[धामपुर/बिजनौर - एग्री डेस्क]
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और चीनी मिलों को गुणवत्तापूर्ण गन्ना उपलब्ध कराने की दिशा में धामपुर शुगर मिल (Dhampur Sugar Mill) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए, मिल प्रबंधन ने रामगंगा फॉर्म्स (Ramganga Farms) में एक विशाल गन्ना प्रजाति प्रदर्शन और प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया।READ ALSO:-रोजगार संगम पोर्टल अलर्ट: कहीं आपकी एक 'छोटी सी गलती' तो नहीं छीन रही नौकरी का मौका? विभाग ने जारी की चेतावनी, तुरंत अपडेट करें अपनी प्रोफाइल
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इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों और गन्ना विभाग के कर्मचारियों को गन्ने की नई और उन्नत प्रजातियों से रूबरू कराना था, ताकि भविष्य में फसल में लगने वाले रोगों से बचा जा सके और उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके। कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि अब पारंपरिक खेती से काम नहीं चलेगा, बल्कि 'प्रजाति संतुलन' (Variety Balance) ही सफलता की कुंजी है।
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आइए, इस आयोजन की विस्तृत रिपोर्ट और वहां दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों को जानते हैं जो हर गन्ना किसान के लिए जानना जरूरी है।
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आयोजन का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
\r\n\r\nगन्ना चीनी आयुक्त, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश भर की चीनी मिलों को निर्देशित किया है कि वे गन्ने की "एक ही प्रजाति" (जैसे 0238) पर निर्भरता कम करें। इसी अनुपालन में धामपुर शुगर मिल ने इस जागरूकता अभियान की शुरुआत की है।
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रामगंगा फॉर्म्स में आयोजित इस कार्यक्रम का दोहरा उद्देश्य था:
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- \r\n प्रदर्शन (Demonstration): खेत में खड़ी गन्ने की विभिन्न नई प्रजातियों को साक्षात दिखाना।\r\n \r\n
- \r\n प्रशिक्षण (Training): गन्ना पर्यवेक्षकों और किसानों को बुवाई की नई तकनीकों का प्रशिक्षण देना।\r\n \r\n
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इस कार्यक्रम में न केवल मिल के अधिकारी बल्कि सरकारी गन्ना विभाग के 100 से अधिक कार्मिकों ने हिस्सा लिया, जिनमें संयुक्त गन्ना सर्वे कार्मिक, सहायक प्रबंधक और गन्ना पर्यवेक्षक शामिल थे।
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गन्ने की नई प्रजातियों का 'लाइव' प्रदर्शन
\r\n\r\nखेती में "देखकर विश्वास करने" (Seeing is Believing) का सिद्धांत सबसे कारगर होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए, रामगंगा फॉर्म्स में गन्ने की विभिन्न उन्नत प्रजातियों के प्लॉट तैयार किए गए थे।
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मुख्य आकर्षण:
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- \r\n वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने प्रशिक्षण ले रहे प्रतिभागियों को खेतों का भ्रमण कराया।\r\n \r\n
- \r\n वहां प्रचलित और नई गन्ना किस्मों की प्लांट क्रॉप (Plant Crop) का प्रदर्शन किया गया।\r\n \r\n
- \r\n किसानों को दिखाया गया कि कैसे नई प्रजातियां कम लागत में बेहतर मोटाई और लंबाई दे रही हैं।\r\n \r\n
