नई दिल्ली (बिज़नेस डेस्क): तंबाकू का नशा सेहत के लिए तो हानिकारक है ही, अब यह आपकी जेब के लिए भी जानलेवा साबित होने वाला है। नए साल के जश्न के बीच सरकार ने सिगरेट पीने वालों को एक तगड़ा झटका दिया है। अगर आप भी स्मोकिंग करते हैं, तो 1 फरवरी 2026 की तारीख नोट कर लीजिए, क्योंकि इस दिन से सिगरेट का कश लगाना आपकी जेब पर बहुत भारी पड़ने वाला है।READ ALSO:-1 जनवरी 2026: नए साल की सुबह आई 'खट्टी-मीठी' खबरें; गैस सिलेंडर और कारों ने दिया झटका, तो 8वें वेतन आयोग और सस्ती हवाई यात्रा ने दी मुस्कान
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सरकार द्वारा जारी किए गए एक नए नोटिफिकेशन ने तंबाकू उद्योग में खलबली मचा दी है। 31 दिसंबर की शाम को जारी इस आदेश के मुताबिक, सिगरेट पर लगने वाले टैक्स स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव किया गया है। आशंका जताई जा रही है कि इस बदलाव के चलते अगले महीने से सिगरेट की खुदरा कीमतों (MRP) में 15% से 20% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
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इस खबर का असर सिर्फ दुकानों पर ही नहीं, बल्कि दलाल स्ट्रीट (शेयर बाजार) पर भी देखने को मिला, जहां देश की सबसे बड़ी सिगरेट निर्माता कंपनी ITC के शेयरों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई।
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1. क्या है नया आदेश? समझिए पूरा मामला
\r\n\r\nवित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, सरकार ने सिगरेट पर लगने वाले 'कंपनसेशन सेस' (Compensation Cess) के ढांचे को खत्म करके उसकी जगह 'नेशनल कैलामिटी कंज़िजेंट ड्यूटी' (NCCD) यानी केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) को बढ़ा दिया है।
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- \r\n लागू होने की तारीख: नई दरें 1 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगी।\r\n \r\n
- \r\n नई दरें: अब सिगरेट की लंबाई (Length) के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक्स पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक की एक्साइज ड्यूटी वसूली जाएगी।\r\n \r\n
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बाजार के जानकारों का कहना है कि यह बदलाव सुनने में तकनीकी लग सकता है, लेकिन इसका सीधा मतलब यह है कि कंपनियों पर टैक्स का बोझ बढ़ गया है, जिसे वे ग्राहकों पर पास-ऑन (Pass-on) करेंगी।
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2. सरकार ने क्यों किया यह बदलाव? (The Inside Story)
\r\n\r\nइस फैसले के पीछे सरकार की एक सोची-समझी रणनीति और रेवेन्यू मॉडल काम कर रहा है। इसे तीन बिंदुओं में समझा जा सकता है:
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- \r\n सेस का खात्मा: सिगरेट पर अब तक 28% GST के अलावा 'कंपनसेशन सेस' लगता था। जीएसटी लागू होने के समय राज्यों को राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए यह सेस लगाया गया था। चूंकि अब वह अवधि समाप्त हो रही थी, तो सरकार ने सेस हटा दिया।\r\n \r\n
- \r\n सस्ती न हो जाए सिगरेट: अगर सरकार केवल सेस हटा देती और कुछ नहीं करती, तो सिगरेट की कीमतें धड़ाम से गिर जातीं। सरकार 'सिन गुड्स' (Sin Goods) यानी हानिकारक उत्पादों को सस्ता नहीं होने देना चाहती थी।\r\n \r\n
- \r\n रेवेन्यू की सुरक्षा: राजस्व (Revenue) को बरकरार रखने और बढ़ाने के लिए सरकार ने सेस की जगह एक 'परमानेंट एक्साइज ड्यूटी' (Permanent Excise Duty) लगा दी। लेकिन पेंच यह है कि यह ड्यूटी पुराने सेस के मुकाबले काफी ज्यादा है।\r\n \r\n
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3. कीमतें क्यों बढ़ेंगी? समझिए 'डबल टैक्स' का खेल
\r\n\r\nसिगरेट महंगी होने के पीछे सिर्फ ड्यूटी बढ़ना ही कारण नहीं है, बल्कि टैक्स कैलकुलेशन का तरीका भी जिम्मेदार है। इसे अर्थशास्त्र की भाषा में 'कैस्केडिंग इफेक्ट' (Cascading Effect) कहते हैं।
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पुराना सिस्टम: कीमत + GST + सेस = फाइनल प्राइस (यहां सेस सीधे जुड़ता था)
\r\n\r\nनया सिस्टम (1 फरवरी 2026 से): (कीमत + एक्साइज ड्यूटी) + GST = फाइनल प्राइस
\r\n\r\nअसर: नए नियम में, पहले सिगरेट की बेसिक कीमत में भारी-भरकम एक्साइज ड्यूटी जोड़ी जाएगी। इसके बाद जो बढ़ी हुई कीमत आएगी, उस पर 28% GST लगाया जाएगा। यानी, अब आपको 'टैक्स के ऊपर टैक्स' देना होगा।
