नई दिल्ली (खबरीलाल विशेष आर्थिक डेस्क): वैश्विक पटल पर मंडरा रहे युद्ध के बादलों ने न केवल दुनिया की राजनीति को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि इसका सीधा और गहरा असर अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी और सर्राफा बाजार पर भी पड़ा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे गंभीर भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) के चलते निवेशकों में भारी दहशत का माहौल है। इसी उथल-पुथल के बीच, आज 13 मार्च 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक और भारी गिरावट दर्ज की गई है।READ ALSO:-बिजनौर में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की बड़ी साजिश नाकाम: रुपयों के लालच में युवक ने पिकअप को किया आग के हवाले, मुंबई से जुड़े तार
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एक तरफ जहां आम ग्राहक इस गिरावट को खरीदारी के एक सुनहरे मौके के रूप में देख रहे हैं, वहीं निवेशक भारी असमंजस में हैं कि क्या यह गिरावट आगे भी जारी रहेगी या बाजार फिर से वापसी करेगा? आइए, 'खबरीलाल' की इस विस्तृत रिपोर्ट में समझते हैं कीमतों के गिरने का पूरा गणित, इसके पीछे की वैश्विक वजहें और आपके लिए एक्सपर्ट्स की क्या है सलाह।
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13 मार्च का ताजा भाव: एक नजर आंकड़ों पर
\r\n\r\nइंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए ताजा और आधिकारिक आंकड़ों ने बाजार को चौंका दिया है।
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- \r\n सोने में भारी कटौती: 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत में एक ही झटके में 1,748 रुपए की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस बड़ी कटौती के बाद आज सोने का भाव 1.58 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है। गौरतलब है कि ठीक एक दिन पहले यानी 12 मार्च को यही सोना 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के भाव पर बिक रहा था।\r\n \r\n
- \r\n चांदी ने भी तोड़ा निवेशकों का दिल: सोने के साथ-साथ चांदी (White Metal) ने भी गिरावट का बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। एक किलो चांदी की कीमत में सीधे 8,350 रुपए की बड़ी सेंध लगी है। इस गिरावट के बाद चांदी का भाव 2.60 लाख रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गया है। इससे पहले शुक्रवार को चांदी की कीमत 2.68 लाख रुपए किलो थी।\r\n \r\n
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ऑल टाइम हाई से कितनी दूर आ गए सोने-चांदी?
\r\n\r\nइस साल की शुरुआत से ही कीमती धातुओं के बाजार में एक रोलर-कोस्टर राइड देखने को मिल रही है। आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करें तो तस्वीर कुछ इस तरह नजर आती है:
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- \r\n सोने का सफर (1.33 लाख से 1.76 लाख और अब गिरावट): बीते साल के अंत यानी 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे। नए साल में वैश्विक मांग बढ़ने से 29 जनवरी 2026 को यह 1.76 लाख रुपए के अपने सबसे उच्चतम स्तर (All-Time High) पर पहुंच गया था। लेकिन तब से अब तक के सफर में सोना 17,566 रुपए सस्ता हो चुका है।\r\n \r\n
- \r\n चांदी का ऐतिहासिक गोता: चांदी का ग्राफ और भी ज्यादा चौंकाने वाला है। 31 दिसंबर 2025 को चांदी 2.30 लाख रुपए प्रति किलो पर थी, जो महज एक महीने के भीतर 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऐतिहासिक ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई। लेकिन यह तेजी बरकरार नहीं रह सकी। तब से लेकर अब तक (महज 44 दिनों में) चांदी की कीमत में 1,25,982 रुपए की भारी-भरकम गिरावट दर्ज की गई है।\r\n \r\n
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क्यों गिर रही हैं कीमतें? ये हैं 3 सबसे बड़े कारण
\r\n\r\nसर्राफा बाजार में इस भारी गिरावट के पीछे कोई एक कारण नहीं है, बल्कि यह वैश्विक घटनाओं के एक 'परफेक्ट स्टॉर्म' का नतीजा है:
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1. अमेरिकी फेडरल रिजर्व और ब्याज दरों का खेल
\r\n\r\nदुनियाभर के बाजारों की नजर अमेरिकी सेंट्रल बैंक (Federal Reserve) पर रहती है। हाल ही में अमेरिका में महंगाई (Inflation) के जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है। महंगाई कम न होने के कारण फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों (Interest Rates) में जल्द कटौती की जो उम्मीदें थीं, वे अब लगभग खत्म हो गई हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि मार्च की पॉलिसी मीटिंग में दरें नहीं घटाई जाएंगी। जब ब्याज दरें ज्यादा होती हैं, तो निवेशक सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों (Non-yielding assets) से पैसा निकालकर बॉन्ड्स में लगाते हैं, जिससे सोने की मांग घटती है।
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2. कैश पर बढ़ा निवेशकों का भरोसा (Cash is King)
\r\n\r\nअमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग ने वैश्विक बाजार में एक अभूतपूर्व अनिश्चितता (Uncertainty) पैदा कर दी है। अमूमन युद्ध के समय सोना एक 'सुरक्षित पनाहगाह' (Safe Haven) माना जाता है, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है। अनिश्चितता इतनी गहरी है कि बड़े निवेशक और संस्थान किसी भी तरह के एसेट क्लास में पैसा फंसाने के बजाय अपने पास नकद (Cash/Liquidity) रखना ज्यादा सुरक्षित और बेहतर मान रहे हैं। कैश की इस होड़ ने सोने की मांग पर नकारात्मक असर डाला है।
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3. महंगा कच्चा तेल और शेयर बाजार में हाहाकार
\r\n\r\nमिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) दुनिया के तेल उत्पादन का मुख्य केंद्र है। वहां चल रहे युद्ध और तनाव की वजह से कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई चेन बाधित होने का डर है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। तेल महंगा होने से दुनिया भर की कंपनियों की लागत बढ़ रही है, जिसके डर से ग्लोबल शेयर बाजारों में भारी बिकवाली (Sell-off) हो रही है। शेयर बाजार में हुए इस नुकसान की भरपाई (Margin Calls) करने के लिए निवेशक कमोडिटी मार्केट (सोने-चांदी) में अपना मुनाफा वसूल रहे हैं और जमकर बिकवाली कर रहे हैं।
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एक्सपर्ट व्यू: क्या यह खरीदारी का सही समय है?
