आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नई सुपरकैपेसिटर तकनीक विकसित की है। टीम का कहना है कि यह तकनीक ब्रेक लगाने पर निकली ऊर्जा को बैटरी में संग्रहीत करने और चार्जिंग तेज करने में मदद कर सकती है। एक मिनट चार्ज होने पर तीन मिनट तक ऊर्जा उपलब्ध होने की बात भी सामने आई है। इससे चार्जिंग के दौरान बैटरी पर पड़ने वाले दबाव को कम करने की दिशा में मदद मिल सकती है।

यह नवाचार संस्थान के रसायन विज्ञान विभाग की टीम ने किया है। टीम में प्रो. प्रकाश चंद्र मंडल, शोध छात्रा नेहा सिंह और प्रियंका मक्कड़ शामिल हैं। सुपरकैपेसिटर के लिए तैयार विशेष हाइब्रिड इलेक्ट्रोड सामग्री को भारत सरकार से इसी साल पेटेंट मिल चुका है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इलेक्ट्रोड सामग्री में कापर फेराइट के सूक्ष्म कणों की सतह पर विशेष कार्बनिक अणु रासायनिक बंधनों के जरिए जोड़े गए हैं। इससे इलेक्ट्रोड के भीतर इलेक्ट्रानों का प्रवाह बढ़ाना संभव होता है। इस बदलाव से सुपरकैपेसिटर का प्रदर्शन बेहतर हो सकता है।

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ईवी के लिए क्यों अहम है यह तकनीक

इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली लीथियम-आयन बैटरियों में ऊर्जा संग्रहीत होती है। इन्हें चार्ज करने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है। सुपरकैपेसिटर कम समय में ऊर्जा ग्रहण करने और अधिक शक्ति उपलब्ध कराने में मददगार माना जा रहा है।

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टीम के मुताबिक, भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल बैटरी के साथ किया जा सकता है। इससे वाहन को तेजी से ऊर्जा देने, बिजली की अचानक बढ़ने वाली मांग संभालने और ब्रेकिंग के दौरान पैदा हुई ऊर्जा को दोबारा संचित करने में मदद मिल सकती है।

प्रोटोटाइप में परीक्षण के नतीजे

शोध टीम ने दो इलेक्ट्रोड वाला एक प्रोटोटाइप उपकरण तैयार किया है। इसमें पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड के घोल को इलेक्ट्रोलाइट और फिल्टर पेपर को विभाजक के रूप में इस्तेमाल किया गया। परीक्षण में उपकरण को 60 सेकंड चार्ज करने के बाद हरी एलईडी बल्ब को 180 सेकंड तक जलाए रखने में सफलता मिली।

प्रो. प्रकाश चंद्र मंडल ने बताया कि यह ऊर्जा भंडारण क्षमता और तेज चार्जिंग का शुरुआती प्रदर्शन है। उनके मुताबिक, भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग कुछ ही मिनटों में करने की दिशा में यह काम आ सकता है। उन्होंने कहा कि इस शोध से सुपर चार्जर पहली बार भारत में बनाना संभव हो सकेगा।

इस शोध का महत्व ईवी की चार्जिंग तेज करने और बैटरी पर पड़ने वाले दबाव को कम करने से जोड़ा जा रहा है। फिलहाल यह तकनीक प्रोटोटाइप और शुरुआती परीक्षण तक सीमित है। टीम ने इसे महत्वपूर्ण नवाचार बताया है।

स्रोत: Jagran

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