उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार दोपहर को सियासी पारा अचानक चढ़ गया, जब समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। इस भारी हंगामे की वजह शहर के विभिन्न चौराहों पर लगे वो विवादित पोस्टर थे, जिन्होंने लखनऊ अखिलेश यादव होर्डिंग विवाद को जन्म दे दिया है। इन होर्डिंग्स में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की तुलना एक फिल्म के विलेन 'रहमान डकैत' से की गई है, जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 'धुरंधर सीएम' बताया गया है। इस होर्डिंग को देखने के बाद सपाई आगबबूला हो गए और उन्होंने जगह-जगह होर्डिंग्स फाड़ डाले तथा प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।READ ALSO:-बिजनौर में प्रशासन का हंटर: वन विभाग की सील तोड़कर चल रही थी अवैध आरा मशीन, DM की जांच में खुली पोल, दर्ज हुई FIR!
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क्या है पूरा लखनऊ अखिलेश यादव होर्डिंग विवाद?
\r\n\r\nइस पूरे लखनऊ अखिलेश यादव होर्डिंग विवाद की जड़ में वे पोस्टर हैं, जो मंगलवार सुबह अचानक लखनऊ, जौनपुर, अमेठी समेत राज्य के करीब 10 जिलों में दिखाई दिए। इन पोस्टरों को 'यूथ अगेंस्ट माफिया' नामक संस्था ने लगवाया है। होर्डिंग का स्वरूप बेहद आक्रामक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील है।
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होर्डिंग में एक तरफ लाल टोपी और काला चश्मा लगाए अखिलेश यादव की एडिट की हुई तस्वीर है, जिसमें उन्हें फिल्म 'धुरंधर' के कुख्यात चरित्र 'रहमान डकैत' की तरह पेश किया गया है। इसके नीचे बड़े अक्षरों में लिखा है- "अखिलेश का ल्यारी राज"। वहीं, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक बेहद सौम्य तस्वीर लगाई गई है, जिसमें वह कन्या पूजन कर रहे हैं। इस तस्वीर के नीचे "धुरंधर सीएम" लिखा गया है।
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जनता से सीधा सवाल पूछते हुए होर्डिंग के बीच में लिखा है- "आपको क्या चाहिए?" अखिलेश यादव की तस्वीर के नीचे 2012 से 2017 के बीच सपा शासनकाल के दौरान हुए मुजफ्फरनगर और शामली के दंगों की खबरों की पेपर कटिंग लगाई गई हैं। इसके उलट, सीएम योगी की तस्वीर के नीचे माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी पर हुई सख्त कार्रवाई की कटिंग चस्पा की गई हैं। इसी तुलनात्मक पोस्टर ने लखनऊ अखिलेश यादव होर्डिंग विवाद को हवा दे दी है।
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यूथ अगेंस्ट माफिया की सफाई: राजनीति से नहीं कोई वास्ता
\r\n\r\nभले ही सपा कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह सत्ता पक्ष की सोची-समझी साजिश है, लेकिन पोस्टर लगाने वाली संस्था 'यूथ अगेंस्ट माफिया' ने इससे इनकार किया है। होर्डिंग पर संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष आशुतोष सिंह और महामंत्री अभिनव तिवारी के नाम फोटो सहित छपे हैं।
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इस बढ़ते लखनऊ अखिलेश यादव होर्डिंग विवाद के बीच संगठन के महामंत्री अभिनव तिवारी ने अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने कहा, "ये होर्डिंग्स किसी भी राजनीतिक दल या नेता से प्रेरित नहीं हैं। यह पूरी तरह से एक जनजागरूकता और संवाद अभियान है। हम इसके माध्यम से युवाओं से यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि वे भविष्य में किस दिशा में जाना चाहते हैं—दंगों वाले राज्य की तरफ या माफिया मुक्त सुरक्षित राज्य की तरफ।" अभिनव ने यह भी बताया कि 15 अप्रैल को संगठन एक प्रेस वार्ता करेगा, जिसमें इस अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
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सपा कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा: दी ईंट से ईंट बजाने की चेतावनी
\r\n\r\nलखनऊ अखिलेश यादव होर्डिंग विवाद ने समाजवादी पार्टी के छात्र और युवा विंग को बुरी तरह आक्रोशित कर दिया है। मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय गेट के सामने और सीएम आवास के पास लगे होर्डिंग्स को फाड़ते हुए सपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
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- \r\n समाजवादी छात्र सभा के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार शुक्ला ने कहा, "यह होर्डिंग केवल सस्ती लोकप्रियता पाने की एक भद्दी साजिश है। लोकप्रियता ऐसे पोस्टर लगाने से नहीं मिलती, इसके लिए जनता के बीच रहकर काम करना पड़ता है। हमारे नेता अखिलेश यादव हमेशा जन-जन तक पहुंचे हैं। जो लोग कह रहे हैं कि वे Gen-Z को जागरूक कर रहे हैं, वो बताएं कि इस मौजूदा सरकार में सबसे ज्यादा बलात्कार क्यों हुए हैं?"\r\n \r\n
- \r\n सपा नेता अभिषेक श्रीवास्तव ने चेतावनी देते हुए कहा, "सपा देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है और अखिलेश यादव हमारे सुप्रीमो हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के सामने ऐसा होर्डिंग लगाना बेहद शर्मनाक है। अगर ये लोग अपनी इन हरकतों से बाज़ नहीं आए, तो क्रिया की भयंकर प्रतिक्रिया होगी। हम भी पूरे शहर में इनके काले कारनामों की होर्डिंग लगाने का काम करेंगे।"\r\n \r\n
- \r\n शिव प्रकाश यादव ने कहा, "हमारे नेता का यह अपमान किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जाएगा। 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता इस भाजपा सरकार को जड़ से उखाड़कर फेंक देगी। हम इस लखनऊ अखिलेश यादव होर्डिंग विवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।"\r\n \r\n
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सियासत में कैसे हुई फिल्म 'धुरंधर' और 'धुरंधर-2' की एंट्री?