\r\n\r\nइस भारी उठापटक के बीच निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस गिरे हुए भाव पर सोना-चांदी खरीद लेना चाहिए?
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देश के जाने-माने कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया का इस पर बहुत ही स्पष्ट नजरिया है। उनके मुताबिक, "वर्तमान में लोग शेयर बाजार में हुए अपने भारी नुकसान की भरपाई करने के लिए सोने और चांदी में 'प्रॉफिट बुकिंग' (मुनाफा वसूली) कर रहे हैं। इसी भारी बिकवाली के दबाव के कारण दामों में लगातार गिरावट आ रही है।"
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चेतावनी: अजय केडिया का अनुमान है कि यह गिरावट यहीं रुकने वाली नहीं है, बल्कि आगे भी जारी रह सकती है। आने वाले कुछ हफ्तों या महीनों में सोना लुढ़ककर 1.50 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी टूटकर 2.50 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल तक आ सकती है। अतः विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि निवेशकों को अभी बाजार में 'बॉटम फिशिंग' (सबसे निचले स्तर पर खरीदने की कोशिश) करने से बचना चाहिए और कुछ समय तक इंतजार करना चाहिए।
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आपके शहर में क्यों अलग होता है सोने का भाव?
\r\n\r\nकई बार ग्राहकों को शिकायत होती है कि टीवी या इंटरनेट पर जो भाव दिख रहा है, उनके शहर का ज्वेलर उससे ज्यादा पैसे मांग रहा है। इसके पीछे कई व्यावहारिक और आर्थिक कारण होते हैं:
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- \r\n ट्रांसपोर्टेशन और भारी सुरक्षा का खर्च: सोना एक अत्यधिक मूल्यवान धातु है। इसे बड़े आयात केंद्रों (जैसे मुंबई या अहमदाबाद) से देश के अन्य सुदूर शहरों तक ले जाने में न केवल भारी मात्रा में ईंधन खर्च होता है, बल्कि बुलेटप्रूफ गाड़ियों और भारी सुरक्षा बलों (Security Costs) की जरूरत पड़ती है। यह सारा लॉजिस्टिक खर्च सोने के स्थानीय दामों में जुड़ जाता है।\r\n \r\n
- \r\n क्षेत्रीय खपत और खरीदारी की मात्रा (Volume of Purchase): दक्षिण भारत (जैसे केरल, तमिलनाडु) में सोने की खपत पूरे भारत की तुलना में बहुत अधिक (करीब 40%) है। वहां के बड़े ज्वेलर्स एक साथ भारी मात्रा (Bulk) में सोना खरीदते हैं, जिससे उन्हें बुलियन डीलर्स से अच्छा-खासा डिस्काउंट मिलता है। इसी छूट का फायदा वे अपने ग्राहकों को प्रति ग्राम कम कीमत के रूप में देते हैं।\r\n \r\n
- \r\n लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन का प्रभाव: हर राज्य और बड़े शहर का अपना अलग ज्वेलरी एसोसिएशन होता है (जैसे तमिलनाडु में मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन या दिल्ली में करोल बाग ज्वेलर्स एसोसिएशन)। ये संगठन अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अलावा स्थानीय मांग, सप्लाई और लॉजिस्टिक खर्चे को जोड़कर सुबह के समय अपने शहर के लिए एक मानक दर तय करते हैं।\r\n \r\n
- \r\n पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य (Inventory Cost): एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि किसी स्थानीय ज्वेलर ने अपना वर्तमान स्टॉक किस भाव पर खरीदा है। यदि किसी ज्वेलर ने कई महीने पहले सस्ते रेट पर भारी स्टॉक खरीद लिया था, तो वह बाजार में प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए ग्राहकों को नए रेट से थोड़ी कम कीमत पर भी सोना बेच सकता है।\r\n \r\n
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कंज्यूमर गाइड: ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय न करें ये गलतियां
