बिजनौर की फिजाओं में आज व्यापारियों के आक्रोश की गूंज सुनाई दी। जिले के सबसे प्रतिष्ठित व्यापारी संगठनों में से एक, पश्चिम उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने आज कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन महज एक धरना नहीं था, बल्कि प्रशासन और पुलिस तंत्र के खिलाफ व्यापारियों का शक्ति प्रदर्शन था। मुद्दा दो-धारी था—एक तरफ सरकारी विभागों (जीएसटी और खाद्य विभाग) की कथित मनमानी और दूसरी तरफ शहर के नामचीन सरिया व्यापारी हाजी जहीर अहमद के दामन पर लगे दाग को धोने की कोशिश।Read also:-मेरठ में रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात! पत्नी बैंक गई, पीछे से पति ने डेढ़ साल के मासूम को अकेला छोड़ लगा ली फांसी
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हाजी जहीर अहमद, जो जिले के एक रसूखदार और बुजुर्ग व्यापारी हैं, इन दिनों अपनी ही पुत्रवधू द्वारा लगाए गए 'अजमत से खिलवाड़' जैसे संगीन आरोपों से घिरे हैं। जहां पुलिस इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है, वहीं व्यापार मंडल ने अपना फैसला सुना दिया है—उनके अनुसार, हाजी जहीर निर्दोष हैं और यह सब एक गहरी साजिश का हिस्सा है।
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कलेक्ट्रेट में जनसैलाब: विरोध का बिगुल
\r\n\r\nआज सुबह से ही बिजनौर के बाजारों में एक अलग तरह की हलचल थी। पश्चिम उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के आह्वान पर जिले भर के व्यापारी अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों से निकलकर कलेक्ट्रेट की ओर कूच करने लगे। देखते ही देखते कलेक्ट्रेट परिसर नारों से गूंज उठा।
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व्यापारियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर "व्यापारियों का उत्पीड़न बंद करो", "हाजी जहीर को न्याय दो", और "भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम लगाओ" जैसे नारे लिखे थे। प्रदर्शनकारी व्यापारियों का नेतृत्व कर रहे मंडल के पदाधिकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि व्यापारियों के सम्मान के साथ खिलवाड़ बंद नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
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जुलूस की शक्ल में पहुंचे व्यापारियों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया। भीड़ का आक्रोश इस बात का सबूत था कि अंदरखाने व्यापारियों में प्रशासन के प्रति कितना गुस्सा भरा है। यह गुस्सा सिर्फ एक घटना का नहीं, बल्कि कई महीनों से दबे हुए असंतोष का विस्फोट था।
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मुद्दा नंबर एक: हाजी जहीर प्रकरण – आरोप, साजिश और सियासत
\r\n\r\nआज के प्रदर्शन का सबसे संवेदनशील और चर्चित मुद्दा शहर के मशहूर सरिया व्यापारी हाजी जहीर अहमद का प्रकरण था।
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क्या है पूरा मामला? बिजनौर के संभ्रांत व्यापारियों में गिने जाने वाले हाजी जहीर पर उन्हीं की पुत्रवधू ने बेहद गंभीर और शर्मनाक आरोप लगाए हैं। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, पुत्रवधू ने अपने ससुर पर उसकी 'अजमत से खेलने' (छेड़छाड़/दुराचार का प्रयास) का आरोप लगाया है। यह खबर पूरे जिले में आग की तरह फैल गई और सामाजिक व व्यापारिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और हर पहलू को खंगाला जा रहा है।
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व्यापारियों का तर्क: "साजिश का शिकार हुए हाजी साहब" आमतौर पर ऐसे मामलों में समाज चुप्पी साध लेता है, लेकिन बिजनौर में तस्वीर अलग दिखी। व्यापार मंडल खुलकर हाजी जहीर के समर्थन में आ गया है। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"हाजी जहीर साहब एक बुजुर्ग व्यक्ति हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा और व्यापार में ईमानदारी से बिताया है। इस उम्र में उन पर ऐसे घिनौने आरोप लगाना न केवल हास्यास्पद है, बल्कि यह उन्हें सामाजिक रूप से बदनाम करने की एक घिनौनी साजिश है। हम इस आरोप को सिरे से खारिज करते हैं।"\r\n
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व्यापारियों ने दलील दी कि यह पारिवारिक कलह या संपत्ति विवाद का मामला हो सकता है, जिसे 'अपराधिक रंग' देकर एक बुजुर्ग को ब्लैकमेल करने या नीचा दिखाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि जांच को एकतरफा न रखा जाए, बल्कि आरोपों के पीछे की मंशा (Motive) की भी जांच हो।
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साजिशकर्ताओं पर कार्यवाही की मांग ज्ञापन के माध्यम से व्यापारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में आरोप झूठे पाए जाते हैं, तो उन लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए जिन्होंने एक सम्मानित व्यक्ति की छवि धूमिल करने की कोशिश की है। उन्होंने इसे 'हनी ट्रैप' या 'कानून के दुरुपयोग' जैसा मामला होने का भी अंदेशा जताया।
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मुद्दा नंबर दो: 'इंस्पेक्टरी राज' की वापसी? (GST और खाद्य विभाग का खौफ)
\r\n\r\nप्रदर्शन का दूसरा सबसे बड़ा पहलू व्यापारियों की रोजमर्रा की मुश्किलें थीं। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) और जीएसटी (GST) विभाग के अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं।
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उत्पीड़न के आरोप: व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के सीजन हो या सामान्य दिन, अधिकारी चेकिंग के नाम पर दुकानों में घुसते हैं और भय का माहौल पैदा करते हैं।
