रामपुर (Rampur News): उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में 11 फरवरी को जिला पंचायत कार्यालय के भीतर हुए गोलीकांड ने पूरे प्रदेश को सन्न कर दिया है। दिनदहाड़े एक वकील की हत्या कर दी गई और आरोपी कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि उसी कार्यालय का एक बाबू (क्लर्क) निकला। अब इस पूरी घटना का रोंगटे खड़े कर देने वाला सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) गुरुवार को सामने आया है, जिसने वारदात की पूरी कहानी को शीशे की तरह साफ कर दिया है।READ ALSO:-मेरठ: शारदा रोड पर 'लव जिहाद' के शक में कोहराम; जिम ट्रेनर को हिंदू लड़की के साथ देख संगठनों ने रेस्टोरेंट में दबोचा, जमकर हुई धुनाई
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वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे चंद मिनटों की कहासुनी मौत के खेल में बदल गई। वकील फारुख अहमद (Advocate Farooq Ahmed) और बाबू असगर अली (Clerk Asgar Ali) के बीच 3 थप्पड़, 5 मिनट की तीखी बहस और फिर रिवाल्वर की गूंज... यह सब कुछ कैमरे में कैद हो गया। पुलिस अब इसी फुटेज को आधार बनाकर मामले की जांच को आगे बढ़ा रही है। आइए जानते हैं, उस खौफनाक दोपहर को जिला पंचायत के बंद कमरे में आखिर हुआ क्या था।
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सीसीटीवी ने खोले राज: पल-पल की दास्तां

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गुरुवार को वायरल हुए सीसीटीवी फुटेज ने इस हत्याकांड की परते खोल दी हैं। 11 फरवरी की दोपहर करीब 1 बजे की यह घटना कैमरे में कैद हुई है। वीडियो में दिख रहा मंजर बताता है कि किस तरह गुस्से (Rage) ने हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद कर दिया।
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दोपहर 1:00 बजे: वकील की एंट्री फुटेज की शुरुआत में वकील फारुख अहमद जिला पंचायत कार्यालय के उस केबिन में दाखिल होते हैं, जहां बाबू असगर अली अपनी सीट पर बैठा है। फारुख के चेहरे पर गुस्सा साफ देखा जा सकता है। उनके साथ उनका एक साथी वकील भी मौजूद है। फारुख सीधे बाबू की मेज के पास पहुंचते हैं। पास में ही दरवाजे पर फारुख की पत्नी गौसिया (जो वहीं क्लर्क हैं) भी खड़ी नजर आती हैं।
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शुरुआती बहस और "हॉट-टॉक" अंदर घुसते ही फारुख, बाबू असगर अली से अपनी पत्नी को लेकर कुछ कहते हैं। बताया जा रहा है कि इससे थोड़ी देर पहले गौसिया और असगर के बीच किसी फाइल या बात को लेकर नोकझोंक हुई थी, जिसके बाद गौसिया ने अपने पति को बुला लिया था। वीडियो में फारुख और असगर के बीच तीखी बहस होती दिख रही है। दोनों एक-दूसरे पर चिल्लाते नजर आ रहे हैं।
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वो 3 थप्पड़ जिन्होंने बदल दी कहानी बहस के दौरान अचानक वकील फारुख का आपा खो जाता है। वीडियो में दिखता है कि वह आव देखा न ताव, कुर्सी पर बैठे बाबू असगर को एक जोरदार थप्पड़ जड़ देते हैं।
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    पहला थप्पड़: असगर को संभलने का मौका भी नहीं मिलता। वह हक्का-बक्का रह जाता है और विरोध में अपनी कुर्सी से खड़ा हो जाता है।
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    दूसरा थप्पड़: जैसे ही असगर खड़ा होकर विरोध करता है, फारुख उसे दूसरा थप्पड़ मार देते हैं। इस थप्पड़ से असगर लड़खड़ाकर वापस अपनी कुर्सी पर गिर पड़ता है।
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    तीसरा थप्पड़: जमीन पर गिरने और मोबाइल उठाकर किसी को कॉल करने की कोशिश करते हुए असगर को फारुख तीसरा थप्पड़ भी जड़ देते हैं।
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इस दौरान असगर अपने हाथ से इशारा करके वकील को देख लेने की धमकी देता है। वहां मौजूद अन्य कर्मचारी और वकील का साथी बीच-बचाव करने की कोशिश करते हैं।
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जाने लगे थे वकील, तभी आई "मौत की ललकार" 

