विश्व पटल पर जब भी कोई बड़ा भू-राजनीतिक भूचाल आता है, तो उसकी लहरें सात समंदर पार आम आदमी की चौखट तक पहुँच ही जाती हैं। इस समय दुनिया अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे भीषण और विनाशकारी युद्ध की गवाह बन रही है। इस युद्ध ने केवल मध्य पूर्व (Middle East) को ही नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था और यहाँ के आम जनमानस की रसोई को भी बुरी तरह झुलसा कर रख दिया है। देशभर में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस (LNG) का एक ऐसा महासंकट खड़ा हो गया है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। सप्लाई चेन पूरी तरह से चरमरा गई है, गैस एजेंसियों के बाहर हाहाकार मचा है और इस राष्ट्रीय आपदा के बीच मुनाफाखोर और कालाबाजारी करने वाले गिद्धों की तरह आम जनता को नोच रहे हैं।READ ALSO:-87 फर्जी कंपनियाँ, 60 करोड़ का खेल और एक 'मास्टरमाइंड'... मेरठ कोर्ट ने GST घोटालेबाज को दिखाया जेल का रास्ता!
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खबरीलाल की इस विस्तृत इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि कैसे खाड़ी देशों की यह जंग आपके घर के बजट को तबाह कर रही है, देश के अलग-अलग राज्यों में कालाबाजारी का क्या आलम है, और सरकार इस महासंकट से निपटने के लिए क्या कड़े कदम उठा रही है।
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ग्राउंड रिपोर्ट: राज्यों में त्राहि-त्राहि और कालाबाजारी का नंगा नाच
\r\n\r\nजब मांग ज्यादा हो और आपूर्ति (सप्लाई) अचानक ठप हो जाए, तो कालाबाजारी का जन्म होता है। मौजूदा समय में भारत के लगभग हर राज्य में यही स्थिति है। गैस सिलेंडर अब एक लग्जरी वस्तु बन गया है, जिसके लिए लोग मुँहमांगी कीमत चुकाने को मजबूर हैं।
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मध्य प्रदेश: 4000 रुपये में खुलेआम बिक रहा कॉमर्शियल सिलेंडर मध्य प्रदेश में गैस संकट ने विकराल रूप ले लिया है। व्यावसायिक (कॉमर्शियल) उपयोग वाले 19 किलोग्राम के गैस सिलेंडर की आधिकारिक कीमत वर्तमान में 1,918 रुपये तय की गई है। लेकिन धरातल पर सच्चाई बेहद खौफनाक है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन और खबरीलाल के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजधानी भोपाल के बरखेड़ा पठानी इलाके और अन्य प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में गैस एजेंसियों पर खुलेआम इसी सिलेंडर के लिए 4,000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। राज्य सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' (Essential Commodities Act) लागू कर दिया है, पुलिस और प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं, लेकिन गैस माफियाओं और कालाबाजारियों पर इसका कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है। वे बेखौफ होकर अपनी जेबें भर रहे हैं।
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बिहार: 1000 का घरेलू सिलेंडर 1800 में, कॉमर्शियल 5000 पार बिहार में स्थिति और भी ज्यादा विस्फोटक है। यहाँ आम आदमी की रसोई का बजट पूरी तरह से तहस-नहस हो गया है। गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत के चलते जो घरेलू सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) आमतौर पर 900 से 1000 रुपये के बीच मिलता था, वह अब ब्लैक मार्केट में 1700 से 1800 रुपये तक में बेचा जा रहा है। बात अगर कॉमर्शियल सिलेंडर की करें, तो जिसकी सामान्य कीमत 1900 रुपये के आसपास होनी चाहिए, उसके लिए छोटे व्यापारियों और रेस्टोरेंट मालिकों से 5000 रुपये तक की भारी-भरकम रकम वसूली जा रही है। यह सीधे तौर पर आम जनता की दिनदहाड़े लूट है।
