उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर मेरठ के सबसे प्रमुख और व्यस्त व्यावसायिक केंद्र, बेगमपुल (Begumpul) में इन दिनों बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। प्रशासन और व्यापारियों के बीच मेरठ बिजली मीटर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बिजली विभाग के कर्मचारी और ठेकेदार दुकानों और प्रतिष्ठानों के बाहर जबरन बिजली मीटर लगाने का दबाव बना रहे हैं, जिसका स्थानीय व्यापारी वर्ग लामबंद होकर कड़ा विरोध कर रहा है। व्यापारियों का साफ कहना है कि जब तक विभाग सुरक्षा की लिखित गारंटी नहीं देता, तब तक दुकानों के बाहर किसी भी कीमत पर मीटर नहीं लगने दिए जाएंगे।READ ALSO:-सावधान! क्या 30 जून से बंद हो रहे हैं कागज के नोट? सोशल मीडिया पर फैली 'प्लास्टिक करेंसी' की अफवाह, सरकार ने खोला सच का पिटारा
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इस मेरठ बिजली मीटर विवाद में सबसे हैरानी की बात यह है कि व्यापारियों के अनुसार, किसी भी बड़े अधिकारी या वरिष्ठ नेता के पास इस नए नियम का कोई आधिकारिक लिखित आदेश मौजूद नहीं है। इसके बावजूद, मीटर बदलने वाले कर्मचारी आम जनता और दुकानदारों को धमका रहे हैं और मनमानी कर रहे हैं। इस मुद्दे ने अब शहर में एक बड़े व्यापारी आंदोलन का रूप ले लिया है।
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अधिकारियों और नेताओं की चुप्पी: बिना लिखित आदेश के कर्मचारियों की मनमानी
\r\n\r\nव्यापारियों का सबसे बड़ा और गंभीर आरोप यह है कि बिजली विभाग के निचले स्तर के कर्मचारी और मीटर बदलने वाली निजी कंपनियों के ठेकेदार अपनी मनमानी कर रहे हैं। जब व्यापारी उनसे दुकानों के बाहर मीटर लगाने का कोई सरकारी या विभागीय लिखित आदेश मांगते हैं, तो वे कोई भी वैध दस्तावेज दिखाने में असमर्थ रहते हैं।
\r\n\r\nइस पूरे मेरठ बिजली मीटर विवाद को लेकर बेगमपुल के व्यापारियों ने शहर के तमाम बड़े अधिकारियों और व्यापारिक नेताओं का दरवाजा खटखटाया, लेकिन कहीं से भी कोई स्पष्ट लिखित आदेश सामने नहीं आया है। जानकारी के मुताबिक:
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- \r\n चीफ इंजीनियर रजनी कान्त मिश्रा\r\n \r\n
- \r\n एसडीओ मीटर (SDO Meter)\r\n \r\n
- \r\n एसडीओ सदर बिजली (SDO Sadar Bijli)\r\n \r\n
- \r\n जेई बिजली बेगम पुल (JE Bijli Begum Pul)\r\n \r\n
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इतने बड़े अधिकारियों व वरिष्ठ नेताओं के पास इस संबंध में कोई भी लिखित आदेश नहीं है। फिर भी, धरातल पर काम करने वाले कर्मचारी व्यापारियों को डरा-धमका रहे हैं। उनसे मौखिक तौर पर कहा जा रहा है कि यदि वे बाहर मीटर नहीं लगवाएंगे, तो उनका बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। इस तानाशाही रवैये के कारण पूरे बेगमपुल बाजार में भारी रोष पनप रहा है। व्यापारियों का सीधा सवाल है कि जब आला अधिकारियों के पास इसका कोई लिखित आदेश नहीं है, तो ये कर्मचारी किसके इशारे पर जनता को परेशान कर रहे हैं?
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बेगमपुल व्यापार संघ का कड़ा विरोध: महामंत्री पुनीत शर्मा का बयान
\r\n\r\nइस बढ़ते मेरठ बिजली मीटर विवाद में बेगमपुल व्यापार संघ (Begumpul Vyapar Sangh) ने व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए सीधा मोर्चा खोल दिया है। बेगमपुल व्यापार संघ के महामंत्री पुनीत शर्मा ने बिजली मीटर को दुकान के बाहर लगाए जाने की इस योजना का पुरजोर और खुला विरोध किया है।
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महामंत्री पुनीत शर्मा ने प्रेस को जारी अपने बयान में कहा कि विभाग की यह जिद पूरी तरह से अव्यावहारिक है और इससे व्यापारियों को भारी आर्थिक व मानसिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनका मानना है कि वातानुकूलित कमरों में बैठकर नीतियां बनाने वाले अधिकारियों को जमीनी हकीकत और बाजार की संकरी व भीड़भाड़ वाली भौगोलिक स्थिति का कोई अंदाजा नहीं है। व्यापार संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर व्यापारियों के प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होने देगा।
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दुकान के बाहर मीटर लगाने से होने वाले गंभीर नुकसान और खतरे
\r\n\r\nमेरठ बिजली मीटर विवाद केवल प्रशासन से टकराव का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर बाजार की सुरक्षा से जुड़ा है। महामंत्री पुनीत शर्मा ने दुकानों के बाहर मीटर लगाने से जुड़े कई गंभीर खतरों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ एक मीटर का सवाल नहीं है, बल्कि पूरे बेगमपुल बाजार की सुरक्षा का अहम मुद्दा है:
