मीटर सीधे उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से जुड़ा होता है। विभाग द्वारा एक त्रि-स्तरीय (Three-Tier) अलर्ट सिस्टम बनाया गया है:
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- \r\n 30% बैलेंस अलर्ट: जब आपके द्वारा रिचार्ज की गई धनराशि का 70% हिस्सा खर्च हो जाता है और केवल 30% बैलेंस बचता है, तो सिस्टम आपके मोबाइल पर पहला SMS भेजता है कि कृपया अपना मीटर रिचार्ज करें।\r\n \r\n
- \r\n 10% बैलेंस अलर्ट: जब बैलेंस और कम होकर मात्र 10% रह जाता है, तब दूसरा और अधिक सख्त अलर्ट मैसेज भेजा जाता है।\r\n \r\n
- \r\n शून्य (Zero) बैलेंस अलर्ट: बैलेंस शून्य होते ही आपको तुरंत सूचित किया जाता है कि आपका पैसा खत्म हो गया है।\r\n \r\n
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3 दिन का 'ग्रेस पीरियड' (Grace Period): विभाग अमानवीय नहीं है। शून्य बैलेंस होने के तुरंत बाद रात के अंधेरे में बिजली नहीं काटी जाती। अगर किसी उपभोक्ता का बैलेंस खत्म हो जाता है, तो उसे पैसे का इंतजाम करने और रिचार्ज करने के लिए 3 दिन का अतिरिक्त समय (Extra Time) दिया जाता है। इस दौरान उसकी बिजली चालू रहती है, लेकिन उसका बैलेंस 'निगेटिव' (माइनस) में जाने लगता है। यदि इन 3 दिनों के भीतर भी रिचार्ज नहीं किया जाता है, तब जाकर सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से लाइन को 'डिस्कनेक्ट' कर देता है।
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रिचार्ज के तरीके और बिजली बहाली की प्रक्रिया (Reconnection Process)
\r\n\r\nअगर किसी कारणवश आपका निगेटिव बैलेंस हो गया है और बत्ती गुल हो गई है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। यूपीपीसीएल ने रिचार्ज और कनेक्शन बहाली की प्रक्रिया को बेहद आसान और फास्ट कर दिया है।
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कैसे करें रिचार्ज? अब उपभोक्ताओं को बिजली दफ्तरों की लंबी लाइनों में लगने की जरूरत नहीं है। आप घर बैठे 24x7 अपना मीटर रिचार्ज कर सकते हैं:
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- \r\n आधिकारिक ऐप: UPPCL के आधिकारिक 'स्मार्ट ऐप' (UPPCL Smart App) के जरिए।\r\n \r\n
- \r\n वेबसाइट: UPPCL की आधिकारिक वेबसाइट (uppcl.org) पर जाकर।\r\n \r\n
- \r\n डिजिटल पेमेंट: अपने मोबाइल के किसी भी UPI ऐप जैसे BHIM (भीम), PhonePe (फोनपे), Google Pay (गूगल पे) या Paytm के माध्यम से कंज्यूमर नंबर डालकर आसानी से पेमेंट कर सकते हैं।\r\n \r\n
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कितनी देर में आएगी बिजली? विभाग ने 'सर्विस लेवल एग्रीमेंट' (SLA) के तहत बकाया भुगतान करने के बाद कनेक्शन वापस जोड़ने के लिए अधिकतम दो घंटे का समय निर्धारित किया है। हालांकि, तकनीक इतनी उन्नत है कि 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में ऑनलाइन रिचार्ज सफल होने के महज कुछ ही मिनटों (2 से 5 मिनट) के भीतर सिस्टम ऑटोमैटिक रूप से कमांड भेजता है और घर की बिजली बहाल हो जाती है।
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समस्या होने पर कहां करें संपर्क? यदि आपने अपना निगेटिव बैलेंस चुका दिया है, मीटर रिचार्ज कर लिया है, लेकिन फिर भी दो घंटे बीत जाने के बाद भी आपके घर की बिजली चालू नहीं हुई है, तो आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। उपभोक्ता तुरंत UPPCL के टोल-फ्री नंबर 1912 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। कस्टमर केयर तुरंत सिस्टम को रीसेट करके आपकी समस्या का समाधान करेगा।