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उत्तर प्रदेश: लखनऊ में "सुविधा शुल्क" से तुरंत मिल रही गैस उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित मेरठ, कानपुर और आगरा जैसे बड़े शहरों में लोग दिन-दिन भर चिलचिलाती धूप में गैस एजेंसियों के बाहर लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। कई घंटों के इंतजार के बाद भी "नो स्टॉक" का बोर्ड दिखा दिया जाता है। लेकिन, भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोगों का दावा है कि अगर आप 950 रुपये वाले घरेलू सिलेंडर के लिए 1600 रुपये (यानी 650 रुपये का सुविधा शुल्क या ब्लैक मनी) देने को तैयार हैं, तो आपको बिना किसी लाइन के तुरंत सिलेंडर मिल जाएगा। यही हाल कॉमर्शियल सिलेंडर का है, जो ब्लैक में 3500 रुपये में "आसानी" से उपलब्ध है, बशर्ते आपकी जेब भारी हो।
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पंजाब और हरियाणा: हफ्तों का इंतजार, डिलीवरी सिस्टम ध्वस्त कृषि प्रधान राज्य पंजाब और हरियाणा में भी गैस संकट ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। पंजाब में तो कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई लगभग पूरी तरह से बंद हो गई है। घरेलू सिलेंडरों की बुकिंग प्रणाली भी बुरी तरह क्रैश हो गई है। जंग शुरू होने से पहले जहाँ गैस एजेंसियां उपभोक्ता के घर तक सिलेंडर डिलीवर करती थीं, अब हालात ये हैं कि लोग अपने खाली सिलेंडर साइकिलों और मोटरसाइकिलों पर लादकर एजेंसियों के सामने सुबह 4 बजे से लाइनों में लग जाते हैं। जालंधर में कॉमर्शियल सिलेंडर 1900 की जगह 3500 रुपये में ब्लैक में बिक रहा है। मजे की बात यह है कि प्रशासनिक अधिकारी अभी भी 'ऑल इज वेल' का राग अलाप रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि उनके पास गैस का भरपूर भंडारण है, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। हरियाणा के हिसार, सोनीपत, फतेहाबाद, हांसी, पानीपत, कैथल, रेवाड़ी और फरीदाबाद जैसे प्रमुख शहरों में जो घरेलू डिलीवरी पहले 1 से 2 दिन में हो जाती थी, अब उसके लिए एक-एक हफ्ते तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ओटीपी (OTP) न आने की तकनीकी समस्याएं भी कोढ़ में खाज का काम कर रही हैं।
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हॉस्पिटैलिटी और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पर मंडराया 'शटर-डाउन' का खतरा
\r\n\r\nइस गैस संकट की सबसे बड़ी मार देश के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर (होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैफे) पर पड़ी है। कोरोना महामारी के बाद किसी तरह पटरी पर लौटे इस उद्योग को युद्ध ने फिर से आईसीयू में धकेल दिया है।
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- \r\n राजस्थान: बंद होने लगे रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट: पर्यटन के लिए मशहूर राजस्थान में हालात बेहद चिंताजनक हैं। चित्तौड़गढ़ में कई रेस्टोरेंट मालिकों ने गैस का स्टॉक पूरी तरह खत्म होने के कारण अपने प्रतिष्ठान अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिए हैं और कर्मचारियों को उनके घर भेज दिया है। सवाई माधोपुर, जो रणथंभौर नेशनल पार्क के कारण पर्यटकों से भरा रहता है, वहाँ भी रेस्टोरेंट शटर गिराने लगे हैं। सबसे बुरा हाल जैसलमेर के विश्व प्रसिद्ध 'सम सैंड ड्यून्स' (Sam Sand Dunes) का है, जहाँ गैस की किल्लत के चलते करीब 150 रिसॉर्ट्स को मजबूरन बंद करने की तैयारी चल रही है।\r\n \r\n
- \r\n घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग: जयपुर जैसे बड़े शहरों में चाय की थड़ी, मिठाई की दुकानों और छोटे ढाबों पर अब कॉमर्शियल गैस की जगह चोरी-छिपे घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग धड़ल्ले से होने लगा है, जो न केवल गैरकानूनी है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक है।\r\n \r\n
