दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार विस्फोट ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। सोमवार के इस आतंकी हमले के एक दिन बाद मंगलवार को एलएनजेपी अस्पताल का दृश्य दिल दहला देने वाला था, जहां मारे गए 8 लोगों के शव परिजनों को सौंपे गए। विस्फोट की भयावहता इतनी थी कि कई शव बुरी तरह से क्षत-विक्षत हो गए थे, जिसके कारण उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो गया था। इस त्रासदी में जान गंवाने वालों में टैक्सी ड्राइवर, बस कंडक्टर और दुकानदार शामिल थे।READ ALSO:-मेरठ में हैवानियत की हदें पार! 13 साल की भतीजी के प्राइवेट पार्ट पर चाची ने डाला केमिकल, दर्द से तड़पती रही मासूम
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अमर कटारिया के टैटू से मिली पहचान
\r\n\r\nविस्फोट में मारे गए लोगों में 34 वर्षीय व्यवसायी अमर कटारिया भी शामिल थे, जिनकी पहचान उनके शरीर पर बने भावनात्मक टैटू से हुई। यह घटना बताती है कि किस तरह मामूली निशान भी ऐसी भयावह स्थिति में पहचान का सहारा बन जाते हैं।
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- \r\n टैटू का महत्व: अमर के हाथ पर 'मॉम माय फर्स्ट लव' (Mom My First Love), 'डैड माय स्ट्रेंथ' (Dad My Strength) और 'कृति' (पत्नी का नाम) लिखा था। अमर के पिता जगदीश कटारिया को अपने बेटे के इन टैटू पर गर्व था।\r\n \r\n
- \r\n पहचान की प्रक्रिया: पिता जगदीश कटारिया ने बताया कि अस्पताल से उन्हें फोन आया और पूछा गया कि 'मॉम माय फर्स्ट लव' टैटू वाला व्यक्ति उनका क्या लगता है। अस्पताल जाकर टैटू के सहारे ही उन्होंने अपने बेटे के शव की शिनाख्त की, जब उनका बेटा मेट्रो पकड़ने जा रहा था।\r\n \r\n
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अपनों को खोने वाले परिवारों की दर्दभरी दास्तान
\r\n\r\nअमर कटारिया के अलावा अन्य पीड़ितों की पहचान भी इसी तरह के भावुक और मुश्किल तरीकों से की गई:
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- \r\n मोहम्मद जुनमान (35 वर्षीय ई-रिक्शा चालक): मोहम्मद जुनमान का फोन रात भर बंद था। उनके चाचा इदरीस ने पोस्टमॉर्टम हाउस में उनकी नीली शर्ट और जैकेट देखकर दर्द भरे स्वर में कहा, "ये मेरा मोहम्मद है।" जुनमान की पत्नी दिव्यांग हैं, और उनके तीन बच्चे अब अनाथ हो गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n पंकज (22 वर्षीय कैब ड्राइवर): पंकज 12वीं तक पढ़े थे और मीशो (Meesho) में नौकरी जाने के बाद कैब चला रहे थे। वह सोमवार शाम पड़ोसी को छोड़ने लाल किला गए थे। उनके साले निकेश कुमार ने बताया कि ब्लास्ट की खबर मिलने के बाद उन्होंने कई बार पंकज को फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मौके पर उनकी कार आधी जली हुई और पिछला हिस्सा उड़ा हुआ मिला।\r\n \r\n
- \r\n नौमान अंसारी (22 वर्षीय दुकानदार): नौमान यूपी के शामली से अपनी कॉस्मेटिक्स दुकान के लिए सामान खरीदने दिल्ली आए थे। वह अपने परिवार में एकमात्र कमाने वाले थे, क्योंकि उनके बड़े भाई की किडनी फेल थी। इस विस्फोट ने उनके परिवार का सहारा छीन लिया।\r\n \r\n
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शवों की शिनाख्त और NIA जांच
\r\n\r\nशवों की बुरी हालत को देखते हुए, कुछ मामलों में परिजनों को डीएनए (DNA) नमूने लेने के लिए भी कहा गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ब्लास्ट की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को सौंप दी है।
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- \r\n गृह मंत्रालय की बैठक: मंगलवार शाम को गृह मंत्रालय में इस ब्लास्ट को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें सभी जांच एजेंसियों के अधिकारी शामिल थे। इससे पहले मंगलवार सुबह 11 बजे गृह मंत्री अमित शाह के घर पर भी एक बैठक हुई थी, जिसमें आईबी (IB), NIA समेत जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी (DGP) भी मौजूद थे।\r\n \r\n
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परिवार में विवाद और शोक
\r\n\r\nइस त्रासदी ने कई परिवारों में विवाद भी पैदा कर दिया। उत्तर-प्रदेश के मेरठ के रहने वाले 35 साल के मोहसिन, जो ई-रिक्शा चलाते थे, उनकी मौत के बाद परिवार में अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हुआ। उनकी पत्नी सुल्ताना चाहती थीं कि उन्हें दिल्ली में दफनाया जाए, जबकि परिवार मेरठ ले जाना चाहता था। अंततः पुलिस की मदद से मोहसिन का अंतिम संस्कार मेरठ में हुआ।
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इन दर्दनाक कहानियों ने दिल्लीवासियों को झकझोर कर रख दिया है। NIA अब इस हमले के पीछे के मकसद और पुलवामा के संदिग्ध डॉ. उमर नबी से जुड़े आतंकी मॉड्यूल की गहन जांच कर रही है।
Sabse pehle comment karne wale banein.