27 जनवरी 2026 की सुबह संगीत जगत के लिए एक बड़ा झटका लेकर आई, जब मौजूदा दौर के सबसे लोकप्रिय गायक अरिजीत सिंह (Arijit Singh) ने प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। उनकी इस घोषणा ने करोड़ों फैंस का दिल तोड़ दिया है। लेकिन, भारतीय संगीत के इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब किसी दिग्गज आवाज ने अपनी प्रसिद्धि के चरम पर या किसी विशेष कारण से बॉलीवुड की चकाचौंध को अलविदा कहा हो।READ ALSO:-अरिजीत सिंह के करियर के 10 सबसे यादगार प्लेबैक गाने: वो सुरीले नगमे जिन्होंने बदल दी बॉलीवुड संगीत की दुनिया
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अरिजीत के इस फैसले ने एक बार फिर उन पुराने किस्सों को ताजा कर दिया है जब कई महान गायकों ने माइक नीचे रख दिया और लाइमलाइट से दूर हो गए। आज हम प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास (Retirement from Playback Singing) लेने वाले ऐसे ही कुछ अन्य दिग्गज भारतीय गायकों और उनके फैसलों के पीछे की कहानियों पर एक नज़र डालेंगे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

1. लकी अली: "इस जगह में बदतमीजी बहुत है"

\r\n\r\n
90 के दशक में अपनी रूहानी आवाज से जादू बिखेरने वाले लकी अली (Lucky Ali) का नाम इस लिस्ट में सबसे ऊपर आता है। 'ओ सनम', 'एक पल का जीना' और 'न तुम जानो न हम' जैसे गीतों के जरिए उन्होंने एक अलग पहचान बनाई थी। लेकिन फिर अचानक वे बॉलीवुड से गायब हो गए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
संन्यास की वजह: लकी अली ने कभी भी अपने शब्दों को नहीं छिपाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें बॉलीवुड की बदलती कार्यशैली और 'बदतमीजी' (disrespect) पसंद नहीं आई। 2015 में फिल्म 'तमाशा' के गीत 'सफरनामा' के बाद उन्होंने दूरी बना ली।
\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    नाराजगी: उनका मानना था कि फिल्मों में अब इंस्पिरेशन की कमी है और हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    शांति की तलाश: आज वे बेंगलुरु में अपने फार्महाउस पर खेती करते हैं और कभी-कभार ही इंडिपेंडेंट म्यूजिक (Indie Music) रिलीज करते हैं। उनका मानना है कि बॉलीवुड में क्रिएटिव फ्रीडम खत्म हो चुकी है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

2. चित्रा सिंह: खामोश हुई गज़ल की आवाज़

\r\n\r\n
गज़ल सम्राट जगजीत सिंह की पत्नी और अपनी मखमली आवाज के लिए मशहूर चित्रा सिंह (Chitra Singh) की कहानी बेहद दर्दनाक है। 70 और 80 के दशक में इस जोड़ी ने 'दुनिया जिसे कहते हैं' और 'बात निकलेगी तो' जैसी कालजयी गज़लें दीं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
संन्यास की वजह: चित्रा सिंह का संन्यास किसी नाराजगी से नहीं, बल्कि एक मां के टूटे हुए दिल के कारण था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    त्रासदी: 1990 में एक कार दुर्घटना में उनके इकलौते बेटे विवेक की मृत्यु हो गई। इस सदमे ने चित्रा को इतना तोड़ दिया कि उन्होंने उसी दिन गायकी छोड़ दी। उनकी आवाज़, जो कभी लाखों दिलों को सुकून देती थी, बेटे के गम में हमेशा के लिए खामोश हो गई।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    बाद में 2011 में जगजीत सिंह के निधन और बेटी की आत्महत्या ने उन्हें पूरी तरह से एकाकी जीवन की ओर धकेल दिया।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

3. अलीशा चिनॉय: "अवैध कॉन्ट्रैक्ट्स और राजनीति"

\r\n\r\n
'मेड इन इंडिया' (Made in India) और 'कजरा रे' जैसे ब्लॉकबस्टर गाने देने वाली अलीशा चिनॉय (Alisha Chinai) को 'क्वीन ऑफ इंडिपॉप' कहा जाता था। लेकिन उन्होंने भी बॉलीवुड से किनारा कर लिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
संन्यास की वजह: अलीशा ने म्यूजिक इंडस्ट्री के अंदरूनी काले सच को उजागर किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे बॉलीवुड के "अवैध कॉन्ट्रैक्ट्स" (Illegal Contracts) और राजनीति से तंग आ चुकी थीं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    रॉयल्टी की लड़ाई: अलीशा उन शुरुआती गायकों में से थीं जिन्होंने सिंगर्स को रॉयल्टी न मिलने के खिलाफ आवाज़ उठाई। उनका कहना था कि "हमसे ऐसे कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाए जा रहे थे जो पूरी तरह गलत थे"।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सम्मान: उन्होंने पैसे और काम के लिए अपने आत्मसम्मान से समझौता करने से इनकार कर दिया और प्लेबैक सिंगिंग छोड़ दी।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