- \r\n पारंपरिक ईंधनों की वापसी: राजस्थान के एजुकेशन हब 'कोटा' में जहाँ लाखों छात्र रहते हैं, वहाँ के मेस और हॉस्टलों में गैस की कमी के चलते एक बार फिर से लकड़ी और कोयले की भट्ठियों का दौर लौट आया है। बाजार में रातों-रात 35 से 40 किलो वजन की लोहे की विशाल भट्ठियों की मांग तेजी से बढ़ गई है।\r\n \r\n
- \r\n उत्तराखंड: मेन्यू से गायब हुए 70% फूड आइटम: देवभूमि उत्तराखंड के देहरादून और हल्द्वानी जैसे प्रमुख शहरों में गैस आपूर्ति बाधित होने से ढाबा और ठेला संचालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। गैस बचाने के लिए कई नामी रेस्टोरेंट्स ने अपने मेन्यू में भारी कटौती की है और करीब 70% ऐसे फूड आइटम्स हटा दिए हैं जिन्हें पकाने में ज्यादा गैस खर्च होती है (जैसे तंदूरी डिशेज या धीमी आंच पर पकने वाले व्यंजन)।\r\n \r\n
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बाजार में आया नया बदलाव: इंडक्शन और इलेक्ट्रिक कुकिंग की बंपर डिमांड
\r\n\r\nजैसा कि कहा जाता है, "आवश्यकता आविष्कार की जननी है।" गैस सिलेंडरों की अनुपलब्धता और भारी ब्लैक मार्केटिंग ने लोगों और व्यापारियों को इलेक्ट्रिक कुकिंग विकल्पों की ओर मोड़ने पर मजबूर कर दिया है। होटलों और घरों में तेजी से इंडक्शन कुकटॉप्स (Induction Cooktops), माइक्रोवेव और इलेक्ट्रिक हीटर का इस्तेमाल बढ़ रहा है। जयपुर के प्रसिद्ध जयंती बाजार (जो इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा हब है) के व्यापार मंडल एसोसिएशन के अध्यक्ष सचिन गुप्ता ने खबरीलाल को बताया कि सामान्य दिनों में जयपुर में महीने भर में 2500 से 3000 इंडक्शन कुकटॉप्स बिकते थे। लेकिन जब से गैस का संकट गहराया है, इनकी डिमांड में अचानक 50% से अधिक का भारी उछाल आ गया है। इलेक्ट्रॉनिक शोरूम्स पर इंडक्शन खरीदने वालों की भीड़ लगी है और कई जगह तो इनका भी स्टॉक खत्म होने लगा है। हालांकि, इससे बिजली के ग्रिड पर भी अचानक लोड बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
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इस महासंकट के 2 सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय कारण
\r\n\r\nआखिर ऐसा क्या हुआ कि अचानक भारत में गैस का इतना बड़ा अकाल पड़ गया? इसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़े भू-राजनीतिक और सामरिक कारण हैं:
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1. होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) का लगभग बंद हो जाना: यह इस पूरे संकट की सबसे बड़ी जड़ है। होर्मुज स्ट्रेट एक बेहद संकरा, लगभग 167 किलोमीटर लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का 'चोकपॉइंट' (Chokepoint) है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम व्यापार का लगभग 20% हिस्सा रोजाना इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और खुद ईरान इसी जलमार्ग पर निर्भर हैं। वर्तमान में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के कारण यह रूट पूरी तरह से 'वॉर जोन' (War Zone) में तब्दील हो गया है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के डर से कोई भी कमर्शियल तेल या गैस टैंकर इस रास्ते से गुजरने की हिम्मत नहीं कर रहा है। भारत पर प्रभाव: भारत अपनी कुल जरूरत का 50% कच्चा तेल (Crude Oil) और 54% लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी रास्ते से आयात करता है। इस रास्ते के ब्लॉक होने का सीधा मतलब है भारत की सप्लाई लाइन का कट जाना।
