खबरीलाल डेस्क रिपोर्ट: देश की जानी-मानी आईवियर (Eyewear) और चश्मा निर्माता कंपनी लेंसकार्ट (Lenskart) इन दिनों एक बड़े और गंभीर विवाद के केंद्र में आ गई है। कंपनी अपनी किसी नई सर्विस या प्रोडक्ट के लिए नहीं, बल्कि अपने कर्मचारियों के लिए बनाए गए एक कथित 'ड्रेस कोड' (Dress Code) और 'ग्रूमिंग गाइडलाइंस' को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर है। इंटरनेट पर एक डॉक्यूमेंट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि लेंसकार्ट ने अपने स्टोर्स में काम करने वाले हिंदू कर्मचारियों के लिए माथे पर बिंदी, तिलक लगाने और हाथ में कलावा (धार्मिक धागा) बांधने पर रोक लगा दी है। वहीं, दूसरी ओर इसी डॉक्यूमेंट में मुस्लिम कर्मचारियों को हिजाब पहनने की सशर्त अनुमति दी गई है।READ ALSO:-मेरठ में हाई-टेक IPL सट्टा गिरोह का पर्दाफाश: फ्लैट में चल रहा था मिनी कंट्रोल रूम, स्वाट टीम के छापे में 3 शातिर बुकी गिरफ्तार
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इस कथित भेदभावपूर्ण नीति के सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर हैशटैग #Lenskart ट्रेंड करने लगा और लोगों ने कंपनी के खिलाफ भारी आक्रोश जताना शुरू कर दिया। विवाद को बढ़ता देख लेंसकार्ट के को-फाउंडर और शार्क टैंक इंडिया (Shark Tank India) के चर्चित जज पीयूष बंसल (Peyush Bansal) को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी है। आइए खबरीलाल की इस विस्तृत रिपोर्ट में समझते हैं कि पूरा विवाद क्या है, वायरल डॉक्यूमेंट में क्या लिखा है और पीयूष बंसल ने अपने बचाव में क्या तर्क दिए हैं।
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विवाद की शुरुआत: एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य का वो ट्वीट जिसने मचाई हलचल

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इस पूरे विवाद ने तब तूल पकड़ा जब जानी-मानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य (Shefali Vaidya) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर लेंसकार्ट के इस कथित इंटरनल 'ग्रूमिंग गाइड' (Grooming Guide) का एक स्क्रीनशॉट साझा किया।
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शेफाली वैद्य ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए सीधे तौर पर लेंसकार्ट के फाउंडर पीयूष बंसल को टैग किया और उनसे एक तीखा सवाल पूछा। उन्होंने लिखा- "पीयूष बंसल, क्या आप स्पष्ट कर सकते हैं कि लेंसकार्ट में हिजाब ठीक है लेकिन बिंदी और कलावा क्यों नहीं?" शेफाली वैद्य के इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर मानो भूचाल आ गया। देखते ही देखते यह ट्वीट वायरल हो गया और हजारों लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। यूजर्स ने लेंसकार्ट की नीतियों को बहुसंख्यक विरोधी और हिंदू धर्म की मान्यताओं के खिलाफ बताते हुए कंपनी को जमकर ट्रोल किया। कई यूजर्स ने तो लेंसकार्ट के प्रोडक्ट्स के बहिष्कार (Boycott Lenskart) तक की मांग कर डाली। लोगों का कहना था कि भारत जैसे बहुसांस्कृतिक देश में कोई भी कंपनी कर्मचारियों के धार्मिक प्रतीकों को लेकर ऐसा दोहरा मापदंड कैसे अपना सकती है।
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आखिर वायरल डॉक्यूमेंट (Grooming Guide) में लिखा क्या है?

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सोशल मीडिया पर जो 'ग्रूमिंग गाइड' का पन्ना वायरल हो रहा है, वह कर्मचारियों के स्टोर में काम करने के दौरान उनके पहनावे और लुक से जुड़ा हुआ है। इस डॉक्यूमेंट में स्पष्ट तौर पर कुछ चीजों को 'क्या करें और क्या न करें' (Do's and Don'ts) की कैटेगरी में रखा गया है।
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वायरल डॉक्यूमेंट के मुख्य बिंदु:

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    बिंदी और क्लचर पर रोक: गाइडलाइंस के मुताबिक, महिला कर्मचारियों को स्टोर में काम करने के दौरान माथे पर बिंदी लगाने और बालों में क्लचर (Clutcher) लगाने की अनुमति नहीं है।
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    कलावा और रिस्ट बैंड की मनाही: डॉक्यूमेंट में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि हाथों में पहने जाने वाले किसी भी तरह के धार्मिक धागे (कलावा), कंगन या रिस्ट बैंड (Wrist Band) को ड्यूटी के दौरान हटाना होगा।
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    हिजाब और पगड़ी को सशर्त मंजूरी: इसी डॉक्यूमेंट का एक और हिस्सा है जिसने सबसे ज्यादा विवाद पैदा किया। इसमें लिखा है कि अगर कोई कर्मचारी हिजाब (Hijab) या पगड़ी (Turban) पहनता है, तो वह केवल 'काले रंग' (Black Color) का होना चाहिए। इसके साथ ही एक शर्त यह भी जोड़ी गई है कि हिजाब की लंबाई ऐसी होनी चाहिए जिससे कंपनी की टी-शर्ट पर छपा 'लेंसकार्ट का लोगो' (Logo) न छुपे।
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    बुर्का बैन: हालांकि, गाइडलाइंस में यह भी साफ किया गया है कि स्टोर के फ्लोर पर काम करते समय किसी भी महिला कर्मचारी को बुर्का (Burqa) पहनने की मनाही है।
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इन नियमों ने ही लोगों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया कि जब यूनिफॉर्मिटी (एकसमानता) के नाम पर बिंदी और कलावा जैसी छोटी चीजों को बैन किया जा सकता है, तो हिजाब और पगड़ी को (भले ही शर्तों के साथ) अनुमति क्यों दी गई है?
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डैमेज कंट्रोल: पीयूष बंसल ने दिया जवाब, बताया 'गलत और पुराना'

