बिजनौर/उत्तर प्रदेश: प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर तमाम दावों और अभियानों के बीच, उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। जंगलों के राजा कहे जाने वाले शानदार वन्यजीवों में से एक, गुलदार (तेंदुआ), मानवीय भूल और खतरनाक बुनियादी ढांचे का शिकार हो गया है।READ ALSO:-शराब और बीयर शौकीनों की जेब पर पड़ेगी भारी मार: बोतलों और कैन का पड़ा टोटा, कंपनियों ने सरकार से की 20% तक दाम बढ़ाने की मांग!
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अमानगढ़ टाइगर रिजर्व (Amangarh Tiger Reserve) के करीब स्थित बिजनौर के तराई इलाकों में गुलदारों की चहलकदमी आम बात है, लेकिन इस बार यह चहलकदमी एक दर्दनाक अंत पर जाकर खत्म हुई। नांगल सोती थाना क्षेत्र के बरकातपुर लालपुरमान इलाके में एक पूरी तरह से वयस्क मादा गुलदार 33 हजार वोल्ट की हाईटेंशन (High Tension) लाइन से चिपककर मौत की नींद सो गई। इस हृदयविदारक घटना ने वन विभाग (Forest Department) की नींद उड़ा दी है और वन्यजीवों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

खौफनाक मंजर: कैसे बिछा हवा में मौत का जाल?

\r\n\r\n
यह दुखद वाकया नांगल सोती क्षेत्र के बरकातपुर लालपुरमान में एक नहर के किनारे स्थित घने जंगल और खेतों के बीच हुआ। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, गुलदार जन्मजात रूप से बेहतरीन पर्वतारोही (Climbers) होते हैं। वे अपना शिकार करने के बाद उसे छिपाने के लिए या दिन की तेज धूप में आराम करने के लिए ऊंचे पेड़ों की घनी डालियों का इस्तेमाल करते हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    पेड़ पर चढ़ने की वो आखिरी कोशिश: स्थानीय लोगों और मौके के मुआयने से यह प्रतीत होता है कि रात के अंधेरे में या तड़के सुबह यह मादा गुलदार किसी ऊंचे पेड़ पर चढ़ने की कोशिश कर रही थी।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    अदृश्य खतरा: गुलदार को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस पेड़ को वह अपना सुरक्षित ठिकाना समझ रही है, उसी पेड़ की डालियों के ठीक ऊपर से 33KV (33,000 वोल्ट) की मौत दौड़ रही है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    पलक झपकते ही सब खत्म: जैसे ही गुलदार पेड़ की ऊपरी डालियों तक पहुंची, उसका शरीर हाईटेंशन लाइन के नंगे तारों के संपर्क में आ गया। 33 हजार वोल्ट के बिजली के झटके ने गुलदार को संभलने का एक माइक्रो-सेकंड भी नहीं दिया। एक भयानक स्पार्किंग के साथ गुलदार बुरी तरह झुलस गई और धड़ाम से पेड़ के नीचे आ गिरी। हाई-वोल्टेज करंट ने उसके नर्वस सिस्टम को पूरी तरह से नष्ट कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

नहर किनारे शव मिलते ही मची भारी सनसनी

\r\n\r\n
सुबह का वक्त था। गांव के कुछ किसान अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या के तहत नहर किनारे बने चकरोट (कच्चे रास्ते) से अपने खेतों की तरफ जा रहे थे। तभी उनकी नजर एक पेड़ के नीचे पड़ी एक बड़ी सी आकृति पर गई। पास जाकर देखा तो उनके होश उड़ गए। वहां एक विशालकाय गुलदार मृत अवस्था में पड़ी थी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    गांव में फैली दहशत: गुलदार का शव मिलने की खबर जंगल की आग की तरह पूरे बरकातपुर लालपुरमान और आसपास के गांवों में फैल गई। कुछ ही देर में मौके पर सैकड़ों ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद किसी शिकारी ने इसे मारा है या किसी अन्य जानवर से संघर्ष में इसकी जान गई है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    पुलिस और वन विभाग को सूचना: ग्रामीणों की मुस्तैदी के चलते तुरंत नांगल सोती थाना पुलिस और सामाजिक वानिकी (Social Forestry) विभाग के अधिकारियों को इस घटना की सूचना दी गई।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

