शिक्षा, समाज सुधार और भारतीय संस्कृति के पुरोधा, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के संस्थापक और भारत रत्न से सम्मानित महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जयंती आज धामपुर में श्रद्धा और उल्लास के संगम के साथ मनाई गई। धामपुर का हृदय स्थल कहे जाने वाले मालवीय चौक (Malviya Chowk) पर आज सुबह से ही गहमागहमी थी। कड़ाके की ठंड के बावजूद शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, राजनेताओं और समाजसेवियों का तांता लगा रहा।
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'महामना पंडित मदन मोहन मालवीय चौक चैरिटेबल ट्रस्ट' के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल मालवीय जी के विचारों को पुनर्जीवित किया, बल्कि शहर में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी किया। कार्यक्रम की रूपरेखा दो सत्रों में विभाजित थी—प्रथम सत्र में पुष्पांजलि और माल्यार्पण, जबकि द्वितीय सत्र में विश्व शांति और जन-कल्याण के लिए वैदिक यज्ञ का आयोजन किया गया।
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गरिमापूर्ण वातावरण में माल्यार्पण: महामनीषी को भावांजलि
\r\n\r\nकार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः काल हुआ। मालवीय चौक स्थित पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था। भगवा और गेंदे के फूलों की मालाएं महामना के विराट व्यक्तित्व की शोभा बढ़ा रही थीं। वातावरण में एक अलग ही पवित्रता थी।
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सबसे पहले कार्यक्रम में पधारे अतिथियों ने मालवीय जी के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
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- \r\n ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार गुप्ता और महासचिव जितेंद्र कुमार शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया।\r\n \r\n
- \r\n धामपुर के पूर्व विधायक डॉ. इंद्रदेव सिंह ने मालवीय जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए कहा कि मालवीय जी ने गुलाम भारत में शिक्षा की जो अलख जगाई थी, उसी का परिणाम है कि आज भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है।\r\n \r\n
- \r\n नगर पालिका परिषद धामपुर के अध्यक्ष चौधरी रवि कुमार सिंह ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि मालवीय जी का जीवन सादगी और उच्च विचारों का प्रतीक था। हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है।\r\n \r\n
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इस दौरान पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राजू गुप्ता, स्वस्तिक गार्डन के एमडी शरद शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एन.पी. सिंह, राजीव चौहान, अतुल कुमार (लोहे वाले), विपिन गुप्ता और प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. आदित्य अग्रवाल ने भी बारी-बारी से माल्यार्पण कर महामना को नमन किया। हर कोई मालवीय जी के कृतित्व को याद कर नतमस्तक था।
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द्वितीय सत्र: धधकते हवन कुंड और गूंजते वेद मंत्र
\r\n\r\nकार्यक्रम का दूसरा और सबसे आध्यात्मिक हिस्सा था—जन-कल्याण यज्ञ। भारतीय संस्कृति में यज्ञ को पर्यावरण शुद्धि और मानसिक शांति का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। मालवीय जी स्वयं सनातन धर्म के प्रबल समर्थक और रक्षक थे, इसलिए उनकी जयंती पर यज्ञ का आयोजन उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी।
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मालवीय चौक पर एक भव्य हवन कुंड तैयार किया गया था। चारों ओर वैदिक मंत्रों की गूंज थी।
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- \r\n विद्वान पुरोहितों की टोली: यज्ञ का संचालन पंडित पैरिटो शास्त्री के आचार्यत्व में हुआ। उनके साथ गौरव भारद्वाज, धर्मवीर शर्मा, आर्यन दीक्षित, दीपक शर्मा और विनोद गोस्वामी ने सस्वर वेद मंत्रों का पाठ किया। जैसे ही 'स्वाहा' का घोष होता, पूरा वातावरण दिव्यता से भर जाता।\r\n \r\n
- \r\n आहुति का संकल्प: भगवान को साक्षी मानकर और शहर वासियों के कल्याण की कामना के साथ यजमानों ने आहुति दी।\r\n \r\n
- \r\n सभी आगंतुकों ने बारी-बारी से हवन कुंड में सामग्री अर्पित की। अग्नि से उठती सुगंधित धुआं और मंत्रों की ध्वनि ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को मंत्रमुग्ध कर दिया।\r\n \r\n
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कौन-कौन रहा उपस्थित? (Guest List)
\r\n\r\nइस भव्य आयोजन में शहर के हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिली। समाजसेवियों से लेकर वकीलों और व्यापारियों तक, सबने एक मंच पर आकर महामना को याद किया। प्रमुख उपस्थित लोगों में शामिल रहे:
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- \r\n संदीप शर्मा (हवाई)\r\n \r\n
- \r\n राकेश चमोली\r\n \r\n
- \r\n विनोद शर्मा\r\n \r\n
- \r\n कुलमानी सिंह\r\n \r\n
- \r\n जयवीर सिंह सिसोदिया\r\n \r\n
- \r\n अनिल शर्मा (सुभाष चौक)\r\n \r\n
- \r\n उदित जैन\r\n \r\n
- \r\n सोमानंद महाराज (जिन्होंने अपने आशीर्वचनों से संगत को निहाल किया)\r\n \r\n
- \r\n विजय जैन\r\n \r\n
- \r\n प्रदेश भारद्वाज\r\n \r\n
- \r\n क्षेत्रपाल सैनी\r\n \r\n
- \r\n प्रमोद अग्रवाल\r\n \r\n
- \r\n आदित्य प्रधान (जैथरा)\r\n \r\n
- \r\n सतीश कुमार (जैथरा)\r\n \r\n
- \r\n उमाशंकर (एडवोकेट)\r\n \r\n
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इन सभी ने पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
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महामना की विरासत: क्यों खास है यह दिन?
\r\n\r\nइस अवसर पर वक्ताओं ने याद दिलाया कि पंडित मदन मोहन मालवीय केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे।
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- \r\n शिक्षा के मसीहा: उन्होंने भिक्षा मांगकर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय जैसा विश्व स्तरीय संस्थान खड़ा किया, जो आज भी भारत की शान है।\r\n \r\n
- \r\n सत्यमेव जयते: भारत के राष्ट्रीय आदर्श वाक्य "सत्यमेव जयते" को लोकप्रिय बनाने का श्रेय मालवीय जी को ही जाता है।\r\n \r\n
- \r\n पत्रकारिता और वकालत: वे एक निडर पत्रकार और अद्भुत वक्ता थे। चौरी-चौरा कांड में उन्होंने ही क्रांतिकारियों का केस लड़ा और 150 से अधिक लोगों को फांसी के फंदे से बचाया था।\r\n \r\n
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धामपुर में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि उनकी विरासत आज भी जीवित है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित कर रही है।
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समापन और आभार
\r\n\r\nयज्ञ की पूर्णाहुति के बाद प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम के अंत में ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार गुप्ता ने सभी अतिथियों, विद्वान ब्राह्मणों और शहरवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ठंड और व्यस्तता के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोगों का आना यह दर्शाता है कि धामपुर के लोगों के दिल में महापुरुषों के लिए कितना सम्मान है।
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कार्यक्रम का सफल और ओजस्वी संचालन ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष अनिल शर्मा (एडवोकेट) ने किया। उन्होंने अपनी शेरो-शायरी और मालवीय जी के जीवन प्रसंगों से कार्यक्रम में समां बांधे रखा।
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धामपुर के इतिहास में यह दिन एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जहां धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।
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