उत्तर प्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने और सरकारी कार्यालयों में कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आज दिनांक 30 मार्च 2026 को सीडीओ बिजनौर (मुख्य विकास अधिकारी) श्री रणविजय सिंह ने विकास खण्ड कार्यालय नूरपुर का आकस्मिक (औचक) निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ब्लॉक कार्यालय के महत्वपूर्ण दस्तावेजों और अभिलेखों की गहन जांच की, साथ ही क्षेत्र पंचायत द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों का स्थलीय सत्यापन भी किया। प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से जहां एक ओर ब्लॉक कर्मियों में हड़कंप मच गया, वहीं दूसरी ओर कार्यालय में सब कुछ सुव्यवस्थित पाए जाने पर सीडीओ बिजनौर ने विभागीय अधिकारियों की जमकर प्रशंसा भी की। (Internal link to related article: उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास योजनाओं का क्रियान्वयन और प्रशासनिक निगरानी)
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इस व्यापक निरीक्षण अभियान के तहत सीडीओ बिजनौर ने न केवल कागजी खानापूर्ति को चेक किया, बल्कि धरातल पर उतरकर अस्थाई गो आश्रय स्थलों (गौशालाओं) की वास्तविक स्थिति का भी जायजा लिया। इस विस्तृत समाचार रिपोर्ट में हम इस निरीक्षण के हर पहलू, ब्लॉक कार्यालय की कार्यप्रणाली, उपस्थित अधिकारियों की भूमिका, गौशालाओं की स्थिति और उत्तर प्रदेश सरकार की गोवंश संरक्षण नीति के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
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नूरपुर ब्लॉक कार्यालय में अचानक पहुंचे सीडीओ बिजनौर
\r\n\r\nसोमवार, 30 मार्च 2026 की सुबह नूरपुर विकास खण्ड (Block Development Office) में आम दिनों की तरह ही कामकाज चल रहा था। कर्मचारी अपनी-अपनी सीटों पर बैठे फाइलों का निपटारा कर रहे थे और ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर कार्यालय आ रहे थे। तभी अचानक सीडीओ बिजनौर रणविजय सिंह का काफिला ब्लॉक परिसर में आकर रुका। किसी भी पूर्व सूचना के बिना जिले के इतने बड़े अधिकारी के अचानक पहुंचने से ब्लॉक परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
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हालांकि, ब्लॉक कार्यालय का प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद था। निरीक्षण के समय खण्ड विकास अधिकारी (BDO) डा0 दिनेश पाल शर्मा कार्यालय में ही मौजूद थे। जैसे ही उन्हें सीडीओ बिजनौर के आगमन की सूचना मिली, उन्होंने तुरंत बाहर आकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। डा0 दिनेश पाल शर्मा ने मुख्य विकास अधिकारी को पुष्पगुच्छ (Bouquet) भेंट कर शिष्टाचार का पालन किया और उन्हें सम्मानपूर्वक कार्यालय के भीतर ले गए।
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अभिलेखों की गहन जांच और ब्लॉक कार्यालय की प्रशंसा
\r\n\r\nकार्यालय में प्रवेश करने के बाद सीडीओ बिजनौर ने बिना समय गंवाए सीधे दस्तावेजों और रजिस्टरों की जांच शुरू कर दी। एक मुख्य विकास अधिकारी का दायित्व जिले के सभी ग्रामीण विकास कार्यों, मनरेगा, पंचायती राज, और समाज कल्याण की योजनाओं की मॉनिटरिंग करना होता है। इसी दायित्व का निर्वहन करते हुए उन्होंने विकास खण्ड कार्यालय के विभिन्न पटलों (Desks) का बारीकी से निरीक्षण किया।
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उन्होंने उपस्थिति पंजिका (Attendance Register), मनरेगा के मास्टर रोल, ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों से जुड़ी पत्रावलियां (Files), और ऑडिट रिपोर्ट की जांच की। अक्सर औचक निरीक्षणों में कई तरह की कमियां, फाइलों का रखरखाव सही न होना या कर्मचारियों की अनुपस्थिति जैसी बातें सामने आती हैं, लेकिन नूरपुर ब्लॉक में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत थी।