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2. कतर के LNG प्लांट पर ड्रोन हमला और प्रोडक्शन का रुकना: पिछले हफ्ते जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर एयर स्ट्राइक की थी, तो उसके जवाब में ईरान समर्थित गुटों ने पलटवार करते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक संपत्तियों को निशाना बनाया। इसी दौरान कतर के विशाल LNG प्लांट्स के करीब भी ड्रोन हमले हुए। सुरक्षा कारणों और संभावित खतरे को देखते हुए कतर ने तुरंत अपने LNG (Liquefied Natural Gas) प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया। भारत पर प्रभाव: भारत गैस आयात के मामले में कतर पर बहुत अधिक निर्भर है। हम अपनी कुल जरूरत की 40% LNG (करीब 2.7 करोड़ टन सालाना) अकेले कतर से आयात करते हैं। कतर के प्लांट बंद होने से रातों-रात भारत में गैस की सप्लाई धड़ाम से गिर गई, जिससे यह पूरा संकट खड़ा हुआ।
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तिरुपति मंदिर का प्रबंधन: 4 लाख लड्डू बन रहे, कोई रुकावट नहीं
\r\n\r\nइस घोर निराशा और संकट के बीच, एक जगह ऐसी है जहाँ का प्रबंधन पूरे देश के लिए एक मिसाल है। वह है आंध्र प्रदेश स्थित विश्व प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD)। TTD तिरुमाला के श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर का कामकाज देखता है। यहाँ हर दिन औसतन करीब 4 लाख पवित्र 'लड्डू' (प्रसाद) तैयार किए जाते हैं और त्योहारों के दौरान यह संख्या 10 लाख तक पहुँच जाती है। इसके अलावा 'अन्नदानम' (मुफ्त भोजन सेवा) किचन में हजारों श्रद्धालुओं के लिए रोज खाना बनता है। अधिकारी ने बताया कि लड्डू बनाने और अन्नदानम यूनिट्स को मिलाकर रोजाना 10 टन से ज्यादा कुकिंग गैस की जरूरत पड़ती है। इतनी भारी डिमांड के बावजूद वहाँ कोई संकट नहीं है। TTD ने बताया कि लड्डू और अन्नप्रसादम का काम बिना रुके चलता रहे, इसके लिए मंदिर प्रशासन हमेशा अपने पास कम से कम 'एक हफ्ते का गैस बफर स्टॉक' (Extra Quota) रिजर्व रखता है। इसके अलावा, लड्डू बनाने और मुख्य अन्नदानम केंद्र के लिए TTD ने समझदारी दिखाते हुए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का नेटवर्क स्थापित किया हुआ है, जो सिलेंडरों पर निर्भरता खत्म करता है। बाकी छोटी अन्नदानम यूनिट्स में सिलेंडर इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनकी सप्लाई सुचारू है। यह बताता है कि संकट के समय बेहतर प्लानिंग कितनी जरूरी है।
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सरकार का 'एक्शन मोड': संकट से निपटने के लिए उठाए गए 5 कड़े कदम
\r\n\r\nदेश में बढ़ते जन-आक्रोश और ब्लैक मार्केटिंग को देखते हुए केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से कई सख्त कदम उठाए हैं:
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- \r\n हाई-लेवल कमेटी का गठन: पेट्रोलियम मंत्रालय ने हालात की गंभीरता को समझते हुए तत्काल प्रभाव से तीन प्रमुख तेल कंपनियों (Indian Oil, Bharat Petroleum, Hindustan Petroleum) के कार्यकारी निदेशकों (Executive Directors) की एक 'हाई-लेवल कमेटी' का गठन किया है। यह कमेटी 24x7 सप्लाई चेन की निगरानी और समीक्षा कर रही है।\r\n \r\n
- \r\n आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodity Act 1955) लागू: गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी को कुचलने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में यह सख्त कानून लागू कर दिया है। इसके तहत अब अगर कोई गैस एजेंसी या डीलर गैस की जमाखोरी करते या ब्लैक में बेचते पकड़ा गया, तो उस पर भारी जुर्माना और बिना वारंट जेल की सजा हो सकती है। राजस्थान जैसे राज्यों में फूड डिपार्टमेंट के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों की छुट्टियां कैंसिल कर दी गई हैं ताकि वे लगातार छापेमारी कर सकें।\r\n \r\n
