मेरठ/उत्तर प्रदेश: राज्य में बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए तेजी से लगाए जा रहे 'स्मार्ट प्रीपेड मीटर' (Smart Prepaid Meter) को लेकर अब एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। शुरुआती दौर में स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं में काफी कन्फ्यूजन और डर देखने को मिला था। सबसे बड़ी समस्या मीटर के निगेटिव बैलेंस (Negative Balance) में जाने और अचानक बिजली कट जाने की थी।READ ALSO:-यूपी में जमीन-मकान की रजिस्ट्री कराना हुआ बेहद आसान: अब रविवार को भी खुलेंगे ऑफिस, रात 8 बजे तक होगा बैनामा, जानें किन 9 शहरों में लागू हुई नई व्यवस्था
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लेकिन, अब उपभोक्ताओं की इन सभी परेशानियों को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) ने एक 'मास्टर प्लान' तैयार किया है। पीवीवीएनएल अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 14 जिलों में उपभोक्ताओं के घरों में लगे स्मार्ट प्रीपेड मीटर के ठीक बगल में एक खास क्यूआर कोड (QR Code) और स्टिकर लगाने जा रहा है। यह डिजिटल पहल उपभोक्ताओं और बिजली विभाग के बीच की दूरी को कम करने के साथ-साथ स्मार्ट मीटर के इस्तेमाल को बेहद आसान बना देगी।
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क्या है यह 'क्यूआर कोड' सिस्टम और इससे क्या फायदा होगा?
\r\n\r\nज्यादातर उपभोक्ताओं की शिकायत रहती है कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि उनका स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है, बैलेंस कैसे चेक करें या फिर मीटर कटने पर दोबारा कनेक्शन कैसे चालू करवाएं। ऐसे में यह नया क्यूआर कोड एक 'डिजिटल गाइड' की तरह काम करेगा।
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- \r\n तुरंत ऐप डाउनलोड की सुविधा: मीटर के पास लगे इस क्यूआर कोड को उपभोक्ता जैसे ही अपने मोबाइल के कैमरे से स्कैन करेंगे, वे सीधे उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) के आधिकारिक ऐप के लिंक पर पहुंच जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n नियमों की आसान जानकारी: इस कोड को स्कैन करने के बाद स्मार्ट प्रीपेड मीटर से जुड़े सभी जरूरी दिशा-निर्देश, नियम और शर्तें आसानी से मोबाइल स्क्रीन पर पढ़ी जा सकेंगी।\r\n \r\n
- \r\n रिचार्ज करने में सहूलियत: कई बार ग्रामीण या कम पढ़े-लिखे उपभोक्ताओं को मीटर रिचार्ज करने में दिक्कत आती है। इस क्यूआर कोड के माध्यम से वे जान सकेंगे कि मीटर को घर बैठे आसानी से कैसे रिचार्ज किया जाए ताकि उनकी बत्ती गुल न हो।\r\n \r\n
- \r\n धोखाधड़ी से बचाव: इस स्टिकर पर बिजली विभाग की आधिकारिक जानकारी होगी, जिससे किसी भी तरह की ऑनलाइन ठगी या फर्जी ऐप से उपभोक्ताओं का बचाव होगा।\r\n \r\n
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इन 14 जिलों के उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा लाभ
\r\n\r\nपीवीवीएनएल (PVVNL) ने इस हाईटेक योजना को फिलहाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उन 14 प्रमुख जिलों में लागू करने का फैसला किया है, जो उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इन जिलों में औद्योगिक और घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या बहुत बड़ी है:
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- \r\n मेरठ (Meerut)\r\n \r\n
- \r\n गाजियाबाद (Ghaziabad)\r\n \r\n
- \r\n गौतमबुद्ध नगर / नोएडा (Gautam Buddha Nagar)\r\n \r\n
- \r\n हापुड़ (Hapur)\r\n \r\n
- \r\n बुलंदशहर (Bulandshahr)\r\n \r\n
- \r\n सहारनपुर (Saharanpur)\r\n \r\n
- \r\n मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar)\r\n \r\n
- \r\n शामली (Shamli)\r\n \r\n
- \r\n बिजनौर (Bijnor)\r\n \r\n
- \r\n मुरादाबाद (Moradabad)\r\n \r\n
- \r\n रामपुर (Rampur)\r\n \r\n
- \r\n अमरोहा / ज्योतिबा फुले नगर (Amroha)\r\n \r\n
- \r\n संभल (Sambhal)\r\n \r\n
- \r\n बागपत (Baghpat)\r\n \r\n
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स्मार्ट मीटर के विरोध पर एमडी रवीश गुप्ता का बड़ा बयान
\r\n\r\nएक तरफ विभाग नई सहूलियतें दे रहा है, तो दूसरी तरफ पूरे उत्तर प्रदेश में किसान संगठनों, स्थानीय नेताओं और आम जनता द्वारा स्मार्ट मीटर का कड़ा विरोध भी किया जा रहा है। लोगों का मानना है कि स्मार्ट मीटर पुराने मीटरों की तुलना में बहुत तेजी से भागते हैं और इससे बिजली का बिल कई गुना बढ़कर आ रहा है। हाल ही में एक केंद्रीय मंत्री द्वारा इस मुद्दे पर दी गई प्रतिक्रिया के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है।