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प्रीपेड उपभोक्ताओं के लिए विशेष छूट और 'संजीवनी' सुविधा
\r\n\r\nपावर कॉर्पोरेशन केवल डंडा ही नहीं चला रहा है, बल्कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर इस्तेमाल करने वाले ईमानदार उपभोक्ताओं को कई तरह की रियायतें और सुविधाएं भी दे रहा है, जो पुराने पोस्टपेड मीटर वालों को नहीं मिलतीं।
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50% भुगतान पर 3 दिन की 'विशेष राहत': मान लीजिए कि महीने के आखिरी दिनों में आपकी जेब खाली है, आपका मीटर निगेटिव में चला गया है और बिजली कट गई है। पूरा बकाया चुकाने के लिए आपके पास पैसे नहीं हैं। ऐसी आपात स्थिति के लिए विभाग ने एक 'विशेष राहत' (Partial Payment Relief) का प्रावधान किया है। अगर आप अपने कुल निगेटिव बकाया राशि का कम से कम 50 प्रतिशत (आधा) हिस्सा भी जमा कर देते हैं, तो सिस्टम इसे एक रिक्वेस्ट मानकर आपकी कटी हुई बिजली को अगले 3 दिनों के लिए फिर से चालू कर देगा। यह 3 दिन का समय आपको अपनी पूरी व्यवस्था करने के लिए दिया जाता है। हालांकि, यह ध्यान रहे कि यह 'संजीवनी' सुविधा प्रत्येक उपभोक्ता को केवल एक बार ही प्रदान की जाती है ताकि वे इस बीच अपना पूर्ण भुगतान कर सकें।
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विद्युत टैरिफ पर 2% की विशेष छूट (Discount): स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगवाने का सबसे बड़ा आर्थिक लाभ यह है कि इसमें आपको पोस्टपेड मीटर के मुकाबले सस्ती बिजली मिलती है। UPPCL प्रीपेड उपभोक्ताओं को उनके निर्धारित विद्युत टैरिफ (Electricity Tariff) पर दो प्रतिशत (2%) की विशेष छूट (Rebate) प्रदान करता है। यानी यदि आपका बिल 1000 रुपये का बनता है, तो प्रीपेड मीटर होने के कारण आपको सिर्फ 980 रुपये ही देने होंगे। यह छूट सीधे आपके बैलेंस में एडजस्ट हो जाती है।
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स्मार्ट मीटरिंग— पारदर्शी और भविष्य की तकनीक
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली पूरी तरह से सुरक्षित, छेड़छाड़-मुक्त (Tamper-proof) और उपभोक्ताओं के हित में काम करने वाली प्रणाली है। इसका मुख्य उद्देश्य 'शुद्ध ऊर्जा खपत' (Actual Energy Consumption) के आधार पर पारदर्शी बिलिंग करना है। पहले जहां मीटर रीडर के न आने, गलत रीडिंग दर्ज होने या 'फर्जी बिल' आने की हजारों शिकायतें आती थीं, स्मार्ट मीटर ने उन सभी मानवीय त्रुटियों (Human Errors) को खत्म कर दिया है।
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अब उपभोक्ता अपनी रोज़ाना की खपत को मोबाइल ऐप पर देख सकता है, अपना बजट खुद तय कर सकता है और बिजली की बचत कर सकता है। वहीं विभाग के लिए भी यह फायदेमंद है क्योंकि इससे राजस्व की समय पर वसूली होती है और लाइन लॉस (Line Loss) कम होता है।
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लेकिन, जो लोग इस पारदर्शी सिस्टम को धोखा देकर पुरानी 'कटिया' संस्कृति की ओर लौटना चाहते हैं, उनके लिए UPPCL का यह विजिलेंस अभियान एक सख्त चेतावनी है: "बिजली चोरी अब छिप नहीं सकती, सीधा मुकदमा होगा।"
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