4. सुमन कल्याणपुर: सादगी और तुलना का शिकार

\r\n\r\n
सुमन कल्याणपुर (Suman Kalyanpur) की आवाज़ में वो मिठास थी जिसे अक्सर लता मंगेशकर से जोड़ा जाता था। 'ना तुम हमें जानो' और 'आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे' जैसे सदाबहार गाने देने के बावजूद, उन्हें वो स्टारडम नहीं मिला जिसकी वे हकदार थीं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
संन्यास की वजह: सुमन कल्याणपुर का करियर इंडस्ट्री की मोनोपोली (एकाधिकार) और तुलनाओं के साये में सिमट कर रह गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    लता जी से तुलना: उनकी आवाज़ लता मंगेशकर से इतनी मिलती थी कि कई बार उन्हें सिर्फ तब काम मिलता था जब लता जी उपलब्ध नहीं होती थीं या किसी संगीतकार से उनकी अनबन होती थी।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    शर्मीला स्वभाव: सुमन जी स्वभाव से बेहद शर्मीली थीं और वे इंडस्ट्री की राजनीति (Politics) में फिट नहीं बैठ पाईं। धीरे-धीरे, उन्होंने खुद को इंडस्ट्री से दूर कर लिया और एक गुमनाम लेकिन सुकून भरी जिंदगी चुनी।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

5. अनुराधा पौडवाल: भक्ति की ओर रुख और एक गलत फैसला

\r\n\r\n
90 के दशक की शुरुआत में अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) 'आशिकी' और 'दिल है कि मानता नहीं' जैसी फिल्मों के जरिए शीर्ष पर थीं। उन्हें लता मंगेशकर का उत्तराधिकारी माना जा रहा था।
\r\n\r\n
संन्यास/दूरी की वजह: उनके करियर में ठहराव एक विवादास्पद फैसले के कारण आया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    सिर्फ टी-सीरीज (T-Series): अपने करियर के पीक पर, उन्होंने घोषणा की कि वे केवल टी-सीरीज के लिए ही गाएंगी। इस फैसले ने अन्य संगीतकारों के दरवाजे उनके लिए बंद कर दिए।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    बाद में उन्होंने फिल्मी गीतों के बजाय भजन और भक्ति संगीत को अपना जीवन समर्पित कर दिया। हालांकि उन्होंने बाद में वापसी की कोशिश की, लेकिन तब तक अलका याग्निक और कविता कृष्णमूर्ति उनकी जगह ले चुकी थीं।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मौजूदा हालात: स्वास्थ्य और नए बदलाव

\r\n\r\n
सिर्फ पुराने गायक ही नहीं, बल्कि हाल के वर्षों में भी कुछ बड़े नामों को मजबूरी में माइक से दूर होना पड़ा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    अलका याग्निक (Alka Yagnik): 2024 में खबर आई कि अलका याग्निक एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल विकार (Sensorineural Hearing Loss) का शिकार हो गईं, जिससे उनकी सुनने की क्षमता प्रभावित हुई। यह एक गायक के लिए सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। हालांकि यह स्वेच्छा से लिया गया संन्यास नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य कारणों ने उन्हें फिलहाल रिकॉर्डिंग स्टूडियो से दूर कर दिया है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्या बॉलीवुड अपनी आवाज़ें खो रहा है?

\r\n\r\n
अरिजीत सिंह का 2026 में लिया गया फैसला और ऊपर दिए गए उदाहरण यह बताते हैं कि एक प्लेबैक सिंगर का जीवन बाहर से जितना ग्लैमरस दिखता है, अंदर से उतना ही चुनौतीपूर्ण हो सकता है। चाहे वह लकी अली का विद्रोही स्वभाव हो, चित्रा सिंह का व्यक्तिगत दुख, या अलीशा चिनॉय की हक की लड़ाई—हर कलाकार के पास रुकने की अपनी वजह थी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास (Retirement from Playback Singing) लेना सिर्फ एक करियर का अंत नहीं, बल्कि एक कलाकार द्वारा अपनी शर्तों पर जीने का चुनाव है। अरिजीत सिंह का जाना निश्चित रूप से एक युग का अंत है, लेकिन यह इंडिपेंडेंट म्यूजिक के लिए एक नई शुरुआत भी हो सकता है, ठीक वैसे ही जैसे लकी अली ने किया था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस लेख में हमने अरिजीत सिंह के हालिया संन्यास के संदर्भ में उन अन्य भारतीय गायकों (Other Indian Singers) पर चर्चा की जिन्होंने प्लेबैक सिंगिंग छोड़ी। लकी अली ने इंडस्ट्री की बदतमीजी के कारण, चित्रा सिंह ने बेटे के निधन के बाद, और अलीशा चिनॉय ने कॉन्ट्रैक्ट विवादों के चलते बॉलीवुड से दूरी बनाई। वहीं, सुमन कल्याणपुर और अनुराधा पौडवाल के करियर के फैसले भी इस बात का सबूत हैं कि प्रतिभा के साथ-साथ परिस्थितियाँ भी कलाकार का रास्ता तय करती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें