नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क): नए साल के जश्न से ठीक पहले लाखों टैक्सपेयर्स के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। अगर आप भी बेसब्री से अपने इनकम टैक्स रिफंड (Income Tax Refund) के बैंक खाते में आने का इंतजार कर रहे थे, तो तुरंत अपना ईमेल और मैसेज चेक करें। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) ने पिछले कुछ दिनों में थोक में (Bulk) टैक्सपेयर्स को ईमेल और एसएमएस भेजे हैं।READ ALSO:-Gold-Silver Price Blast: महंगाई का 'एटम बम'! चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, एक दिन में ₹13,000 का उछाल; सोना भी ₹1.38 लाख के करीब, खरीदने से पहले पढ़ें पूरी रिपोर्ट
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इन संदेशों ने करदाताओं की नींद उड़ा दी है। विभाग ने साफ कर दिया है कि 'रिस्क मैनेजमेंट प्रोसेस' (Risk Management Process) के तहत ITR फाइलिंग में कुछ गंभीर गड़बड़ियां और विसंगतियां (Discrepancies) मिली हैं, जिसके चलते रिफंड को होल्ड (Hold) पर डाल दिया गया है। सबसे डराने वाली बात यह है कि इन गलतियों को सुधारने के लिए आपके पास अब महज 5 दिन यानी 31 दिसंबर 2025 तक का ही वक्त बचा है।
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क्या है 'रिस्क मैनेजमेंट प्रोसेस' का यह नया नोटिस?

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अक्सर टैक्सपेयर्स को लगता है कि आईटीआर भरने के बाद उनका काम खत्म हो गया, लेकिन असली खेल अब शुरू हुआ है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब पहले से कहीं ज्यादा हाईटेक हो गया है। डिपार्टमेंट का सिस्टम अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल कर रहा है।
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टैक्सपेयर्स को जो नोटिस या मैसेज मिल रहे हैं, उनमें आमतौर पर लिखा है:

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"रिस्क मैनेजमेंट प्रोसेस के तहत आपके रिफंड क्लेम में कुछ विसंगतियां पाई गई हैं, इसलिए रिटर्न की प्रोसेसिंग रोक दी गई है। इसकी विस्तृत जानकारी आपके रजिस्टर्ड ईमेल पर भेज दी गई है।"
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इसका सीधा मतलब है कि आपने जो जानकारी अपने ITR में दी है और जो जानकारी डिपार्टमेंट के पास पहले से मौजूद (AIS/TIS/26AS के जरिए) है, उनमें तालमेल नहीं बैठ रहा है।
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सावधान! इन 5 गलतियों की वजह से अटका है आपका पैसा

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अगर आपका रिफंड स्टेटस 'Processing' में नहीं है और 'Hold' या 'Defective' दिखा रहा है, तो इसके पीछे मुख्य रूप से ये 5 कारण हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिपार्टमेंट अब छोटी सी भी मिसमैच को पकड़ रहा है।
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1. डेटा मिसमैच (Data Mismatch)

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यह सबसे आम गलती है। आपने आईटीआर फॉर्म में अपनी इनकम कुछ और बताई है, जबकि डिपार्टमेंट के पास मौजूद फॉर्म 26AS (Tax Credit Statement) और AIS (Annual Information Statement) में आंकड़े कुछ और बोल रहे हैं। उदाहरण के लिए, बैंक से मिला ब्याज या डिविडेंड आपने कम दिखाया है, जबकि बैंक ने पूरी रिपोर्ट डिपार्टमेंट को दे दी है।
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2. इनकम छिपाना (Hiding Income)

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कई लोग शेयर बाजार (Stock Market) में फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) से होने वाले लॉस या प्रॉफिट को नजरअंदाज कर देते हैं। इसके अलावा विदेशी संपत्तियों से होने वाली आय या प्रॉपर्टी बेचने से हुए कैपिटल गेन्स (Capital Gains) को न दिखाना भी रिफंड अटकने का बड़ा कारण है। सिस्टम इसे तुरंत 'रेड फ्लैग' कर देता है।
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3. फर्जी और बोगस क्लेम (Bogus Deductions)

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टैक्स बचाने के चक्कर में कई लोगों ने HRA (House Rent Allowance), फर्जी इंश्योरेंस प्रीमियम, या राजनैतिक पार्टियों को डोनेशन के नाम पर धारा 80GGC के तहत फर्जी क्लेम किए हैं। डिपार्टमेंट ने इस साल ऐसे क्लेम पर बहुत सख्ती दिखाई है और रिफंड रोक दिए हैं।
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4. 'खर्च ज्यादा, आमदनी कम' का खेल

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यह AI की देन है। अगर आपने अपनी इनकम बहुत कम दिखाई है, लेकिन आपके क्रेडिट कार्ड का बिल लाखों में है, या आपने हाल ही में कोई महंगी प्रॉपर्टी/गाड़ी खरीदी है, तो सिस्टम समझ जाता है कि आप इनकम कम बता रहे हैं। इसे 'High Value Transaction' मिसमैच कहा जाता है।
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5. नोटिस का जवाब न देना

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कई बार डिपार्टमेंट आपके कंप्लायंस पोर्टल (Compliance Portal) पर कुछ सवाल पूछता है। अगर आप उन सवालों या नोटिस को नजरअंदाज करते हैं, तो आपका रिफंड अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया जाता है।
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31 दिसंबर की 'डेडलाइन' क्यों है इतनी खतरनाक?