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निरीक्षण के समय कार्यालय खण्ड विकास अधिकारी पर सभी अभिलेख (Records) पूरी तरह से दुरूस्त और अद्यतन (Updated) पाये गये। फाइलों का रखरखाव बेहद सुव्यवस्थित था और सभी योजनाओं का डेटा सही ढंग से मेंटेन किया गया था। यह देखकर सीडीओ बिजनौर काफी प्रसन्न हुए। उन्होंने इस उत्कृष्ट कार्यप्रणाली और सुशासन के लिए विकास खण्ड कार्यालय नूरपुर, विशेषकर बीडीओ डा0 दिनेश पाल शर्मा और उनके पूरे स्टाफ की खुले मंच से प्रशंसा की। यह प्रशंसा कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए एक बहुत ही सकारात्मक कदम है।
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मौके पर मौजूद रहे ब्लॉक स्तरीय अधिकारी और कर्मचारी
\r\n\r\nविकास खण्ड कार्यालय के सुचारू संचालन में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की एक पूरी टीम काम करती है। सीडीओ बिजनौर के इस निरीक्षण के दौरान कार्यालय में लगभग सभी प्रमुख अधिकारी और कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद पाए गए।
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निरीक्षण के समय कार्यालय में निम्नलिखित अधिकारी एवं कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे:
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- \r\n आर0बी0 यादव: उपायुक्त मनरेगा (Deputy Commissioner MNREGA) - मनरेगा योजना के तहत हो रहे कार्यों और रोजगार सृजन की जानकारी देने के लिए।\r\n \r\n
- \r\n गिरीश चन्द: एकाउन्टेन्ट (Accountant) - वित्तीय लेखा-जोखा और फंड रिलीज से जुड़े दस्तावेजों के साथ।\r\n \r\n
- \r\n इस्लाम बाबू: कार्यालय सहायक।\r\n \r\n
- \r\n करूणा चौहान: सहायक विकास अधिकारी पंचायत (ADO Panchayat) - ग्राम पंचायतों के विकास, स्वच्छता अभियान और पंचायत निधि के उपयोग की प्रभारी।\r\n \r\n
- \r\n सलीम अहमद: एडीओ ग्राम विकास (ADO Gram Vikas) - ग्रामीण आवास योजना, सड़क और नाली निर्माण कार्यों के पर्यवेक्षक।\r\n \r\n
- \r\n योगेश कुमार: सहायक विकास अधिकारी समाज कल्याण (ADO Social Welfare) - वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन योजनाओं का संचालन देखने वाले अधिकारी।\r\n \r\n
- \r\n सतीश कुमार: सीडीपीओ (CDPO - Child Development Project Officer) - बाल विकास, आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन और पुष्टाहार वितरण के प्रभारी।\r\n \r\n
- \r\n अनीस कुमार एवं डोली चौहान: कम्प्यूटर आँपरेटर - कार्यालय के डिजिटल कामकाज और ऑनलाइन पोर्टल पर डेटा फीडिंग की जिम्मेदारी संभालने वाले।\r\n \r\n
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इन सभी अधिकारियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि नूरपुर विकास खण्ड कार्यालय में शासन के निर्देशों का सख्ती से पालन हो रहा है और सभी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग हैं।
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क्षेत्र पंचायत द्वारा कराए गए कार्यों का स्थलीय सत्यापन
\r\n\r\nकेवल कार्यालय में कागजों को देखकर संतुष्ट हो जाना अच्छे प्रशासन की निशानी नहीं है। एक कुशल प्रशासक हमेशा कागजी दावों की जमीनी हकीकत परखता है। इसी तर्ज पर, ब्लॉक कार्यालय के अभिलेखों की जांच करने के पश्चात, सीडीओ बिजनौर रणविजय सिंह सीधे फील्ड में निकल गए।
