आज के डिजिटल दौर में हमारा मोबाइल फोन जितना बड़ा मददगार है, थोड़ी सी लापरवाही बरतने पर वह उतना ही बड़ा दुश्मन भी बन सकता है। एक अनजान लिंक पर क्लिक या एक ओटीपी (OTP) शेयर करना, आपको कंगाल बनाने के लिए काफी है। इसी खतरे को भांपते हुए और युवाओं को 'डिजिटल दुनिया' के खतरों से बचाने के लिए जनपद बिजनौर की नूरपुर पुलिस ने एक सराहनीय पहल की है।READ ALSO:-जंगल में मां से बिछड़े 'नन्हे हाथी' को मिली नई जिंदगी: रेंजर ने जान पर खेलकर बचाया, अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व बना नया आशियाना; विदाई में बहे आंसू
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शनिवार को गौहावर स्थित एल.बी.एस.एस. कॉलेज (L.B.S.S. College) में "साइबर सुरक्षा अभियान" के तहत एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कलम और किताब की बातों से इतर, जिंदगी को सुरक्षित रखने का पाठ पढ़ाया गया। कार्यक्रम की कमान खुद थानाध्यक्ष नूरपुर और उनकी विशेषज्ञ साइबर टीम ने संभाली। पुलिस ने छात्रों को न केवल साइबर अपराधों की बारीकियां समझाईं, बल्कि उनसे बचने के लिए एक मजबूत 'सुरक्षा चक्र' भी प्रदान किया।
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डिजिटल साक्षरता ही सबसे बड़ा हथियार: थानाध्यक्ष

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कार्यक्रम की शुरुआत में थानाध्यक्ष महोदय ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का युवा सोशल मीडिया और इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सक्रिय है, इसलिए वे साइबर अपराधियों (Cyber Criminals) के सबसे आसान शिकार भी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, "साइबर अपराध से बचने का सिर्फ एक ही तरीका है - जागरूकता। पुलिस बाद में कार्रवाई करती है, लेकिन अगर आप सतर्क रहेंगे, तो अपराध घटित ही नहीं होगा।"
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उन्होंने हाल ही में बढ़ रहे 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) और 'फेक जॉब ऑफर' जैसे मामलों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अपराधी डर और लालच का इस्तेमाल कर पढ़े-लिखे लोगों को भी अपना शिकार बना रहे हैं।
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साइबर टीम ने दी 'इनसाइड' जानकारी: क्या करें और क्या न करें?

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थाना नूरपुर की साइबर टीम ने प्रोजेक्टर और उदाहरणों के माध्यम से छात्रों को तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हैकर्स अब पुराने तरीकों के बजाय नए और लुभावने तरीके अपना रहे हैं। टीम ने छात्रों को साइबर सुरक्षा के 'गोल्डन रूल्स' समझाए:
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1. पासवर्ड का खेल (The Password Game)

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साइबर टीम ने बताया कि अक्सर छात्र अपना पासवर्ड '123456', अपना नाम या जन्मतिथि रख लेते हैं। यह घर का दरवाजा खुला छोड़ने जैसा है।
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    सलाह: पासवर्ड हमेशा 'अल्फान्यूमेरिक' (Alphanumeric) रखें, जिसमें अक्षर, नंबर और स्पेशल कैरेक्टर (@, #, $) शामिल हों। हर 3 महीने में पासवर्ड बदलें।
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2. फिशिंग लिंक का जाल (Phishing Trap)

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"आपका बिजली का बिल बकाया है" या "आपको लॉटरी लगी है"—ऐसे मैसेज रोज हजारों लोगों को आते हैं।
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    सलाह: किसी भी अनजान लिंक (खासकर जो http से शुरू हो, न कि https से) पर क्लिक न करें। बैंक या पुलिस कभी भी आपको लिंक भेजकर केवाईसी (KYC) अपडेट करने के लिए नहीं कहती।
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3. सोशल मीडिया की प्राइवेसी (Social Media Hygiene)

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फेसबुक, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट पर अंजान लोगों से दोस्ती भारी पड़ सकती है।
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    सलाह: अपनी प्रोफाइल को 'लॉक' रखें। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें। अपनी लोकेशन और निजी तस्वीरें सार्वजनिक रूप से शेयर करने से बचें, क्योंकि इनका इस्तेमाल 'डीपफेक' (Deepfake) बनाने में हो सकता है।
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4. वीडियो कॉल स्कैम (Sextortion)

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युवाओं को खास तौर पर 'हनी ट्रैप' या वीडियो कॉल स्कैम के बारे में आगाह किया गया। अनजान नंबर से आई वीडियो कॉल उठाने पर स्क्रीन रिकॉर्डिंग करके ब्लैकमेलिंग की जाती है।
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    सलाह: अनजान नंबर से वीडियो कॉल न उठाएं। अगर फंस जाएं, तो डरें नहीं, पैसा न दें और सीधे पुलिस से संपर्क करें।
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ब्रह्मास्त्र है '1930' हेल्पलाइन

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कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर '1930' की जानकारी। पुलिस टीम ने बताया कि अगर किसी के साथ ऑनलाइन वित्तीय ठगी (Financial Fraud) हो जाए, तो 'गोल्डन ऑवर' (शुरुआती 1-2 घंटे) बहुत कीमती होते हैं।
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    अगर आप तुरंत 1930 पर कॉल करते हैं या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराते हैं, तो पुलिस बैंक के साथ मिलकर अपराधी के खाते में गए पैसे को 'फ्रीज' (Freeze) करा सकती है और आपका पैसा वापस मिल सकता है।
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छात्रों के सवाल और पुलिस के जवाब

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जागरूकता सत्र के बाद एक प्रश्नोत्तरी (Q&A) सत्र भी रखा गया। छात्रों ने यूपीआई (UPI) फ्रॉड, गेमिंग ऐप्स और लोन ऐप्स से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका थानाध्यक्ष और साइबर सेल के प्रभारियों ने बहुत ही सरल भाषा में जवाब दिया।
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एक छात्र ने पूछा, "सर, अगर गलती से ओटीपी शेयर हो जाए तो क्या करें?" जवाब में टीम ने बताया, "तुरंत अपने बैंक को कॉल करके खाता ब्लॉक कराएं और 1930 पर रिपोर्ट करें।"
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कॉलेज प्रशासन ने जताया आभार

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एल.बी.एस.एस. कॉलेज के प्रधानाचार्य और प्रबंधन समिति ने नूरपुर पुलिस की इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान आज की बड़ी जरूरत है। पुलिस मित्र बनकर छात्रों के बीच आई, जिससे छात्रों के मन से पुलिस का डर भी निकला और वे अपनी समस्याओं को खुलकर रख सके।
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सतर्कता ही सुरक्षा है

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इस अभियान का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि उपस्थित सभी छात्र न केवल खुद सुरक्षित रहेंगे, बल्कि अपने परिवार और पड़ोसियों को भी 'साइबर स्मार्ट' बनाएंगे। बिजनौर पुलिस का यह कदम निश्चित रूप से सराहनीय है। अपराध होने के बाद लकीर पीटने से बेहतर है कि युवाओं को ढाल बनाकर अपराध को होने से पहले ही रोक दिया जाए।
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'खबरीलाल' अपने सभी पाठकों से अपील करता है—आपकी जागरूकता ही आपकी सुरक्षा है। किसी भी ऑनलाइन प्रलोभन में न आएं और अपनी निजी जानकारी को अपनी तिजोरी की तरह सुरक्षित रखें।
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