बिजनौर/शेरकोट: उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला इन दिनों इंसानों और वन्यजीवों (विशेषकर गुलदार) के बीच चल रहे खूनी संघर्ष का केंद्र बन चुका है। गन्ने के खेतों में घात लगाकर बैठे गुलदारों का आतंक रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा और बेहद खौफनाक मामला जिले के शेरकोट थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां शिकार की तलाश में रिहायशी इलाके के करीब पहुंचे एक गुलदार (Leopard) ने सुबह-सवेरे मजदूरी पर जा रहे एक 25 वर्षीय युवक पर जानलेवा हमला कर दिया।READ ALSO:-बिजनौर में रूह कंपाने वाली वारदात: 'ऑनर किलिंग' में पिता बना जल्लाद, बदनामी के डर से 17 वर्षीय बेटी की गला घोंटकर हत्या
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस अचानक हुए हमले में युवक बुरी तरह से लहूलुहान हो गया और उसकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। घटना के बाद से पूरे नसीर दीवाला गांव और आसपास के क्षेत्रों में भारी दहशत का माहौल है। ग्रामीण खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं और वन विभाग (Forest Department) की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कैसे हुआ यह जानलेवा हमला?
\r\n\r\nप्राप्त जानकारी के अनुसार, यह रूह कंपा देने वाली घटना शेरकोट क्षेत्र के नसीर दीवाला गांव की है। गांव का रहने वाला 25 वर्षीय युवक करण (पुत्र ऋषि पाल) पेशे से एक दिहाड़ी मजदूर है। रोजमर्रा की तरह वह सुबह-सुबह अपने घर से काम पर जाने के लिए निकला था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
झाड़ियों में घात लगाए बैठा था मौत का साया: सुबह का समय था और रास्तों पर आवाजाही थोड़ी कम थी। जब करण गांव के बाहरी हिस्से से गुजर रहा था, तभी रास्ते के किनारे घनी झाड़ियों और गन्ने के खेत में पहले से ही घात लगाकर बैठे एक विशालकाय गुलदार ने उस पर अचानक छलांग लगा दी।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
हमला इतना तीव्र और अचानक था कि करण को संभलने या बचाव करने का रत्ती भर भी मौका नहीं मिला। गुलदार ने अपने पैने पंजों और दांतों से करण के शरीर पर कई गहरे वार किए। करण ने अपनी जान बचाने के लिए गुलदार से कड़ा संघर्ष किया और मदद के लिए जोर-जोर से चीखने लगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
ग्रामीणों की चीख-पुकार से भागी जानलेवा बिल्ली
\r\n\r\nकरण की दर्दनाक चीखें सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे किसान और रास्ते से गुजर रहे अन्य ग्रामीण तुरंत हाथों में लाठी-डंडे लेकर घटनास्थल की ओर दौड़े। ग्रामीणों ने भारी संख्या में इकट्ठा होकर जोर-जोर से शोर मचाया और हांका लगाया। इंसानों की भारी भीड़ और शोर-शराबे को देखकर गुलदार घबरा गया और करण को लहूलुहान हालत में छोड़कर वापस गन्ने के घने खेतों में ओझल हो गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए खून से लथपथ करण को एम्बुलेंस की मदद से नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों के अनुसार, युवक के शरीर पर पंजों और दांतों के गहरे घाव हैं और अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसकी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। फिलहाल उसका सघन चिकित्सा कक्ष में इलाज चल रहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
गांव में पसरा खौफ और ग्रामीणों का आक्रोश
\r\n\r\nइस खौफनाक घटना के बाद नसीर दीवाला और आसपास के दर्जनों गांवों में दहशत का माहौल है। स्थिति यह हो गई है कि लोग दिन के उजाले में भी अकेले खेतों की तरफ जाने से कतरा रहे हैं।
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
- \r\n
- \r\n लगातार देखी जा रही थी गुलदार की चहलकदमी: ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से इस इलाके में गुलदार की गतिविधियां देखी जा रही थीं। रात के समय कुत्तों और मवेशियों के गायब होने की घटनाएं भी सामने आ रही थीं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत था कि गुलदार रिहायशी इलाके के बेहद करीब अपना डेरा जमा चुका है।\r\n \r\n
- \r\n वन विभाग से तत्काल पिंजरा लगाने की मांग: आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि गांव के आसपास के संवेदनशील इलाकों में तुरंत पिंजरे (Trap Cages) लगाए जाएं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर वन विभाग ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में कोई बड़ी जनहानि हो सकती है। किसानों ने मांग की है कि खेतों में काम करने के दौरान उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जाए।\r\n \r\n
\r\n\r\n
बिजनौर: गुलदार के आतंक का 'हॉटस्पॉट' (अब तक 35 से अधिक मौतें)
\r\n\r\nबिजनौर जिले के लिए यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले दो-तीन सालों में बिजनौर का नाम पूरे उत्तर प्रदेश में गुलदार-मानव संघर्ष (Human-Leopard Conflict) के सबसे बड़े हॉटस्पॉट के रूप में उभरा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आंकड़ों की बात करें तो स्थिति बेहद भयावह है:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n मौतों का डरावना आंकड़ा: बिजनौर जिले में पिछले काफी समय से सक्रिय अलग-अलग आदमखोर गुलदारों के हमलों में अब तक 35 से अधिक मासूम लोगों की जान जा चुकी है। मरने वालों में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग किसान और महिलाएं तक शामिल हैं।\r\n \r\n
- \r\n घायलों की संख्या: सैकड़ों की संख्या में लोग गुलदार के हमलों में गंभीर रूप से घायल होकर हमेशा के लिए अपंगता का शिकार हो चुके हैं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
वन विभाग हालांकि गुलदार को पकड़ने के लिए लगातार पिंजरे लगा रहा है, थर्मल ड्रोन से निगरानी कर रहा है और गांवों में जागरूकता अभियान (Awareness Campaigns) भी चला रहा है, लेकिन विशाल गन्ने के खेतों के आगे ये सारी कवायदें नाकाफी साबित हो रही हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आखिर बिजनौर में ही क्यों बढ़ रहे हैं गुलदार के हमले?
