पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक धरती बिजनौर, जो अपनी गंगा-जमुनी तहजीब और वीरों की गाथाओं के लिए जानी जाती है, आज एक बार फिर राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगी नजर आई। मौका था 'सेवा दिवस' (Sewa Diwas) का और स्थान था शहर का प्रतिष्ठित जेवीएस रिजॉर्ट (JVS Resort)।READ ALSO:-बिजनौर में कुत्ते को लोगों ने माना 'भैरव बाबा': 4 दिन से कर रहा मंदिर की परिक्रमा; महिलाएं कर रहीं दंडवत प्रणाम, 50 हजार लोग कर चुके दर्शन
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आमतौर पर राजनीतिक रैलियों या शादियों की गवाह बनने वाली यह जगह आज एक अलग ही ऊर्जा से सराबोर थी। यहां न कोई राजनीतिक एजेंडा था और न ही कोई चुनावी वादा—यहां सिर्फ एक ही धर्म था, और वह था 'राष्ट्र धर्म'। सेना की वर्दी का अनुशासन, प्रशासन की गंभीरता और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी—ये तीनों आज एक ही मंच पर नजर आए।
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बिजनौर सांसद चंदन चौहान, सेवानिवृत्त मेजर जनरल अजीत सिंह गहलोत और जिलाधिकारी जसजीत कौर की गरिमामयी उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया। यह आयोजन सिर्फ एक रस्म अदायगी नहीं था, बल्कि उन शहीदों और वीरों को याद करने का एक महायज्ञ था, जिन्होंने हमारी कल के लिए अपना आज कुर्बान कर दिया।
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1. भव्य आयोजन: सेना, प्रशासन और जनता का संगम

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जेवीएस रिजॉर्ट का विशाल प्रांगण आज खचाखच भरा था। कार्यक्रम की शुरुआत होते ही माहौल में एक अलग ही गंभीरता छा गई।
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    भागीदारी: इस महासंगम में समाज के हर वर्ग ने हिस्सा लिया। क्या पूर्व सैनिक, क्या प्रशासनिक अधिकारी, क्या स्कूल के नन्हे-मुन्ने बच्चे और क्या शहर के गणमान्य नागरिक—सब एक ही छत के नीचे 'भारत माता' के जयकारे लगा रहे थे।
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    मुख्य अतिथि: कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में बिजनौर के युवा और ओजस्वी सांसद चंदन चौहान ने शिरकत की।
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    विशिष्ट अतिथि: भारतीय सेना के शौर्य के प्रतीक, सेवानिवृत्त मेजर जनरल अजीत सिंह गहलोत की उपस्थिति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उनकी मौजूदगी पूर्व सैनिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत थी।
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    प्रशासनिक नेतृत्व: जिले की मुखिया, जिलाधिकारी जसजीत कौर की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि प्रशासन सेना और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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2. 'ऑपरेशन सिंदूर': वो नाटिका जिसने सबको रुला दिया

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कार्यक्रम का सबसे भावुक और यादगार हिस्सा वह था, जब मंच पर गुरुकुल इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, हरचंदपुर के छात्र-छात्राएं आए। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) पर आधारित एक बेहद मार्मिक नाटिका प्रस्तुत की।
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क्या था नाटिका में? बच्चों ने अपने अभिनय से दिखाया कि कैसे एक सैनिक सीमा पर जाता है, कैसे उसकी पत्नी (वीर नारी) घर पर उसका इंतजार करती है, और कैसे तिरंगे में लिपटकर आने पर उस पत्नी का 'सिंदूर' देश के नाम कुर्बान हो जाता है।
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    जब मंच पर नन्हे कलाकारों ने शहादत का दृश्य दिखाया, तो पूरा हॉल सन्न रह गया।
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    पृष्ठभूमि में बजते देशभक्ति गीतों और बच्चों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों की आंखों में आंसू ला दिए।
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    खुद सांसद चंदन चौहान और डीएम जसजीत कौर भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ बच्चों का उत्साहवर्धन किया। यह प्रस्तुति सिर्फ एक नाटक नहीं, बल्कि सैनिकों के परिवारों के त्याग का जीवंत दस्तावेज थी।
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3. सम्मान समारोह: जब वीरों के आगे झुका प्रशासन