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- \r\n खाद्य विभाग: मिठाई विक्रेताओं, किराना व्यापारियों और होटल मालिकों का आरोप है कि 'सैंपलिंग' (Sampling) के नाम पर उन्हें डराया जाता है। छोटी-मोटी कमियों को आधार बनाकर भारी जुर्माने की धमकी दी जाती है और कथित तौर पर सुविधा शुल्क (रिश्वत) की मांग की जाती है।\r\n \r\n
- \r\n GST विभाग: जीएसटी सर्वे और छापेमारी के नाम पर व्यापारियों का मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि वे ईमानदारी से टैक्स भरते हैं, इसके बावजूद उन्हें चोर समझा जाता है और कागजी कमियों का हवाला देकर परेशान किया जाता है।\r\n \r\n
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प्रदर्शनकारियों ने एक सुर में कहा, "हम व्यापारी हैं, चोर नहीं। सरकार को राजस्व हम देते हैं, लेकिन बदले में हमें सिर्फ जिल्लत और डर मिलता है। इस 'इंस्पेक्टरी राज' को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
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ज्ञापन: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार
\r\n\r\nप्रदर्शन के समापन पर, पश्चिम उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी (DM) बिजनौर से मुलाकात की। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
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ज्ञापन के मुख्य बिंदु:
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- \r\n हाजी जहीर प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच: स्थानीय पुलिस के अलावा, इस मामले की निगरानी उच्च अधिकारियों द्वारा की जाए ताकि कोई भी निर्दोष जेल न जाए।\r\n \r\n
- \r\n झूठे मुकदमे वापस हों: यदि जांच में हाजी जहीर निर्दोष पाए जाते हैं, तो मुकदमा तुरंत वापस हो और शिकायतकर्ता पर मानहानि का केस दर्ज हो।\r\n \r\n
- \r\n विभागीय प्रताड़ना पर रोक: खाद्य विभाग और जीएसटी विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे व्यापारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें। लक्ष्य पूरा करने के दबाव में व्यापारियों का शोषण बंद हो।\r\n \r\n
- \r\n व्यापारी सुरक्षा: जिले में व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।\r\n \r\n
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व्यापार मंडल की चेतावनी: "यह तो अंगड़ाई है..."
\r\n\r\nव्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने मीडिया से बात करते हुए साफ कर दिया कि आज का प्रदर्शन सिर्फ एक चेतावनी है। उन्होंने कहा, "अगर एक हफ्ते के भीतर प्रशासन ने हमारी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया और हाजी जहीर साहब को न्याय नहीं मिला, तो हम बिजनौर बंद (Bijnor Bandh) का आह्वान करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।"
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संगठन ने यह भी कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर लखनऊ तक जाएंगे और उद्योग मंत्री तथा डीजीपी से भी मुलाकात करेंगे।
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पुलिस का पक्ष: "कानून अपना काम करेगा"
\r\n\r\nदूसरी ओर, पुलिस प्रशासन इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि हाजी जहीर पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज अगेंस्ट वुमन या संबंधित धाराओं) के हैं।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"कानून के लिए सब बराबर हैं, चाहे वह कोई बड़ा व्यापारी हो या आम नागरिक। महिला द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। साक्ष्य संकलन (Evidence Collection) का काम चल रहा है। अगर आरोप झूठे पाए गए तो पुलिस अंतिम रिपोर्ट (Final Report) लगाएगी, लेकिन अगर सबूत मिले तो गिरफ्तारी भी संभव है। व्यापारियों का प्रदर्शन जांच को प्रभावित नहीं कर सकता।"\r\n
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बिजनौर की सियासत पर असर
\r\n\r\nबिजनौर में व्यापारियों का यह आंदोलन सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि इसके गहरे सामाजिक और राजनीतिक मायने भी हैं।
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- \r\n एकता का संदेश: हाजी जहीर प्रकरण में जिस तरह से हिंदू और मुस्लिम व्यापारी एक मंच पर आए हैं, वह व्यापार मंडल की एकता को दर्शाता है। आमतौर पर ऐसे व्यक्तिगत मामलों में संगठन दूरी बना लेते हैं, लेकिन यहाँ 'व्यापारी हित' को सर्वोपरि रखा गया है।\r\n \r\n
- \r\n प्रशासन पर दबाव: एक तरफ महिला सुरक्षा के कड़े कानून और दूसरी तरफ प्रभावशाली व्यापारी वर्ग का दबाव—जिला प्रशासन के लिए यह स्थिति 'इधर कुआं, उधर खाई' जैसी हो गई है।\r\n \r\n
- \r\n आर्थिक पहलू: अगर व्यापारी अपनी धमकी के अनुसार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाते हैं, तो जिले की अर्थव्यवस्था और राजस्व पर बुरा असर पड़ सकता है।\r\n \r\n
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बिजनौर कलेक्ट्रेट में आज का दिन गहमागहमी भरा रहा। पश्चिम उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अपने साथी व्यापारियों के अपमान और उत्पीड़न पर चुप नहीं बैठेंगे। हाजी जहीर का मामला अब न्यायालय से पहले 'जन-अदालत' और 'सड़क' पर आ गया है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यालय इस ज्ञापन पर क्या संज्ञान लेता है और क्या पुलिस अपनी जांच में 'साजिश' के दावे की पुष्टि करती है या आरोपों को सही पाती है।
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फिलहाल, बिजनौर का व्यापारी वर्ग अपनी सांसें थामे पुलिस की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।
Sabse pehle comment karne wale banein.