नजीबाबाद में मजदूर की मौत: उत्तर प्रदेश में अचानक बदले मौसम, तेज आंधी और बारिश ने अब जानलेवा रूप ले लिया है। बिजनौर जिले के नजीबाबाद (Najibabad) इलाके में एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। बीती रात आई तेज आंधी और बारिश के कारण कोटद्वार रोड स्थित एक गन्ने के क्रेशर (Sugarcane Crusher) पर मलबा गिर गया। इस हादसे में वहां सो रहे एक मजदूर की मलबे के नीचे दबकर मौके पर ही मौत हो गई।READ ALSO:-महाविनाशक मौसम! यूपी में कुदरत का डबल अटैक: कहीं ओलों की मार से फसलें तबाह, तो कहीं झुलसाने वाली गर्मी का अलर्ट
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मृतक मजदूर की पहचान 'शिवम' के रूप में हुई है। इस अचानक हुई घटना से मृतक के परिवार में कोहराम मच गया है और इलाके में शोक की लहर है। पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू कर दिया है और मामले की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस रिपोर्ट में हम इस हादसे की पूरी जानकारी, प्रशासनिक कार्रवाई और मुआवजे की स्थिति पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
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कोटद्वार रोड गन्ने के क्रेशर पर कैसे हुआ हादसा?

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना नजीबाबाद के कोटद्वार रोड (Kotdwar Road) पर स्थित एक गन्ने के क्रेशर की है। इस समय गन्ने की पेराई का सीजन चल रहा है, जिसके चलते क्रेशर पर दिन-रात काम होता है। मृतक मजदूर शिवम इसी गन्ने के क्रेशर पर काम करता था।
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चश्मदीदों और साथ काम करने वाले अन्य मजदूरों के मुताबिक, रात के समय शिवम काम खत्म करने के बाद क्रेशर परिसर में ही बनी एक कच्ची/अस्थायी जगह पर सो रहा था। आधी रात के बाद मौसम ने अचानक करवट ली। तेज तूफान और झमाझम बारिश के कारण क्रेशर के एक हिस्से का जर्जर ढांचा (मलबा) भरभरा कर सीधा शिवम के ऊपर गिर पड़ा। गहरी नींद में होने के कारण शिवम को वहां से भागने या खुद को बचाने का जरा भी मौका नहीं मिला। भारी मलबे के नीचे दबने से उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
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परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल (Byte - मृतक का परिजन)

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जैसे ही घटना की सूचना शिवम के परिवार वालों को मिली, वे बदहवास हालत में कोटद्वार रोड स्थित घटनास्थल पर पहुंच गए। जवान बेटे का शव देखकर परिजनों में चीख-पुकार मच गई।
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मृतक के परिजन का बयान (Byte): "शिवम ही हमारे घर का इकलौता सहारा था। वह दिन-रात क्रेशर पर मेहनत करके परिवार का पेट पालता था। हमें रात में खबर मिली कि तूफान की वजह से दीवार/मलबा गिर गया है। जब तक हम यहां पहुंचे, तब तक सब खत्म हो चुका था। क्रेशर मालिक और प्रशासन को हमारे नुकसान की भरपाई करनी चाहिए।" परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे प्रशासन से न्याय और आर्थिक सहायता की गुहार लगा रहे हैं।
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पुलिस की कार्रवाई: शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा

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हादसे की सूचना मिलते ही नजीबाबाद थाना पुलिस तत्काल दलबल के साथ मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने स्थानीय लोगों और अन्य मजदूरों की मदद से मलबे को हटाया और शिवम के शव को बाहर निकाला।
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पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद शव को कब्जे में ले लिया है। कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम (Postmortem) के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी। इसके अलावा, क्रेशर मालिक से भी पूछताछ की जा रही है कि मजदूरों के ठहरने के लिए सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे।
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एसडीएम नजीबाबाद का आश्वासन: मिलेगा उचित मुआवजा

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इस दुखद घटना का संज्ञान लेते हुए स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आया। नजीबाबाद के उप जिलाधिकारी (SDM Najibabad) ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मीडिया और पीड़ित परिवार से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रशासन इस मुश्किल घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है।
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एसडीएम ने कहा, "यह एक बेहद दुखद प्राकृतिक आपदा और हादसा है। हमने राजस्व विभाग की टीम को घटनास्थल का मुआयना करने और नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दे दिए हैं। मृतक मजदूर के परिजनों को सरकार की 'कृषक/मजदूर दुर्घटना बीमा योजना' या मुख्यमंत्री राहत कोष के तहत जल्द से जल्द उचित मुआवजा (Compensation) दिलाने की पूरी व्यवस्था की जाएगी।" प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि क्रेशर मालिकों को भविष्य में मजदूरों की सुरक्षा पुख्ता करने के सख्त निर्देश जारी किए जाएंगे।
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खराब मौसम और मजदूरों की सुरक्षा पर उठते सवाल

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यह घटना केवल एक प्राकृतिक हादसा नहीं है, बल्कि यह असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की कार्यस्थल सुरक्षा (Workplace Safety) पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
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    अस्थायी ढांचे: गन्ने के क्रेशरों और ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले ज्यादातर मजदूर टीन शेड या कच्ची ईंटों से बने अस्थायी ढांचों में रहते हैं, जो तेज आंधी या बारिश का सामना नहीं कर पाते।
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    सुरक्षा मानकों की अनदेखी: अक्सर ऐसे कार्यस्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम नहीं होते हैं। रात के समय मौसम बिगड़ने पर बचाव का कोई सुरक्षित आश्रय न होना इस हादसे का एक बड़ा कारण बना।
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मौसम विभाग ने पहले ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया था। ऐसे में क्रेशर संचालकों की जिम्मेदारी बनती थी कि वे अपने मजदूरों को सुरक्षित पक्के स्थानों पर शिफ्ट करते।
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नजीबाबाद के कोटद्वार रोड पर गन्ने के क्रेशर में हुआ यह हादसा बेहद हृदयविदारक है। नजीबाबाद में मजदूर की मौत ने एक गरीब परिवार का चिराग बुझा दिया है। जहां एक ओर पुलिस मामले की वैधानिक जांच कर रही है और एसडीएम नजीबाबाद ने मुआवजे का भरोसा दिलाया है, वहीं दूसरी ओर इस घटना से सबक लेने की सख्त जरूरत है। बेमौसम बारिश और तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन कार्यस्थलों पर मजदूरों के रहने और काम करने की जगह को सुरक्षित बनाकर ऐसी मौतों को जरूर टाला जा सकता है। उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करेगा और जिले के सभी क्रेशर संचालकों के लिए सुरक्षा दिशानिर्देश सख्ती से लागू किए जाएंगे।
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