नई दिल्ली/NCR: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) और विशेष रूप से ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का सीधा असर अब भारत के आम नागरिकों की जेब पर दिखने लगा है। बढ़ती महंगाई के बीच जनता को एक और बड़ा झटका लगा है। कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमतों में एक बार फिर से तेज उछाल आया है।READ ALSO:-मेरठ मेट्रो और नमो भारत स्टेशन पर दुकान खोलने का मौका: जानिए टेंडर फीस, सिक्योरिटी और जरूरी दस्तावेज
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इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने आज, मंगलवार 26 मई को CNG की कीमतों में ₹2 प्रति किलोग्राम की बड़ी बढ़ोतरी कर दी है। यह कोई आम बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि पिछले महज दो हफ्तों के भीतर सीएनजी के दामों में यह चौथी बार किया गया इजाफा है। इस फैसले से दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) सहित देश के कई प्रमुख शहरों में आवाजाही और माल ढुलाई महंगी हो गई है।
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दिल्ली और NCR के शहरों में अब क्या होंगे नए रेट्स?
\r\n\r\nIGL द्वारा की गई इस ताज़ा बढ़ोतरी के बाद, दिल्ली और इसके आसपास के शहरों (National Capital Region) में रहने वाले लोगों का बजट पूरी तरह से डगमगा गया है। 26 मई से लागू हुए सीएनजी के नए रेट्स इस प्रकार हैं:
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- \r\n दिल्ली (Delhi): देश की राजधानी में सीएनजी जो पहले ₹81.09 प्रति किलोग्राम बिक रही थी, वह अब ₹2 महंगी होकर ₹83.09 प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गई है।\r\n \r\n
- \r\n नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद (UP NCR): उत्तर प्रदेश के इन प्रमुख औद्योगिक और रिहायशी शहरों में सीएनजी भरवाने के लिए अब वाहन चालकों को ₹91.70 प्रति किलोग्राम चुकाने होंगे। यह दर दिल्ली के मुकाबले काफी ज्यादा है।\r\n \r\n
- \r\n गुरुग्राम (Haryana NCR): साइबर सिटी मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में भी सीएनजी की कीमतों ने रफ्तार पकड़ ली है। यहां नई कीमत बढ़कर ₹88.12 प्रति किलोग्राम कर दी गई है।\r\n \r\n
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पेट्रोल-डीजल ने भी तोड़ी आम आदमी की कमर
\r\n\r\nमहंगाई की यह मार सिर्फ सीएनजी वाहनों तक ही सीमित नहीं है। पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों के मालिकों को भी बड़ा झटका लगा है। इसी महीने में चौथी बार पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ाए गए हैं।
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तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने 25 मई को पेट्रोल की कीमत में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल की कीमत में ₹2.71 प्रति लीटर का इजाफा किया था।
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- \r\n पेट्रोल के नए रेट: इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब शतक पार कर ₹102.12 प्रति लीटर हो गई है।\r\n \r\n
- \r\n डीजल के नए रेट: वहीं, व्यवसायिक और कृषि कार्यों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले डीजल की कीमत बढ़कर ₹95.20 प्रति लीटर तक पहुंच गई है।\r\n \r\n
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आखिर क्यों लग रही है ईंधन की कीमतों में आग?
\r\n\r\nपेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दामों में इस बेतहाशा बढ़ोतरी की सबसे मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में मची उथल-पुथल है।
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ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुई जंग ने वैश्विक सप्लाई चेन को बुरी तरह से बाधित कर दिया है। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल के दाम औसतन 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर थे। लेकिन युद्ध की आहट और तनाव बढ़ने के साथ ही क्रूड ऑयल की कीमतों में जबरदस्त आग लग गई और यह अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। जानकारों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा, तो कच्चे तेल की आपूर्ति और बाधित होगी, जिससे कीमतें अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर भी जा सकती हैं।
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सरकारी तेल कंपनियों को हर दिन 600 करोड़ रुपए का भारी घाटा
\r\n\r\nक्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से भारतीय तेल कंपनियों पर मार्जिन का जबरदस्त दबाव आ गया था। इस आर्थिक संकट की स्थिति को स्पष्ट करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने 25 मई को एक अहम बयान दिया। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को वर्तमान में करीब 600 करोड़ रुपए प्रति दिन का घाटा उठाना पड़ रहा है।
