नई दिल्ली: देश में महंगाई का एक और बड़ा दौर शुरू होने जा रहा है, और इस बार इसका मुख्य कारण है आसमान छूते 'डीजल के दाम'। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे और कई राज्यों में ईंधन की कमी (Shortage) के चलते ट्रांसपोर्ट सेक्टर (Transport Sector) पूरी तरह से बेपटरी हो गया है।READ ALSO;-मेरठ मेट्रो और नमो भारत स्टेशन पर दुकान खोलने का मौका: जानिए टेंडर फीस, सिक्योरिटी और जरूरी दस्तावेज
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'इकोनॉमिक्स टाइम्स' की एक हालिया और चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, डीजल के ऊंचे दामों और आपूर्ति में बाधा के कारण ट्रांसपोर्टर्स ने अपने ट्रकों को सड़कों पर निकालने से तौबा कर ली है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्तमान में देशभर में मौजूद लगभग 95 लाख कमर्शियल ट्रकों में से करीब 20% यानी 19 लाख ट्रक सड़कों से हट गए हैं और वे गैराज या हाईवे के किनारे खड़े हो गए हैं।
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मालभाड़े (Freight) में 15% का भारी इजाफा, आम आदमी पर पड़ेगी मार
\r\n\r\nजब सड़कों पर ट्रक कम होंगे, तो जाहिर सी बात है कि सामान ढोने (लॉजिस्टिक) की लागत बढ़ जाएगी। डीजल की किल्लत और ऊंचे दामों की भरपाई करने के लिए ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने तत्काल प्रभाव से मालभाड़े (Freight Rates) में भारी बढ़ोतरी कर दी है।
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- \r\n लॉन्ग रूट का भाड़ा: पश्चिम भारत (महाराष्ट्र, गुजरात) से उत्तर भारत (दिल्ली, पंजाब, यूपी) जैसे मुख्य और व्यस्त रूट्स पर भाड़े में 10% से 15% तक की सीधी बढ़ोतरी की गई है।\r\n \r\n
- \r\n लोकल ढुलाई का भाड़ा: स्थिति सबसे ज्यादा खराब छोटे और लोकल रूट्स पर है। 30 किलोमीटर तक की लोकल ढुलाई के दाम सबसे ज्यादा बढ़े हैं।\r\n \r\n
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क्या-क्या होगा महंगा? मालभाड़ा बढ़ने का मतलब है 'चेन रिएक्शन'। इसका सीधा और सबसे पहला असर आम जनता की रसोई पर पड़ेगा। ट्रकों के खड़े होने से सप्लाई चेन बाधित होगी, जिसके चलते आने वाले कुछ ही दिनों में मंडियों में फल, ताजी सब्जियां, अनाज, दालें और रोजमर्रा का राशन काफी महंगा हो जाएगा।
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11 दिन में ₹8 तक की बढ़ोतरी, पेट्रोल पंपों पर हाहाकार
\r\n\r\nआपको बता दें कि पिछले 11 दिनों के भीतर ही सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम 4 बार बढ़ाए हैं। इस अवधि में कुल बढ़त ₹7.5 से ₹8 प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
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अचानक बढ़े इन दामों और कुछ राज्यों में सप्लाई की कमी की अफवाहों के बीच, नेशनल हाईवे (National Highways) पर मौजूद पेट्रोल पंपों पर ट्रकों की कई किलोमीटर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। ट्रक ड्राइवर्स को अपनी गाड़ी में डीजल भरवाने के लिए 6 से 8 घंटे तक का लंबा और थका देने वाला इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे डिलीवरी में और ज्यादा देरी हो रही है।
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छोटे ट्रक ऑपरेटर्स की टूटी कमर: उधार पर तेल मिलना बंद
