बिजनौर (जनपद): अपराध और अपराधियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस का जीरो टॉलरेंस अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में बिजनौर जिले के थाना नजीबाबाद क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक ऐसा गिरोह सक्रिय था जो धर्म और सामाजिक संगठन की आड़ में अपना काला धंधा चला रहा था। ये शातिर अपराधी खुद को 'राष्ट्रीय हिन्दू एकता संगठन' का पदाधिकारी बताते थे और शहर के प्रतिष्ठित होटलों में जाकर 'चेकिंग' के नाम पर डराते-धमकाते थे। इनका मुख्य हथियार था— "वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने और समाचारों में बदनाम करने की धमकी।" लेकिन कहते हैं ना कि पाप का घड़ा एक न एक दिन जरूर भरता है, और ऐसा ही हुआ 22 मई 2026 की उस शाम जब इनका दांव उलटा पड़ गया।Read also:-बिजनौर में खाकी का खौफ खत्म! स्योहारा थाने के बाहर दो पक्षों में जमकर मारपीट, लात-घूंसों का लाइव वीडियो हुआ वायरल
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कैसे शुरू हुआ पूरा खेल और क्या था मास्टरप्लान?

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आजकल अपराध के तरीके बदल गए हैं। अपराधी अब तमंचा लेकर नहीं, बल्कि 'संगठन' का कार्ड और 'पत्रकारिता' या 'सामाजिक कार्यकर्ता' का चोला ओढ़कर आते हैं। नजीबाबाद में पकड़ा गया यह 4 सदस्यीय गिरोह भी ठीक इसी तर्ज पर काम कर रहा था। पुलिस की पूछताछ और तफ्तीश में जो खुलासे हुए हैं, वे आम जनता और व्यापारियों के लिए एक बड़ा सबक हैं।
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इस गिरोह ने वर्ष 2025 में तथाकथित रूप से 'राष्ट्रीय हिन्दू एकता संगठन' से जुड़ने का दावा किया था। इस संगठन के नाम का इस्तेमाल ये समाज सेवा के लिए नहीं, बल्कि अपनी जेबें भरने और लोगों को ब्लैकमेल करने के लिए करते थे। इनका काम करने का तरीका (Modus Operandi) बेहद सुलझा हुआ और शातिराना था। ये अपनी लग्जरी सफेद स्विफ्ट डिजायर कार (रजिस्ट्रेशन नंबर- DL 1C AJ 139) में सवार होकर होटलों पर धमकते थे। वहां जाकर ये खुद को बड़े पदाधिकारी के रूप में पेश करते, होटल के रजिस्टर चेक करने का नाटक करते और फिर होटल मालिकों पर अनैतिक काम होने का झूठा आरोप लगाकर वीडियो बनाने लगते। जब होटल मालिक अपनी इज्जत और व्यापार को बचाने की गुहार लगाता, तो ये मोटी रकम (अवैध वसूली) की मांग करते थे।
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22 मई 2026 का वो दिन: जब पब्लिक ने सिखाया सबक

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अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके थे कि वे लगातार एक के बाद एक वारदातों को अंजाम दे रहे थे। दिनांक 22.05.2026 को इस गिरोह ने नजीबाबाद के ग्राम सुभाष नगर डबल खजूरी के पास स्थित एक होटल को अपना निशाना बनाया। इस होटल के मालिक वादी श्री सतेन्द्र कुमार (पुत्र श्री राजेन्द्र सिंह) हैं।
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यह चारों अभियुक्त— जगजीत सिंह, उसकी पत्नी प्रियंका, विवेक और अक्षय ठाकुर— सतेन्द्र कुमार के राजन होटल में घुसे। उन्होंने हमेशा की तरह रौब गालिब किया और सतेन्द्र कुमार को डरा-धमकाकर 20,000 रुपये की अवैध मांग की। लेकिन इस बार दांव उल्टा पड़ गया। सतेन्द्र कुमार ने इनकी धमकियों से डरने के बजाय इनका कड़ा विरोध किया। जब होटल मालिक ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया, तो इन बदमाशों ने मारपीट और धक्का-मुक्की शुरू कर दी।
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इस हंगामे और शोर-शराबे को सुनकर आसपास के लोग और अन्य कर्मचारी मौके पर इकट्ठा हो गए। भीड़ को देखकर इन फर्जी संगठन वालों के पसीने छूट गए। जनता ने बहादुरी का परिचय देते हुए इन चारों को मौके पर ही धर दबोचा। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि ये शातिर अपनी गाड़ी (स्विफ्ट डिजायर) लेकर भागने में पूरी तरह से नाकाम रहे। इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से वादी सतेन्द्र कुमार ने इन चारों को मय इनकी गाड़ी के थाना नजीबाबाद लाकर पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
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पुलिस की एंट्री और दर्ज हुई पहली FIR