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हालांकि, यह घाटा पहले और भी ज्यादा था। 15 मई से पहले जब तक कीमतों में बदलाव शुरू नहीं किया गया था, तब तक पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस बेचने पर कंपनियों को रोजाना लगभग 1,000 करोड़ रुपए का भारी नुकसान हो रहा था। कंपनियों ने खुद को दिवालिया होने से बचाने और घाटे की भरपाई के लिए ही अंततः उपभोक्ताओं पर यह बोझ डाला है।
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चेतावनी: अन्य जरूरी चीजों के दाम भी बढ़ेंगे (महंगाई का चेन रिएक्शन)
\r\n\r\nईंधन महंगा होने का मतलब सिर्फ गाड़ी चलाना महंगा होना नहीं है। इसका सीधा असर हर उस चीज पर पड़ता है जो हमारे घर तक पहुंचती है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, डीजल और सीएनजी महंगी होने से एक 'चेन रिएक्शन' शुरू होगा:
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- \r\n मालभाड़ा (Freight Charges) बढ़ेगा: ट्रकों, लॉरियों और मालवाहक टेम्पो का किराया तुरंत प्रभाव से बढ़ जाएगा। इसके परिणामस्वरूप दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, ताजे फल, दालें, और रोजमर्रा का राशन सीधा महंगा हो जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n खेती की लागत (Farming Cost) में इजाफा: भारत एक कृषि प्रधान देश है। खेतों की जुताई के लिए ट्रैक्टर और सिंचाई के लिए पंपिंग सेट पूरी तरह से डीजल पर निर्भर हैं। डीजल महंगा होने से किसानों की लागत बढ़ेगी, जिसका अंतिम असर अनाज और सब्जियों की खुदरा कीमतों पर पड़ेगा।\r\n \r\n
- \r\n सार्वजनिक परिवहन (Public Transport): सीएनजी और डीजल के महंगे होने से बस, ऑटो, टैक्सी और यहां तक कि बच्चों की स्कूल बसों के किराए में भी आने वाले दिनों में भारी इजाफा देखने को मिल सकता है।\r\n \r\n
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बदलता ट्रेंड: महंगी सीएनजी के बावजूद गाड़ियों की बिक्री में 50% का उछाल
\r\n\r\nएक तरफ जहां सीएनजी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सीएनजी गाड़ियों की डिमांड में कोई कमी नहीं आ रही है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का एक केस स्टडी देखें, तो पिछले तीन साल में वहां सीएनजी गाड़ियों की बिक्री में 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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भोपाल के प्रमुख कार शोरूम्स के आंकड़ों के मुताबिक, हर रोज सीएनजी बेस्ड 10 से 15 गाड़ियां बिक रही हैं। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी मुख्य वजह माइलेज (Average) है। पेट्रोल-डीजल के मुकाबले सीएनजी गाड़ियां प्रति किलो/लीटर बहुत ज्यादा माइलेज देती हैं। भले ही सीएनजी ₹80 के पार चली गई हो, लेकिन फिर भी पेट्रोल के ₹102 वाले रेट और कम माइलेज की तुलना में यह ग्राहकों के लिए लंबी दूरी में काफी किफायती साबित होती है।
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नॉलेज पार्ट (Knowledge Section): आखिर क्या है CNG और यह कैसे बनती है?
\r\n\r\nअक्सर हम पेट्रोल पंपों पर सीएनजी भरवाते हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि यह बनती कैसे है।
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CNG का पूरा नाम 'कंप्रेस्ड नेचुरल गैस' (Compressed Natural Gas) है।
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- \r\n मूल संरचना: यह मुख्य रूप से मीथेन (Methane) गैस से बनी होती है। पेट्रोल और डीजल (जो कार्बन छोड़ते हैं) के मुकाबले सीएनजी जलने पर बहुत ही कम मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसें छोड़ती है, इसीलिए इसे 'ग्रीन फ्यूल' (Green Fuel) कहा जाता है।\r\n \r\n
- \r\n यह कहां से आती है? यह गैस पृथ्वी की सतह के नीचे बने तेल और गैस के कुओं से प्राकृतिक रूप से निकाली जाती है। कई बार यह कच्चे तेल के साथ ही खदानों से प्राप्त होती है।\r\n \r\n
- \r\n प्रक्रिया (Process): खदानों से निकालने के बाद इसे सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसे रिफाइनरियों और फैक्ट्रियों में भेजा जाता है। वहां इसे रिफाइन करके इसके अंदर मौजूद नमी (Moisture) और अन्य रासायनिक अशुद्धियों को पूरी तरह से साफ किया जाता है।\r\n \r\n
- \r\n कंप्रेस करना: इसके बाद इस शुद्ध प्राकृतिक गैस पर मशीनों के जरिए बहुत ज्यादा दबाव (Pressure) डाला जाता है। इस उच्च दबाव के कारण यह गैस बहुत ही कम जगह (आयतन) में सिमट जाती है।\r\n \r\n
- \r\n अंतिम चरण: इसी अत्यधिक दबी हुई (Compressed) गैस को मोटे और बेहद मजबूत स्टील के सिलेंडरों में भरकर गाड़ियों में ईंधन (Fuel) के रूप में इस्तेमाल के लिए सीएनजी पंपों तक पहुंचाया जाता है।\r\n \r\n
Sabse pehle comment karne wale banein.