- \r\n बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव (25/45 दिन का नियम): पैनिक बुकिंग (Panic Booking) को रोकने के लिए सरकार ने नियम बदल दिए हैं। अब शहरी उपभोक्ता एक घरेलू सिलेंडर डिलीवर होने के '25 दिन' बाद ही दूसरा सिलेंडर बुक कर सकेंगे। वहीं, तेल कंपनियों ने ग्रामीण इलाकों में यह समय सीमा बढ़ाकर '45 दिन' कर दी है। यानी ग्रामीण क्षेत्रों में एक डिलीवरी के 45 दिन बाद ही दूसरी बुकिंग सिस्टम में स्वीकार की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य: गैस माफिया और डिलीवरी बॉय मिलीभगत करके जरूरतमंदों का सिलेंडर ब्लैक मार्केट में न बेच दें, इसके लिए डिलीवरी के समय उपभोक्ता के मोबाइल पर आने वाला OTP (One Time Password) या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (Biometric Verification) पूरी तरह से अनिवार्य और सख्त कर दिया गया है। बिना इसके डिलीवरी सिस्टम में दर्ज नहीं होगी।\r\n \r\n
- \r\n स्वदेशी LPG उत्पादन बढ़ाने का आपातकालीन आदेश: बाहरी आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने देश की सभी ऑयल रिफाइनरीज को अपनी पूरी क्षमता (Full capacity) पर काम करने और LPG का उत्पादन अधिकतम स्तर तक बढ़ाने का आदेश दिया था। सूत्रों का कहना है कि इस आदेश के बाद स्वदेशी उत्पादन में करीब 10% की वृद्धि दर्ज की गई है।\r\n \r\n
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महंगाई का डबल अटैक: गैस के दामों में भी की गई बढ़ोतरी
\r\n\r\nएक तरफ गैस मिल नहीं रही है, और दूसरी तरफ जो मिल रही है, वह अब और महंगी हो गई है। संकट के बीच सरकार ने गैस की कीमतों में भी इजाफा कर दिया है।
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- \r\n घरेलू गैस (Domestic LPG): सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ा दिए हैं। नई कीमतें 7 मार्च 2026 से लागू हो गई हैं। इसके बाद देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम की LPG गैस अब 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये की हो गई है।\r\n \r\n
- \r\n कॉमर्शियल गैस (Commercial LPG): इससे पहले 1 मार्च 2026 को 19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक गैस सिलेंडर के दाम में भी 115 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद यह 1883 रुपये का हो गया है।\r\n \r\n
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आगे क्या? कब तक सुधरेंगे हालात?
\r\n\r\nआम आदमी के मन में अब एक ही सवाल है कि यह संकट कब टलेगा? इंडियन ऑयल (IOCL) के मुख्य महाप्रबंधक (LPG) के.एम. ठाकुर ने जनता से अपील की है कि वे घबराहट (Panic) में आकर जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक करने का प्रयास न करें, क्योंकि इससे सिस्टम पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। राहत की बात यह है कि सरकार अमेरिका और अन्य मित्र देशों से वैकल्पिक समुद्री मार्गों के जरिए 'कार्गो' (गैस के जहाज) मंगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस ऊर्जा संकट को कम करने के लिए G7 देश (दुनिया की 7 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं) अपने-अपने देशों के 'इमरजेंसी तेल और गैस भंडार' (Strategic Petroleum Reserves) से सप्लाई जारी करने पर चर्चा कर रहे हैं। इसके अलावा, रूस और अल्जीरिया से भी अतिरिक्त कच्चे तेल और गैस के आयात की उम्मीद बंधी है।
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कुल मिलाकर, जब तक खाड़ी देशों में युद्ध के बादल नहीं छंटते और होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित नहीं होती, तब तक भारतीय उपभोक्ताओं को संयम और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के सहारे ही इस मुश्किल वक्त को काटना होगा। खबरीलाल की टीम इस वैश्विक संकट और इसके स्थानीय प्रभावों पर लगातार नजर बनाए हुए है। हर नई अपडेट के लिए हमारे पोर्टल से जुड़े रहें।
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