बिजनौर (प्रशासनिक डेस्क/खबरीलाल): "मानवाधिकार केवल सेमिनारों में बोलने का विषय नहीं है, बल्कि यह प्रशासन की कार्रवाई का आधार होना चाहिए।" यह संदेश आज बिजनौर के विकास भवन (Vikas Bhawan) के सभागार में गूंजा, जब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली के सदस्य प्रियंक कानूनगो (Priyank Kanoongo) जिले के आला अधिकारियों के साथ रूबरू हुए।READ ALSO:-Meerut Development: सोहराबगेट बस अड्डे का 'मेकओवर'! फरवरी से चलेगा बुलडोजर, 2 साल बाद मिलेगा एयरपोर्ट जैसा अहसास; लेकिन अभी 'गोभी-गेहूं' ने फंसाया पेंच
\r\n\r\n\r\n\r\n
जिला स्तर पर मानवाधिकारों को मजबूत करने और विकास की अवधारणा को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से आयोजित इस अहम बैठक ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। बैठक में न केवल विभागों के पेंच कसे गए, बल्कि समाज के सबसे वंचित तबके—जेल में बंद बुजुर्ग कैदियों और विधवा/वृद्धा पेंशन पाने वाले बुजुर्गों—के लिए ऐतिहासिक फैसले लिए गए।
\r\n\r\n\r\n\r\n
'खबरीलाल' की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि बंद कमरे में हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में क्या फैसले लिए गए, 70 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए सरकार की नई सोच क्या है और बिजनौर प्रशासन अब किस रोडमैप पर काम करेगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
विकास भवन में 'समीक्षा' का दौर
\r\n\r\nबुधवार की सुबह बिजनौर विकास भवन के सभागार का नजारा आम दिनों से अलग था। जिले के तमाम बड़े अधिकारी फाइलों के साथ तैयार थे। मौका था राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक का।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
बैठक की गरिमा और उपस्थिति: बैठक की अध्यक्षता स्वयं NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने की। मंच पर और सभागार में जिले की प्रशासनिक मशीनरी के प्रमुख चेहरे मौजूद थे:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n वान्या सिंह: अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) - इन्होंने प्रशासन का पक्ष रखा।\r\n \r\n
- \r\n दिनकर भारती: परियोजना निदेशक, डीआरडीए (DRDA) - ग्रामीण विकास की योजनाओं का ब्यौरा दिया।\r\n \r\n
- \r\n रचना गुप्ता: जिला विकास अधिकारी (DDO) - विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट पेश की।\r\n \r\n
- \r\n अन्य: स्वास्थ्य, समाज कल्याण, प्रोबेशन और जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।\r\n \r\n
\r\n\r\n
सबसे बड़ा फैसला - 'कैदियों को स्वास्थ्य का अधिकार'
\r\n\r\nइस बैठक का सबसे मानवीय और महत्वपूर्ण पहलू जिला कारागार (District Jail) में बंद बुजुर्ग कैदियों को लेकर रहा। अक्सर जेल में बंद कैदियों के मानवाधिकारों पर चर्चा होती है, लेकिन स्वास्थ्य सुरक्षा पर ठोस कदम कम ही उठाए जाते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
70 पार कैदियों को 'आयुष्मान कवच'
\r\n\r\nप्रियंक कानूनगो ने स्पष्ट शब्दों में निर्देशित किया कि अपराध की सजा भुगत रहे व्यक्ति के भी मानवाधिकार होते हैं, खासकर स्वास्थ्य के मामले में।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n आदेश: जिला कारागार में निरुद्ध 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी कैदियों को अनिवार्य रूप से आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Scheme) से जोड़ा जाए।\r\n \r\n
- \r\n क्यों है जरूरी: जेल में बंद बुजुर्ग अक्सर गंभीर बीमारियों से ग्रसित होते हैं। जेल अस्पतालों में सीमित संसाधन होते हैं। आयुष्मान कार्ड बनने से उन्हें बड़े अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा। यह कदम कैदियों के 'जीवन के अधिकार' (Article 21) को सुरक्षित करेगा।\r\n \r\n
\r\n\r\n
पेंशन धारकों के लिए 'डबल डोज'
\r\n\r\nNHRC सदस्य का फोकस सिर्फ जेल तक सीमित नहीं था। उन्होंने समाज के उन बुजुर्गों की भी सुध ली जो सरकारी पेंशन पर आश्रित हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
वृद्धा और विधवा पेंशनर्स को तोहफा
\r\n\r\nबैठक में यह मुद्दा उठा कि कई बुजुर्ग जो वृद्धा पेंशन (Old Age Pension) या विधवा पेंशन (Widow Pension) ले रहे हैं, वे बीमारी के वक्त इलाज के खर्च से टूट जाते हैं।
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n निर्देश: जिले में जितने भी लाभार्थी वृद्धा या विधवा पेंशन ले रहे हैं और उनकी उम्र 70 वर्ष पूर्ण हो चुकी है, उनका आयुष्मान कार्ड प्राथमिकता के आधार पर बनाया जाए।\r\n \r\n
- \r\n मकसद: यह सुनिश्चित करना कि जिसे सामाजिक सुरक्षा (पेंशन) मिल रही है, उसे स्वास्थ्य सुरक्षा भी मिले। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे समाज कल्याण विभाग के डेटा का मिलान स्वास्थ्य विभाग से करें और कैंप लगाकर कार्ड बनाएं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
मानवाधिकारों का सम्मान - प्रगति की नींव
\r\n\r\nबैठक के दौरान प्रियंक कानूनगो ने एक दार्शनिक और प्रशासनिक सूत्र वाक्य दिया— "मानवाधिकारों का सम्मान करना चाहिए, तभी समाज की प्रगति की आधारशिला रखी जा सकती है।"
\r\n\r\n\r\n\r\n
जागरूकता शिविर (Awareness Camps)
\r\n\r\nअक्सर देखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अपने अधिकारों का पता ही नहीं होता। पुलिस की ज्यादती हो या राशन डीलर की मनमानी, गरीब आदमी चुपचाप सह लेता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n समाधान: NHRC सदस्य ने निर्देश दिया कि जिले में व्यापक स्तर पर मानवाधिकार जागरूकता शिविर लगाए जाएं।\r\n \r\n
- \r\n लक्ष्य: "कोई भी व्यक्ति जानकारी के अभाव में लाभ से वंचित न रहे।" इन शिविरों में बताया जाए कि अगर किसी के अधिकारों का हनन हो रहा है, तो वह कहां शिकायत कर सकता है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
बच्चों के भविष्य पर चिंता - JJB और CWC की समीक्षा
\r\n\r\nकिसी भी समाज का भविष्य उसके बच्चों में होता है। बैठक में बाल अधिकारों (Child Rights) पर विशेष चर्चा हुई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board)
\r\n\r\nप्रियंक कानूनगो ने किशोर न्याय बोर्ड के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने पूछा कि बाल अपराधियों (Juveniles) के कितने मामले लंबित हैं और उनके पुनर्वास के लिए क्या किया जा रहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee - CWC)
\r\n\r\nअनाथ, लावारिस या मुसीबत में फंसे बच्चों की देखरेख करने वाली CWC की भी क्लास लगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n निर्देश: बच्चों के मामलों में संवेदनशीलता बरती जाए। गोद लेने (Adoption) की प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाया जाए। बाल श्रम और भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को रेस्क्यू कर मुख्यधारा में लाया जाए।\r\n \r\n
\r\n\r\n
विभागों की 'बिंदुवार' स्कैनिंग
\r\n\r\nयह बैठक केवल भाषणबाजी तक सीमित नहीं थी। प्रियंक कानूनगो ने एक मझे हुए प्रशासक की तरह सभी विभागों की बिंदुवार समीक्षा (Point-wise Review) की।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n राजस्व विभाग: एडीएम वित्त वान्या सिंह से भूमि विवादों और पट्टों के आवंटन में दलितों/वंचितों के अधिकारों की स्थिति जानी।\r\n \r\n
- \r\n ग्रामीण विकास: पीडी दिनकर भारती और डीडीओ रचना गुप्ता से मनरेगा, आवास योजना और शौचालयों की स्थिति पर सवाल किए गए। मानवाधिकार का तकाजा है कि हर व्यक्ति के पास छत और गरिमापूर्ण जीवन (शौचालय) हो।\r\n \r\n
