उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में विकास और जन-सुविधाओं के बीच चल रहा संघर्ष अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। जनपद के हेमराज बंगाली कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों ने नवनिर्मित नेशनल हाईवे 34 (NH-34) पर अंडरपास की मांग को लेकर अपना विरोध तेज कर दिया है। पिछले नौ महीनों से चल रहा यह शांतिपूर्ण आंदोलन अब प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव का केंद्र बन चुका है।READ ALSO:-Bijnor Police 2.0: अब एआई (AI) और सुरीले गीतों से थमेगा साइबर अपराध! बिजनौर पुलिस ने इन्फ्लुएंसर्स के साथ मिलाया हाथ; एसपी ने जारी किया 'डिजिटल सुरक्षा कवच'
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आज, 19 जनवरी 2026 को बड़ी संख्या में बंगाली समाज के लोग और स्थानीय निवासी कलेक्टर ऑफिस (जिलाधिकारी कार्यालय) पहुँचे और अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया। निवासियों का आरोप है कि प्रशासन उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय 'तानाशाही' रवैया अपना रहा है।
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प्रशासन की शनिवार रात की कार्रवाई और जनाक्रोश

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इस आंदोलन में सबसे बड़ा मोड़ शनिवार रात (17 जनवरी 2026) को आया, जब जिला प्रशासन और पुलिस ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। रिपोर्टों के अनुसार, महीनों से धरने पर बैठे बंगाली समाज के लोगों को प्रशासन ने नजरबंद (House Arrest) कर दिया।
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इतना ही नहीं, प्रशासन ने अंधेरे का लाभ उठाते हुए धरना स्थल पर भारी मात्रा में मिट्टी डलवा दी, जिससे वहां अंडरपास निर्माण की संभावना लगभग समाप्त हो गई। इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है। कॉलोनी की महिलाओं और बुजुर्गों का कहना है कि प्रशासन ने बिना किसी पूर्व संवाद के यह कदम उठाया है, जो लोकतंत्र के खिलाफ है।
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क्यों हो रही है बिजनौर में अंडर पास की मांग?

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बिजनौर के हेमराज बंगाली कॉलोनी के निवासियों के लिए अंडरपास केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि सुरक्षा का सवाल है। एनएच-34 के चौड़ीकरण और निर्माण के बाद, पुरानी आबादी और मुख्य सड़क के बीच का संपर्क लगभग कट गया है।
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1. सुरक्षा और दुर्घटनाओं का भय

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स्थानीय निवासियों का कहना है कि हाईवे पर वाहनों की गति अत्यधिक तीव्र होती है। स्कूल जाने वाले बच्चे, महिलाएं और बुजुर्गों को सड़क पार करने में अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। पूर्व में भी इस क्षेत्र में सड़क पार करते समय कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें स्थानीय लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
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2. बाढ़ और भौगोलिक चुनौतियां

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बंगाली परिवारों का कहना है कि यह क्षेत्र गंगा और मालन नदियों के करीब है। बाढ़ की स्थिति में आर्थिक रूप से भारी नुकसान होता है, और सुरक्षित निकासी मार्ग न होने से संकट और बढ़ जाता है।
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3. आबादी का संपर्क टूटना

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कॉलोनी के निवासियों के अनुसार, यह एक वर्षों पुरानी आबादी है। हाईवे के निर्माण ने उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन को दो हिस्सों में बांट दिया है। अंडरपास न होने से उन्हें कई किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है।
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नौ महीने लंबा संघर्ष: अप्रैल 2025 से अब तक

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बंगाली समाज का यह धरना प्रदर्शन कोई अचानक हुई घटना नहीं है। यह संघर्ष 18 अप्रैल 2025 को शुरू हुआ था।
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    246 दिनों का अटूट धरना: भारतीय किसान संघ के तत्वावधान में यह धरना लगातार 246 दिनों से अधिक समय तक चला।
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    पूजा और प्रार्थना: जब प्रशासन ने उनकी नहीं सुनी, तो नवंबर 2025 में प्रदर्शनकारियों ने धरना स्थल पर ही पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन शुरू कर दिया। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि प्रशासन की 'आंखें और कान' खुलें।
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    प्रतिनिधिमंडलों की मुलाकात: आंदोलनकारियों ने सांसद चंदन चौहान और विधायक सुचि मौसम चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई, लेकिन आश्वासन के अलावा ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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प्रशासन और NHAI का पक्ष