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वीडियो का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा तब आता है जब मामला शांत होता दिखाई देता है। बीच-बचाव के बाद फारुख वापस लौटने लगते हैं। वह केबिन के दरवाजे तक पहुंच जाते हैं। लेकिन जाते-जाते वह पीछे मुड़कर असगर को कुछ अपशब्द या चेतावनी दे देते हैं।
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यही वह पल था जब बाबू असगर अली के सब्र का बांध टूट गया। अपनी बेइज्जती से तिलमिलाए असगर ने अपनी कमर में लगी लाइसेंसी रिवॉल्वर (Licensed Revolver) निकाल ली। उसने रिवॉल्वर को अनलॉक किया और जाते हुए वकील को ललकारा।
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गुत्थमगुत्था और फायरिंग ललकार सुनते ही फारुख तेजी से वापस मुड़े और असगर की तरफ लपके। दोनों के बीच जबरदस्त गुत्थमगुत्था शुरू हो गई। फारुख ने असगर की कमर पकड़ ली और उसे काबू करने की कोशिश की। दोनों लड़ते-लड़ते कुर्सी पर गिर पड़े। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बाबू के हाथ में लोडेड रिवॉल्वर थी और उसकी उंगली ट्रिगर पर।
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    पहली और दूसरी गोली: हाथापाई के बीच ही असगर ने वकील के सीने में ताबड़तोड़ दो गोलियां दाग दीं।
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    तीसरी गोली: इस छीनाझपटी में एक गोली खुद बाबू असगर के पेट में भी जा लगी।
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गोली लगते ही फारुख की पकड़ ढीली पड़ गई और वह कुर्सी के सहारे निढाल होकर गिर पड़े। उनके शरीर से खून बहने लगा।
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खून का खेल यहीं नहीं रुका

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गोली मारने के बाद भी असगर का गुस्सा शांत नहीं हुआ। फायरिंग की आवाज सुनकर जब वकील के साथी ने उसे पकड़ने की कोशिश की, तो असगर ने उस पर भी बंदूक तान दी और दूर रहने की धमकी दी।
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इसके बाद, केबिन से बाहर निकलते वक्त उसकी नजर वकील की पत्नी गौसिया पर पड़ी। वीडियो में दिखता है कि भागते हुए असगर ने गौसिया के सिर पर रिवॉल्वर की बट (Butt of the gun) से जोरदार वार किया और वहां से फरार हो गया।
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घायल फारुख ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि आरोपी असगर खुद को गोली लगने के कारण अस्पताल पहुंच गया।
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परिवार का आरोप: "सोची-समझी साजिश थी"

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घटना के बाद वकील फारुख के परिवार में कोहराम मच गया है। फारुख के भतीजे कामरान खान ने मीडिया को बताया कि यह हत्या अचानक हुए गुस्से का नतीजा नहीं, बल्कि एक साजिश लग रही है।
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कामरान ने कहा, "चाची (गौसिया) ने चाचा को फोन करके बुलाया था क्योंकि असगर उन्हें परेशान कर रहा था। वहां पहुंचने पर असगर ने जानबूझकर विवाद बढ़ाया। उसने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से चाचा की हत्या की है। बाद में खुद को बचाने के लिए और सेल्फ डिफेंस (Self Defense) का केस बनाने के लिए उसने खुद को गोली मारी है।"
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पुलिस भी इस एंगल से जांच कर रही है कि क्या बाबू असगर को लगी गोली एक्सीडेंटल थी या उसने खुद को बचाने के लिए यह ड्रामा रचा।
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कौन थे फारुख अहमद?

