आम जनता के लिए आने वाले दिन आर्थिक मोर्चे पर बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होने वाले हैं। वैश्विक भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical Crisis) और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग का सीधा असर अब आपकी और हमारी जेब पर पड़ने वाला है। सरकारी सूत्रों और पेट्रोलियम क्षेत्र के विशेषज्ञों की मानें तो निकट भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की संभावना से बिल्कुल भी इनकार नहीं किया जा सकता है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि तेल विपणन कंपनियों (OMCs) का घाटा उनके बर्दाश्त की सीमा से बाहर जा चुका है।READ ALSO:-मेरठ पुलिस की रडार से नहीं बच पाया 50 हजारी इनामी: 8 महीने से फरार 'इंतजार उर्फ मोटा' को गुजरात के अहमदाबाद से दबोचा
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
शुक्रवार को आधिकारिक सूत्रों ने स्पष्ट रूप से कहा कि बदले हुए वैश्विक हालात और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों को देखते हुए देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना को अब पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता है। पिछले चार सालों से चुनावी और राजनीतिक कारणों से जो कीमतें स्थिर रखी गई थीं, उनका 'बांध' अब किसी भी वक्त टूट सकता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कच्चे तेल में भारी उबाल: 4 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची कीमतें

\r\n\r\n
पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की सबसे बड़ी और प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की बेतहाशा बढ़ती कीमतें हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    126 डॉलर का आंकड़ा पार: इस सप्ताह ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें उछलकर 126 डॉलर प्रति बैरल के अपने चार साल के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    वर्तमान स्थिति: हालांकि, इस उच्चतम स्तर को छूने के बाद कीमतों में हल्की सी गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन फिर भी कीमतें लगातार 110 डॉलर प्रति बैरल के चिंताजनक स्तर से ऊपर ही बनी हुई हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    पिछले साल से तुलना: स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले वर्ष कच्चे तेल की औसत कीमत महज 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। वहीं, इस महीने की औसत कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चल रही है। यह लगभग 60% से अधिक का सीधा उछाल है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट

\r\n\r\n
कच्चे तेल की कीमतों में इस भयंकर उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व (Middle East) में पैदा हुआ युद्ध का संकट है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    28 फरवरी का हमला: अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए सैन्य हमले और उसके जवाब में ईरान द्वारा की गई आक्रामक कार्रवाई के बाद से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर असर: ईरान और अमेरिका के बीच इस सीधी टक्कर का सबसे बड़ा खामियाजा होर्मुज जलडमरूमध्य को भुगतना पड़ रहा है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'चोकपॉइंट' है। वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत (पांचवां हिस्सा) इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सप्लाई चेन बाधित: इस जलडमरूमध्य के रास्ते तेलवाहक (Oil Tanker) जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित हुई है। स्थिति पूरी तरह से अनिश्चित बनी हुई है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो गई है और पैनिक बाइंग (Panic Buying) के कारण कीमतें आसमान छू रही हैं।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

तेल कंपनियों का दिवालिया होने की कगार पर पहुंचना: 100 रुपये प्रति लीटर का घाटा

\r\n\r\n
भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% से 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले हर छोटे-बड़े बदलाव का सीधा असर भारत की तेल विपणन कंपनियों (जैसे IOCL, BPCL, HPCL) की बैलेंस शीट पर पड़ता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    भारी नुकसान के आंकड़े: पिछले सप्ताह पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया था। अधिकारी के मुताबिक, खुदरा कीमतें लगभग चार साल से स्थिर रहने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर करीब 20 रुपये प्रति लीटर का भारी नुकसान हो रहा है। वहीं, डीजल की स्थिति तो और भी भयावह है, जिस पर कंपनियों को करीब 100 रुपये प्रति लीटर का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    अब तक क्या कहा गया था? इससे पहले इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने पेट्रोलियम उद्योग की तरफ से जारी एक आधिकारिक बयान में जनता को आश्वस्त करने का प्रयास किया था कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस (LPG) के दाम फिलहाल नहीं बढ़ाए जा रहे हैं। पिछले सप्ताह तक सरकार ने कीमतें बढ़ाने की कोई औपचारिक योजना भी साझा नहीं की थी।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्या ₹28 तक महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल? विश्लेषकों की बड़ी चेतावनी

