मेरठ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के क्रांतिधरा मेरठ जिले में उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद द्वारा की जा रही ध्वस्तीकरण और अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के खिलाफ जनाक्रोश चरम पर पहुंच गया है। 'संयुक्त मेरठ बचाओ आंदोलन समिति' के आह्वान पर बुधवार को आयोजित 'मेरठ बंद' का व्यापक और अभूतपूर्व असर देखने को मिला। एक तरफ जहां शहर के प्रमुख व्यावसायिक बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा, वहीं दूसरी तरफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और मेरठ नर्सिंग होम एसोसिएशन के समर्थन के बाद पूरे जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। मौसम की विपरीत परिस्थितियों और तेज बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में क्षेत्रवासी, व्यापारी, महिलाएं और शिक्षिकाएं सड़कों पर उतरकर अपने आशियाने और रोजगार को बचाने की जंग लड़ते नजर आए।
\r\n\r\nमकान और व्यापार बचाने की जंग: बारिश भी नहीं डिगा सकी हौसला
\r\n\r\nबुधवार की सुबह से ही मेरठ के शास्त्री नगर गुरुद्वारा रोड पर अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। आसमान से बरसती बूंदों और खराब मौसम की परवाह किए बिना शास्त्री नगर, जागृति विहार, माधवपुरम और आसपास के इलाकों से भारी भीड़ जुटना शुरू हो गई। इस विरोध प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें केवल व्यापारी या पुरुष ही शामिल नहीं थे, बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं, गृहणियां और विभिन्न प्राइवेट स्कूलों की शिक्षिकाएं भी अपने मकान और परिजनों के रोजगार की रक्षा के लिए प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं। हाथों में छाता लिए लोग घंटों पानी में भीगते हुए आवास एवं विकास परिषद के खिलाफ नारेबाजी करते रहे और धरने पर डटे रहे।
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प्रशासन की पाबंदी: टेंट नहीं लगा तो ट्रैक्टर बना विरोध की बुलंद आवाज
\r\n\r\nआंदोलन को दबाने और भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से स्थानीय पुलिस व प्रशासनिक टीम ने प्रदर्शन स्थल पर टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी और न ही टेंट गाड़ने दिया। हालांकि, प्रशासनिक सख्ती भी प्रदर्शनकारियों के बुलंद हौसलों को तोड़ नहीं सकी। टेंट न मिलने पर लोग बिना किसी झिझक के गीली जमीन पर ही धरने पर बैठ गए।
\r\n\r\nजब मंच बनाने की जगह नहीं बची, तो प्रदर्शनकारियों ने मौके पर खड़े एक ट्रैक्टर को ही अपना मंच बना लिया। नेताओं ने ट्रैक्टर की ट्रॉली पर चढ़कर माइक संभाला और जनता को संबोधित किया। संयुक्त मेरठ बचाओ आंदोलन समिति के अध्यक्ष रवींद्र गुर्जर ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा, "आवास एवं विकास परिषद जिस तरह से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर लोगों के आशियाने और सालों पुराने व्यापार को उजाड़ने पर आमादा है, हम उसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह लड़ाई सिर्फ किसी एक दुकान या मकान की नहीं है, यह मेरठ के हजारों परिवारों के रोजगार, अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई है।" इस दौरान मुखिया गुर्जर, मेजर हिमांशु और नितेश राजपूत सहित कई प्रमुख वक्ताओं ने भी संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि यदि आवास विकास परिषद ने अपनी दमनकारी नीतियां वापस नहीं लीं, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा।
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स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा आघात: 1400 से अधिक स्वास्थ्य केंद्र बंद
