इंडिया पोस्ट (India Post) ने महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले में एक बड़ी और महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। यहाँ अब दुर्गम गाँवों तक ड्रोन मेल डिलीवरी के जरिए डाक पहुंचाई जाएगी। यह पायलट प्रोजेक्ट भामरागढ़, वैरागढ़ और सिरोंचा तालुका के 27 सुदूर गाँवों में शुरू किया जाएगा। यह फैसला उन आदिवासी आबादी के लिए वरदान साबित होगा जो बारिश के मौसम में हफ्तों तक बाहरी दुनिया से कट जाते हैं।READ ALSO:-SSC GD Medical Test 2024: 10 ज़रूरी बातें! इन पॉइंट्स को चेक कर 100% होंगे पास
\r\n\r\n\r\nदुर्गम क्षेत्रों में डाक वितरण की चुनौती
\r\nगढ़चिरौली जिले का अधिकांश हिस्सा घने जंगलों और नदियों से घिरा हुआ है। यहाँ की खराब सड़क कनेक्टिविटी के कारण डाक कर्मियों को वितरण में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। कई इलाकों में डाक पहुंचने में सामान्यतः दो दिन (D+2) तक का समय लग जाता था। विशेष रूप से बरसात के महीनों में, बाढ़ के कारण कई सड़कें और संपर्क मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाते हैं। इस वजह से सरकारी योजनाएँ और आवश्यक दस्तावेज़ समय पर नहीं पहुँच पाते थे।
\r\nड्रोन सेवा: 'D+0 डिलीवरी' का लक्ष्य
\r\nइस नई ड्रोन मेल डिलीवरी सेवा का प्राथमिक लक्ष्य 'D+0 डिलीवरी' यानी उसी दिन डाक पहुँचाना है। ड्रोन 5 से 7 किलोग्राम तक डाक सामग्री ले जाने में सक्षम होंगे। ये ड्रोन सब-पोस्ट ऑफिस और ब्रांच पोस्ट ऑफिस के बीच माल और पत्रों का तेजी से परिवहन करेंगे। इस पहल से न केवल सामान्य डाक, बल्कि सरकारी दस्तावेज़, समाचार पत्र और आवश्यक चिकित्सा किट की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित होगी।
\r\nसफल ट्रायल के बाद मिली हरी झंडी
\r\nइंडिया पोस्ट ने पहले गुजरात के कच्छ और अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में ड्रोन से डाक डिलीवरी का सफल परीक्षण किया था। इन परीक्षणों में 45 किलोमीटर तक की दूरी मिनटों में तय की गई थी। गढ़चिरौली में भी एक सफल ट्रायल के बाद अगस्त 2025 में इस पायलट प्रोजेक्ट को शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया था। अब 27 गाँवों का चयन कर इसकी शुरुआत की जा रही है।
\r\nअधिकारियों और जनता की प्रतिक्रिया
\r\nडाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस परियोजना की पुष्टि की है। अधिकारियों ने बताया कि नागपुर के क्षेत्रीय कार्यालय को विस्तृत प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम दुर्गम क्षेत्रों में परिचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए उठाया गया है। स्थानीय आदिवासी समुदाय और गढ़चिरौली के लोगों ने इस फैसले पर खुशी व्यक्त की है। उनका मानना है कि यह तकनीक उनके जीवन की रफ्तार को निर्णायक रूप से बदलेगी और सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाएगी।
\r\nतकनीक का असर और आगे का विस्तार
\r\nड्रोन मेल डिलीवरी परियोजना से यह उम्मीद है कि इससे संचार व्यवस्था मजबूत होगी। यह पहल यह भी प्रदर्शित करती है कि उन्नत तकनीकों का उपयोग कर भारत के सबसे दुर्गम और चुनौती भरे इलाकों तक भी सेवाएँ पहुँचायी जा सकती हैं। इंडिया पोस्ट इस पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर, ड्रोन लॉजिस्टिक्स का विस्तार चंद्रपुर और अन्य खराब कनेक्टिविटी वाले जिलों में भी कर सकता है। यह कदम देश के सबसे पुराने संचार नेटवर्क के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी छलांग है।
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