नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों में आई बाधाओं का असर अब सीधे तौर पर ऊर्जा सेक्टर पर दिखने लगा है। खाड़ी देशों से होने वाले तेल व्यापार के सबसे प्रमुख रास्ते 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के बंद होने के बाद दुनिया भर में पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वैश्विक हलचल के बीच, भारत सरकार ने किसी भी संभावित संकट और अफवाहों को रोकने के लिए शुक्रवार को एक बेहद महत्वपूर्ण और विस्तृत एडवाइजरी जारी की है।READ ALSO:-हाईवे पर सफर करने वाले ध्यान दें! 10 अप्रैल से टोल प्लाजा पर 'कैश' पूरी तरह बंद, बिना FASTag कट जाएगी जेब, जानिए सभी नए नियम
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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) ने देश के सभी नागरिकों, राज्यों और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को सख्त निर्देश देते हुए स्पष्ट किया है कि भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) का पर्याप्त भंडार मौजूद है। आइए 'खबरीलाल' की इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि इस नई एडवाइजरी में आम आदमी के लिए क्या-क्या निर्देश दिए गए हैं और एलपीजी बुकिंग के किन नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का क्या है असर?
\r\n\r\nहोर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'ऑयल चोकपॉइंट' (Oil Chokepoint) है, जहां से दुनिया भर का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात-निर्यात करता है। इसके बंद होने या बाधित होने से सीधे तौर पर कच्चे तेल की आवाजाही पर असर पड़ता है। मंत्रालय ने अपनी एडवाइजरी में इस बात को स्वीकार किया है कि इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के कारण सप्लाई चेन में कुछ तकनीकी बाधाएं उत्पन्न हुई हैं। लेकिन, इसके साथ ही सरकार ने देशवासियों को पूरी तरह आश्वस्त किया है कि भारत के पास पर्याप्त रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) और रिफाइनिंग क्षमता मौजूद है। देश भर में पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए युद्ध स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
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'पैनिक बाइंग' (Panic Buying) से बचें आम नागरिक
\r\n\r\nअक्सर देखा गया है कि जब भी ईंधन की कमी की कोई अफवाह उड़ती है, तो लोग घबराहट में आकर अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने लगते हैं और घरों में खाली पड़े सभी गैस सिलेंडरों की एक साथ बुकिंग कर देते हैं। इसे 'पैनिक बाइंग' कहा जाता है, जो कृत्रिम कमी (Artificial Shortage) पैदा कर देता है। सरकार ने नागरिकों से विशेष अपील की है कि वे घबराकर पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की खरीदारी न करें। सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें और केवल पेट्रोलियम मंत्रालय या आधिकारिक सरकारी स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें।
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LPG गैस बुकिंग के नियमों में हुआ ऐतिहासिक बदलाव
\r\n\r\nइस एडवाइजरी का सबसे बड़ा और सीधा असर देश के करोड़ों आम परिवारों की रसोई पर पड़ने वाला है। एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की मांग और आपूर्ति के बीच एक बेहतर और सटीक संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार ने गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं:
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- \r\n शहरों में 25 दिन का अंतराल: शहरी क्षेत्रों (Urban Areas) में अब दो एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग के बीच के आवश्यक अंतराल को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। यानी अगर आपने आज सिलेंडर लिया है, तो आप 25 दिन से पहले दूसरे सिलेंडर की बुकिंग नहीं कर पाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का अंतराल: गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों (Rural Areas) के लिए यह नियम और सख्त किया गया है। यहां दो गैस सिलेंडरों की बुकिंग के बीच का अंतराल 45 दिन निर्धारित कर दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n डिजिटल मोड का अनिवार्य उपयोग: नागरिकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे गैस सिलेंडर की बुकिंग के लिए केवल डिजिटल माध्यमों (जैसे- गैस कंपनियों के आधिकारिक मोबाइल ऐप, व्हाट्सएप नंबर या ऑनलाइन वेबसाइट पोर्टल) का ही उपयोग करें। जब तक बहुत ज्यादा जरूरी न हो, तब तक गैस एजेंसियों या डिस्ट्रीब्यूटर के कार्यालयों के चक्कर काटने से बचें।\r\n \r\n
