भारत का इतिहास उन वीर सपूतों की कहानियों से भरा पड़ा है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा और स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। 23 मार्च का दिन भारतीय इतिहास में 'शहीद दिवस' (Shaheed Diwas) के रूप में दर्ज है। इसी दिन साल 1931 में भारत माता के तीन महान सपूतों—भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव—को ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी के फंदे पर लटका दिया था। इन वीर बलिदानियों की याद में पूरे देश में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर शहर में भी यह दिन बेहद खास होता है।READ ALSO:-'बेटी पैदा हुई तो टूट पड़ा दरिंदगी का कहर': बिजनौर में हैवान बने पति ने ऑपरेशन के टांके कटवाने आई पत्नी और नवजात को अस्पताल से निकाला
\r\n\r\n\r\n\r\n
धामपुर में Dhampur Shaheed Diwas Program केवल एक रस्म अदायगी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी गौरवशाली परंपरा है जो पिछले पांच दशकों से अनवरत चली आ रही है। उत्तर प्रदेश युवा साहित्यकार संघ, धामपुर के तत्वावधान में आयोजित इस वर्ष का कार्यक्रम भी देशभक्ति, साहित्य और जन-भागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण बना। खबरीलाल मीडिया की इस विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में हम इस ऐतिहासिक आयोजन, इसमें शामिल अतिथियों, काव्य गोष्ठी के साहित्यिक महत्व और 50 वर्षों से चली आ रही इस महान परंपरा का गहराई से विश्लेषण करेंगे।
\r\n\r\n 
धामपुर के भगत सिंह चौक पर गूंजे देशभक्ति के नारे
\r\n\r\nधामपुर नगर के हृदय स्थल यानी 'भगत सिंह चौक' पर सुबह से ही देशभक्ति का माहौल नजर आने लगा था। Dhampur Shaheed Diwas Program की शुरुआत अमर शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। शहर के गणमान्य नागरिक, राजनीतिक हस्तियां, साहित्यकार और युवा पीढ़ी भारी संख्या में चौक पर एकत्रित हुए।
\r\n\r\n 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और विधान परिषद सदस्य (MLC) श्री अशोक कटारिया उपस्थित रहे। उन्होंने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमाओं पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने कहा कि आज हम जिस खुली हवा में सांस ले रहे हैं, वह इन्हीं अमर बलिदानियों के त्याग का परिणाम है। युवाओं को भगत सिंह के जीवन और उनके विचारों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति और उनके विचार
\r\n\r\nइस Dhampur Shaheed Diwas Program में राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर विभिन्न दलों और विचारधाराओं के लोग एक मंच पर नजर आए, जो शहीदों के प्रति धामपुर निवासियों के असीम सम्मान को दर्शाता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में निम्नलिखित हस्तियों ने भाग लिया और अपने विचार व्यक्त किए:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n डॉ. इंद्रदेव सिंह (पूर्व विधायक): उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला और कहा कि शहीदों के सपनों का भारत बनाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।\r\n \r\n
- \r\n राजू गुप्ता (पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष): उन्होंने धामपुर नगर में शहीदों की स्मृति को सहेजने के लिए किए गए नागरिक प्रयासों की सराहना की।\r\n \r\n
- \r\n ठाकुर अमित सिंह (वरिष्ठ सपा नेता): उन्होंने समाज में बढ़ती कुरीतियों के खिलाफ भगत सिंह के वैचारिक संघर्ष को आज के संदर्भ में प्रासंगिक बताया।\r\n \r\n
- \r\n दिनेश अग्रवाल 'नवीन': उन्होंने देशप्रेम और राष्ट्र निर्माण में आम नागरिक के योगदान की आवश्यकता पर बल दिया।\r\n \r\n
\r\n\r\n
सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि Dhampur Shaheed Diwas Program जैसे आयोजन समाज में, विशेषकर युवा पीढ़ी में, राष्ट्रवाद की भावना को जीवित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
\r\n\r\n 
50 वर्षों की अटूट परंपरा: उत्तर प्रदेश युवा साहित्यकार संघ का योगदान
\r\n\r\nकिसी भी आयोजन को एक या दो साल तक चलाना आसान होता है, लेकिन किसी वैचारिक कार्यक्रम को आधी सदी (50 वर्षों) तक लगातार आयोजित करना एक भगीरथ प्रयास है। उत्तर प्रदेश युवा साहित्यकार संघ, धामपुर इस बात के लिए विशेष बधाई का पात्र है कि उन्होंने पिछले 50 वर्षों से इस Dhampur Shaheed Diwas Program की लौ को बुझने नहीं दिया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
संघ के सदस्य हर साल 23 मार्च को बिना किसी सरकारी मदद की प्रतीक्षा किए, अपने संसाधनों और नागरिकों के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन करते हैं। यह संस्था केवल शहीदों को श्रद्धांजलि ही नहीं देती, बल्कि साहित्य के माध्यम से समाज में बौद्धिक चेतना जगाने का कार्य भी कर रही है। बिजनौर जिले के स्थानीय इतिहास में इस संस्था का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
काव्य गोष्ठी का आयोजन: साहित्य के मंच से वीरों को नमन
\r\n\r\nशहीदों की याद में आयोजित इस कार्यक्रम का एक प्रमुख और सबसे आकर्षक हिस्सा 'काव्य गोष्ठी' (Kavi Sammelan) रहा। उत्तर प्रदेश युवा साहित्यकार संघ के अध्यक्ष श्री हरिकांत शर्मा के कुशल नेतृत्व और संचालन में इस काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कलम और कविता की हमेशा से एक धारदार भूमिका रही है। चाहे वह रामप्रसाद बिस्मिल की 'सरफरोशी की तमन्ना' हो या माखनलाल चतुर्वेदी की 'पुष्प की अभिलाषा', कविताओं ने हमेशा सोए हुए जनमानस को झकझोरने का काम किया है। धामपुर में आयोजित इस गोष्ठी में स्थानीय और आमंत्रित कवियों ने अपनी ओजस्वी वाणी से वहां मौजूद श्रोताओं के भीतर देशभक्ति का ज्वार भर दिया।
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n अमर शहीदों के जीवन दर्शन को प्रस्तुत किया।\r\n \r\n
- \r\n वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था पर व्यंग्य कसा।\r\n \r\n
- \r\n देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों के शौर्य का गुणगान किया।\r\n \r\n
- \r\n युवाओं को नशे और भटकाव से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में लगने का आह्वान किया।\r\n \r\n
\r\n\r\n
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख हस्तियां और नागरिक भागीदारी
\r\n\r\nइस ऐतिहासिक Dhampur Shaheed Diwas Program और देशभक्ति पूर्ण काव्य गोष्ठी में धामपुर के कई प्रतिष्ठित नागरिकों, साहित्य प्रेमियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम को सफल बनाने में जिन प्रमुख लोगों की भूमिका रही, उनमें शामिल हैं:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n सरदार सतवंत सिंह सलूजा\r\n \r\n
- \r\n दीपक अग्रवाल (नगर मंडल भाजपा अध्यक्ष)\r\n \r\n
- \r\n इंदुकांत शर्मा\r\n \r\n
- \r\n रवि कुमार सिंह (भाजपा जिला उपाध्यक्ष)\r\n \r\n
- \r\n विभूति कांत शर्मा\r\n \r\n
- \r\n रजनीश शर्मा\r\n \r\n
- \r\n नागेश्वर दयाल\r\n \r\n
- \r\n पीयूष अग्रवाल\r\n \r\n
- \r\n शरद राजवंशी\r\n \r\n
- \r\n विजय जैन\r\n \r\n
\r\n\r\n
इन सभी गणमान्य व्यक्तियों ने न केवल कार्यक्रम में भाग लिया, बल्कि आयोजन समिति का उत्साहवर्धन भी किया। इतनी बड़ी संख्या में समाज के हर वर्ग के लोगों की उपस्थिति यह साबित करती है कि बिजनौर और धामपुर की मिट्टी में आज भी देशभक्ति की जड़ें कितनी गहरी हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु: एक संक्षिप्त ऐतिहासिक विश्लेषण