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उन्होंने क्षेत्र पंचायत (Kshetra Panchayat) और ग्राम पंचायतों द्वारा कराए गए विकास कार्यों का स्थलीय सत्यापन (Physical Verification) किया। इस सत्यापन के तहत उन्होंने गांवों में बनी सीसी रोड (CC Roads), खड़ंजा, जल निकासी के लिए बनाई गई नालियों, और मनरेगा के तहत खोदे गए तालाबों या इंटरलॉकिंग के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने इस बात की बारीकी से जांच की कि जो निर्माण कार्य फाइलों में पूरे दिखाए गए हैं, वे वास्तव में जमीन पर बने हैं या नहीं, और उनमें इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री की गुणवत्ता (Quality of Material) कैसी है।
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इस तरह के स्थलीय निरीक्षण से ठेकेदारों और पंचायत सचिवों में यह डर बना रहता है कि उच्च अधिकारी कभी भी उनके काम की गुणवत्ता चेक कर सकते हैं, जिससे भ्रष्टाचार पर सीधे तौर पर लगाम लगती है।
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अस्थाई गो आश्रय स्थलों (गौशालाओं) का किया निरीक्षण
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है निराश्रित गोवंश का संरक्षण और उनका उचित भरण-पोषण। राज्य सरकार करोड़ों रुपये का बजट केवल गौशालाओं के निर्माण और वहां गायों के लिए चारे-पानी की व्यवस्था पर खर्च कर रही है। सरकार के इसी विजन को जमीन पर सही तरीके से लागू करवाने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है।
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स्थलीय सत्यापन के इसी क्रम में, सीडीओ बिजनौर ने विकास खण्ड नूरपुर के अंतर्गत संचालित दो प्रमुख गो आश्रय स्थलों का दौरा किया। ये गो आश्रय स्थल हैं:
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- \r\n अस्थाई गो आश्रय स्थल, मिर्जापुर ढीकली (Mirzapur Dhikli)\r\n \r\n
- \r\n अस्थाई गो आश्रय स्थल, फीना (Feena)\r\n \r\n
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इन दोनों ही गांवों में बने अस्थाई गो आश्रय स्थलों में बेसहारा और निराश्रित गायों (Stray Cattle) को आश्रय दिया गया है, ताकि वे सड़कों पर घूमकर दुर्घटनाओं का शिकार न हों और न ही किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाएं।
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गोवंशों की संख्या और हरे चारे व स्वच्छ पानी की उपलब्धता
\r\n\r\nमार्च का महीना खत्म हो रहा है और धीरे-धीरे गर्मियों ने दस्तक दे दी है। ऐसे में पशुओं के लिए पर्याप्त छाया, स्वच्छ पानी और पौष्टिक चारे की जरूरत बढ़ जाती है। सीडीओ बिजनौर ने सबसे पहले गौशालाओं में पल रहे गोवंशों की कुल संख्या का जायजा लिया।
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उन्होंने बारीकी से निरीक्षण किया कि गोवंशों की संख्या के अनुपात में गौशाला में पर्याप्त मात्रा में हरा चारा (Green Fodder), सूखा भूसा (Chaff) और पशु आहार (Cattle Feed) उपलब्ध है या नहीं। गर्मी के मौसम को देखते हुए उन्होंने पीने के पानी की खेलियों (Water Troughs) की सफाई और स्वच्छ पानी की उपलब्धता को भी विशेष रूप से चेक किया।
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निरीक्षण के दौरान परिणाम बेहद संतोषजनक रहे। दोनों ही अस्थाई गो आश्रय स्थलों (मिर्जापुर ढीकली और फीना) में पर्याप्त मात्रा में हरा चारा, भूसा और पशु आहार मौके पर उपलब्ध पाया गया। गोवंशों के स्वास्थ्य की स्थिति भी ठीक पाई गई और गौशाला परिसर में साफ-सफाई का भी उचित ध्यान रखा गया था।
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गौशालाओं में उपस्थित केयरटेकर और प्रबंधन समिति को दिशा-निर्देश
\r\n\r\nगौशाला का संचालन केवल एक व्यक्ति के बस की बात नहीं है, इसके लिए ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और केयरटेकरों की एक पूरी टीम काम करती है। गोशाला निरीक्षण के समय दोनों स्थानों पर संबंधित प्रबंधन टीम मौजूद थी।