वन विभाग का त्वरित एक्शन और पोस्टमार्टम की तैयारी

\r\n\r\n
सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू और इन्वेस्टिगेशन टीम लाव-लश्कर के साथ मौके पर पहुंच गई। टीम ने सबसे पहले ग्रामीणों की भीड़ को घटनास्थल से दूर किया ताकि किसी भी तरह के वैज्ञानिक साक्ष्यों (Forensic Evidences) से छेड़छाड़ न हो सके।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    अधिकारियों ने की पुष्टि: मौके पर पहुंचे सामाजिक वानिकी के वन दरोगा विकास कुमार ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने मीडिया और ग्रामीणों को जानकारी देते हुए बताया कि, "यह एक मादा गुलदार (Female Leopard) है। इसके दांतों और शारीरिक संरचना को देखकर इसकी उम्र लगभग 6 वर्ष आंकी जा रही है। प्रथम दृष्टया, इसके शरीर पर मौजूद झुलसने के निशान इस बात की पुष्टि करते हैं कि इसकी मौत ऊपर से गुजर रही 33 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से हुई है।"
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    शव को लिया कब्जे में: वन विभाग की टीम ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की गाइडलाइंस का पालन करते हुए मादा गुलदार के शव को एक जाल में सुरक्षित रूप से लपेटा और उसे अपने वाहन में रखकर पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    विशेषज्ञों का पैनल करेगा जांच: वन अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में तीन पशु चिकित्सकों (Veterinarians) का एक विशेष पैनल गुलदार का पोस्टमार्टम करेगा। पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। विसरा (Viscera) के नमूने सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि अगर जहर खुरानी (Poisoning) का कोई एक प्रतिशत भी अंदेशा हो, तो उसे लैब टेस्ट के जरिए स्पष्ट किया जा सके।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

इकोसिस्टम को अपूरणीय क्षति: क्यों महत्वपूर्ण थी यह मादा गुलदार?

\r\n\r\n
वन्यजीव जीवविज्ञानियों (Wildlife Biologists) के नजरिए से देखें तो एक 6 वर्षीय मादा गुलदार की मौत सिर्फ एक जानवर की मौत नहीं है, बल्कि यह पूरे प्राकृतिक संतुलन के लिए एक बड़ा झटका है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
6 वर्ष की उम्र एक मादा गुलदार के लिए उसकी 'प्राइम रिप्रोडक्टिव एज' (मुख्य प्रजनन आयु) होती है। एक स्वस्थ मादा अपने जीवनकाल में कई शावकों को जन्म देकर तेंदुए की आबादी को बनाए रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस मादा गुलदार की मौत का सीधा अर्थ है कि जंगल ने भविष्य की एक पूरी पीढ़ी को खो दिया है। यह बिजनौर के जंगलों के इकोसिस्टम (Ecosystem) के लिए एक भारी और अपूरणीय क्षति है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

विकास या विनाश: 'साइलेंट किलर' बने नंगे तार

\r\n\r\n
बिजनौर में गुलदारों की अच्छी खासी तादाद है। गन्ने के खेत उनके छिपने और शिकार के लिए मुफीद जगह माने जाते हैं। लेकिन जिस तरह से जंगलों और कृषि भूमियों के बीच से बिजली के नंगे तारों का संजाल बिछाया गया है, वह इन जानवरों के लिए 'साइलेंट किलर' (खामोश कातिल) का काम कर रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    पेड़ों का तारों से छूना: बारिश या आंधी के समय पेड़ों की डालियां अक्सर इन हाईटेंशन लाइनों से छू जाती हैं, जिससे पूरे पेड़ में करंट दौड़ने लगता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    अंडरग्राउंड केबलिंग का अभाव: विकसित देशों में वन्यजीव बहुल क्षेत्रों (Wildlife Corridors) में बिजली की लाइनें अंडरग्राउंड (भूमिगत) होती हैं या उन पर भारी इंसुलेशन होता है। लेकिन हमारे यहां बजट के अभाव या लापरवाही के चलते नंगे तारों का ही इस्तेमाल होता है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पर्यावरण प्रेमियों की अपील: व्यवस्था में सुधार की दरकार

\r\n\r\n
इस घटना के बाद बिजनौर के स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े एनजीओ (NGOs) ने बिजली विभाग और जिला प्रशासन के सामने कुछ गंभीर मांगें रखी हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    कवर्ड वायर (AB Cables) का इस्तेमाल: जंगली क्षेत्रों और नहर पटरियों के पास से गुजरने वाली सभी 11KV और 33KV लाइनों को तुरंत 'कवर्ड इंसुलेटेड वायर' (AB Cable) में बदला जाए।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    नियमित प्रूनिंग (पेड़ों की छंटाई): मानसून से पहले और बाद में बिजली लाइनों के नीचे या आसपास उग आए पेड़ों और उनकी डालियों की नियमित छंटाई की जाए, ताकि कोई जानवर तारों तक न पहुंच सके।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    जॉइंट पेट्रोलिंग: वन विभाग और पावर कॉर्पोरेशन की एक संयुक्त टीम इलाके का सर्वे करे और उन सभी डेंजर पॉइंट्स (Danger Points) को चिन्हित करे जहां वन्यजीवों को करंट लगने का खतरा सबसे ज्यादा है।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
बिजनौर के नांगल सोती में हाईटेंशन लाइन से झुलसकर मादा गुलदार की यह मौत एक अलार्म बेल (खतरे की घंटी) है। हमें यह समझना होगा कि विकास की अंधाधुंध दौड़ में हम उन बेजुबानों के घर (जंगल) में घुसपैठ कर रहे हैं, जिन्हें खुद की सुरक्षा के लिए इंसानी नियमों का ज्ञान नहीं है। जब तक बिजली विभाग और वन विभाग समन्वय बनाकर इन 'मौत के तारों' का कोई सुरक्षित विकल्प नहीं खोजते, तब तक ऐसे दर्दनाक हादसे हमारे इकोसिस्टम को यूं ही लहूलुहान करते रहेंगे। फिलहाल, वन विभाग को फाइनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद आगे की विभागीय और कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें