नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (Indigo Airlines) का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को लगातार पांचवें दिन इंडिगो फ्लाइट कैंसिलेशन (Indigo flight cancellation) और देरी का सिलसिला जारी रहा, जिससे हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। दिल्ली से लेकर हैदराबाद और कोलकाता तक, एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी का माहौल है। इस बीच, सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए डीजीसीए (DGCA) की एक कमेटी गठित की है, जबकि विपक्ष ने इस अव्यवस्था के लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।READ ALSO:-गोवा में 'मौत की पार्टी': नाइट क्लब में सिलेंडर ब्लास्ट, 25 लोग जिंदा जले; मैनेजर गिरफ्तार, किचन से शुरू हुई तबाही
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एयरपोर्ट्स पर हाहाकार: दिल्ली-हैदराबाद सबसे ज्यादा प्रभावित

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रविवार को भी देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर इंडिगो का ऑपरेशन बुरी तरह प्रभावित रहा। एयरपोर्ट डेटा के मुताबिक, हैदराबाद एयरपोर्ट पर 69 फ्लाइट्स (26 अराइवल और 43 डिपार्चर) रद्द करनी पड़ीं। वहीं, दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हालात और भी खराब रहे, जहां इंडिगो की 86 उड़ानें (37 जाने वाली और 49 आने वाली) कैंसिल कर दी गईं।
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अहमदाबाद और कोलकाता में भी यात्रियों का बुरा हाल रहा। कोलकाता में सुबह 9 बजे तक दर्जनों उड़ानें रद्द थीं। असम के गुवाहाटी और मुंबई एयरपोर्ट पर यात्री अपने सामान के साथ घंटों इंतजार करते और फर्श पर बैठे नजर आए। फ्लाइट कैंसिल होने पर यात्रियों के अधिकार और रिफंड नियम) यात्रियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है, क्योंकि कई जगहों पर उन्हें पूर्व सूचना नहीं मिल रही है।
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DGCA का बड़ा एक्शन: 4 सदस्यों की कमेटी गठित

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मामले की गंभीरता को देखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने दखल दिया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने जानकारी दी कि इंडिगो फ्लाइट कैंसिलेशन के कारणों की जांच और समाधान के लिए चार सदस्यों की एक उच्च-स्तरीय कमेटी बनाई गई है।
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यह कमेटी क्रू प्लानिंग, ऑपरेशनल तैयारी और नए 'फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन' (FDTL) नियमों के पालन की समीक्षा करेगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी 'सिस्टम फेलियर' जैसी स्थिति दोबारा न बने। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि यात्रियों की सुविधा के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
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इंडिगो की सफाई: 95% कनेक्टिविटी का दावा और रिफंड

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चौतरफा दबाव के बीच इंडिगो ने दावा किया है कि स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। एयरलाइन के प्रवक्ता के अनुसार, 95 फीसदी नेटवर्क कनेक्टिविटी बहाल कर दी गई है। इंडिगो ने एक 'क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप' (CMG) का गठन किया है, जिसमें चेयरमैन विक्रम सिंह मेहता और सीईओ पीटर एल्बर्स शामिल हैं, जो हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
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यात्रियों के गुस्से को शांत करने के लिए इंडिगो ने रिफंड पॉलिसी में ढील दी है। एयरलाइन ने घोषणा की है कि 5 से 15 दिसंबर के बीच की यात्रा के लिए कैंसिल या रीशेड्यूलिंग चार्ज पूरी तरह माफ कर दिए गए हैं। "बिना कोई सवाल पूछे" रिफंड तुरंत ओरिजिनल पेमेंट मोड में प्रोसेस किया जाएगा। 
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विपक्ष का हमला: 'मोनोपॉली मॉडल' पर उठे सवाल

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इस संकट ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे 'मोनोपॉली मॉडल' (एकाधिकार) का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि जब बाजार में एक ही खिलाड़ी का दबदबा होता है, तो उसकी कीमत आम नागरिक को चुकानी पड़ती है। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस रुख का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने बिजनेस में मोनोपॉली का विरोध किया था।
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वहीं, कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल ने डीजीसीए की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "यह स्थिति पिछले डेढ़ साल से बन रही थी। FDTL के नए नियम जनवरी 2024 में आए थे, लेकिन डीजीसीए अब तक क्या कर रहा था? यह सरकार की नाकामी है।"
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इंडिगो फ्लाइट कैंसिलेशन का यह संकट न केवल एयरलाइन की मैनेजमेंट क्षमता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि भारतीय एविएशन सेक्टर की मजबूती की भी पोल खोलता है। जहां एक तरफ यात्री परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ सियासी बयानबाजी तेज है। उम्मीद है कि डीजीसीए की कमेटी और इंडिगो के प्रयासों से जल्द ही हालात सामान्य होंगे, ताकि आम यात्रियों को राहत मिल सके।
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