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कालाबाजारी रोकने के लिए 'DAC' (Delivery Authentication Code) लागू
\r\n\r\nऐसे संकट के समय में कुछ असामाजिक तत्व और गैस माफिया सिलेंडरों की कालाबाजारी (Black Marketing) और डायवर्जन (Commercial use of domestic cylinder) करने लगते हैं। इस पर नकेल कसने के लिए सरकार ने डिलीवरी सिस्टम को पूरी तरह से पारदर्शी बना दिया है। अब देश भर में 88% से अधिक एलपीजी डिलीवरी 'डीएसी' (DAC - Delivery Authentication Code) आधारित कर दी गई है। यानी गैस डिलीवरी बॉय को जब तक आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आया हुआ OTP (ऑथेंटिकेशन कोड) नहीं मिलेगा, तब तक वह गैस सिलेंडर की डिलीवरी पूरी नहीं कर पाएगा।
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ऊर्जा संरक्षण और वैकल्पिक ईंधन (Alternative Fuels) का करें प्रयोग
\r\n\r\nपेट्रोलियम मंत्रालय ने देशवासियों से ऊर्जा संरक्षण (Energy Conservation) को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की है। सरकार ने सलाह दी है कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए लोग खाना पकाने के लिए पारंपरिक एलपीजी के अलावा वैकल्पिक साधनों का अधिक से अधिक उपयोग करें। नागरिकों को पीएनजी (PNG - Piped Natural Gas), इंडक्शन कुकटॉप्स (Induction Cooktops), इलेक्ट्रिक हीटर, माइक्रोवेव और सोलर कुकर जैसे ऊर्जा के अन्य विकल्पों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इससे न केवल एलपीजी पर निर्भरता कम होगी, बल्कि सप्लाई चेन पर भी दबाव घटेगा।
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राज्यों को दिए गए सख्त निर्देश, जमाखोरों पर कसेगी लगाम
\r\n\r\nपेट्रोलियम सचिव ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों (ACS) और प्रमुख सचिवों के साथ एक उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक कर स्थिति की गहन समीक्षा की है। इस बैठक में राज्यों को निम्नलिखित सख्त निर्देश जारी किए गए हैं:
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- \r\n प्राथमिकता तय करें: राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे घरेलू जरूरतों वाले आम नागरिकों और अस्पतालों, एंबुलेंस जैसी आवश्यक आपातकालीन सेवाओं को ईंधन सप्लाई में सबसे पहली प्राथमिकता दें।\r\n \r\n
- \r\n सख्त निगरानी: पेट्रोल पंपों, गैस एजेंसियों और तेल डिपो के आसपास पुलिस और नागरिक प्रशासन की सख्त निगरानी रखी जाए। जो भी व्यक्ति या संस्था ईंधन की जमाखोरी (Hoarding) या गलत सूचना फैलाकर पैनिक पैदा करने की कोशिश करे, उसके खिलाफ तत्काल और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।\r\n \r\n
- \r\n प्रवासी मजदूरों का रखा जाए ध्यान: मंत्रालय ने उन सभी खबरों का कड़ाई से खंडन किया है जिनमें कहा जा रहा था कि प्रवासी मजदूरों को गैस सप्लाई में कोई बाधा आ रही है। राज्यों को सुनिश्चित करने को कहा गया है कि उज्ज्वला योजना (Ujjwala Yojana) के लाभार्थियों और प्रवासी श्रमिकों को बिना किसी रुकावट के गैस मिलती रहे।\r\n \r\n
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कोयला और केरोसिन (Kerosene) के आवंटन में भारी वृद्धि
\r\n\r\nएलपीजी की मांग को प्रबंधित करने और ग्रामीण तथा औद्योगिक क्षेत्रों में ऊर्जा की कमी न होने देने के लिए सरकार ने एक मास्टरस्ट्रोक चला है। सरकार ने घरेलू कोयला (Coal) और मिट्टी के तेल (केरोसिन) के राष्ट्रीय आवंटन में तत्काल प्रभाव से वृद्धि कर दी है। भारत की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी 'कोल इंडिया लिमिटेड' (Coal India) को विशेष आदेश दिए गए हैं कि वे छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं, विशेषकर ईंट भट्ठों और छोटे उद्योगों के लिए अधिक से अधिक कोयला आवंटित करें ताकि वे अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पेट्रोलियम उत्पादों की ओर रुख न करें।
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कुल मिलाकर, भारत सरकार ने इस वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए एक मजबूत और बहुआयामी रणनीति तैयार कर ली है। अब यह देश के नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करें, पैनिक बाइंग से बचें और ऊर्जा के समझदारी पूर्ण उपयोग से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करें।
Sabse pehle comment karne wale banein.