मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) स्थित प्रतिष्ठित और व्यस्ततम इलाकों में से एक 'सेंट्रल मार्केट' (Central Market) में इन दिनों सन्नाटा, खौफ और भारी आक्रोश का माहौल है। दशकों से अपनी आजीविका चला रहे व्यापारियों के सिर पर अचानक सीलिंग की तलवार लटक गई है। देश की सर्वोच्च अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक कड़े आदेश के बाद प्रशासन ने मार्केट के 44 प्रतिष्ठानों को सील कर दिया है। इस कार्रवाई ने सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी पर सीधा प्रहार किया है। अब स्थानीय व्यापारियों ने हार मानने के बजाय आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। इसी कड़ी में सेंट्रल मार्केट के लोगों और व्यापारियों के समर्थन में एक विशाल 'पैदल न्याय यात्रा' का शंखनाद किया गया है, जो बुधवार, 15 अप्रैल 2026 की सुबह मेरठ से देश की राजधानी दिल्ली के लिए कूच करेगी।READ ALSO:-रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत! LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं, जानिए दिल्ली से मुंबई तक के ताज़ा रेट
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सुप्रीम कोर्ट के चाबुक से मची भारी खलबली: क्या है पूरा विवाद?

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यह पूरा विवाद आवासीय क्षेत्र (Residential Area) में व्यावसायिक गतिविधियों (Commercial Activities) के संचालन से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक सख्त आदेश जारी करते हुए मेरठ के सेंट्रल मार्केट में चल रहे 44 बड़े प्रतिष्ठानों को सील करने का निर्देश दिया था। कोर्ट का स्पष्ट कहना है कि आवासीय भूखंडों पर नियमों को ताक पर रखकर कमर्शियल गतिविधियां नहीं चलाई जा सकती हैं।
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 पैदल न्याय यात्रा का जारी हुआ पोस्टर।

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सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं कि अगले 15 दिन के भीतर इन सभी चिन्हित प्रतिष्ठानों की कमर्शियल गतिविधियां पूरी तरह से बंद कर दी जाएं। इसके साथ ही दुकानों के बाहर किए गए अतिक्रमण को हटाकर 'सेटबैक' (Setback) का रास्ता पूरी तरह से खुलवाया जाए। कोर्ट के इस फरमान के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) और स्थानीय प्रशासन हरकत में आया, जिसके बाद से ही व्यापारियों में खलबली और हड़कंप मचा हुआ है।
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दुकानें ही नहीं, स्कूल, अस्पताल और बैंक भी आए लपेटे में

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सीलिंग की इस कार्रवाई की सबसे बड़ी और चिंताजनक बात यह है कि इसकी जद में केवल सामान्य दुकानें या शोरूम ही नहीं आए हैं, बल्कि कई आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। सील किए गए 44 प्रतिष्ठानों की सूची में स्थानीय स्कूल, अस्पताल (Hospitals) और बैंक (Banks) की शाखाएं तक शामिल हैं।
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 Khedi Manihar(Mawana)-Meerut News ( खड़ी मनिहार(मवाना) - मेरठ न्यूज़):  Khedi Manihar(Mawana) - Meerut News Hindi Samachar, Latest News Headlines  and Breaking News - Dainik Bhaskar

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अस्पतालों और स्कूलों के सील होने से न केवल व्यापारी, बल्कि आम जनता और मरीज भी भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस कार्रवाई ने पूरे इलाके के आर्थिक और सामाजिक ढांचे को हिला कर रख दिया है। लोगों का कहना है कि दशकों से यह मार्केट इसी तरह चल रहा था और अब अचानक इसे बंद करने से हजारों लोगों का रोजगार छिन जाएगा।
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मातृशक्ति ने संभाला मोर्चा, धरने पर बैठीं महिलाएं

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प्रशासनिक कार्रवाई और कोर्ट के आदेश से हताश व्यापारियों के परिवारों की महिलाओं ने अब न्याय की मांग को लेकर मोर्चा संभाल लिया है। पिछले चार दिनों से सेंट्रल मार्केट में महिलाओं और व्यापारियों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी है। चिलचिलाती धूप और गर्मी की परवाह किए बिना महिलाएं धरने पर बैठी हैं। उनकी मांग है कि सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि (सांसद और विधायक) इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को विधानसभा या संसद में एक विशेष कानून या अध्यादेश लाकर इन दुकानों को नियमित (Regularize) करना चाहिए, ताकि उनका रोजगार बच सके।
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'पैदल न्याय यात्रा' का शंखनाद: 150 लोगों का जत्था करेगा दिल्ली कूच