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- \r\n मीटर से छेड़छाड़ और भारी टूट-फूट: जब मीटर दुकान के बाहर सड़क या फुटपाथ की ओर लगाए जाएंगे, तो कोई भी असामाजिक तत्व आसानी से उनके साथ छेड़छाड़ कर सकता है। रात के अंधेरे में या भीड़भाड़ वाले समय में मीटरों के टूटने या उन्हें जानबूझकर नुकसान पहुंचाए जाने की पूरी संभावना रहती है।\r\n \r\n
- \r\n बिजली चोरी का बड़ा खतरा: बाहर लगे मीटरों से कटिया डालकर या तार जोड़कर कोई भी आसानी से बिजली चोरी कर सकता है। इसका सीधा आर्थिक नुकसान और बिजली के भारी बिल का बोझ उस निर्दोष व्यापारी पर पड़ेगा जिसके नाम पर वह मीटर दर्ज है।\r\n \r\n
- \r\n तार चोरी होने की लगातार घटनाएं: बाजार में कुछ दुकानों के बाहर पहले से ही जो मीटर लगे हैं, उनके साथ चोरी की कई घटनाएं हो चुकी हैं। रात के समय नशा करने वाले और चोर मीटर से जुड़े मोटे तार खींच कर ले जाते हैं ताकि वे उसके तांबे को बाजार में बेच सकें।\r\n \r\n
- \r\n शॉर्ट सर्किट और आगजनी का खौफ: पुनीत शर्मा ने बताया कि चोरों द्वारा तार काटे जाने या खींचे जाने के कारण अक्सर नंगे तार आपस में टकरा जाते हैं। बेगमपुल जैसे घनी आबादी, लकड़ी के पुराने स्ट्रक्चर और संकरी गलियों वाले बाजार में इससे भयंकर शॉर्ट सर्किट होने की अत्यधिक संभावना रहती है, जो एक बड़ी आगजनी और करोड़ों के माल के नुकसान का कारण बन सकती है।\r\n \r\n
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नुकसान की पूरी जिम्मेदारी ले सरकार या बिजली विभाग
\r\n\r\nइस पूरे मेरठ बिजली मीटर विवाद में व्यापारियों की मांग बहुत ही स्पष्ट, तार्किक और सीधी है। बेगमपुल व्यापार संघ के महामंत्री पुनीत शर्मा ने सभी व्यापारियों की ओर से कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि इन सब कारणों और बाहरी तत्वों द्वारा की गई छेड़छाड़ से होने वाले किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की पूरी जिम्मेदारी या तो राज्य सरकार ले या फिर स्थानीय बिजली विभाग इसे लिखित में स्वीकार करे।
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व्यापारियों का दो-टूक कहना है कि अगर मीटर बाहर लगने से तार चोरी होता है, मीटर टूटता है, या शॉर्ट सर्किट से किसी भी दुकान में आग लगती है, तो विभाग को बिना किसी हीलाहवाली के व्यापारी को इसका पूरा मुआवजा देना होगा। यदि बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन यह जिम्मेदारी और कानूनी गारंटी लिखित में लेने को तैयार है, तभी सभी व्यापारी अपनी दुकानों के बाहर मीटर लगवाएंगे। अन्यथा बेगमपुल का कोई भी व्यापारी इस तुगलकी फरमान को नहीं मानेगा और यह मेरठ बिजली मीटर विवाद एक बड़े सड़क आंदोलन में तब्दील हो जाएगा।
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संवाद से ही निकलेगा समाधान
\r\n\r\nकुल मिलाकर, मेरठ बिजली मीटर विवाद ने प्रशासन और व्यापारियों के बीच संवाद की भारी कमी और अविश्वास को पूरी तरह से उजागर कर दिया है। बेगमपुल व्यापार संघ के महामंत्री पुनीत शर्मा और अन्य पदाधिकारियों के नेतृत्व में व्यापारियों ने यह साफ कर दिया है कि वे शहर के विकास या नियमों के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे उन थोपी गई नीतियों के खिलाफ हैं जो उनकी मेहनत की कमाई और व्यापार को खतरे में डालती हैं।
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अब गेंद सीधे तौर पर प्रशासन, चीफ इंजीनियर रजनी कान्त मिश्रा और संयुक्त व्यापार संघ के नेताओं के पाले में है। उन्हें चाहिए कि वे व्यापारियों को ठेकेदारों द्वारा धमकाने के बजाय उनके साथ टेबल पर बैठकर बातचीत करें। उनकी जायज चिंताओं का समाधान निकालें और मीटर सुरक्षा को लेकर एक स्पष्ट एवं लिखित नीति सार्वजनिक करें। जब तक इस मुद्दे का शांतिपूर्ण और सुरक्षित हल नहीं निकलता, तब तक बेगमपुल में यह गतिरोध खत्म होता नहीं दिख रहा है।
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मेरठ के बेगमपुल बाजार में बिजली विभाग द्वारा बिना लिखित आदेश के दुकानों के बाहर मीटर लगाने पर भारी विवाद खड़ा हो गया है। चीफ इंजीनियर, एसडीओ और संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्षों के पास कोई लिखित आदेश न होने के बावजूद, कर्मचारी व्यापारियों को कनेक्शन काटने की धमकी दे रहे हैं। बेगमपुल व्यापार संघ के महामंत्री पुनीत शर्मा ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि बाहर मीटर लगने से छेड़छाड़, तार चोरी और शॉर्ट सर्किट से आग लगने का भारी खतरा है। संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार या बिजली विभाग इन नुकसानों की जिम्मेदारी लिखित में नहीं लेता, तब तक व्यापारी दुकानों के बाहर मीटर नहीं लगने देंगे।
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Sabse pehle comment karne wale banein.