\r\n\r\nमेरठ बंद के आह्वान का सबसे गंभीर और व्यापक असर जिले की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) मेरठ और मेरठ नर्सिंग होम एसोसिएशन ने आंदोलनकारियों की मांगों का जायज ठहराते हुए बंद को अपना शत-प्रतिशत समर्थन देने का आधिकारिक ऐलान किया।
\r\n\r\nबुधवार सुबह आठ बजे से ही शहर के करीब 300 से अधिक छोटे-बड़े निजी नर्सिंग होम और लगभग 1100 से ज्यादा निजी क्लिनिकों में ओपीडी (OPD) सेवाएं पूरी तरह से ठप कर दी गईं। ओपीडी बंद रहने के कारण अस्पतालों और क्लिनिकों के बाहर सन्नाटा पसरा रहा। जो डॉक्टर अपने नियमित शेड्यूल के अनुसार अस्पतालों में पहुंचे भी, उन्होंने मरीजों का चेकअप नहीं किया और समर्थन में ओपीडी का कामकाज बंद रखा।
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4000 से ज्यादा मरीज हुए परेशान, मेडिकल कॉलेज पर बढ़ा दबाव
\r\n\r\nअचानक ओपीडी सेवाएं बंद होने से जिले के दूर-दराज इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सुबह-सुबह अपनी रूटीन जांच, परामर्श या पर्चा बनवाने पहुंचे लगभग 4,000 से अधिक मरीज बिना इलाज कराए ही वापस लौटने को मजबूर हुए।
\r\n\r\nनिजी क्लिनिक और नर्सिंग होम बंद होने के कारण मरीज मजबूरी में सरकारी लाला लाजपत राय स्मारक (LLRM) मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल (प्यारेलाल अस्पताल) की ओर भागे, जिससे सरकारी अस्पतालों की ओपीडी और इमरजेंसी में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और वहां की व्यवस्थाएं चरमराती दिखीं।
\r\n\r\nमानवीय संवेदनाएं कायम: 24 घंटे जारी रहीं आपातकालीन सेवाएं
\r\n\r\nस्वास्थ्य सेवाओं के ठप होने के बीच डॉक्टरों ने मानवीय संवेदनाओं का पूरा ख्याल रखा। मेरठ नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. पुष्पेंद्र पंवार ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि डॉक्टरों ने एकजुट होकर बंद का समर्थन किया है और ओपीडी सेवाएं बुधवार सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक (कुल 12 घंटे) के लिए स्थगित रखी गई हैं।
\r\n\r\nडॉ. पंवार ने स्पष्ट किया, "हम जनता के दर्द और अपने शहर के नागरिकों के मकान-दुकान बचाने की लड़ाई के साथ हैं, लेकिन एक चिकित्सक होने के नाते हमारा पहला धर्म मरीज की जान बचाना है। इसलिए जिले के सभी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में आपातकालीन सेवाएं (Emergency Services) और आईसीयू (ICU) 24 घंटे पूरी तरह सुचारू रखी गई हैं, ताकि किसी भी गंभीर मरीज के इलाज में कोई कोताही न हो।"
\r\n\r\nवहीं, आईएमए (IMA) मेरठ शाखा की अध्यक्ष डॉ. मनीषा त्यागी ने कहा कि आवास विकास परिषद की एकतरफा कार्रवाई से शहर का हर वर्ग पीड़ित है। व्यापारियों और आम जनता के इस न्यायसंगत आंदोलन को आईएमए ने पूरा नैतिक समर्थन दिया है।
\r\n\r\nबाजारों में पसरा सन्नाटा, व्यापार ठप
\r\n\r\nप्रदर्शन के चलते शास्त्री नगर, जागृति विहार, माधवपुरम, सेंट्रल मार्केट सहित शहर के तमाम प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहे। व्यापारियों ने अपनी दुकानें स्वतः ही बंद रखकर संयुक्त मेरठ बचाओ आंदोलन समिति के फैसले पर मुहर लगाई। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब तक आवास एवं विकास परिषद अपनी ध्वस्तीकरण की योजना को रद्द नहीं करता या कोई संतोषजनक बीच का रास्ता नहीं निकालता, तब तक यह लड़ाई थमने वाली नहीं है।
\r\n\r\nDisclaimer (अस्वीकरण):
\r\n\r\nयह समाचार रिपोर्ट स्थानीय संवाददाताओं, प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित यूनियनों (IMA व नर्सिंग होम एसोसिएशन) द्वारा दिए गए बयानों के आधार पर तैयार की गई है। खबर का उद्देश्य आम जनता तक जिले की वर्तमान स्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं की अद्यतन जानकारी पहुंचाना है। किसी भी चिकित्सीय आपात स्थिति में मरीज निकटतम सरकारी अस्पताल या चालू इमरजेंसी सेवाओं से संपर्क करें।
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