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वैज्ञानिकों और अधिकारियों का महामंथन
\r\n\r\nइस कार्यशाला में गन्ना अनुसंधान और विकास क्षेत्र के कई दिग्गज नाम शामिल हुए। उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और किसानों की शंकाओं का समाधान किया।
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प्रमुख वक्ता और उपस्थिति:
\r\n\r\n| \r\n नाम \r\n | \r\n \r\n पद/परिचय \r\n | \r\n \r\n भूमिका \r\n | \r\n
| \r\n डॉ. अवधेश डांगर \r\n | \r\n \r\n सेवानिवृत्त वैज्ञानिक \r\n | \r\n \r\n गन्ना शोध केंद्र, मुजफ्फरनगर (विशेषज्ञ राय) \r\n | \r\n
| \r\n अमित कुमार पांडे \r\n | \r\n \r\n गन्ना विकास निरीक्षक \r\n | \r\n \r\n सरकारी योजनाओं और विभाग का पक्ष रखा \r\n | \r\n
| \r\n ओमवीर सिंह \r\n | \r\n \r\n गन्ना महाप्रबंधक (GM Cane) \r\n | \r\n \r\n मिल की नीतियों और खरीद प्रक्रिया पर चर्चा \r\n | \r\n
| \r\n करुणेश सिंह \r\n | \r\n \r\n डेवलपमेंट ऑफिसर \r\n | \r\n \r\n गन्ने के विकास और बीज उपलब्धता पर बात की \r\n | \r\n
| \r\n मनोज चौहान \r\n | \r\n \r\n वरिष्ठ गन्ना प्रबंधक \r\n | \r\n \r\n खेत प्रबंधन और तकनीकी सहायता \r\n | \r\n
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डॉ. अवधेश डांगर ने इस मौके पर कहा कि मुजफ्फरनगर शोध केंद्र लगातार ऐसी किस्मों पर काम कर रहा है जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जलवायु के अनुकूल हों और जिनमें रेड रॉट (Red Rot) जैसी बीमारी न लगे।
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सबसे बड़ी सलाह: "प्रजाति संतुलन" का सूत्र
\r\n\r\nकार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष रामगंगा फॉर्म्स के वरिष्ठ प्रबंधक द्वारा दिया गया बयान था, जो हर किसान के लिए एक 'गाइडलाइन' की तरह है।
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"कम से कम तीन प्रजातियां बोना अनिवार्य"
\r\n\r\nवरिष्ठ प्रबंधक ने जोर देकर कहा कि "प्रजाति संतुलन (Variety Balance) के लिए प्रत्येक किसान को अपने खेत में गन्ने की कम से कम तीन अलग-अलग प्रजातियां बोनी चाहिए।"
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इसके पीछे का वैज्ञानिक तर्क क्या है?
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- \r\n बीमारी से सुरक्षा: यदि आप पूरे खेत में एक ही वैरायटी (जैसे 0238) बोते हैं और उसमें कोई बीमारी आती है, तो पूरी फसल बर्बाद हो जाती है। अलग-अलग किस्में बोने से जोखिम कम हो जाता है।\r\n \r\n
- \r\n चीनी मिल में आपूर्ति: अलग-अलग किस्में अलग-अलग समय पर पकती हैं (अगेती, मध्यम और पछेती)। इससे किसान पूरी सीजन मिल को गन्ना दे सकता है और उसे पर्ची की समस्या नहीं होती।\r\n \r\n
- \r\n मिट्टी की सेहत: एक ही किस्म बार-बार बोने से मिट्टी से विशिष्ट पोषक तत्व खत्म होने लगते हैं। किस्म बदलने से जमीन की उर्वरता बनी रहती है।\r\n \r\n
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प्रशिक्षण कार्यशाला की मुख्य बातें (Key Takeaways)
\r\n\r\nइस एक दिवसीय सत्र में 100 से अधिक व्यक्तियों (गन्ना सुपरवाइजर और प्रगतिशील किसानों) ने जो सीखा, उसका सार निम्नलिखित है:
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A. बुवाई की विधियां
