मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में बुधवार दोपहर एक बड़ी दुर्घटना होते-होते टल गई। शहर के व्यस्ततम इलाकों में से एक गढ़ रोड स्थित न्यू जनता कॉलोनी में अचानक मेरठ में गोदाम में आग (Meerut Mein Godam Mein Aag) लगने से अफरातफरी मच गई। आग एक बंद पड़े मोबाइल फोन एक्सेसरीज के गोदाम में लगी थी। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते गोदाम से काला धुआं आसमान छूने लगा।READ ALSO:-मेरठ में घर का सपना होगा पूरा: MDA नीलाम करेगा 974 प्लॉट, नमो भारत ट्रेन के पास जमीन खरीदने का मौका
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गनीमत रही कि समय रहते फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। दमकल की चार गाड़ियों ने करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। इस घटना में लाखों रुपये का सामान जलकर राख होने की आशंका है, लेकिन राहत की बात यह है कि कोई जनहानि नहीं हुई।
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ढाई बजे दिखा धुएं का गुबार
\r\n\r\nघटना दोपहर करीब 2:30 बजे की है। स्थानीय लोगों के अनुसार, न्यू जनता कॉलोनी में स्थित इस इमारत की पहली मंजिल पर मोबाइल एक्सेसरीज का गोदाम है। अचानक बंद गोदाम से धुआं निकलता देख आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। चूंकि गोदाम के अंदर प्लास्टिक, मोबाइल कवर, पैकिंग मटीरियल और लकड़ी का सामान भरा हुआ था, इसलिए आग ने बहुत तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया।
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मेरठ में गोदाम में आग की खबर जंगल की आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई। काला और जहरीला धुआं दूर से ही दिखाई देने लगा था। आसपास के दुकानदारों और निवासियों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचित किया और अपने स्तर पर आग बुझाने या उसे फैलने से रोकने की कोशिश करने लगे। (Internal link to related article: मेरठ में आगजनी की घटनाएं और बचाव के उपाय)
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चाय वाले ने सबसे पहले देखी लपटें
\r\n\r\nगोदाम से महज 20 मीटर की दूरी पर चाय की दुकान चलाने वाले प्रत्यक्षदर्शी योगेश ने बताया, "मैं अपनी दुकान पर चाय बना रहा था, तभी मेरी नजर गोदाम की तरफ गई। वहां से काला धुआं निकल रहा था। मैंने शोर मचाकर आसपास के लोगों को इकट्ठा किया। देखते ही देखते लपटें खिड़कियों से बाहर आने लगीं।"
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योगेश ने बताया कि जिस समय मेरठ में गोदाम में आग लगी, उस वक्त गोदाम में कोई भी कर्मचारी या व्यक्ति मौजूद नहीं था। अगर कोई अंदर होता, तो जहरीले धुएं के कारण बड़ा हादसा हो सकता था।
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फायर ब्रिगेड की मुस्तैदी ने टाला बड़ा हादसा
\r\n\r\nसूचना मिलते ही दमकल विभाग ने त्वरित कार्रवाई की। चूंकि यह इलाका शहर के बीचों-बीच है और यहां घनी आबादी है, इसलिए फायर ब्रिगेड ने कोई जोखिम नहीं लिया और तुरंत चार गाड़ियां मौके पर रवाना कर दीं।
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दमकलकर्मियों ने लगभग 30 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। इस दौरान सीओ नौचंदी और सीओ सिविल लाइन भी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और भीड़ को नियंत्रित किया ताकि राहत कार्य में बाधा न आए। अधिकारियों का कहना है कि मेरठ में गोदाम में आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन प्रथम दृष्टया यह शॉर्ट सर्किट का मामला लग रहा है।
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लाखों का नुकसान, लेकिन जान बची
\r\n\r\nगोदाम के मालिक भारत खुराना ने बताया, "हमारा मोबाइल फोन एक्सेसरीज का काम है। हम सुबह गोदाम पर आए थे और काम करके चले गए थे। दोपहर में पड़ोसियों का फोन आया कि गोदाम में आग लग गई है। जब तक हम पहुंचे, फायर ब्रिगेड अपना काम कर रही थी।"
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भारत खुराना के अनुसार, नुकसान का सटीक आकलन करना अभी मुश्किल है, लेकिन आग की तीव्रता को देखते हुए लग रहा है कि अंदर रखा सारा माल जलकर खराब हो गया है। उन्होंने ईश्वर का शुक्रिया अदा किया कि मेरठ में गोदाम में आग लगने के वक्त वहां कोई मौजूद नहीं था, जिससे किसी की जान को खतरा नहीं हुआ।
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प्लास्टिक के कारण फैला जहरीला धुआं
\r\n\r\nविशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल एक्सेसरीज में प्लास्टिक और रबर का अधिक इस्तेमाल होता है। जब इन चीजों में आग लगती है, तो कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं। मेरठ में गोदाम में आग के दौरान भी यही हुआ, जिससे आसपास के घरों में रहने वाले लोगों को कुछ देर के लिए सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन की शिकायत हुई।
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इस घटना ने एक बार फिर रिहायशी और भीड़भाड़ वाले इलाकों में चल रहे कॉमर्शियल गोदामों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने गोदामों और दुकानों में फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच समय-समय पर जरूर कराएं।
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गढ़ रोड पर हुई इस घटना ने शहरवासियों की सांसें कुछ देर के लिए थाम दी थीं। हालांकि, दमकल विभाग की तत्परता से मेरठ में गोदाम में आग को फैलने से रोक लिया गया। यह घटना व्यापारियों के लिए एक सबक है कि बंद गोदामों में भी बिजली के उपकरणों को पूरी तरह स्विच ऑफ करना और सुरक्षा मानकों का पालन करना कितना जरूरी है।
Sabse pehle comment karne wale banein.