\r\n\r\nइस लखनऊ अखिलेश यादव होर्डिंग विवाद को समझने के लिए सिनेमाघरों में 19 मार्च को रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर-2’ के संदर्भ को समझना बेहद जरूरी है। दरअसल, होर्डिंग में अखिलेश को 'धुरंधर' फिल्म के जिस 'रहमान डकैत' की तरह दिखाया गया है, वह किरदार बॉलीवुड एक्टर अक्षय खन्ना ने निभाया था। रहमान डकैत असल में पाकिस्तान के कराची स्थित 'ल्यारी' इलाके का एक खूंखार डॉन था।
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वहीं, हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर-2’ के एक किरदार ‘आतिफ अहमद’ ने यूपी की सियासत में भूचाल ला दिया है। कहा जा रहा है कि यह किरदार प्रयागराज के मारे जा चुके माफिया अतीक अहमद से प्रेरित है। फिल्म में इस किरदार का ISI (पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी) और नकली नोटों के रैकेट से कनेक्शन दिखाया गया है।
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अखिलेश और सपा का एतराज
\r\n\r\nसमाजवादी पार्टी ने इस फिल्म को शुरू से ही सत्ता पक्ष का प्रोपेगेंडा करार दिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुले तौर पर कहा था कि यह फिल्म विपक्ष को बदनाम करने और एक विशेष नरेटिव सेट करने के लिए बनाई गई है। गाजीपुर से सपा सांसद और मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी ने भी फिल्म पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि जो व्यक्ति (अतीक अहमद) अब इस दुनिया में नहीं है, उसे फिल्म में ISI एजेंट के रूप में दिखाना सरासर गलत है।
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सीएम योगी और पूर्व आईपीएस का फिल्म को समर्थन
\r\n\r\nएक तरफ जहां विपक्ष इसे प्रोपेगेंडा बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ सीएम योगी आदित्यनाथ ने 2 दिन पहले वाराणसी में ‘धुरंधर’ की जमकर तारीफ की थी। योगी ने कहा था, "आज की फिल्मों में सच्चाई को दिखाया जा रहा है। पहले की फिल्मों में तो सही को गलत और गलत को सही बनाकर पेश किया जाता था। अब वक्त बदल गया है।"
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इसी कड़ी में भाजपा नेता और रिटायर्ड आईपीएस अफसर डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने भी फिल्म के तथ्यों का समर्थन किया है। उन्होंने दावा किया कि बिहार के शहाबुद्दीन, यूपी के मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद के बीच गहरा आपराधिक गठजोड़ था। ये तीनों मिलकर भारत में जाली नोटों का व्यापार करते थे और उस कमाई से अपने गैंग को मजबूत करते थे। फिल्म ‘धुरंधर-2’ में बिल्कुल यही कहानी दिखाई गई है।
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कुल मिलाकर देखा जाए तो लखनऊ अखिलेश यादव होर्डिंग विवाद सिर्फ एक पोस्टर का मसला नहीं है, बल्कि यह सिनेमा, सियासत और आगामी चुनावों के बीच चल रही एक गहरी रस्साकशी का हिस्सा है। फिल्म ‘धुरंधर-2’ के 'आतिफ अहमद' किरदार को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस अब सड़कों पर होर्डिंग वॉर में तब्दील हो चुकी है। सपा जहां इसे अपने नेता की छवि खराब करने की साजिश मान रही है, वहीं विरोधी गुट इसे अतीत के काले पन्नों का आईना बता रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा इसका जवाब अपने पोस्टरों से कैसे देती है।
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उत्तर प्रदेश की राजधानी में लखनऊ अखिलेश यादव होर्डिंग विवाद गहरा गया है। 'यूथ अगेंस्ट माफिया' संस्था द्वारा लगाए गए पोस्टरों में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को 'रहमान डकैत' और सीएम योगी को 'धुरंधर सीएम' बताया गया है। पोस्टर में सपा सरकार के दौरान हुए दंगों और योगी सरकार के माफिया विरोधी अभियानों की तुलना की गई है। इस पर भड़के सपा कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर होर्डिंग फाड़ दिए और सरकार को 2027 के चुनावों में उखाड़ फेंकने की चेतावनी दी। यह पूरा विवाद फिल्म 'धुरंधर-2' में अतीक अहमद से प्रेरित किरदार 'आतिफ अहमद' के इर्द-गिर्द घूम रही राजनीतिक बयानबाजी का ही एक विस्तार है।
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