मेरठ (Real Estate & Utility Desk): अगर आप उत्तर प्रदेश में रहते हैं और अपना कोई मकान, दुकान, या कमर्शियल प्रॉपर्टी किराए पर देने की सोच रहे हैं, या फिर बतौर किराएदार कोई प्रॉपर्टी लेने जा रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। अब तक एक रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement) या किरायानामा बनवाने के लिए लोगों को कचहरी, तहसील या सब-रजिस्ट्रार ऑफिस के कई चक्कर लगाने पड़ते थे। वकील को फीस देना, स्टाम्प पेपर खरीदना और बिचौलियों के नखरे सहना एक आम बात थी।READ ALSO:-बुजुर्गों के हाथ में कानून का 'ब्रह्मास्त्र': बुढ़ापे में सताने वाले बच्चों को घर से निकालें बाहर, छिनेगी सारी संपत्ति; जानिए Senior Citizen Act की पूरी ताकत
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लेकिन, अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इस पूरी पुरानी और जटिल व्यवस्था को हमेशा के लिए बदल दिया है। यूपी सरकार ने एक बेहद पारदर्शी और डिजिटल पहल शुरू की है, जिसके तहत अब आप अपने घर के सोफे पर बैठकर, अपने मोबाइल या लैपटॉप के जरिए खुद ही एक वैध (Legal) किरायानामा तैयार कर सकते हैं।
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क्या है यह नई व्यवस्था और कैसे मिलेगी राहत?
\r\n\r\nइस महत्वपूर्ण फैसले के बारे में मेरठ के सहायक महानिरीक्षक (निबंधन) शर्मा नवीन कुमार ने ईटीवी भारत से विशेष बातचीत की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने विभागीय सेवाओं का व्यापक डिजिटलीकरण करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है।
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जो लोग 12 महीने तक या उससे कम समय के लिए अपनी रेजिडेंशियल (आवासीय) या कॉमर्शियल (व्यावसायिक) प्रॉपर्टी का रेंट एग्रीमेंट बनाना चाहते हैं, उन्हें अब किसी भी सरकारी दफ्तर जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन, पारदर्शी और पेपरलेस (Paperless) बना दिया गया है।
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संक्षिप्त विवरण:
\r\n\r\n| \r\n सुविधा का नाम \r\n | \r\n \r\n ऑनलाइन रेंट एग्रीमेंट (E-Rent Agreement) \r\n | \r\n
| \r\n राज्य \r\n | \r\n \r\n उत्तर प्रदेश (UP) \r\n | \r\n
| \r\n आधिकारिक पोर्टल \r\n | \r\n \r\n igrs.up.gov.in (स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग) \r\n | \r\n
| \r\n समयावधि \r\n | \r\n \r\n अधिकतम 12 महीने तक के लिए \r\n | \r\n
| \r\n प्रमाणीकरण का तरीका \r\n | \r\n \r\n आधार आधारित ई-केवाईसी (e-KYC) और ई-साइन \r\n | \r\n
| \r\n लाभार्थी \r\n | \r\n \r\n मकान मालिक, किराएदार, व्यापारी और आम नागरिक \r\n | \r\n
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कैसे बनाएं ऑनलाइन किरायानामा? (Step-by-Step Process)
\r\n\r\nऑनलाइन किरायानामा बनाने की प्रक्रिया को इतना सरल रखा गया है कि कोई भी व्यक्ति जिसे इंटरनेट की थोड़ी सी भी समझ है, वह इसे आसानी से कर सकता है। यहाँ इसकी पूरी प्रक्रिया विस्तार से दी गई है:
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- \r\n आधिकारिक पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले आपको उत्तर प्रदेश सरकार के स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट igrs.up.gov.in पर जाना होगा।\r\n \r\n
- \r\n विकल्प का चयन: होमपेज पर आपको 'किरायानामा' (Rent Agreement) जेनरेट करने का विकल्प मिलेगा। इस पर क्लिक करें।\r\n \r\n
- \r\n विवरण भरें: यहां एक फॉर्म खुलेगा जिसमें आपको दोनों पक्षों (मकान मालिक और किराएदार) का पूरा नाम, पता, संपर्क सूत्र, और प्रॉपर्टी का पूरा विवरण (जैसे- कितने कमरे हैं, दुकान है या मकान) भरना होगा। साथ ही किराए की राशि और किराए की समयावधि (अधिकतम 12 महीने) दर्ज करनी होगी।\r\n \r\n