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स्थानीय स्तर पर जब बात बनती नहीं दिखी, तो सेंट्रल मार्केट के लोगों ने अपनी आवाज देश के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने का फैसला किया है। इसके लिए एक 'पैदल न्याय यात्रा' का विधिवत ऐलान किया गया है, जिसका पोस्टर भी सोमवार को जारी कर दिया गया है।
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आयोजन समिति के प्रमुख सदस्य सचिन सिरोही ने इस यात्रा की पूरी रणनीति मीडिया के साथ साझा की। उन्होंने बताया कि यह कोई सामान्य प्रदर्शन नहीं है, बल्कि अपनी रोजी-रोटी बचाने की एक भावुक और दृढ़ पदयात्रा है। इस यात्रा के तहत करीब 150 प्रभावित लोगों और व्यापारियों का एक बड़ा जत्था पैदल ही मेरठ से दिल्ली तक का सफर तय करेगा।
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यह रहेगा पैदल न्याय यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम:

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    15 अप्रैल (बुधवार): सुबह 10:30 बजे मेरठ के सेंट्रल मार्केट से यह पैदल यात्रा पूरे जोश और नारों के साथ दिल्ली के लिए रवाना होगी। पहले दिन का सफर तय करने के बाद यह जत्था रात्रि विश्राम के लिए मोदीनगर (Modinagar) में रुकेगा।
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    16 अप्रैल (गुरुवार): मोदीनगर से यात्रा पुनः शुरू होगी और गाजियाबाद (Ghaziabad) की ओर बढ़ेगी। दूसरे दिन की रात का विश्राम गाजियाबाद में तय किया गया है।
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    17 अप्रैल (शुक्रवार): यात्रा गाजियाबाद से आगे बढ़ते हुए दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर पहुंचेगी। थके हुए लेकिन दृढ़ निश्चयी व्यापारी इस रात यूपी बॉर्डर पर ही डेरा डालेंगे।
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    18 अप्रैल (शनिवार): यात्रा अपने अंतिम पड़ाव पर होगी। दोपहर 12 बजे दिल्ली में देश के गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मुलाकात का समय और कार्यक्रम तय किया गया है।
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गृहमंत्री अमित शाह से मिलेंगी उम्मीदें: ज्ञापन में होंगी दो प्रमुख मांगें

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दिल्ली पहुंचकर यह पैदल न्याय यात्रा सीधे गृह मंत्रालय का रुख करेगी। सचिन सिरोही ने बताया कि व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल गृहमंत्री अमित शाह से मिलकर उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन (Memorandum) सौंपेगा और अपना दुखड़ा रोएगा। इस ज्ञापन में मुख्य रूप से दो बड़ी मांगें रखी जाएंगी:
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    संसद में उठे मुद्दा और बने कानून: पहली और सबसे अहम मांग यह होगी कि केंद्र सरकार इस मामले का संज्ञान ले। गृहमंत्री से यह गुहार लगाई जाएगी कि सेंट्रल मार्केट के इस गंभीर मुद्दे को संसद (Parliament) के पटल पर उठाया जाए। देश के सभी सांसदों का समर्थन जुटाकर एक ऐसा कानून या नीतिगत बदलाव लाया जाए, जिससे आवासीय क्षेत्रों में दशकों से चल रहे इन बाजारों को वैध (Legal) ठहराया जा सके और व्यापारियों को उजड़ने से बचाया जा सके।
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    केंद्र सरकार मुहैया कराए वरिष्ठ अधिवक्ता: दूसरी बड़ी मांग कानूनी सहायता से जुड़ी है। चूंकि यह मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट का है, और स्थानीय व्यापारियों के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वे देश के सबसे बड़े वकीलों की फीस चुका सकें। इसलिए, व्यापारी यह मांग करेंगे कि केंद्र सरकार अपनी ओर से देश के किसी शीर्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) को व्यापारियों के पक्ष में खड़ा करे। इस कानूनी लड़ाई का पूरा खर्च और जिम्मेदारी केंद्र सरकार उठाए, ताकि व्यापारियों को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखने का एक निष्पक्ष मौका मिल सके।
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मेरठ सेंट्रल मार्केट का यह मुद्दा अब केवल एक शहर की सीलिंग का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के कई शहरों में मौजूद 'मिक्स्ड लैंड यूज' (Mixed Land Use) की जटिल समस्या का प्रतीक बन गया है। 15 अप्रैल से शुरू होने वाली यह पैदल न्याय यात्रा व्यापारियों के संघर्ष और उनके अस्तित्व को बचाने की एक बड़ी कोशिश है। अब देखना यह होगा कि क्या 18 अप्रैल को गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद इन व्यापारियों को कोई ठोस आश्वासन मिलता है, या फिर सुप्रीम कोर्ट की तय सीमा के भीतर 44 प्रतिष्ठानों पर हमेशा के लिए ताला लटक जाएगा। मेरठ सहित पूरे प्रदेश की नजरें अब इस न्याय यात्रा के परिणाम पर टिकी हुई हैं।
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