शकील अहमद विशेष संवाददाताI बिजनौर, उत्तर प्रदेश: बिजनौर में गंगा नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है, जिससे किनारे बसे गांवों पर बाढ़ का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। गंगा बैराज के पास तटबंध पर लगातार हो रहे कटान के कारण प्रशासन ने मेरठ-पौड़ी हाईवे पर रोडवेज बसों और भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया है। यह फैसला तब लिया गया जब तटबंध को बचाने के 24 घंटे के प्रयास विफल हो गए।READ ALSO:-मेरठ में हाई-टेक साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़: क्रिप्टो करेंसी में चल रहा था अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का 'जाल'
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गंगा के तटबंध पर बचाव कार्य रोका गया
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पिछले 24 घंटों से गंगा के तटबंध को बचाने के लिए सैकड़ों मजदूर और मशीनें काम कर रही थीं, लेकिन कटान की रफ्तार इतनी तेज हो गई कि बचाव दल ने आखिरकार हाथ खड़े कर दिए। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने काम रोक दिया है।
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प्रशासन अब लोगों की जान बचाने की तैयारियों में जुटा है। गंगा किनारे बसे गांवों में मुनादी (घोषणा) कराई जा रही है कि लोग तटबंध टूटने के तुरंत बाद गांव खाली करने के लिए तैयार रहें। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और पीएसी की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं, ताकि आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
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रामगंगा नदी के पुल की भी टूटी सांस
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एक तरफ जहां गंगा का रौद्र रूप चिंता बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ रामगंगा नदी पर बना पुराना पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया है। भूतपुरी गांव के पास धामपुर मार्ग पर स्थित इस पुल की सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे वाहनों का निकलना मुश्किल हो रहा है। पीएनसी के अधिकारियों ने पुल की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है, जिसमें करीब एक सप्ताह का समय लग सकता है। अधिकारियों ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे पुल पर सावधानी से वाहन चलाएं।
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पूरा जिला इस समय दोहरी मार झेल रहा है, जहां एक ओर नदियों का कहर जारी है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और लोग जीवन को सामान्य बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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