मेरठ (क्राइम रिपोर्टर): पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जरायम की दुनिया में एक वक्त पर अपनी धमक रखने वाले हिस्ट्रीशीटर विनय त्यागी उर्फ टिंकू त्यागी की कहानी का अंत हो चुका है। गोलियों से छलनी विनय त्यागी का शव शनिवार को जैसे ही मेरठ के मेडिकल थाना क्षेत्र स्थित जाग्रति विहार सेक्टर-1 में उसके पैतृक आवास पर पहुंचा, वहां का माहौल गमगीन हो गया। एम्बुलेंस का सायरन बजते ही परिजनों के सब्र का बांध टूट गया और पूरा इलाका चीत्कार से गूंज उठा।READ ALSO:-उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची पर अब तक की सबसे बड़ी 'सर्जिकल स्ट्राइक': लखनऊ और प्रयागराज में कटे 23 लाख से ज्यादा नाम, देखें 75 जिलों का पूरा रिपोर्ट कार्ड
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प्रशासन ने स्थिति की नजाकत को भांपते हुए विनय त्यागी के घर और आसपास के इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया है। आज यानी शनिवार को ही गढ़ ब्रजघाट में उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस दौरान किसी भी तरह की गैंगवार या अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस बल मुस्तैद है।
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जाग्रति विहार में 300 लोगों का जमावड़ा, हर तरफ खाकी का पहरा

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विनय त्यागी का शव आने की खबर मिलते ही उसके रिश्तेदारों, पुराने परिचितों और पैतृक गांव के लोगों का जाग्रति विहार पहुंचना शुरू हो गया था। घर के बाहर करीब 300 लोगों की भीड़ जमा है। भीड़ में मौजूद लोगों के चेहरों पर गम के साथ-साथ पुलिस प्रशासन के खिलाफ दबी जुबान में गुस्सा भी दिखाई दे रहा है।
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    फ्लैशबैक: करीब पांच साल पहले विनय त्यागी अपने परिवार के साथ इसी मकान में हंसी-खुशी रहता था। उसके पिता सेवाराम त्यागी मेरठ के प्रतिष्ठित एलएलआरएम (LLRM) मेडिकल कॉलेज में कार्यालय अधीक्षक के पद पर तैनात रह चुके हैं। एक पढ़े-लिखे और प्रतिष्ठित परिवार का बेटा कैसे अपराध की दुनिया का 'टिंकू त्यागी' बन गया, यह कहानी आज हर किसी की जुबान पर है।
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    सुरक्षा व्यवस्था: मेडिकल थाना पुलिस के साथ-साथ पीएसी (PAC) के जवानों को भी तैनात किया गया है। आने-जाने वाले हर संदिग्ध व्यक्ति पर नजर रखी जा रही है।
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एम्स ऋषिकेश में तोड़ा दम: शनिवार सुबह 7 बजे की पुष्टि

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बुधवार को हुए हमले के बाद से विनय त्यागी ऋषिकेश के एम्स (AIIMS) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा था। गोलियों ने उसकी आंतों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ।
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एम्स प्रशासन ने शनिवार सुबह करीब 7 बजे विनय त्यागी को मृत घोषित कर दिया। इसकी आधिकारिक पुष्टि एम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. श्रीलाय मोहंती ने की। इसके बाद हरिद्वार पुलिस ने पंचनामा भरकर शव का पोस्टमार्टम कराया और भारी सुरक्षा के बीच शव को मेरठ के लिए रवाना किया।
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बेटी तन्वी के आरोप: "यह हत्या नहीं, साजिश है"

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विनय त्यागी की मौत के बाद उसकी बेटी तन्वी भारद्वाज ने प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसने इस हत्याकांड को एक नया मोड़ दे दिया है। तन्वी का कहना है कि यह केवल बदमाशों द्वारा किया गया हमला नहीं है, बल्कि सिस्टम द्वारा की गई लापरवाही का नतीजा है।
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    पूर्वाभास और पत्र: तन्वी ने बताया कि उनके पिता को पहले से ही अपनी हत्या की साजिश का अंदेशा हो गया था। उन्होंने अपनी जान को खतरा बताते हुए सिटी मजिस्ट्रेट और जेल प्रशासन को लिखित पत्र दिया था और पेशी के दौरान पुख्ता सुरक्षा की मांग की थी।
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    सुरक्षा में चूक: परिजनों का आरोप है कि खतरे के बावजूद विनय त्यागी को पेशी पर ले जाते समय 'ठोस सुरक्षा व्यवस्था' नहीं की गई। उन्हें सामान्य सुरक्षा में ले जाया गया, जो कि हमलावरों के लिए एक आसान मौका बन गया।
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    मिलने पर पाबंदी: तन्वी ने रोते हुए बताया, "पिछले तीन दिनों से पुलिस प्रशासन ने हमें पापा से ठीक से मिलने तक नहीं दिया। अस्पताल में पहरा लगा दिया गया था। हमें सिर्फ एक-दो बार दूर से देखने दिया गया। शायद वे नहीं चाहते थे कि पापा हमें कुछ बता सकें।"
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वारदात का रिकैप: लक्सर फ्लाईओवर पर 'फिल्मी स्टाइल' शूटआउट

