आजकल बाजारों में बिकने वाले पैकेज्ड फूड (Packaged Food) पर ग्राहकों को लुभाने के लिए कई तरह के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। '100% नेचुरल', 'नो प्रिजर्वेटिव्स' और '100% वेजिटेरियन' जैसे टैग देखकर अक्सर लोग आंख बंद करके इन उत्पादों को खरीद लेते हैं। लेकिन क्या ये दावे हमेशा सच होते हैं? हाल ही में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इस दिशा में एक बेहद सख्त कदम उठाया है। खाने-पीने की चीजों में भ्रामक दावों और गलत लेबलिंग को लेकर 3 दिग्गज कंपनियों को FSSAI का नोटिस (FSSAI Notice) जारी किया गया है।READ ALSO:-रक्षक की वर्दी में छिपा था भेड़िया: 'तुम बेहद खूबसूरत हो, पत्नी को छोड़ दूंगा...' कहकर दरोगा ने एक साल तक किया महिला का शारीरिक शोषण, 8 लाख के जेवर भी लूटे
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जिन तीन बड़ी कंपनियों पर यह कड़ा एक्शन लिया गया है, उनमें Lotte India Corporation Pvt. Ltd., Kubera Foods और Ferns N Petals Pvt. Ltd. शामिल हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि इन्होंने अपने उत्पादों की पैकेजिंग पर ग्राहकों को गुमराह करने वाले दावे किए और नियमों के तहत जरूरी पोषण संबंधी जानकारियां छिपा लीं।
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पैकेज्ड फूड में भ्रामक दावों पर FSSAI का नोटिस
\r\n\r\nFSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली सर्वोच्च संस्था है। प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों तक जो भी खाद्य सामग्री पहुंचे, वह पूरी तरह से सुरक्षित हो और उस पर दी गई जानकारी 100% पारदर्शी हो।
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हालिया जांच में पाया गया कि ये तीनों दिग्गज कंपनियां FSSAI के लेबलिंग और डिस्प्ले नियमों (Labeling and Display Regulations) का खुला उल्लंघन कर रही थीं। इसी लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए, इन तीनों कंपनियों को कारण बताओ नोटिस (Show-Cause Notice) थमाया गया है। FSSAI का नोटिस मिलने के बाद खाद्य उद्योग (Food Industry) में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इससे कंपनियों की ब्रांड इमेज पर भी सीधा असर पड़ता है।
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किस कंपनी पर क्या हैं गंभीर आरोप?
\r\n\r\nFSSAI की टीम ने जब इन कंपनियों के उत्पादों की बारीकी से जांच की, तो लेबल पर लिखे दावों और उत्पाद की असल सामग्री (Ingredients) में भारी अंतर पाया गया। आइए विस्तार से जानते हैं कि किस कंपनी पर क्या आरोप लगे हैं:
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1. लोटे इंडिया (Lotte India) के दावों में झोल लोटे इंडिया देश की जानी-मानी कन्फेक्शनरी कंपनी है, लेकिन इसके दावों में बड़ी विसंगतियां पाई गई हैं।
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- \r\n आरोप: कंपनी पर आरोप है कि उसने अपने उत्पाद पर “100% Vegetarian” जैसे भ्रामक दावे किए, जबकि लेबलिंग के नियमों का सही से पालन नहीं किया गया।\r\n \r\n
- \r\n अधूरी जानकारी: कंपनी ने उत्पाद के पैकेट पर पोषण (Nutritional) संबंधी पूरी और सटीक जानकारी नहीं दी थी।\r\n \r\n
- \r\n डिस्क्लेमर की कमी: FSSAI के नियमों के मुताबिक विज्ञापनों और पैकेजिंग पर जरूरी डिस्क्लेमर देना अनिवार्य है, जो लोटे के उत्पादों से गायब था।\r\n \r\n
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2. कुबेरा फूड्स (Kubera Foods) के '100% नेचुरल' दावे की खुली पोल कुबेरा फूड्स के मामले में ग्राहकों के साथ सीधा धोखा देखने को मिला है।
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- \r\n आरोप: कंपनी ने अपने मशहूर उत्पाद ‘Soft and Fresh Cream Bun Pineapple’ पर बहुत बड़े अक्षरों में “100% Natural” और “No Preservatives, Colours & Flavours” लिख रखा था।\r\n \r\n
- \r\n सच्चाई: जब लैब में इस उत्पाद की जांच की गई, तो पता चला कि बन में प्रिजर्वेटिव (Preservatives), सिंथेटिक कलर (Synthetic Colours) और आर्टिफिशियल फ्लेवर मौजूद हैं। यह सीधे तौर पर ग्राहकों की सेहत और उनके विश्वास के साथ खिलवाड़ है।\r\n \r\n