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इन सभी अटकलों और विरोध प्रदर्शनों पर स्थिति साफ करते हुए पीवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक (MD) रवीश गुप्ता ने 'ईटीवी भारत' से हुई विशेष बातचीत में अहम जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, "वर्तमान में शासन या उच्च स्तर से ऐसी कोई भी नई गाइडलाइन या आदेश जारी नहीं हुआ है, जिसमें स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता को खत्म करने या इन्हें न लगाने की बात कही गई हो।" इसका सीधा मतलब है कि विभाग अपनी योजना के अनुसार घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का कार्य निर्बाध रूप से जारी रखेगा।
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बैलेंस निगेटिव होने से कटे हजारों कनेक्शन: आंकड़े गवाही दे रहे हैं
\r\n\r\nस्मार्ट प्रीपेड मीटर ठीक आपके मोबाइल के प्रीपेड सिम की तरह काम करते हैं। जब तक उसमें बैलेंस है, तब तक आपके घर में रोशनी रहेगी। जैसे ही बैलेंस खत्म होता है, मीटर ऑटोमैटिक तरीके से पावर सप्लाई को डिस्कनेक्ट कर देता है। शुरुआत में जानकारी के अभाव में बड़ी संख्या में लोगों के कनेक्शन कट गए थे।
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एमडी रवीश गुप्ता ने इस पूरी प्रक्रिया के कुछ चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए:
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- \r\n 1.43 लाख कनेक्शन कटे: विभाग के 10 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिमी यूपी में करीब 1 लाख 43 हजार स्मार्ट मीटर धारकों के घरों की बिजली निगेटिव बैलेंस की वजह से कट गई थी।\r\n \r\n
- \r\n 83% रिकवरी रेट: राहत की बात यह है कि कनेक्शन कटने के बाद लगभग 83 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने तुरंत अपना मीटर रिचार्ज करवा लिया और उनका कनेक्शन फिर से चालू (Reconnect) हो गया है।\r\n \r\n
- \r\n चलाया गया डोर-टू-डोर अभियान: जिन लोगों ने मीटर रिचार्ज नहीं कराया, उनके लिए विभाग ने एक सघन अभियान चलाया। विभागीय टीमों ने करीब 36 हजार लोगों से सीधे तौर पर संपर्क किया। इस काउंसलिंग का नतीजा यह निकला कि लगभग 22 हजार उपभोक्ताओं ने तुरंत अपना मीटर रिचार्ज करा लिया।\r\n \r\n
- \r\n बंद घरों पर दोबारा दस्तक: इस अभियान के दौरान करीब 1,700 घर ऐसे पाए गए जिन पर ताला लटका था। प्रबंध निदेशक ने सख्त निर्देश दिए हैं कि इन घरों पर टीमें दोबारा जाएंगी और सुनिश्चित करेंगी कि वहां रहने वालों तक सही जानकारी पहुंचे।\r\n \r\n
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1912 हेल्पलाइन पर बना 'स्मार्ट मीटर सेल', शिकायतों में आई भारी गिरावट
\r\n\r\nस्मार्ट मीटर से जुड़ी किसी भी प्रकार की उलझन या शिकायत को दूर करने के लिए शासन ने कमर कस ली है। टोल-फ्री नंबर '1912' पर एक डेडिकेटेड 'स्मार्ट मीटर सेल' (Smart Meter Cell) का निर्माण किया गया है। अब कोई भी उपभोक्ता मीटर तेज चलने, बैलेंस अचानक कटने या ऐप काम न करने जैसी किसी भी शिकायत के लिए सीधे 1912 पर कॉल कर सकता है।
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- \r\n शिकायत निस्तारण का बेहतरीन रिकॉर्ड: एमडी के अनुसार, पहले के मुकाबले शिकायतों की संख्या में भारी कमी आई है। अभी तक विभाग को स्मार्ट मीटर से जुड़ी कुल 24,396 शिकायतें मिली थीं। इनमें से तकनीकी टीमों ने मुस्तैदी से काम करते हुए 24,002 शिकायतों का पूरी तरह से समाधान (Resolution) कर दिया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सिस्टम अब धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है।\r\n \r\n
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पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) द्वारा स्मार्ट मीटर के पास क्यूआर कोड लगाना एक बेहद सकारात्मक और आधुनिक कदम है। यह न केवल उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों और मीटर के संचालन के प्रति जागरूक करेगा, बल्कि बिजली विभाग के कर्मचारियों पर भी बेवजह के सवालों का दबाव कम करेगा। अगर विभाग इसी तरह से जन-जागरूकता के कदम उठाता रहा, तो स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर आम जनता के बीच फैला अविश्वास जल्द ही खत्म हो जाएगा और उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से हाईटेक हो सकेगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.