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सेवा दिवस का मूल उद्देश्य सेवा और त्याग का सम्मान करना है। इसी कड़ी में एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
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वीर नारियों का सम्मान: मंच पर उन 'वीर नारियों' (War Widows) को बुलाया गया, जिन्होंने अपने पतियों को देश की रक्षा में खो दिया है।
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    सांसद चंदन चौहान, मेजर जनरल अजीत सिंह गहलोत और डीएम जसजीत कौर ने संयुक्त रूप से शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान किया।
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    इस दौरान माहौल बेहद गमगीन लेकिन गर्व से भरा हुआ था। अतिथियों ने यह संदेश दिया कि पूरा देश इन परिवारों का ऋणी है।
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गैलंट्री अवॉर्ड विजेता: उन पूर्व सैनिकों को भी सम्मानित किया गया जिन्हें सेना में उनकी बहादुरी के लिए गैलंट्री अवॉर्ड (Gallantry Awards) से नवाजा गया था। उनकी छाती पर लगे मेडल और मंच पर मिलता सम्मान देख युवा पीढ़ी में देशसेवा का जज्बा हिलोरे लेने लगा।
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4. अतिथियों का उद्बोधन: क्या बोले दिग्गज?

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सांसद चंदन चौहान का संदेश: अपने संबोधन में सांसद चंदन चौहान ने कहा, "बिजनौर वीरों की धरती है। आज सेवा दिवस पर हम सब यहां इसलिए जमा हुए हैं ताकि अपनी सेना और उनके परिवारों को बता सकें कि वे अकेले नहीं हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसी नाटिकाएं हमें याद दिलाती हैं कि हमारी आजादी मुफ्त में नहीं मिली है, इसके लिए किसी ने अपना सुहाग और किसी ने अपना बेटा खोया है।"
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डीएम जसजीत कौर की प्रतिबद्धता: जिलाधिकारी जसजीत कौर ने प्रशासन की ओर से आश्वस्त किया कि पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों की समस्याओं का समाधान उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, "एक सैनिक जब सीमा पर खड़ा होता है, तो वह निश्चिंत रहना चाहिए कि पीछे प्रशासन उसके परिवार का ख्याल रखेगा। हम उसी भरोसे को कायम रखने के लिए यहां हैं।"
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मेजर जनरल अजीत सिंह गहलोत (रि.) का अनुभव: मेजर जनरल गहलोत ने अपने सैन्य अनुभवों को साझा करते हुए युवाओं को अनुशासन और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सेवा दिवस का असली अर्थ निस्वार्थ भाव से समाज और देश की सेवा करना है।
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5. समापन और आभार: एक नई ऊर्जा का संचार

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कार्यक्रम के समापन सत्र में आयोजकों ने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रशासन, पुलिस, पूर्व सैनिकों, विद्यालय प्रबंधन और विशेष रूप से गुरुकुल इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के बच्चों का धन्यवाद किया जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाया।
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जब कार्यक्रम समाप्त हुआ, तो जेवीएस रिजॉर्ट से निकलने वाले हर शख्स के चेहरे पर एक संतोष और गर्व का भाव था। बिजनौर में आयोजित यह 'सेवा दिवस' महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक संकल्प था—देश की सुरक्षा, सम्मान और सेवा का।
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ख़बरीलाल की टिप्पणी: ऐसे आयोजन समाज में संजीवनी का काम करते हैं। बिजनौर में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का एक मंच पर आकर सैनिकों का सम्मान करना एक स्वस्थ लोकतंत्र और मजबूत राष्ट्र की निशानी है। गुरुकुल के बच्चों ने साबित कर दिया कि देश का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।
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