\r\n\r\nविशेषज्ञों और वन अधिकारियों के अनुसार, बिजनौर में गुलदार के हमलों की बढ़ती संख्या के पीछे कई भौगोलिक और पारिस्थितिक कारण जिम्मेदार हैं:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n गन्ने के खेत (सुरक्षित पनाहगाह): बिजनौर उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख गन्ना उत्पादक जिला है। यहां मीलों दूर तक फैले गन्ने के ऊंचे खेत गुलदारों के लिए एक प्राकृतिक जंगल का काम करते हैं। इन खेतों में छिपना, बच्चों को जन्म देना और शिकार करना उनके लिए बेहद आसान होता है।\r\n \r\n
- \r\n जंगल का दायरा और शिकार की कमी: बिजनौर जिला अमानगढ़ टाइगर रिजर्व (Amangarh Tiger Reserve) और कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटा हुआ है। जंगलों में बाघों की बढ़ती संख्या और प्राकृतिक शिकार (जैसे हिरण, जंगली सूअर) की कमी के कारण गुलदार जंगल के बाहरी किनारों और इंसानी बस्तियों (गन्ने के खेतों) की ओर रुख कर रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n आसान शिकार: रिहायशी इलाकों में आवारा कुत्ते, बकरियां, मुर्गियां और कभी-कभी छोटे बच्चे गुलदार के लिए सबसे 'आसान शिकार' (Easy Prey) बन जाते हैं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
वन विभाग की एडवाइजरी: ग्रामीण इन बातों का रखें विशेष ध्यान
\r\n\r\nवन विभाग ने बार-बार ग्रामीणों से अपील की है कि जब तक इस गुलदार को पिंजरे में कैद नहीं कर लिया जाता, तब तक सुरक्षा के कड़े उपाय अपनाएं:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n समूह में निकलें: अकेले खेतों या सुनसान रास्तों पर जाने से बचें। कम से कम 3-4 लोगों के समूह में ही बाहर निकलें।\r\n \r\n
- \r\n शोर मचाएं: खेतों में काम करते समय मोबाइल पर तेज आवाज में गाने बजाएं या आपस में जोर-जोर से बात करते रहें। टिन के डिब्बे या सीटी बजाने से भी गुलदार दूर भागता है।\r\n \r\n
- \r\n लाठी-डंडा साथ रखें: घर से बाहर निकलते समय एक मजबूत लाठी हमेशा अपने साथ रखें।\r\n \r\n
- \r\n बच्चों का रखें खास ख्याल: सुबह-शाम के समय छोटे बच्चों को घर से बाहर न निकलने दें। उन्हें अकेले स्कूल या शौच के लिए न भेजें।\r\n \r\n
- \r\n गले को सुरक्षित रखें: गुलदार हमेशा इंसान की गर्दन पर वार करता है, इसलिए बाहर निकलते समय गले में मफलर या कोई मोटा कपड़ा लपेट कर रखें।\r\n \r\n
\r\n\r\n
बिजनौर के शेरकोट की यह घटना एक बार फिर इस बात की चेतावनी दे रही है कि इंसानों और वन्यजीवों के बीच का यह संघर्ष तब तक नहीं थमेगा, जब तक कि कोई दीर्घकालिक और वैज्ञानिक समाधान नहीं निकाला जाता। फिलहाल, सभी की प्रार्थनाएं घायल युवक करण के जल्द स्वस्थ होने की हैं और निगाहें वन विभाग के पिंजरों पर टिकी हैं कि कब वह आदमखोर जानवर कैद होगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.