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मिर्जापुर ढीकली गो आश्रय स्थल: जब सीडीओ बिजनौर ने मिर्जापुर ढीकली की गौशाला का निरीक्षण किया, तो वहां इसके संचालन को देख रहे ग्राम पंचायत सचिव नीरज कुमार उपस्थित थे। उनके साथ ग्राम प्रधान पुत्र शाने आलम, मनरेगा के रोजगार सेवक पंकज कुमार, और गोशाला के केयरटेकर (देखभाल करने वाले) सलाउद्दीन, सायरा और इसरार भी मौके पर मौजूद रहे। मुख्य विकास अधिकारी ने केयरटेकरों से बात की और उन्हें निर्देश दिया कि गोवंश को समय पर चारा-पानी दें और यदि कोई पशु बीमार पड़ता है, तो तुरंत पशु चिकित्सा अधिकारी (Veterinary Officer) को सूचित करें।
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फीना गो आश्रय स्थल: इसी प्रकार, जब अधिकारियों का दल अस्थाई गो आश्रय स्थल फीना पहुंचा, तो वहां गौशाला का सुचारू संचालन देख रहे ग्राम पंचायत सचिव दीपक कुमार और गो आश्रय स्थल फीना की प्रबन्धक रजनी गौहर उपस्थित रहीं। सीडीओ बिजनौर ने रजनी गौहर और दीपक कुमार के कार्यों की भी समीक्षा की और उन्हें निर्देश दिया कि गौशाला में शेड (टीन शेड) और गर्मी से बचाव के इंतजामों को और बेहतर किया जाए ताकि तेज धूप में गोवंश को परेशानी न हो।
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उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण योजना: एक व्यापक नजरिया
\r\n\r\nनूरपुर ब्लॉक में सीडीओ बिजनौर द्वारा किया गया यह गौशाला निरीक्षण कोई सामान्य रूटीन वर्क नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार की एक बहुत बड़ी और महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है।
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उत्तर प्रदेश सरकार 'मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना' (Mukhyamantri Nirasrit Govansh Sahbhagita Yojana) चला रही है। इस योजना के तहत बेसहारा गोवंश को सड़कों से हटाकर सुरक्षित गो आश्रय स्थलों में रखा जाता है। हाल ही के आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य में 6000 से अधिक अस्थाई और स्थाई गो आश्रय स्थलों में लगभग 11 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। सरकार इसके लिए करोड़ों रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित करती है। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अब सरकार इन्हें प्राकृतिक खेती, गोबर गैस प्लांट और सीएनजी उत्पादन से भी जोड़ रही है।
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ऐसे में यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि सरकार द्वारा भेजा जा रहा पैसा (भूसा और चारे का फंड) सीधे गायों के पेट तक पहुंच रहा है या नहीं। यही कारण है कि शासन स्तर से सभी जिलाधिकारियों (DM) और मुख्य विकास अधिकारियों (CDO) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे हर हफ्ते किसी न किसी गौशाला का औचक निरीक्षण अवश्य करें।
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ग्रामीण विकास में मनरेगा और पंचायती राज की महत्ता
\r\n\r\nइस औचक निरीक्षण के दौरान उपायुक्त मनरेगा और एडीओ पंचायत की उपस्थिति भी इस बात का संकेत है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में इन विभागों की भूमिका कितनी बड़ी है।
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मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत गांवों में तालाबों की खुदाई, मेड़बंदी, वृक्षारोपण और संपर्क मार्गों का निर्माण किया जाता है। इससे एक तरफ गांव का इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत होता है, तो दूसरी तरफ स्थानीय मजदूरों को उनके ही गांव में 100 दिन का पक्का रोजगार मिलता है। सीडीओ बिजनौर का यह दौरा इस बात को पुख्ता करता है कि नूरपुर विकास खण्ड में रोजगार सृजन के कार्य सुचारू रूप से चल रहे हैं और किसी भी प्रकार का 'फर्जी मस्टर रोल' (Fake Muster Roll) नहीं भरा जा रहा है, जैसा कि अक्सर शिकायतों में सामने आता है। अभिलेखों का दुरुस्त पाया जाना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है।