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विनय त्यागी की हत्या की पटकथा बुधवार को हरिद्वार के लक्सर फ्लाईओवर के पास लिखी गई थी। यह घटना किसी बॉलीवुड क्राइम थ्रिलर के सीन जैसी थी।
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    घटनास्थल: हरिद्वार पुलिस विनय त्यागी को कोर्ट में पेशी के लिए ले जा रही थी। वैन लक्सर फ्लाईओवर के पास जाम में फंसी थी।
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    हमला: तभी बाइक सवार दो बेखौफ बदमाशों ने पुलिस की गाड़ी का पीछा करते हुए उसे घेर लिया। मौका देखते ही उन्होंने विनय त्यागी को टारगेट करते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
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    क्रॉस फायरिंग: पुलिस के जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई की, लेकिन बदमाश भीड़ और जाम का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे। इस गोलीबारी में विनय त्यागी को तीन गोलियां लगीं, जबकि दो पुलिस कॉन्स्टेबल भी घायल हुए।
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 हरिद्वार में बुधवार को फिल्मी स्टाइल में विनय त्यागी को गोली मारी थी। फायरिंग के बाद बदमाश भाग निकले।

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24 घंटे में पुलिस का एक्शन: जंगल से दबोचे गए शूटर

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हरिद्वार पुलिस के लिए यह हमला एक बड़ी चुनौती थी। पुलिस ने अपनी साख बचाने के लिए दिन-रात एक कर दिया और घटना के एक दिन बाद ही सफलता हासिल की।
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    गिरफ्तारी: पुलिस ने 25 दिसंबर को खानपुर थाना क्षेत्र के गांव सिकंदरपुर के जंगल (बिजनौर हाईवे के पास) से दोनों शूटरों को गिरफ्तार कर लिया।
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    लुकने का ठिकाना: वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों बदमाश अपनी बाइक छोड़कर पैदल ही जंगल के रास्ते सिकंदरपुर गांव में छिप गए थे। पुलिस ने कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाकर उन्हें दबोचा।
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    शूटरों की पहचान:
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      सन्नी यादव उर्फ शेरा (28 वर्ष): निवासी काशीपुर, ऊधम सिंह नगर।
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      अजय (24 वर्ष): पुत्र कुंवर सैन, निवासी काशीपुर, ऊधम सिंह नगर।
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    पुलिस के मुताबिक, ये दोनों हार्डकोर क्रिमिनल हैं और इन पर उत्तराखंड और यूपी में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन शूटरों को सुपारी किसने दी थी और इसके पीछे असली 'मास्टरमाइंड' कौन है।
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विनय त्यागी: 58 मुकदमों का इतिहास और अपराध का सफर

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विनय त्यागी का नाम पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपराध जगत में कोई नया नहीं था। उसका आपराधिक ग्राफ लगातार बढ़ता गया था।
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    58 केस: विनय त्यागी पर हत्या, अपहरण, डकैती और रंगदारी जैसे संगीन अपराधों के करीब 58 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे।
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    गैंग कनेक्शन: एक समय में वह कुख्यात माफिया बदन सिंह बद्दो, भूपेंद्र बाफर और नीरज भाटी जैसे गैंग्स का खास गुर्गा रहा था। मेरठ में उसका नाम सबसे पहले 2015 में तब सुर्खियों में आया था, जब दो युवकों के अपहरण और नृशंस हत्या के मामले में उसका नाम सामने आया था।
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    दुबई कनेक्शन: पुलिस के दबाव से बचने के लिए विनय त्यागी लंबे समय तक दुबई भाग गया था। सूत्रों का कहना है कि वह वहीं से अपना नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था।
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    गिरफ्तारी: वह चोरी-छिपे भारत लौटा और दिल्ली में पहचान बदलकर किराए के फ्लैट में रहने लगा। जून 2024 में मेरठ एसओजी (SOG) ने एक सटीक सूचना के आधार पर उसे गिरफ्तार किया था और तब से वह जेल में था।
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राजनीतिक रसूख और परिवार

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विनय त्यागी सिर्फ एक अपराधी नहीं था, उसका परिवार राजनीति में भी सक्रिय दखल रखता था।
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    पत्नी: उसकी पत्नी निशा त्यागी दो बार मुजफ्फरनगर के पुरकाजी ब्लॉक से ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं।
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    चुनाव: विनय ने खुद भी राजनीति में किस्मत आजमाई थी। उसने सहारनपुर की देवबंद विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, हालांकि उसे जीत नहीं मिली थी।
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सुलगते सवाल और गमगीन विदाई

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आज विनय त्यागी का अंतिम संस्कार हो जाएगा, लेकिन अपने पीछे वह कई सुलगते सवाल छोड़ गया है।
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    क्या जेल से पेशी पर ले जाते वक्त उसकी रेकी (Recce) की जा रही थी?
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    बदमाशों को कैसे पता चला कि पुलिस की गाड़ी किस रास्ते से और किस वक्त गुजरेगी?
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    बेटी के आरोपों के मुताबिक, सुरक्षा बढ़ाने की मांग को नजरअंदाज क्यों किया गया?
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फिलहाल, पुलिस प्रशासन की प्राथमिकता शांतिपूर्ण तरीके से अंतिम संस्कार संपन्न कराना है। लेकिन, आने वाले दिनों में इस हत्याकांड की जांच की आंच कई बड़े नामों तक पहुंच सकती है। गढ़ ब्रजघाट में आज उसके अंतिम सफर में शामिल होने के लिए समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा है, जो इस बात का गवाह है कि विनय त्यागी का प्रभाव क्षेत्र कितना व्यापक था।
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