नई दिल्ली: केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच एक बार फिर नए मोबाइल एप्लीकेशन को लेकर ठन गई है। मुद्दा है दूरसंचार विभाग (DoT) का नया आदेश, जिसमें सभी मोबाइल फोनों में Sanchar Saathi App (संचार साथी ऐप) को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य करने की बात कही गई थी। इस मुद्दे पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसे 'जासूसी ऐप' करार दिया, जिसके बाद विवाद गहरा गया। बढ़ते विरोध को देखते हुए मंगलवार को केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सफाई दी है कि यह ऐप अनिवार्य नहीं है और यूजर चाहे तो इसे डिलीट कर सकते हैं।READ ALSO:-मेरठ: 'मैं नर्वस हो गया था...', सुहागरात पर 'बल्ब' लेने निकला दूल्हा 4 दिन बाद हरिद्वार में मिला, बताई भागने की असली वजह
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क्या है Sanchar Saathi App विवाद?

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दरअसल, केंद्र सरकार ने 1 दिसंबर को एप्पल, सैमसंग, वीवो और ओप्पो जैसी बड़ी स्मार्टफोन कंपनियों को एक आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि अगले 90 दिनों के भीतर बिकने वाले सभी स्मार्टफोन्स में Sanchar Saathi App पहले से इंस्टॉल होना चाहिए। शुरुआती खबरों के मुताबिक, इसे डिलीट या डिसेबल करने का विकल्प यूजर्स के पास नहीं होना था। इसी आदेश के बाद विपक्ष ने इसे निजता (Privacy) पर हमला बताया।
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प्रियंका गांधी का वार: 'सरकार जासूसी करना चाहती है'

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सरकार के इस कदम पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह कदम लोगों की प्राइवेसी पर सीधा हमला है। Sanchar Saathi App एक तरह का जासूसी ऐप है। सरकार इसके जरिए देश के हर नागरिक की निगरानी करना चाहती है।"
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उन्होंने आगे कहा कि साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए सिस्टम जरूरी है, लेकिन इसका बहाना बनाकर लोगों की निजी जिंदगी में ताक-झांक करना गलत है। वहीं, कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन बताते हुए संसद में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस भी दिया।
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सरकार का यू-टर्न: सिंधिया बोले- अनिवार्य नहीं है ऐप

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विपक्ष के चौतरफा हमलों के बाद सरकार बैकफुट पर नजर आई। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि Sanchar Saathi App को मोबाइल में रखना अनिवार्य नहीं (Not Mandatory) है। उन्होंने कहा, "सरकार का उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा है, निगरानी नहीं। अगर कोई यूजर इसे अपने फोन में नहीं रखना चाहता, तो वह इसे आसानी से डिलीट कर सकता है।"
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हालांकि, DoT के शुरुआती नोट में इसे अन-इंस्टॉल न किए जा सकने वाला बताया गया था, लेकिन अब सरकार ने इसमें ढील देने के संकेत दिए हैं।
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विपक्ष लामबंद: 'पेगासस पार्ट-2' की आशंका

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कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि मदद के नाम पर बीजेपी लोगों की निजी जानकारी तक पहुंच बनाना चाहती है। उन्होंने कहा, "हमने भारत में पेगासस जैसे मामले देखे हैं। अब Sanchar Saathi App के जरिए 120 करोड़ फोनों की निगरानी की कोशिश हो रही है।" वहीं, सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने इसे सुप्रीम कोर्ट के पुट्टास्वामी फैसले (निजता का अधिकार) के खिलाफ बताया।
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Sanchar Saathi App क्या है और कैसे काम करता है?

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सरकार के मुताबिक, Sanchar Saathi App एक साइबर सिक्योरिटी टूल है, जिसे 17 जनवरी 2025 को लॉन्च किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य साइबर फ्रॉड, फर्जी IMEI नंबर और मोबाइल चोरी को रोकना है।
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    खोया फोन खोजें: यह ऐप चोरी या गुम हुए फोन को ट्रैक और ब्लॉक करने में मदद करता है।
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    IMEI जांच: यूजर किसी भी पुराने फोन को खरीदने से पहले उसकी वैधता (IMEI) जांच सकते हैं।
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    फ्रॉड रिपोर्टिंग: संदिग्ध कॉल, मैसेज या वॉट्सएप चैट की रिपोर्ट की जा सकती है।
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सरकार का दावा है कि इस सिस्टम के जरिए अब तक 7 लाख से ज्यादा चोरी हुए मोबाइल बरामद किए जा चुके हैं।
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टेक कंपनियों की मुश्किलें

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इस आदेश से मोबाइल निर्माता कंपनियां, खासकर एप्पल (Apple) पसोपेश में है। एप्पल की ग्लोबल पॉलिसी किसी भी थर्ड-पार्टी या सरकारी ऐप को प्री-इंस्टॉल करने की इजाजत नहीं देती। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार और टेक कंपनियों के बीच इस मुद्दे पर लंबी बातचीत चल सकती है।
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Sanchar Saathi App का उद्देश्य भले ही साइबर सुरक्षा को मजबूत करना हो, लेकिन इसे लागू करने के तरीके ने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष इसे निजता का हनन मान रहा है, जबकि सरकार इसे सुरक्षा कवच बता रही है। फिलहाल, सरकार की ताजा सफाई कि 'ऐप डिलीट किया जा सकता है', से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन टेक कंपनियों और प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स की चिंताएं अभी भी बरकरार हैं।
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सारांश: केंद्र सरकार द्वारा मोबाइल फोन में Sanchar Saathi App को प्री-इंस्टॉल करने के आदेश पर विवाद छिड़ गया है। प्रियंका गांधी ने इसे जासूसी का जरिया बताया, जिसके बाद सरकार ने सफाई दी कि यह ऐप अनिवार्य नहीं है और इसे डिलीट किया जा सकेगा। विपक्ष का आरोप है कि यह निजता के अधिकार का हनन है।
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