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जैसे ही सोशल मीडिया पर लेंसकार्ट के खिलाफ गुस्सा चरम पर पहुंचा और ब्रांड की इमेज को नुकसान होने लगा, कंपनी के सीईओ पीयूष बंसल ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी। बंसल ने सोशल मीडिया पर ही शेफाली वैद्य और अन्य यूजर्स को जवाब देते हुए इस पूरे विवाद को शांत करने का प्रयास किया।
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पीयूष बंसल की सफाई के मुख्य अंश:

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    डॉक्यूमेंट पुराना है: पीयूष बंसल ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर जो स्क्रीनशॉट शेयर किया जा रहा है, वह कंपनी का बहुत 'पुराना और गलत' (Old and Incorrect) डॉक्यूमेंट है।
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    मौजूदा नीति नहीं है: उन्होंने जोर देकर कहा कि वायरल हो रही ये गाइडलाइंस कंपनी की मौजूदा नीति (Current HR Policy) या विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं।
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    सभी धर्मों का सम्मान: बंसल ने कहा, "लेंसकार्ट एक समावेशी (Inclusive) कंपनी है और हम सभी धर्मों, संस्कृतियों और मान्यताओं का पूरा सम्मान करते हैं।"
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    कर्मचारियों की आजादी: अपने बचाव में उन्होंने आगे लिखा कि पूरे देश में लेंसकार्ट के हजारों टीम मेंबर्स काम कर रहे हैं और वे हर दिन अपनी आस्था, विश्वास और संस्कृति के प्रतीकों को पूरे गर्व के साथ पहनकर स्टोर्स में ग्राहकों की सेवा करते हैं।
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हालांकि, पीयूष बंसल की इस सफाई के बाद भी सोशल मीडिया पर कई लोग संतुष्ट नजर नहीं आए। यूजर्स ने पूछा कि अगर यह डॉक्यूमेंट पुराना है, तो क्या कंपनी सार्वजनिक रूप से अपनी 'नई और अपडेटेड ग्रूमिंग पॉलिसी' का डॉक्यूमेंट शेयर करेगी ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके?
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कॉर्पोरेट जगत और ड्रेस कोड की संवेदनशीलता

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यह कोई पहली बार नहीं है जब भारत में कोई बड़ी कंपनी इस तरह के धार्मिक प्रतीकों या विज्ञापनों को लेकर विवादों में घिरी हो। इससे पहले फैबइंडिया (FabIndia), तनिष्क (Tanishq) और जोमैटो (Zomato) जैसी कंपनियां भी सोशल मीडिया के गुस्से का शिकार हो चुकी हैं। कॉर्पोरेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मल्टीनेशनल या राष्ट्रीय स्तर की कंपनियों को भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में अपने 'ग्रूमिंग स्टैंडर्ड्स' बनाते समय बहुत अधिक संवेदनशीलता बरतने की जरूरत होती है। किसी भी एक धर्म के प्रतीकों पर रोक और दूसरे को छूट देने जैसी नीतियां ब्रांड की छवि को रातों-रात गहरा नुकसान पहुंचा सकती हैं।
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विवादों के बीच लेंसकार्ट के शानदार वित्तीय नतीजे: मुनाफा 70 गुना बढ़ा

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ड्रेस कोड के इस भारी विवाद के बीच, अगर कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें तो लेंसकार्ट के लिए व्यापारिक मोर्चे पर एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर भी है। कंपनी ने हाल ही में अपने दिसंबर तिमाही (Q3) के शानदार वित्तीय नतीजे जारी किए हैं।
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आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर तिमाही में लेंसकार्ट के मुनाफे में छप्परफाड़ इजाफा हुआ है। कंपनी का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) करीब 70 गुना तक बढ़ गया है।
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    पिछले साल की स्थिति: एक साल पहले की समान तिमाही में लेंसकार्ट का शुद्ध मुनाफा महज 1.85 करोड़ रुपये था।
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    वर्तमान स्थिति: अब बढ़कर यह सीधे 131 करोड़ रुपये (1.31 बिलियन रुपये) के भारी-भरकम आंकड़े पर पहुंच गया है।
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यह शानदार वित्तीय प्रदर्शन बताता है कि बाजार में लेंसकार्ट की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है और कंपनी तेजी से विस्तार कर रही है। हालांकि, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सोशल मीडिया का यह 'ड्रेस कोड' विवाद कंपनी की इस तेज विकास दर या ग्राहकों के विश्वास पर कोई नकारात्मक असर डालता है या पीयूष बंसल की सफाई से यह मामला यहीं शांत हो जाएगा। खबरीलाल इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी नजर बनाए हुए है।
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