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जहां जनता अंडरपास की मांग पर अड़ी है, वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि बिजनौर में अंडर पास की मांग को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया गया है।
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"अंडरपास के निर्माण के प्रस्ताव को एनएचएआई (NHAI) मुख्यालय से पहले ही अस्वीकार कर दिया गया है।" — प्रशासनिक अधिकारी।
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प्रशासन का तर्क है कि हाईवे के डिजायन में उस स्थान पर अंडरपास का प्रावधान नहीं है और अब निर्माण कार्य काफी आगे बढ़ चुका है। मिट्टी डालने की कार्रवाई को प्रशासन ने 'काम को गति देने और व्यवस्था बनाए रखने' का हिस्सा बताया है। हालांकि, प्रदर्शनकारी इस दलील को मानने को तैयार नहीं हैं।
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राजनीतिक सरगर्मियां और बढ़ता आंदोलन

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बिजनौर का यह स्थानीय मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। शनिवार की कार्रवाई के बाद विभिन्न दलों के नेताओं ने बंगाली समाज के प्रति सहानुभूति जताई है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को जनता की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं और प्रशासन का रवैया नहीं बदला, तो वे बड़े आंदोलन (Massive Movement) के लिए मजबूर होंगे। आज के कलेक्टर ऑफिस के प्रदर्शन में भी यही स्वर सुनाई दिया। निवासियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
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सुरक्षा ऑडिट की आवश्यकता

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स्वतंत्र विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में हाईवे निर्माण के दौरान रोड सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। यदि एक बड़ी आबादी (विशेषकर बंगाली कॉलोनी जैसी स्थापित बस्तियां) हाईवे के कारण कट रही है, तो वहां अंडरपास या फुट-ओवर-ब्रिज (FOB) अनिवार्य होना चाहिए।
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बिजनौर के इस मामले में, निवासियों का दावा है कि उनकी मांगों की अनदेखी करना भविष्य में बड़े हादसों को निमंत्रण देना है। सांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली 30% दुर्घटनाएं पैदल यात्रियों के गलत तरीके से सड़क पार करने के कारण होती हैं, जिसे सुरक्षित क्रॉसिंग के जरिए रोका जा सकता है।
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समाधान की तलाश

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बिजनौर में अंडर पास की मांग अब केवल एक ढांचागत मांग नहीं रही, बल्कि यह नागरिक अधिकारों और प्रशासनिक संवेदनशीलता की परीक्षा बन गई है। एक ओर प्रशासन तकनीकी बाधाओं का हवाला दे रहा है, तो दूसरी ओर जनता अपनी जान की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रही है।
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समाधान के लिए आवश्यक है कि प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच एक पारदर्शी संवाद स्थापित हो। यदि अंडरपास संभव नहीं है, तो क्या कोई वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग (जैसे लाइट अंडरपास या ओवरब्रिज) प्रदान किया जा सकता है? शनिवार रात की 'नजरबंदी' जैसी कार्रवाइयां जनता के विश्वास को और कम करती हैं।
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बिजनौर की हेमराज बंगाली कॉलोनी के निवासी एनएच-34 पर अंडरपास की मांग को लेकर नौ महीने से आंदोलनरत हैं। 17 जनवरी 2026 की रात प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को नजरबंद कर धरना स्थल पर मिट्टी डलवा दी, जिसके विरोध में आज लोगों ने कलेक्टर ऑफिस पर प्रदर्शन किया। निवासियों का कहना है कि हाईवे के कारण उनकी सुरक्षा खतरे में है, जबकि प्रशासन का दावा है कि मुख्यालय ने अंडरपास की अनुमति नहीं दी है। स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और निवासी बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
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