- \r\n ई-केवाईसी (e-KYC) सत्यापन: जानकारी भरने के बाद, दोनों पक्षों को आधार कार्ड के माध्यम से ई-केवाईसी पूरी करनी होगी। इससे यह प्रमाणित हो जाएगा कि आवेदन करने वाले व्यक्ति वास्तविक हैं और कोई फर्जीवाड़ा नहीं हो रहा है।\r\n \r\n
- \r\n डिजिटल हस्ताक्षर और फीस: इसके बाद आपको निर्धारित स्टाम्प ड्यूटी का ऑनलाइन भुगतान (Online Payment) करना होगा। अंत में दोनों पक्षों को डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signature/e-Sign) करने होंगे।\r\n \r\n
- \r\n ई-डॉक्यूमेंट की प्राप्ति: जैसे ही प्रक्रिया पूरी होगी, एक ई-डॉक्यूमेंट (E-Document) जेनरेट हो जाएगा। यह डिजिटल किरायानामा सीधे दोनों पक्षों की ओर से दी गई रजिस्टर्ड ईमेल आईडी पर पीडीएफ (PDF) फॉर्मेट में पहुंच जाएगा।\r\n \r\n
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ऑनलाइन रेंट एग्रीमेंट के जबरदस्त फायदे
\r\n\r\nइस नई डिजिटल प्रणाली के लागू होने से आम जनता को कई बड़े फायदे होंगे, जो उनके समय और पैसे दोनों की बचत करेंगे:
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- \r\n बिचौलियों और दलालों से मुक्ति: पहले लोगों को यह जानकारी नहीं होती थी कि उन्हें कितनी स्टाम्प ड्यूटी देनी है। इसी अज्ञानता का फायदा उठाकर बिचौलिए या वकील मनमाने पैसे वसूलते थे। इस व्यवस्था से आपके पैसे सीधे तौर पर बचेंगे।\r\n \r\n
- \r\n समय की भारी बचत: दफ्तरों की लाइनों में लगने और छुट्टी लेकर एग्रीमेंट बनवाने की जरूरत नहीं है। यह काम कुछ ही मिनटों में 24x7 कभी भी किया जा सकता है।\r\n \r\n
- \r\n सुरक्षित रिकॉर्ड कीपिंग: भौतिक (Physical) कागजात अक्सर खो जाते हैं या दीमक का शिकार हो जाते हैं। ऑनलाइन बना यह किरायानामा स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के सुरक्षित सर्वर पर हमेशा मौजूद रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर आप इसे कभी भी दोबारा डाउनलोड कर सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n संदिग्ध एग्रीमेंट का झंझट खत्म: कई बार पुराने तरीके से बनाए गए एग्रीमेंट को कानूनी दांव-पेच में फर्जी या संदिग्ध बता दिया जाता था। लेकिन यह नया ई-डॉक्यूमेंट पूरी तरह से सिस्टम जेनरेटेड होगा, इसलिए इस पर कोई उंगली नहीं उठा सकेगा।\r\n \r\n
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क्या कोर्ट में मान्य होगा यह ऑनलाइन किरायानामा?
\r\n\r\nइस प्रणाली का सबसे मजबूत पहलू इसकी कानूनी वैधता है। सहायक महानिरीक्षक शर्मा नवीन कुमार ने स्पष्ट किया है कि यह ऑनलाइन तैयार किया गया ई-डॉक्यूमेंट पूरी तरह से एक लीगल (Legal) और प्रामाणिक दस्तावेज है। चूंकि यह सरकारी पोर्टल के माध्यम से, आवश्यक स्टाम्प शुल्क चुकाकर और ई-केवाईसी के जरिए बनाया जाता है, इसलिए किसी भी विवाद की स्थिति में न्यायालय (Court Proceedings) में इसे एक ठोस सबूत और कानूनी दस्तावेज के रूप में पूरी मान्यता मिलेगी।
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'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) की ओर एक बड़ा कदम
\r\n\r\nयह सुविधा केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह सरकार के 'ईज ऑफ लिविंग' विजन का एक अहम हिस्सा है। सरकार का प्रयास है कि आम नागरिकों को अपनी रोजमर्रा की कानूनी और प्रशासनिक जरूरतों के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
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आने वाले समय में इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से विभागीय सेवाओं का और भी अधिक डिजिटलीकरण होगा। ऑनलाइन अभिलेख प्रबंधन, ई-साइन आधारित प्रमाणीकरण और पेपरलेस वर्किंग से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार पर सीधी चोट होगी। कुल मिलाकर, यह पहल उत्तर प्रदेश के नागरिकों के लिए एक बेहद सरल, पारदर्शी और सुरक्षित तरीका साबित होने जा रही है। अब आपको बस अपना लैपटॉप खोलना है और आपका कानूनी किरायानामा कुछ ही क्लिक्स में आपके हाथ में होगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.