\r\n\r\nविशेषज्ञों ने ट्रेंच विधि (Trench Method) पर जोर दिया। प्रदर्शन में दिखाया गया कि ट्रेंच विधि से बोए गए गन्ने में धूप और हवा जड़ों तक पहुंचती है, जिससे कल्ले (Tillers) अधिक फूटते हैं।
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B. बीज उपचार (Seed Treatment)
\r\n\r\nडॉ. अवधेश डांगर ने बताया कि बुवाई से पहले गन्ने के टुकड़ों को फफूंदीनाशक और कीटनाशक के घोल में डुबोकर उपचारित करना बेहद जरूरी है। इससे जमाव प्रतिशत बढ़ता है।
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C. 0238 का विकल्प
\r\n\r\nचूंकि लोकप्रिय वैरायटी 0238 में अब रेड रॉट रोग का प्रकोप बढ़ गया है, इसलिए कार्यशाला में 0118, 15023, 14201 और 13235 जैसी नई और रोग-रोधी प्रजातियों को अपनाने की सलाह दी गई।
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धामपुर चीनी मिल की प्रतिबद्धता
\r\n\r\nधामपुर शुगर मिल प्रबंधन ने इस आयोजन के माध्यम से स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल गन्ना खरीदने में नहीं, बल्कि गन्ने के 'सर्वांगीण विकास' में विश्वास रखते हैं।
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गन्ना महाप्रबंधक ओमवीर सिंह ने कहा:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"हमारा लक्ष्य किसान की खुशहाली है। जब किसान स्वस्थ और ज्यादा गन्ना पैदा करेगा, तभी मिल सुचारू रूप से चल पाएगी। हम किसानों को उन्नत बीज और तकनीकी सलाह देने के लिए हमेशा तत्पर हैं।"\r\n
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किसानों के लिए आगे की राह
\r\n\r\nइस कार्यशाला से यह संदेश साफ है कि अब खेती में बदलाव का समय आ गया है।
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- \r\n मोनोकल्चर छोड़ें: केवल एक वैरायटी के भरोसे न रहें।\r\n \r\n
- \r\n संपर्क में रहें: अपने क्षेत्र के गन्ना पर्यवेक्षक और डेवलपमेंट ऑफिसर (जैसे करुणेश सिंह और मनोज चौहान) के संपर्क में रहें।\r\n \r\n
- \r\n नई तकनीक अपनाएं: रामगंगा फॉर्म्स में प्रदर्शित तकनीकों को अपने खेतों में लागू करें।\r\n \r\n
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बदलाव की बयार
\r\n\r\nधामपुर शुगर मिल और रामगंगा फॉर्म्स का यह प्रयास सराहनीय है। "तीन प्रजातियों" का फार्मूला अगर क्षेत्र के किसान अपना लेते हैं, तो न केवल बीमारियों का खतरा टलेगा बल्कि चीनी परता (Sugar Recovery) में भी सुधार होगा। यह पहल निश्चित रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों की तकदीर बदलने में सहायक सिद्ध होगी।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
\r\n\r\nQ1: किसानों को गन्ने की 3 प्रजातियां क्यों बोनी चाहिए?
\r\n\r\nAns: ताकि अगर किसी एक प्रजाति में बीमारी आए तो बाकी फसल सुरक्षित रहे। साथ ही, इससे अगेती और पछेती फसल का संतुलन बना रहता है।
\r\n\r\nQ2: इस कार्यशाला में कौन-कौन शामिल था?
\r\n\r\nAns: डॉ. अवधेश डांगर (वैज्ञानिक), अमित कुमार पांडे (गन्ना निरीक्षक), मिल के जीएम ओमवीर सिंह और 100 से अधिक गन्ना पर्यवेक्षक व किसान।
\r\n\r\nQ3: रामगंगा फॉर्म्स कहां स्थित है?
\r\n\r\nAns: यह धामपुर शुगर मिल के अधिकार क्षेत्र में स्थित एक कृषि फार्म है, जहां गन्ने की नई तकनीकों का प्रदर्शन किया जाता है।
\r\n\r\nQ4: गन्ने की कौन सी नई प्रजातियां अच्छी मानी जा रही हैं?
\r\n\r\nAns: विशेषज्ञों के अनुसार को. 0118, को. 15023 और को. 13235 अच्छी और रोग-रोधी किस्में हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.