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3. फर्न्स एंड पेटल्स (Ferns N Petals) की चॉकलेट में गड़बड़ी गिफ्टिंग और बेकरी सेगमेंट का बड़ा नाम फर्न्स एंड पेटल्स (FNP) भी FSSAI की रडार पर आ गया है।
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- \r\n आरोप: कंपनी के लोकप्रिय उत्पाद ‘Roasted Almond Chocolate’ में हाइड्रोजेनेटेड वेजिटेबल फैट (Hydrogenated Vegetable Fat) का इस्तेमाल किया गया था। ट्रांस फैट के नजरिए से यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।\r\n \r\n
- \r\n नियमों की अनदेखी: नियमों के अनुसार पैकेट पर इसकी अनिवार्य रूप से घोषणा की जानी चाहिए थी, लेकिन कंपनी ने इसे छिपा लिया।\r\n \r\n
- \r\n गायब जानकारी: उत्पाद के पैकेट से RDA (रोजाना जरूरी पोषण) मूल्य और बादाम की सटीक मात्रा जैसी अहम जानकारियां भी पूरी तरह से गायब थीं।\r\n \r\n
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7 दिनों के भीतर मांगा गया स्पष्टीकरण
\r\n\r\nइस बड़ी कार्रवाई के तहत, FSSAI ने तीनों कंपनियों को अपनी इस भारी लापरवाही और नियम उल्लंघन पर 7 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण (Explanation) देने का कड़ा निर्देश दिया है। प्राधिकरण ने अपने नोटिस में साफ कर दिया है कि उपभोक्ता के स्वास्थ्य और उनके जानने के अधिकार (Right to Information) के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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अगर तय समय सीमा (7 दिन) के भीतर लोटे इंडिया, कुबेरा फूड्स या फर्न्स एंड पेटल्स की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो FSSAI का नोटिस कानूनी कार्रवाई में बदल जाएगा। प्राधिकरण ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ऐसे मामलों में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट (FSS Act, 2006) के सख्त प्रावधानों के तहत कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और उनके उत्पादों का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।
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ग्राहकों के स्वास्थ्य और अधिकारों से खिलवाड़
\r\n\r\nआज के दौर में ग्राहक अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं। वे पैकेट पर 'नेचुरल' या 'ऑर्गेनिक' देखकर ज्यादा पैसे चुकाने को तैयार रहते हैं। ऐसे में जब बड़ी कंपनियां गलत लेबलिंग करती हैं, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह एक तरह का आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी अपराध है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि प्रिजर्वेटिव्स और सिंथेटिक कलर्स का अधिक सेवन शरीर में एलर्जी, पेट की खराबी और लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इसी तरह, हाइड्रोजेनेटेड वेजिटेबल फैट दिल की बीमारियों (Heart Diseases) के जोखिम को बढ़ाता है। इसलिए, कंपनियों द्वारा इन सामग्रियों को छिपाना एक बेहद निंदनीय कृत्य है।
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निष्कर्ष के तौर पर, 3 बड़ी कंपनियों को मिला यह FSSAI का नोटिस पूरे फूड और बेवरेज (F&B) उद्योग के लिए एक कड़ा संदेश है। कंपनियां अब अपने उत्पादों को बेचने के लिए झूठे और भ्रामक दावों का सहारा नहीं ले सकती हैं। FSSAI की यह कार्रवाई न केवल बाजार में पारदर्शिता लाएगी बल्कि ग्राहकों का विश्वास भी बढ़ाएगी। एक जागरूक नागरिक और उपभोक्ता होने के नाते, हमें भी पैकेज्ड फूड खरीदते समय उसकी सामग्री (Ingredients List) को ध्यान से पढ़ना चाहिए और किसी भी भ्रामक दावे की शिकायत तुरंत संबंधित फोरम पर करनी चाहिए।
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भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पैकेज्ड उत्पादों पर भ्रामक दावे और गलत जानकारी देने के आरोप में तीन दिग्गज कंपनियों— Lotte India, Kubera Foods, और Ferns N Petals को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन कंपनियों पर 100% वेजिटेरियन, 100% नेचुरल जैसे झूठे दावे करने और प्रिजर्वेटिव्स व वेजिटेबल फैट की जानकारी छिपाने का गंभीर आरोप है। FSSAI ने इन सभी से 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। जवाब संतोषजनक न होने पर FSS Act, 2006 के तहत भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
Sabse pehle comment karne wale banein.