- \r\n स्वास्थ्य विभाग: अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और डॉक्टरों की उपस्थिति पर रिपोर्ट तलब की गई।\r\n \r\n
\r\n\r\n
नीति से 'कार्रवाई' तक का सफर
\r\n\r\nइस बैठक का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह रहा कि बिजनौर में मानवाधिकार अब फाइलों से निकलकर एक्शन मोड में आ गया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"यह बैठक संकेत देती है कि मानव अधिकार अब केवल नीतिगत चर्चा (Policy Discussion) नहीं, अपितु प्रशासनिक कार्रवाई (Administrative Action) का आधार बने हैं।"\r\n
\r\n\r\n
इसका मतलब है कि अब अधिकारी यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकते कि बजट नहीं था या नियम नहीं थे। अगर किसी बुजुर्ग को इलाज नहीं मिला या किसी बच्चे को न्याय नहीं मिला, तो इसे मानवाधिकार हनन माना जाएगा और सीधी कार्रवाई होगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आगे की राह
\r\n\r\nबिजनौर विकास भवन में हुई यह बैठक आने वाले दिनों में जिले की प्रशासनिक कार्यशैली में बदलाव का कारण बनेगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n जेल प्रशासन को अब बुजुर्ग कैदियों की सूची तैयार करनी होगी।\r\n \r\n
- \r\n समाज कल्याण विभाग को 70+ पेंशनरों का डेटा फिल्टर करना होगा।\r\n \r\n
- \r\n आम जनता को जागरूकता शिविरों के माध्यम से एक नया मंच मिलेगा।\r\n \r\n
\r\n\r\n
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की यह सक्रियता बताती है कि दिल्ली में बैठे आयोग की नजर अब जिलों की जमीनी हकीकत पर है। प्रियंक कानूनगो के कड़े तेवर ने स्पष्ट कर दिया है कि कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
खबरीलाल की राय: बुजुर्ग कैदियों को आयुष्मान भारत से जोड़ने का फैसला स्वागत योग्य है। सजा अपराध की होती है, शरीर की नहीं। एक सभ्य समाज की पहचान इससे होती है कि वह अपने कैदियों और बुजुर्गों के साथ कैसा व्यवहार करता है। उम्मीद है बिजनौर प्रशासन इन निर्देशों को उतनी ही गंभीरता से लागू करेगा, जितनी गंभीरता बैठक में दिखाई गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
(बिजनौर के विकास और प्रशासनिक हलचल की हर खबर के लिए जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ।)
\r\n\r\n\r\n\r\n
FAQ: आम जनता के लिए जरूरी जानकारी
\r\n\r\nप्रश्न 1: 70 वर्ष से अधिक के पेंशनर्स आयुष्मान कार्ड कैसे बनवाएं?
\r\n\r\nउत्तर: प्रशासन जल्द ही कैंप लगाएगा। आप अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) पर जाकर भी अपना पेंशन पीपीओ (PPO) नंबर और आधार कार्ड दिखाकर चेक कर सकते हैं।
\r\n\r\nप्रश्न 2: मानवाधिकार हनन की शिकायत कहां करें?
\r\n\r\nउत्तर: आप सीधे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की वेबसाइट पर या जिले में लगने वाले जागरूकता शिविरों में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
\r\n\r\nप्रश्न 3: क्या जेल में बंद सभी कैदियों को आयुष्मान लाभ मिलेगा?
\r\n\r\nउत्तर: अभी निर्देश विशेष रूप से 70 वर्ष से अधिक आयु के कैदियों के लिए दिया गया है, क्योंकि वे स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे अधिक संवेदनशील हैं।
\r\n\r\nप्रश्न 4: बाल कल्याण समिति (CWC) क्या करती है?
\r\n\r\nउत्तर: अगर आपको कोई लावारिस बच्चा मिले या किसी बच्चे पर अत्याचार हो रहा हो, तो आप CWC को सूचित कर सकते हैं। वे बच्चे की सुरक्षा और पुनर्वास की जिम्मेदारी लेते हैं।
\r\n\r\nरिपोर्टिंग: अनिल कुमार शर्मा, खबरीलाल विशेष संवाददाता स्थान: धामपुर, बिजनौर (यूपी)
Sabse pehle comment karne wale banein.