देश के 81.35 करोड़ गरीबों और जरूरतमंदों की खाद्य सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कैबिनेट (CCEA) ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब राशन की दुकानों (Fair Price Shops) पर घटतौली, धांधली और कालाबाजारी बीते जमाने की बात हो जाएगी। सरकार 25,530 करोड़ रुपये के बजट के साथ भारत के राशन सिस्टम को दुनिया का सबसे हाईटेक नेटवर्क बनाने जा रही है।
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नई दिल्ली (नेशनल डेस्क): भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System - PDS) दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा नेटवर्क्स में से एक है। दशकों से इस सिस्टम में लीकेज, अनाज की कालाबाजारी और राशन डीलरों की मनमानी जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। लेकिन अब मोदी सरकार (Modi Government) ने इन सभी खामियों को जड़ से खत्म करने के लिए डिजिटल इंडिया (Digital India) की ताकत का पूरा इस्तेमाल करने का मन बना लिया है।READ ALSO:-यूपी में 15 दिन की भयंकर गर्मी के बाद 'तूफान' की एंट्री: प्रयागराज में 100 Kmph की रफ्तार से आंधी का रेड अलर्ट, 50 से ज्यादा जिलों में बारिश-ओले की चेतावनी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की अहम बैठक में देश की खाद्य सुरक्षा प्रणाली का डिजिटल कायाकल्प करने के लिए एक महत्वाकांक्षी 'अम्ब्रेला योजना' को हरी झंडी दे दी गई है। इस नई और क्रांतिकारी योजना का नाम 'सार्थक-पीडीएस' (Sarthak-PDS) रखा गया है। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए 25,530 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। यह नई व्यवस्था सीधे तौर पर देश के 81.35 करोड़ लाभार्थियों के जीवन में पारदर्शिता और सुविधा लेकर आएगी।
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क्या है 'सार्थक-पीडीएस' (Sarthak-PDS) योजना?

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'सार्थक-पीडीएस' का पूरा नाम 'Scheme for Assistance in Ration Transport and Handling-Income with Automation in PDS' है। यह कोई साधारण योजना नहीं है, बल्कि यह एक मास्टर प्लान है जिसे आगामी 5 वर्षों (31 मार्च, 2031 तक) के लिए लागू किया गया है। इसका कार्यकाल 16वें वित्त आयोग (16th Finance Commission) के चक्र के बिल्कुल अनुरूप रखा गया है।
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इस नई 'अम्ब्रेला योजना' के तहत सिस्टम की जटिलताओं को कम करने के लिए दो बड़ी और पुरानी योजनाओं का आपस में विलय (Merger) कर दिया गया है:
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    राज्यों को खाद्यान्न के अंतःराज्यीय परिवहन व राशन डीलरों के मार्जिन के लिए सहायता: जो डीलरों की आय और अनाज के ट्रांसपोर्टेशन से जुड़ी थी।
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    स्मार्ट पीडीएस (SMART PDS): जो तकनीकी ढांचे को मजबूत करने के लिए बनाई गई थी।
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इन दोनों के एकीकरण से अब देश का पूरा राशन वितरण ढांचा प्रशासनिक और तकनीकी रूप से एक ही सिंगल प्लेटफॉर्म (Single Platform) पर आ जाएगा, जिससे काम में तेजी आएगी और लालफीताशाही खत्म होगी।
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AI और ब्लॉकचेन (Blockchain): ऐसे लगेगा कालाबाजारी पर ताला

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'सार्थक-पीडीएस' का सबसे बड़ा और गेम-चेंजिंग पहलू इसका तकनीकी ढांचा है। सरकार अब राशन माफियाओं से निपटने के लिए पुलिस नहीं, बल्कि एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (Advanced Technology) का इस्तेमाल करेगी। योजना के तहत नई व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) और ब्लॉकचेन (Blockchain) तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा।
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आइए एक टेबल के जरिए समझते हैं कि यह तकनीक कैसे काम करेगी:

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तकनीक (Technology)
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काम का तरीका (How it Works)
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मुख्य फायदा (Key Benefit)
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कमांड कंट्रोल सेंटर (Command Center)
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राज्यों के स्तर पर रीयल-टाइम डेटा की 24x7 निगरानी के लिए विशेष कंट्रोल रूम बनेंगे।
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किसी भी इलाके में अनाज की कमी या चोरी का रीयल-टाइम पता चल जाएगा।
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ब्लॉकचेन ट्रैकिंग (Blockchain)
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एफसीआई (FCI) गोदाम से अनाज उठने से लेकर लाभार्थी के झोले में जाने तक की डिजिटल ट्रैकिंग।
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डेटा को कोई हैक या बदल नहीं सकेगा, अनाज रास्ते से गायब नहीं होगा।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI/ML)
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यह पिछले डेटा का विश्लेषण करके भविष्य की मांग का सटीक अनुमान लगाएगा।
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वितरण में किसी भी तरह की असामान्य गतिविधि (Fraud Pattern) को तुरंत पकड़ लेगा।
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स्मार्ट शिकायत प्रणाली (NLP)
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उपभोक्ता अपनी स्थानीय भाषा (Local Language) में बोलकर या लिखकर शिकायत कर सकेंगे।
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एआई-आधारित सिस्टम बिना इंसानी दखल के शिकायतों का त्वरित समाधान करेगा।
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विशेषज्ञों का मानना है: "ब्लॉकचेन तकनीक के लागू होने से राशन वितरण में 'जीरो लीकेज' का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। अनाज की हर बोरी का अपना एक डिजिटल फुटप्रिंट होगा, जिसे ट्रैक करना बेहद आसान होगा।"
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राशन डीलरों (Fair Price Shop Dealers) के लिए बड़ी राहत

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अक्सर देखा जाता है कि राशन डीलरों को अनाज के परिवहन और उनके कमीशन (Margin) को लेकर कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कम मार्जिन होने के कारण ही कई बार डीलर गलत रास्तों का चुनाव करते हैं। 'सार्थक-पीडीएस' योजना ने इस समस्या का भी स्थायी समाधान निकाल लिया है।
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कैबिनेट के फैसले के अनुसार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अनाज के परिवहन, रखरखाव और फेयर प्राइस शॉप (FPS) डीलरों के कमीशन पर होने वाले खर्च के लिए केंद्रीय सहायता के नियमों में बहुत व्यापक और सकारात्मक संशोधन किए गए हैं।
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    आय की सुरक्षा: केंद्र सरकार अपने मौजूदा 'फंडिंग पैटर्न' को जारी रखेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सुदूर ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक काम कर रहे राशन डीलरों की आय सुरक्षित रहे।
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    निर्बाध आपूर्ति: जब ट्रांसपोर्टरों और डीलरों को समय पर उनका उचित मेहनताना मिलेगा, तो सप्लाई चेन मजबूत होगी और अंतिम छोर (Last Mile) तक बैठे गरीब व्यक्ति को अनाज की आपूर्ति बिना किसी बाधा के मिल सकेगी।
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81.35 करोड़ लाभार्थियों को मिलेगा सम्मान और पोषण

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भारत में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत वर्तमान में 81.35 करोड़ लोग कवर किए जाते हैं। 'सार्थक-पीडीएस' योजना सीधे तौर पर इन करोड़ों परिवारों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने का काम करेगी।
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पिछले एक दशक में मोदी सरकार ने डिजिटल राशन कार्ड, आधार सीडिंग (Aadhaar Seeding), 'वन नेशन वन राशन कार्ड' (ONORC) और राशन की दुकानों पर ई-पॉश (e-PoS - Electronic Point of Sale) मशीनों का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया है। इन कदमों से करोड़ों फर्जी राशन कार्ड रद्द किए जा चुके हैं। अब 'सार्थक-पीडीएस' इस डिजिटल यात्रा का अगला और सबसे उन्नत चरण है।
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इस योजना के लागू होने से लाभार्थियों को घंटों लाइन में नहीं लगना पड़ेगा, घटतौली की शिकायतें खत्म हो जाएंगी और हर व्यक्ति को गरिमापूर्ण (Dignified) तरीके से उसका पूरा पोषण अधिकार मिलेगा।
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वैश्विक स्तर पर भारत बनेगा एक 'रोल मॉडल'

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आज पूरी दुनिया में खाद्य सुरक्षा (Food Security) एक बड़ा मुद्दा है। 'सार्थक-पीडीएस' के जरिए भारत सरकार ने यह साबित कर दिया है कि वह अपनी जनता के पेट भरने के लिए आधुनिक तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल कर सकती है। 25,530 करोड़ रुपये का यह निवेश सिर्फ एक सरकारी खर्च नहीं है, बल्कि यह भविष्य के भारत की नींव है। जब यह योजना 2031 तक पूरी तरह से लागू हो जाएगी, तो भारत की राशन व्यवस्था वैश्विक स्तर पर सबसे उन्नत, पारदर्शी और सुरक्षित नेटवर्क के रूप में जानी जाएगी, जो दुनिया के अन्य विकासशील देशों के लिए एक केस स्टडी और 'रोल मॉडल' साबित होगी।
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