\r\n\r\n
आम आदमी के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि दाम कितने बढ़ेंगे और कब बढ़ेंगे? आर्थिक विश्लेषकों और बाजार के जानकारों ने जो तस्वीर पेश की है, वह बेहद डराने वाली है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    बंगाल चुनाव का कनेक्शन: विश्लेषकों ने पहले ही यह पुख्ता आशंका जता दी थी कि जब तक देश में चुनाव चल रहे हैं, तब तक सरकार कीमतों को रोक कर रखेगी। लेकिन 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मतदान समाप्त होने के बाद अब सरकार के पास तेल कंपनियों को राहत देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ₹25 से ₹28 तक का सीधा उछाल: विश्लेषकों का स्पष्ट अनुमान है कि ओएमसी (OMCs) के भारी-भरकम अंडर-रिकवरी (घाटे) को पाटने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एकमुश्त 25 रुपये से लेकर 28 रुपये प्रति लीटर तक की भारी-भरकम बढ़ोतरी की जा सकती है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    दिल्ली में मौजूदा भाव: राजधानी दिल्ली में फिलहाल पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर है, जबकि डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। अगर विश्लेषकों की भविष्यवाणी सच साबित होती है, तो दिल्ली में पेट्रोल 120 रुपये के पार और डीजल 115 रुपये के पार जा सकता है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर पर पहले ही गिर चुकी है गाज

\r\n\r\n
भले ही आम जनता के लिए पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) के दाम 4 साल से नहीं बढ़ाए गए हैं, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अपने घाटे को कम करने के लिए पिछले दरवाजे से कमर्शियल और इंडस्ट्रियल फ्यूल के दामों में भारी इजाफा कर दिया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    हाल ही में वाणिज्यिक एलपीजी (Commercial LPG - 19kg) के दामों में तेज बढ़ोतरी की गई है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    औद्योगिक उपयोग में आने वाले डीजल (Industrial Diesel) को बाजार मूल्य से जोड़ा जा चुका है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    इसके अलावा, 5 किलोग्राम वाले छोटू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों को लागत के अनुरूप बढ़ा दिया गया है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को बेचे जाने वाले विमान ईंधन (ATF - Aviation Turbine Fuel) के दाम भी अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ाए जा चुके हैं।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा इस बढ़ोतरी का असर?

\r\n\r\n
अगर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी होती है, तो यह केवल तेल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था में महंगाई का एक 'चेन रिएक्शन' (Chain Reaction) शुरू कर देगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन: डीजल मुख्य रूप से ट्रकों, रेल और माल ढुलाई के काम आता है। डीजल 28 रुपये महंगा होने का सीधा अर्थ है कि देश भर में ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट (Transportation Cost) 30% से 40% तक बढ़ जाएगी।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    रोजमर्रा की चीजें होंगी महंगी: फल, सब्जियां, दूध, अनाज और एफएमसीजी (FMCG) से लेकर हर वह चीज जो ट्रकों से फैक्ट्रियों और खेतों से आपके घर तक पहुंचती है, उसके दाम रातों-रात बढ़ जाएंगे।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    सार्वजनिक परिवहन: ऑटो, टैक्सी, ओला, उबर, बस और हवाई सफर सभी के किराये में भारी वृद्धि होगी।
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n
    ब्याज दरें: महंगाई बढ़ने से रिजर्व बैंक (RBI) पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बनेगा, जिससे आम आदमी की होम लोन और कार लोन की ईएमआई (EMI) भी बढ़ सकती है।
    \r\n
  8. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
चार साल का लंबा इंतजार और अंतरराष्ट्रीय बाजार का बढ़ता दबाव अब एक ऐसे बिंदु पर पहुंच गया है जहां से सरकार और तेल कंपनियों के लिए पीछे हटना मुश्किल है। पश्चिम बंगाल चुनाव संपन्न होने के साथ ही राजनीतिक मजबूरियां भी खत्म हो गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट जब तक पूरी तरह से सुलझ नहीं जाता, कच्चे तेल में नरमी के कोई आसार नहीं हैं। ऐसे में आम जनता को आने वाले दिनों में महंगाई के इस बड़े और कड़वे झटके के लिए मानसिक और आर्थिक रूप से खुद को तैयार कर लेना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें