उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही बिजनौर के शिया समुदाय में गहरा आक्रोश और शोक की लहर दौड़ गई है। इस घटना को लेकर नगीना देहात के प्रसिद्ध जोगीपुरा दरगाह क्षेत्र में शिया समुदाय के लोगों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। यह बिजनौर न्यूज सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि अली खामेनेई के चाहने वालों की संख्या इस क्षेत्र में काफी अधिक है।READ ALSO:-दुल्हेंडी 2026 का महा-पर्व: रंगों की फुहार, श्रीकृष्ण का प्रेम और बुराई पर अच्छाई की जीत; जानें 'रंगवाली होली' का संपूर्ण और रहस्यमयी इतिहास
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बिजनौर न्यूज: शहादत पर जंजीर का मातम और कैंडल मार्च

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नगीना देहात क्षेत्र के जोगीपुरा दरगाह परिसर में आज माहौल काफी गमगीन रहा। अली खामेनेई की मौत को शिया समुदाय 'शहादत' के रूप में देख रहा है। इस मौके पर समुदाय के पुरुषों ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए 'जंजीर का मातम' किया। ढोल की थाप और धार्मिक नारों के बीच युवाओं और बुजुर्गों ने खुद को जंजीरों से लहूलुहान कर अपना दुख प्रकट किया।
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वहीं दूसरी ओर, महिलाओं ने भी इस शोक में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में शिया समुदाय की महिलाओं ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर एक विशाल 'कैंडल मार्च' निकाला। महिलाओं का कहना था कि अली खामेनेई ने हमेशा मजलूमों की आवाज उठाई और उनकी मौत पूरे इस्लामिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। बिजनौर न्यूज के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए स्थानीय पुलिस भी मुस्तैद रही।
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अमेरिका और इजरायल के खिलाफ लगाए नारे

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विरोध प्रदर्शन के दौरान शिया समुदाय के लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर देखा गया। प्रदर्शनकारियों ने इस घटना के लिए वैश्विक राजनीति को जिम्मेदार ठहराते हुए अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। "अमेरिका मुर्दाबाद" और "इजरायल मुर्दाबाद" के नारों से पूरा जोगीपुरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ईरान के नेतृत्व को कमजोर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साजिशें रची जा रही हैं।
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चाहने वालों में गम का माहौल

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अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद न केवल नगीना देहात, बल्कि बिजनौर के अन्य क्षेत्रों जैसे किरतपुर और मंडावर में भी शिया समुदाय के घरों में चूल्हे नहीं जले। लोगों ने अपने व्यापारिक संस्थान बंद रखे और मस्जिदों व इमामबाड़ों में विशेष मजलिसों का आयोजन किया गया। स्थानीय मौलानाओं ने अली खामेनेई के जीवन और उनके संघर्षों पर प्रकाश डाला।
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उनका कहना है कि खामेनेई केवल ईरान के नेता नहीं थे, बल्कि वे दुनिया भर के शिया समुदाय के लिए एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक की तरह थे। उनकी मौत से पैदा हुआ यह शून्य भरना नामुमकिन है। बिजनौर न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल लगातार गश्त कर रहा है।
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बिजनौर के नगीना देहात में हुआ यह प्रदर्शन अली खामेनेई के प्रति शिया समुदाय की गहरी आस्था और जुड़ाव को दर्शाता है। जंजीर का मातम और कैंडल मार्च के जरिए लोगों ने अपनी संवेदनाएं तो व्यक्त की ही हैं, साथ ही वैश्विक शक्तियों के प्रति अपना कड़ा विरोध भी दर्ज कराया है। प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है ताकि शोक की इस घड़ी में कानून-व्यवस्था बनी रहे।
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ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद बिजनौर के नगीना देहात स्थित जोगीपुरा दरगाह में शिया समुदाय ने भारी विरोध और शोक प्रदर्शन किया। महिलाओं ने कैंडल मार्च निकाला, जबकि पुरुषों ने जंजीर का मातम कर अपना दुख व्यक्त किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। क्षेत्र में गम का माहौल है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
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