\r\n\r\nअगर आप शादी-ब्याह या निजी उपयोग के लिए इस गिरे हुए रेट पर सोना खरीदने जा रहे हैं, तो 'खबरीलाल' आपको सतर्क रहने की सलाह देता है। अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करने से पहले इन 2 महत्वपूर्ण बातों का हमेशा ध्यान रखें:
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- \r\n सिर्फ सर्टिफाइड (HUID) गोल्ड ही खरीदें: कभी भी ज्वेलर की बातों में आकर बिना मार्का वाला सोना न खरीदें। हमेशा सुनिश्चित करें कि आभूषण पर ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हो। 1 अप्रैल 2023 से भारत में 6 अंकों वाला अल्फान्यूमेरिक HUID (Hallmark Unique Identification) कोड अनिवार्य हो गया है (उदाहरण के लिए: AZ4524)। आप अपने फोन में 'BIS Care App' डाउनलोड करके इस नंबर को स्कैन कर सकते हैं, जिससे आपको तुरंत पता चल जाएगा कि वह आभूषण असली है या नहीं और वह कितने कैरेट (24K, 22K, 18K) का है।\r\n \r\n
- \r\n कीमतों को मल्टीपल सोर्सेज से क्रॉस चेक करें: सोना खरीदने जाने से पहले उस दिन का भाव जरूर पता करें। सोने का भाव उसकी शुद्धता के आधार पर अलग-अलग होता है (24 कैरेट सबसे महंगा होता है, 22 कैरेट आभूषणों के लिए होता है और 18 कैरेट डायमंड ज्वेलरी के लिए)। आप 'इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA)' की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर उस दिन के सटीक भाव क्रॉस-चेक कर सकते हैं। इसके अलावा, मेकिंग चार्जेज (Making Charges) को लेकर भी ज्वेलर से खुलकर मोलभाव करें।\r\n \r\n
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बोनस जानकारी: घर बैठे असली चांदी की पहचान करने के 4 अचूक तरीके
\r\n\r\nचांदी की कीमतों में आई गिरावट के बाद इसकी खरीदारी भी जोर पकड़ेगी। बाजार में जर्मन सिल्वर या कॉपर की मिलावट वाली नकली चांदी धड़ल्ले से बिकती है। आप घर बैठे इन 4 आसान टेस्ट्स के जरिए असली चांदी की पहचान कर सकते हैं:
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- \r\n मैग्नेट टेस्ट (चुंबक परीक्षण): असली चांदी एक गैर-चुंबकीय (Non-magnetic) धातु है। एक मजबूत चुंबक लें और उसे चांदी के बर्तन या गहने के पास लाएं। अगर वह चुंबक से चिपक जाता है, तो समझ लीजिए कि उसमें लोहे या अन्य धातु की भारी मिलावट है और वह नकली है।\r\n \r\n
- \r\n आइस टेस्ट (बर्फ परीक्षण): चांदी ऊष्मा (Heat) की सबसे अच्छी सुचालक (Conductor) होती है। अपनी चांदी के सिक्के या गहने पर बर्फ का एक छोटा टुकड़ा रखें। असली चांदी कमरे के तापमान की गर्मी को इतनी तेजी से बर्फ तक पहुंचाती है कि बर्फ सामान्य की तुलना में बहुत ही तेजी से पिघलने लगेगी।\r\n \r\n
- \r\n स्मेल टेस्ट (सुगंध परीक्षण): असली शुद्ध चांदी में कोई अपनी गंध (Odorless) नहीं होती है। अपनी चांदी को जोर से सूंघें। अगर उसमें से तांबे (Copper) की, जंग की या किसी अजीब तरह की धात्विक गंध आ रही है, तो इसका मतलब है कि उसमें भारी मिलावट की गई है।\r\n \r\n
- \r\n क्लॉथ टेस्ट (सफेद कपड़ा परीक्षण): एक सूती का एकदम साफ और सफेद कपड़ा लें। इसे अपनी चांदी की वस्तु पर जोर-जोर से रगड़ें। चांदी हवा में मौजूद सल्फर के साथ प्रतिक्रिया करके ऑक्साइड बनाती है। रगड़ने पर अगर सफेद कपड़े पर काले रंग के निशान (Tarnish marks) आ जाएं, तो यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि आपकी चांदी असली है।\r\n \r\n
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(डिस्क्लेमर: यह खबर कमोडिटी बाजार के रुझानों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। शेयर बाजार या कमोडिटी मार्केट में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है। 'खबरीलाल' किसी भी प्रकार के निवेश से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से परामर्श लेने की सलाह देता है।)
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