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यह तारीख सिर्फ साल का आखिरी दिन नहीं है, बल्कि आपके रिफंड को बचाने का आखिरी मौका है।
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    रिवाइज्ड रिटर्न (Revised Return): अगर आपके ITR में कोई गलती हुई है, तो उसे सुधारने के लिए रिवाइज्ड रिटर्न (Section 139(5)) भरने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2025 है।
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    अगर चूक गए तो क्या होगा? अगर आप 31 दिसंबर तक रिवाइज्ड रिटर्न नहीं भर पाते हैं, तो आपके पास सिर्फ अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) भरने का विकल्प बचेगा।
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    सबसे बड़ा नुकसान: ITR-U भरने में सबसे बड़ा पेंच यह है कि आप इसमें रिफंड क्लेम नहीं कर सकते। यानी, अगर डिपार्टमेंट के पास आपका 50,000 रुपये का रिफंड बनता भी है, तो भी ITR-U भरने पर आपको वह पैसा वापस नहीं मिलेगा। आपका पैसा डूब जाएगा। साथ ही, आपको अतिरिक्त टैक्स और 25% से 50% तक पेनल्टी भी देनी पड़ सकती है।
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एक्सपर्ट्स की राय: घबराएं नहीं, बस डेटा मैच करें

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इस अफरातफरी के बीच टैक्स एक्सपर्ट्स ने संयम बरतने की सलाह दी है। एसडी सिंह एंड एसोसिएट्स के फाउंडर और टैक्स एक्सपर्ट सूरज सिंह बताते हैं:
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"जिन लोगों का रिफंड रिस्क मैनेजमेंट में फ्लैग हुआ है, उन्हें पैसा मिलने में कुछ हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है। यह देरी इसलिए हो रही है क्योंकि सिस्टम रिचेक कर रहा है। अगर आपने कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया है, तो आपको नोटिस का जवाब देना चाहिए और रिवाइज्ड रिटर्न भरना चाहिए।"
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वहीं, द चैंबर ऑफ टैक्स कंसल्टेंट्स के मेंबर अशोक मेहता का कहना है:

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"अगर आप एक जेनुइन (Genuine) टैक्सपेयर हैं, तो पैनिक होने की जरूरत नहीं है। यह सिस्टम जेनरेटेड अलर्ट है। बस अपना फॉर्म 26AS और AIS डाउनलोड करें और देखें कि कहां अंतर आ रहा है। अनजाने में हुई गलती को 31 दिसंबर से पहले सुधार लें।"
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ओल्ड और न्यू रिजीम, दोनों रडार पर यह गलतफहमी न पालें कि यह सख्ती सिर्फ ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) वालों पर है। हालांकि, ओल्ड रिजीम में डिडक्शन के ऑप्शन ज्यादा होते हैं इसलिए वहां गलतियां ज्यादा होती हैं, लेकिन न्यू रिजीम वालों को भी इनकम छिपाने के मामले में नोटिस मिले हैं।
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अब आपको क्या करना चाहिए? (Step-by-Step Guide)

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अगर आपको भी ऐसा कोई ईमेल या एसएमएस आया है, तो तुरंत ये कदम उठाएं:
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    पोर्टल लॉग-इन करें: सबसे पहले इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल (e-filing portal) पर लॉग-इन करें।
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    'Worklist' चेक करें: पोर्टल पर 'Pending Actions' या 'Worklist' टैब में जाएं। वहां 'For Your Action' में देखें कि क्या कोई नोटिस पेंडिंग है।
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    AIS/TIS डाउनलोड करें: सर्विसेज टैब में जाकर अपना AIS (Annual Information Statement) डाउनलोड करें और चेक करें कि विभाग के पास आपकी कौन सी कमाई की जानकारी है जो आपने ITR में नहीं दी।
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    रिवाइज्ड रिटर्न भरें: अगर कोई गलती मिलती है, तो बिना देर किए 31 दिसंबर से पहले रिवाइज्ड ITR फाइल कर दें। इसके लिए कोई पेनल्टी नहीं लगती।
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    जवाब दें: अगर आपको लगता है कि आपका ITR सही है और नोटिस गलत है, तो पोर्टल पर 'Response to Outstanding Demand' या नोटिस का जवाब सबमिट करें और उसमें कारण बताएं कि आप सही क्यों हैं।
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5 दिन का अल्टीमेटम

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इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का यह कदम बताता है कि अब टैक्स चोरी या लापरवाही की गुंजाइश खत्म हो चुकी है। 31 दिसंबर की डेडलाइन बेहद करीब है। अगर आपने अभी एक्शन नहीं लिया, तो न सिर्फ आपका रिफंड का पैसा डूबेगा, बल्कि आने वाले दिनों में आपको स्क्रूटनी (Scrutiny) और सेक्शन 133(6) के तहत कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है।
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