\r\n\r\nभारत का ट्रांसपोर्ट ढांचा बहुत हद तक छोटे व्यापारियों पर टिका है। देश के ट्रांसपोर्ट सेक्टर में 70% से ज्यादा हिस्सेदारी छोटे ट्रक ऑपरेटर्स (जिनके पास 1 से 5 ट्रक हैं) की है।
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ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के नेशनल प्रेसिडेंट हरीश सभरवाल ने स्थिति की गंभीरता को समझाते हुए कहा, "एक ट्रक को चलाने के कुल खर्च (Operating Cost) में 40% से 45% हिस्सा अकेले डीजल का होता है। पिछले 11 दिनों में किस्तों में जो बढ़ोतरी हुई है, उसका बोझ उठाने की स्थिति में छोटे ऑपरेटर्स बिल्कुल नहीं हैं।"
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सभरवाल ने एक और बड़ी समस्या की ओर इशारा करते हुए बताया कि अक्सर छोटे ऑपरेटर्स पेट्रोल पंपों से महीने भर के 'उधार' पर डीजल लेते हैं। लेकिन कीमतों में अचानक आए इस उछाल के बाद कई पेट्रोल पंप मालिकों ने उधार पर तेल देना पूरी तरह से बंद कर दिया है। इसके चलते छोटे ट्रक मालिकों के सामने भारी 'वर्किंग कैपिटल' (Working Capital) का संकट खड़ा हो गया है।
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आखिर पेट्रोल पंपों पर क्यों उमड़ रही है इतनी भीड़?
\r\n\r\nबाजार में पेट्रोल पंपों पर ट्रकों की भारी भीड़ लगने का एक और बड़ा तकनीकी कारण सामने आया है। दरअसल, बाजार में डीजल की बिक्री दो तरह की कीमतों पर होती है- बल्क (थोक) और रिटेल (खुदरा)।
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हाल ही में सरकार ने थोक में खरीदे जाने वाले इंडस्ट्रियल डीजल (Bulk Diesel) की कीमत में 22 रुपये प्रति लीटर की भारी-भरकम बढ़ोतरी की थी। इसके बाद थोक में मिलने वाला डीजल, रिटेल (पेट्रोल पंप वाले) डीजल के मुकाबले ₹40 से ₹42 प्रति लीटर तक महंगा हो गया है।
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नतीजा यह हुआ है कि राज्य परिवहन की बसें, बड़े मॉल्स, फैक्ट्रियां और बड़े ट्रांसपोर्ट संस्थान, जो पहले कंपनियों से सीधे थोक में (टैंकरों के जरिए) सस्ता डीजल खरीदते थे, वे अब पैसा बचाने के लिए आम जनता वाले रिटेल पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगा रहे हैं। अचानक से बढ़ी इस भारी मांग के कारण रिटेल आउटलेट्स पर सप्लाई कम पड़ गई है।
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तेल कंपनियों का क्या है कहना?
\r\n\r\nइन बिगड़ते हालातों के बीच, इंडियन ऑयल (IOC) जैसी सरकारी तेल कंपनियों ने देशभर में ईंधन की किसी भी तरह की भारी किल्लत या कमी (Shortage) से साफ इनकार किया है।
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कंपनियों ने अपने आंकड़े पेश करते हुए बताया है कि इस महीने पेट्रोल की बिक्री में 14% और डीजल की बिक्री में 18% का उछाल आया है, जो रिकॉर्ड स्तर पर है। तेल कंपनियों के मुताबिक:
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- \r\n किल्लत पूरे देश में नहीं है, बल्कि यह केवल कुछ चुनिंदा इलाकों और राज्यों में है।\r\n \r\n
- \r\n यह स्थिति पूरी तरह से 'अस्थायी' है और सप्लाई चेन को दुरुस्त करने का काम तेजी से चल रहा है।\r\n \r\n
- \r\n कंपनियों का यह भी मानना है कि जैसे ही मानसून पूरे देश में सक्रिय होगा, वैसे ही कृषि कार्यों (Farming) और पर्यटन (Tourism) में डीजल की मांग अपने आप कम हो जाएगी, जिससे पेट्रोल पंपों पर स्थिति बहुत जल्द सामान्य होने की उम्मीद है।\r\n \r\n
Sabse pehle comment karne wale banein.