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नजीबाबाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत एक्शन लिया। वादी सतेन्द्र कुमार की तहरीर के आधार पर थाना नजीबाबाद पर मु0अ0सं0 237/2026 पंजीकृत किया गया। नए आपराधिक कानूनों के तहत पुलिस ने इसमें धारा 308(5) और 115(2) बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से चारों अभियुक्तों को हिरासत में ले लिया और घटना में प्रयुक्त स्विफ्ट डिजायर कार को भी सीज कर अपने कब्जे में ले लिया।
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एक के बाद एक खुलने लगे राज: अन्य व्यापारियों ने भी तोड़ी चुप्पी

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जैसे ही शहर में यह खबर फैली कि होटलों में वसूली करने वाला गिरोह पुलिस की गिरफ्त में आ गया है, तो उनके डर से खामोश बैठे अन्य पीड़ित भी हिम्मत जुटाकर सामने आने लगे। इसी दिन (22.05.2026 को ही) मौहल्ला जयनगर, कस्बा व थाना नजीबाबाद के निवासी श्री महेश कुमार गुप्ता (पुत्र स्व० श्री तुलसीदास) भी थाने पहुंचे।
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महेश कुमार गुप्ता ने पुलिस को एक और तहरीर दी, जिसने इस गिरोह के काले कारनामों की फेहरिस्त को और लंबा कर दिया। उन्होंने बताया कि मात्र 3 दिन पहले, यानी 19.05.2026 को इसी गैंग ने उनके होटल में आकर इसी तरह का ड्रामा किया था और उनसे जबरन 10,000/- रुपये की अवैध वसूली की थी।
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बात यहीं खत्म नहीं हुई। महेश गुप्ता की तहरीर में एक और बड़ा खुलासा हुआ। उन्होंने बताया कि इस गिरोह ने 17.05.2026 को 'होटल लिकिंग रेजीडेन्सी एण्ड रेस्टोरेन्ट' के मालिक सारिक को भी अपना शिकार बनाया था और उससे भी ब्लैकमेलिंग करके 17,000/- रुपये की मोटी रकम ऐंठी थी। इस दूसरी तहरीर के आधार पर पुलिस ने तुरंत एक और मुकदमा मु0अ0सं0 238/2026 धारा 308(5) बीएनएस के तहत पंजीकृत कर लिया।
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कौन हैं ये शातिर ठग? (अभियुक्तों की प्रोफाइल)

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पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए इन चारों अभियुक्तों का संबंध जनपद बिजनौर के शहरी इलाके से ही है। इस गैंग की सबसे खास बात यह है कि इसमें पति-पत्नी दोनों मिलकर इस अपराध को अंजाम दे रहे थे, ताकि लोगों को 'चेकिंग' और 'संगठन' के नाम पर ज्यादा आसानी से बेवकूफ बनाया जा सके और महिला के होने से कोई जल्दी उन पर शक न करे।
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    जगजीत सिंह (मास्टरमाइंड): पुत्र सुखदेव सिंह, निवासी मौहल्ला भारत बिहार, थाना कोतवाली शहर, जनपद बिजनौर।
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    प्रियंका (महिला सदस्य): पत्नी जगजीत सिंह, निवासी मौहल्ला भारत बिहार, थाना कोतवाली शहर, जनपद बिजनौर। (महिला का गिरोह में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि ये किस स्तर पर जाकर व्यापारियों को ब्लैकमेल करते थे)।
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    विवेक: पुत्र कमल, निवासी ग्राम तिमरपुर काशीराम कालोनी, थाना कोतवाली शहर, जनपद बिजनौर।
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    अक्षय ठाकुर: पुत्र सहदेव, निवासी मौहल्ला जे के कॉलोनी, थाना कोतवाली शहर, जनपद बिजनौर।
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पुलिस द्वारा की गई बरामदगी (Seizures)