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प्रशासनिक कसावट से बढ़ता है जनता का विश्वास
\r\n\r\nजब कोई उच्चाधिकारी वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर सीधे ब्लॉक कार्यालयों और सुदूर गांवों (जैसे मिर्जापुर ढीकली और फीना) में पहुंचता है, तो इसके कई मनोवैज्ञानिक और प्रशासनिक लाभ होते हैं:
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- \r\n जवाबदेही (Accountability): ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों को यह पता होता है कि उनके काम की कभी भी जांच हो सकती है, इसलिए वे काम में लापरवाही नहीं बरतते।\r\n \r\n
- \r\n गुणवत्ता में सुधार (Quality Improvement): निर्माण कार्यों में ठेकेदार घटिया सामग्री का इस्तेमाल करने से डरते हैं, क्योंकि स्थलीय सत्यापन में पकड़े जाने पर सीधा मुकदमा दर्ज हो सकता है।\r\n \r\n
- \r\n कर्मचारियों में अनुशासन: औचक निरीक्षण के डर से सभी ब्लॉक कर्मचारी समय पर कार्यालय आते हैं और फाइलों को पेंडिंग नहीं रखते।\r\n \r\n
- \r\n जनता का विश्वास: जब ग्रामीण देखते हैं कि जिले के बड़े अधिकारी खुद उनके गांव की गौशालाओं और सड़कों का निरीक्षण कर रहे हैं, तो सरकार और प्रशासन के प्रति उनका विश्वास दृढ़ होता है।\r\n \r\n
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कुल मिलाकर, सीडीओ बिजनौर रणविजय सिंह का यह दौरा एक 'गुड गवर्नेंस' (सुशासन) का उत्कृष्ट उदाहरण है। बीडीओ डा0 दिनेश पाल शर्मा के नेतृत्व में नूरपुर ब्लॉक कार्यालय ने जिस प्रकार से अपने सभी रिकॉर्ड्स को अपडेट रखा है, वह जिले के अन्य ब्लॉक कार्यालयों के लिए भी एक नजीर (Example) है।
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अंततः, 30 मार्च 2026 का दिन विकास खण्ड नूरपुर के लिए काफी सकारात्मक रहा। सीडीओ बिजनौर श्री रणविजय सिंह द्वारा किए गए इस आकस्मिक निरीक्षण से यह स्पष्ट हो गया कि यदि ब्लॉक स्तर के अधिकारी (बीडीओ, एडीओ, सचिव) ईमानदारी और लगन से अपना काम करें, तो सरकारी योजनाएं कितनी सहजता से धरातल पर उतर सकती हैं। कार्यालय के अभिलेखों का दुरुस्त मिलना और मिर्जापुर ढीकली तथा फीना गौशालाओं में चारे-पानी की उत्तम व्यवस्था पाया जाना, प्रशासन की मुस्तैदी को दर्शाता है। गोवंश संरक्षण से लेकर मनरेगा के विकास कार्यों तक, नूरपुर ब्लॉक की स्थिति संतोषजनक पाई गई है। आशा है कि भविष्य में भी प्रशासनिक अधिकारी इसी तरह निरंतर स्थलीय निरीक्षण करते रहेंगे, ताकि ग्रामीण विकास की गति कभी धीमी न पड़े और जन-कल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
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संक्षिप्त सारांश (Summary): दिनांक 30 मार्च 2026 को मुख्य विकास अधिकारी (CDO) बिजनौर, रणविजय सिंह ने नूरपुर विकास खण्ड कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान बीडीओ डा0 दिनेश पाल शर्मा सहित सभी अधिकारी मौजूद रहे। कार्यालय के सभी रजिस्टर और पत्रावलियां पूरी तरह से दुरुस्त पाई गईं, जिस पर सीडीओ ने स्टाफ की कार्यप्रणाली की जमकर तारीफ की। इसके बाद उन्होंने क्षेत्र पंचायत के कार्यों का स्थलीय सत्यापन किया और मिर्जापुर ढीकली तथा फीना गांव में बने अस्थाई गो आश्रय स्थलों (गौशालाओं) का बारीकी से निरीक्षण किया। गर्मी के मौसम को देखते हुए गौशालाओं में गोवंश के लिए हरे चारे, भूसे और स्वच्छ पानी की व्यवस्था पर्याप्त पाई गई, जो स्थानीय प्रशासन और ग्राम सचिवों की अच्छी कार्यशैली का प्रमाण है।
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