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फारुख अहमद (45 वर्ष) रामपुर जिला कचहरी में एक प्रतिष्ठित वकील थे। वह पिछले 15-20 सालों से वकालत की प्रैक्टिस कर रहे थे। उनका परिवार शहर के नालापार इलाके में रहता है। फारुख के परिवार में पांच भाई हैं और सभी अच्छे कारोबारी हैं। फारुख अपने पीछे अपनी पत्नी गौसिया और दो बच्चों को छोड़ गए हैं। उनका एक बेटा और एक बेटी है, जो शहर के ही एक स्कूल में पढ़ाई करते हैं। इस घटना ने इन बच्चों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए छीन लिया है।
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पुलिस एक्शन: सीन रिक्रिएशन की तैयारी

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घटना की सूचना मिलते ही रामपुर के एसपी (SP) विद्यासागर मिश्र और डीएम अजय कुमार द्विवेदी मौके पर पहुंचे थे। हत्या के बाद वकीलों ने जिला अस्पताल में जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की थी, जिसे शांत कराने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज सबसे अहम सबूत है। इसके आधार पर पुलिस अब 'क्राइम सीन रिक्रिएशन' (Crime Scene Recreation) करेगी।
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    फॉरेंसिक जांच: फॉरेंसिक टीम ने मौके से खून के नमूने और फिंगरप्रिंट्स लिए हैं।
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    बयान: पुलिस जल्द ही फारुख की पत्नी गौसिया का विस्तृत बयान दर्ज करेगी ताकि बहस की असली वजह सामने आ सके।
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    आरोपी की स्थिति: आरोपी बाबू असगर अली का भी अस्पताल में पुलिस की निगरानी में इलाज चल रहा है। ठीक होते ही उसे जेल भेजा जाएगा। पुलिस ने हत्या (BNS Section 103) का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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बड़ा सवाल: दफ्तर में रिवॉल्वर क्यों?

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इस हत्याकांड ने सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर एक क्लर्क ड्यूटी के दौरान अपनी कमर में लोडेड रिवॉल्वर लेकर क्यों बैठा था? क्या जिला पंचायत कार्यालय में हथियारों के साथ प्रवेश की अनुमति है?
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    लाइसेंस की जांच: पुलिस अब आरोपी असगर अली के शस्त्र लाइसेंस की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि उसे जान का खतरा था या उसने रौब झाड़ने के लिए हथियार रखा था।
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    सुरक्षा में चूक: सरकारी कार्यालयों में जहां आम जनता और अधिकारी बैठते हैं, वहां इस तरह हथियारों का प्रदर्शन एक बड़ी लापरवाही है।
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वकीलों में भारी आक्रोश

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अपने साथी की दिनदहाड़े हत्या से रामपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के वकीलों में भी भारी गुस्सा है। बार एसोसिएशन ने हड़ताल का ऐलान किया है और आरोपी को सख्त से सख्त सजा देने की मांग की है। वकीलों का कहना है कि अगर कोर्ट परिसर और सरकारी दफ्तरों में वकील ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा का क्या होगा?
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रामपुर का यह सीसीटीवी फुटेज (Rampur Advocate Murder CCTV) हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्षणिक आवेश इंसान को किस हद तक ले जा सकता है। महज 5 मिनट के गुस्से ने दो परिवारों को तबाह कर दिया। एक तरफ फारुख का परिवार है जिसने अपना बेटा और पिता खो दिया, तो दूसरी तरफ असगर का परिवार है जिसे अब जेल और कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने होंगे। पुलिस के लिए अब चुनौती यह साबित करना है कि यह हत्या 'हीट ऑफ द मोमेंट' थी या सोची-समझी साजिश। बहरहाल, सीसीटीवी फुटेज ने अभियोजन पक्ष (Prosecution) का केस बेहद मजबूत कर दिया है।
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रामपुर जिला पंचायत कार्यालय में वकील फारुख अहमद की हत्या का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। वीडियो में वकील द्वारा बाबू असगर अली को 3 थप्पड़ मारने और उसके बाद बाबू द्वारा रिवॉल्वर से फायरिंग करने की पूरी घटना कैद है। गोली लगने से वकील की मौत हो गई, जबकि बाबू और वकील की पत्नी भी घायल हैं। पुलिस वीडियो के आधार पर जांच कर रही है।
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