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सरल उदाहरण से समझें: मान लीजिए, एक सिगरेट की फैक्ट्री कीमत ₹10 है।
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- \r\n पहले: मान लीजिए टैक्स ₹6 था (GST+सेस)। कुल कीमत = ₹16।\r\n \r\n
- \r\n अब: सेस हटा (-₹2), लेकिन एक्साइज जुड़ा (+₹4)। नई बेस कीमत हो गई ₹14। अब इस ₹14 पर GST लगेगा। यानी टैक्स का बोझ ₹6 से बढ़कर ₹8 या ₹9 हो सकता है।\r\n \r\n
- \r\n नतीजा: जो सिगरेट आपको ₹15-16 की मिलती थी, वह अब ₹18 से ₹20 की हो सकती है।\r\n \r\n
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4. शेयर बाजार में भूचाल: ITC 6 साल में सबसे ज्यादा टूटा
\r\n\r\nसिगरेट पर टैक्स बढ़ने की खबर का सबसे बुरा असर शेयर बाजार पर दिखा। निवेशक इस बात से डर गए हैं कि कीमतें बढ़ने से सिगरेट की बिक्री (Volume) में गिरावट आएगी।
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- \r\n ITC (इंडियन टोबैको कंपनी): देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी और सिगरेट कंपनी ITC के शेयर आज कारोबार के दौरान 10% तक टूट गए। साल 2020 (कोविड क्रैश) के बाद यह एक दिन में आई सबसे बड़ी गिरावट है।\r\n \r\n
- \r\n गॉडफ्रे फिलिप्स (Godfrey Phillips): 'मार्सबोरो' (Marlboro) और 'फोर स्क्वायर' जैसे ब्रांड बनाने वाली इस कंपनी के शेयरों में तो कोहराम मच गया। इसके शेयर 17.6% तक लुढ़क गए।\r\n \r\n
- \r\n VST Industries: चारमिनार जैसे ब्रांड बनाने वाली वीएसटी इंडस्ट्रीज के शेयर भी लाल निशान में गहरे गोते लगाते दिखे।\r\n \r\n
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ब्रोकरेज हाउसों ने तुरंत इन कंपनियों की रेटिंग डाउनग्रेड कर दी है। उनका मानना है कि टैक्स के इस झटके से उबरने में कंपनियों को कम से कम 2-3 तिमाहियों का समय लगेगा।
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5. आपकी जेब पर कितना असर? (Price Prediction)
\r\n\r\nहालांकि कंपनियों ने अभी तक नई प्राइस लिस्ट जारी नहीं की है, लेकिन इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने अनुमान लगाना शुरू कर दिया है।
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- \r\n रेगुलर साइज (64mm): जो सिगरेट अभी ₹10-12 की है, वह ₹13-14 की हो सकती है।\r\n \r\n
- \r\n किंग साइज (84mm): प्रीमियम सिगरेट, जो अभी ₹18-20 प्रति स्टिक मिलती है, वह ₹22-25 तक जा सकती है।\r\n \r\n
- \r\n पैक की कीमत: 10 सिगरेट का जो पैकेट अभी ₹180 का आता है, उसके ₹210 से ₹220 तक पहुंचने की संभावना है।\r\n \r\n
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6. तस्करी (Smuggling) का डर बढ़ा
\r\n\r\nटैक्स विशेषज्ञों और इंडस्ट्री बॉडीज का कहना है कि भारत में सिगरेट पर दुनिया के मुकाबले पहले से ही बहुत ज्यादा टैक्स है। अब इस नई बढ़ोतरी से लीगल (कानूनी) सिगरेट और ज्यादा महंगी हो जाएगी। इसका सीधा फायदा तस्करों को होगा। नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते आने वाली विदेशी सिगरेट (जिन पर कोई टैक्स नहीं दिया जाता) अब बाजार में और पांव पसार सकती हैं, क्योंकि वे सस्ती होती हैं। इससे न केवल हेल्थ रिस्क बढ़ेगा, बल्कि सरकार को भी राजस्व का नुकसान होगा।
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बजट से पहले का 'मिनी बजट'
\r\n\r\nआमतौर पर टैक्स से जुड़े ऐसे बड़े फैसले 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट (Union Budget) में लिए जाते हैं। लेकिन सरकार ने बजट से ठीक एक महीने पहले, नए साल के पहले दिन यह नोटिफिकेशन जारी करके अपने इरादे साफ कर दिए हैं।
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सरकार का संदेश स्पष्ट है—राजस्व से कोई समझौता नहीं होगा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों पर सख्ती जारी रहेगी। अब देखना यह होगा कि सिगरेट कंपनियां इस टैक्स बोझ का कितना हिस्सा खुद उठाती हैं और कितना हिस्सा 1 फरवरी से आपकी जेब से निकालती हैं।
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(नोट: यह रिपोर्ट बाजार के जानकारों और सरकारी नोटिफिकेशन के विश्लेषण पर आधारित है। सिगरेट की फाइनल कीमतें कंपनियों द्वारा जारी नई प्राइस लिस्ट पर निर्भर करेंगी।)
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