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दौराने विवेचना और गिरफ्तारी, पुलिस ने इस गैंग के पास से अपराध में इस्तेमाल की गई कई अहम चीजें बरामद की हैं:
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    एक लग्जरी कार: स्विफ्ट डिजायर (रजिस्ट्रेशन नंबर- DL 1C AJ 139) - जिसका इस्तेमाल ये लोग रौब झाड़ने और जल्दी से भागने के लिए करते थे।
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    नकद राशि: 15,000/- रुपये - जो कि इनके द्वारा की गई अवैध वसूली का हिस्सा माने जा रहे हैं।
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    मोबाइल फोन: 03 मोबाइल फोन - इन फोनों की जांच पुलिस के लिए बेहद अहम है। साइबर सेल की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि इन्होंने किन-किन लोगों के वीडियो बनाए थे और उनके जरिए और कितने लोगों को ब्लैकमेल किया जा रहा था।
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नए कानूनों (BNS) का चला हंटर: बढ़ाई गईं और भी सख्त धाराएं

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भारत में अब नए आपराधिक कानून (भारतीय न्याय संहिता - BNS) लागू हो चुके हैं, जो संगठित अपराध और जबरन वसूली (Extortion) के मामलों में बेहद सख्त हैं। नजीबाबाद पुलिस ने साक्ष्य संकलन (Evidence Collection) और बरामदगी के आधार पर दोनों अभियोगों (FIR 237 और 238) में विवेचना के दौरान और भी गंभीर धाराओं की वृद्धि कर दी है।
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अब इन अपराधियों पर धारा 317(2), 61(2), और 111(1) बीएनएस भी लगा दी गई है। धारा 111 विशेष रूप से 'संगठित अपराध' (Organized Crime) से संबंधित है, जो यह साबित करती है कि पुलिस ने इस मामले को कितनी गंभीरता से लिया है। यह गिरोह अब आसानी से कानून के शिकंजे से बाहर नहीं आ पाएगा। पुलिस की अन्य आवश्यक विधिक कार्यवाही अभी भी प्रचलित है।
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समाज और व्यापारियों के लिए एक बड़ा संदेश

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नजीबाबाद पुलिस की यह कार्रवाई सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि समाज के उन सभी सफेदपोश अपराधियों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो 'पत्रकारिता', 'एनजीओ' या 'धार्मिक/सामाजिक संगठनों' की आड़ में आम जनता का खून चूस रहे हैं। अक्सर देखा जाता है कि छोटे व्यापारी, होटल मालिक या दुकानदार बदनामी के डर से ऐसे ब्लैकमेलरों की मांगें पूरी कर देते हैं और पुलिस के पास नहीं जाते।
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लेकिन बिजनौर के सतेन्द्र कुमार और महेश कुमार गुप्ता ने जो हिम्मत दिखाई है, वह काबिले तारीफ है। अगर पब्लिक इसी तरह निडर होकर पुलिस का साथ दे, तो ऐसे किसी भी 'फर्जी संगठन' का वजूद एक दिन भी नहीं टिक सकता। जनपद बिजनौर पुलिस ने आम जनमानस से अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति या संगठन चेकिंग, वायरल करने या न्यूज़ में छापने की धमकी देकर रुपयों की मांग करता है, तो उससे डरें नहीं। तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या डायल 112 पर सूचना दें। आपका नाम गुप्त रखा जाएगा और ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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फिलहाल, नजीबाबाद का यह फर्जी 'हिन्दू एकता संगठन' गैंग सलाखों के पीछे अपनी करतूतों की सजा भुगतने की तैयारी कर रहा है और पुलिस रिमांड लेकर इनसे अन्य मुकदमों और छुपे हुए राज उगलवाने की तैयारी में जुटी है। इस शानदार खुलासे के लिए नजीबाबाद पुलिस की कार्यप्रणाली की पूरे जिले में जमकर सराहना हो रही है।
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