खबरीलाल न्यूज़ डेस्क, मेरठ:
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) शहर से एक बड़ी लापरवाही और हादसे की खबर सामने आई है। शहर के जाने-माने जसवंत राय हॉस्पिटल (Jaswant Rai Hospital) परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पार्किंग एरिया में खड़ी गाड़ियों के ऊपर एक विशाल यूकेलिप्टस (Eucalyptus/सफेदा) का पेड़ अचानक जड़ से उखड़कर गिर गया।Read also:-बिजनौर की महिलाओं की उड़ान! 'VIDUR प्रेरणा स्वदेशी हर्बल टी' हुई ग्लोबल, अमेरिका और यूरोप में भी छाई देसी चाय
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इस हादसे में कई कारें और अन्य वाहन बुरी तरह से पिचक कर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हालांकि, एक बहुत बड़ी राहत की बात यह रही कि घटना के समय गाड़ियों के अंदर या पेड़ के आस-पास कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
\r\n\r\n1. कैसे हुआ हादसा? तेज आवाज से मची अफरातफरी
\r\n\r\nप्रत्यक्षदर्शियों (Eyewitnesses) ने खबरीलाल को बताया कि घटना के वक्त सब कुछ सामान्य था। अचानक एक बहुत तेज धमाके और चरमराने की आवाज आई। जब तक लोग कुछ समझ पाते, एक बहुत पुराना और विशालकाय पेड़ सीधे नीचे खड़ी कारों पर जा गिरा।
\r\n\r\nतेज आवाज सुनकर अस्पताल के अंदर मौजूद मरीज, उनके तीमारदार, डॉक्टर और स्टाफ तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। बाहर का नजारा देखकर हर कोई सन्न रह गया। पेड़ के भारी तने और डालियों के नीचे दबकर कई लग्जरी कारें और दोपहिया वाहन पूरी तरह से पिचक गए थे। कारों की छतें धंस गई थीं और शीशे टूटकर बिखर गए थे।
\r\n\r\n2. हादसे का असली कारण: नाले की खुदाई या नगर निगम की लापरवाही?
\r\n\r\nइस हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन, स्थानीय लोगों और जिन लोगों की गाड़ियां टूटी हैं, उनका गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने इस दुर्घटना के लिए सीधे तौर पर नगर निगम (Nagar Nigam Meerut) और निर्माण एजेंसी की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है।
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\r\n\r\nक्या है आरोप?
\r\n\r\nस्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल के ठीक बाहर 'सीएम ग्रिड' (CM Grid) योजना के तहत नाले के निर्माण का कार्य चल रहा है। आरोप है कि ठेकेदार और मजदूरों ने बिना किसी तकनीकी सलाह के, इस विशाल पेड़ की जड़ों के बिल्कुल पास से गहरी खुदाई कर दी। खुदाई के कारण पेड़ की मिट्टी खिसक गई और उसकी जड़ों की पकड़ कमजोर हो गई। इसी वजह से पेड़ का संतुलन बिगड़ा और वह सीधे अस्पताल परिसर की ओर गिर गया। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा के कोई मापदंड नहीं अपनाए गए।
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3. हादसे के बाद नगर निगम का रवैया: फोन करने पर भी नहीं पहुंचे अधिकारी
\r\n\r\nघटना के तुरंत बाद अस्पताल प्रशासन और पीड़ित वाहन मालिकों ने नगर निगम के अधिकारियों और कंट्रोल रूम को कई बार फोन करके हादसे की सूचना दी। उनसे पेड़ को हटवाने और राहत कार्य शुरू करने की अपील की गई।
\r\n\r\nलेकिन, लोगों का आरोप है कि सूचना देने के काफी देर बाद तक भी नगर निगम का कोई बड़ा अधिकारी या राहत-बचाव दल मौके पर नहीं पहुंचा। प्रशासन के इस ढुलमुल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया।
\r\n\r\n4. नुकसान की भरपाई और कार्रवाई की मांग
\r\n\r\nअपनी आंखों के सामने अपनी लाखों रुपये की गाड़ियों को कबाड़ बनते देख वाहन मालिकों में भारी रोष है।
\r\n\r\nस्थानीय लोगों और पीड़ित पक्ष ने प्रशासन से मांग की है कि:
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- \r\n इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच (High-level Inquiry) की जाए।\r\n \r\n
- \r\n खुदाई के दौरान लापरवाही बरतने वाली निर्माण एजेंसी और इसके लिए जिम्मेदार नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।\r\n \r\n
- \r\n जिन लोगों के वाहनों का भारी नुकसान हुआ है, प्रशासन या ठेकेदार की तरफ से उन्हें इसका उचित मुआवजा (Compensation) दिया जाए।\r\n \r\n
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मेरठ के जसवंत राय अस्पताल में हुई यह घटना विकास कार्यों के नाम पर बरती जा रही घोर लापरवाही का एक जीता-जागता उदाहरण है। यह तो किस्मत अच्छी थी कि हादसे के वक्त कोई वहां मौजूद नहीं था, अन्यथा कई जिंदगियां इस लापरवाही की भेंट चढ़ जातीं। खबर लिखे जाने तक प्रशासन या नगर निगम की ओर से पेड़ गिरने के कारणों या मुआवजे को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। खबरीलाल न्यूज़ इस खबर पर नजर बनाए हुए है, ताकि पीड़ितों की आवाज प्रशासन तक पहुंच सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.