\r\n\r\nDhampur Shaheed Diwas Program के अवसर पर उस इतिहास को याद करना भी जरूरी है जिसके कारण यह दिन मनाया जाता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
भगत सिंह का जन्म 1907 में हुआ था। जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उनके बाल मन पर गहरा प्रभाव डाला था। लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए सांडर्स वध (1928) और उसके बाद बहरी हो चुकी ब्रिटिश सरकार को जगाने के लिए सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने (1929) की घटनाओं ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को पूरे भारत के युवाओं का आदर्श बना दिया था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
लाहौर षड्यंत्र केस के तहत इन तीनों क्रांतिवीरों को 24 मार्च 1931 को फांसी दी जानी थी, लेकिन जनआक्रोश के डर से ब्रिटिश हुकूमत ने कायरता का परिचय देते हुए उन्हें निर्धारित समय से 11 घंटे पहले, 23 मार्च 1931 की शाम को ही फांसी दे दी। उनके अंतिम शब्द 'इंकलाब जिंदाबाद' थे। आज Dhampur Shaheed Diwas Program जैसे आयोजनों के माध्यम से हम उसी 'इंकलाब' (क्रांति) की भावना को अपने भीतर सहेजने का प्रयास करते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
वर्तमान परिप्रेक्ष्य: युवाओं के लिए क्या है संदेश?
\r\n\r\nआज के दौर में जब युवा पीढ़ी सोशल मीडिया और पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में अपनी जड़ों से कटती जा रही है, तब Dhampur Shaheed Diwas Program जैसे आयोजन एक 'वेक-अप कॉल' (Wake-up call) की तरह हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
भगत सिंह केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, वे एक महान विचारक, लेखक और स्वप्नदृष्टा थे। उन्होंने 23 साल की छोटी सी उम्र में जो साहित्य पढ़ा और लिखा, वह आज भी शोध का विषय है। धामपुर का यह कार्यक्रम संदेश देता है कि आज के युवा को केवल शरीर से ही नहीं, बल्कि वैचारिक रूप से भी मजबूत होना चाहिए। समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, सांप्रदायिकता और असमानता जैसी बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाना ही शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
उत्तर प्रदेश युवा साहित्यकार संघ, धामपुर द्वारा आयोजित Dhampur Shaheed Diwas Program ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि राष्ट्र के नायकों को याद रखने वाली कौमें ही इतिहास में जीवित रहती हैं। पूर्व मंत्री अशोक कटारिया से लेकर स्थानीय साहित्यकारों और आम नागरिकों तक, सभी ने एक स्वर में राष्ट्रप्रेम का जो संदेश दिया है, वह पूरे जनपद बिजनौर के लिए गर्व का विषय है। भगत सिंह चौक पर अर्पित किए गए श्रद्धा सुमन केवल फूल नहीं, बल्कि भारत के उज्ज्वल भविष्य के संकल्प का प्रतीक हैं। उम्मीद है कि यह 50 वर्षों की शानदार परंपरा आगे भी इसी ऊर्जा और उत्साह के साथ जारी रहेगी, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास के सबसे सुनहरे पन्नों से परिचित होती रहें।
\r\n\r\n\r\n\r\n
संक्षिप्त सारांश (Summary): 23 मार्च को शहीद दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर में उत्तर प्रदेश युवा साहित्यकार संघ द्वारा एक भव्य Dhampur Shaheed Diwas Program का आयोजन किया गया। भगत सिंह चौक पर पूर्व मंत्री अशोक कटारिया और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। पिछले 50 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत एक देशभक्तिपूर्ण काव्य गोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय नागरिकों और साहित्यकारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
Sabse pehle comment karne wale banein.