बिजनौर (Bijnor News): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और दर्दनाक घटना सामने आई है। शहर की शांत और पॉश मानी जाने वाली इंद्रलोक कॉलोनी में उस वक्त भारी हड़कंप मच गया, जब वहां रहने वाले एक सरकारी कर्मचारी ने संदिग्ध परिस्थितियों में अपनी जीवन लीला समाप्त करने का खौफनाक कदम उठाया। चांदपुर तहसील में नाज़िर (रिकॉर्ड कीपर/प्रशासनिक लिपिक) के महत्वपूर्ण पद पर तैनात संजीव चौधरी ने अपने ही आवास पर खुद को गोली मार ली। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय प्रशासनिक महकमे में भी गहरा शोक और चिंता का माहौल है।Read also:-रेलवे रोड पर पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक: मेरठ के भटीपुरा के मकान में चल रहा था 'जिस्मफरोशी' का धंधा, रेड पड़ते ही मची भगदड़; 7 युवतियां और 2 युवक गिरफ्तार
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गोली की तेज आवाज सुनकर जब तक परिजन और आस-पड़ोस के लोग मौके पर पहुंचे, तब तक संजीव चौधरी खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर चुके थे। आनन-फानन में बिना एक पल की देरी किए, परिवार वालों और पड़ोसियों की मदद से उन्हें शहर के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में ले जाया गया। अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और उन्हें सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। मेडिकल टीम लगातार उनकी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन अत्यधिक खून बह जाने के कारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
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घटना का विवरण और शुरुआती खौफनाक मंजर मिली जानकारी के अनुसार, घटना वाले दिन संजीव चौधरी अपने घर पर ही मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि वे पिछले कुछ समय से किसी अज्ञात तनाव या मानसिक दबाव से गुजर रहे थे, हालांकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। घटना के समय घर के अन्य सदस्य अपने-अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। तभी अचानक संजीव के कमरे से एक जोरदार धमाके (गोली चलने) की आवाज आई।
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आवाज सुनकर परिजन बदहवास हालत में उनके कमरे की तरफ दौड़े। जब उन्होंने कमरे का दरवाजा खोला, तो अंदर का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। संजीव चौधरी खून से सने हुए पड़े थे और उनके पास ही वह हथियार पड़ा था जिससे उन्होंने खुद पर फायर किया था। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर आस-पड़ोस के लोग भी तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े। किसी ने तुरंत स्थानीय पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल रेफर किया गया।
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चांदपुर तहसील में शोक और सहकर्मियों की प्रतिक्रिया संजीव चौधरी चांदपुर तहसील में नाज़िर के पद पर कार्यरत हैं। राजस्व और तहसील प्रशासन में नाज़िर का पद बेहद जिम्मेदारी भरा होता है। उनका काम फाइलों का रखरखाव, प्रशासनिक पत्राचार और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजी प्रक्रियाओं को संभालना होता है। संजीव चौधरी को उनके सहकर्मी एक शांत, व्यवहारकुशल और अपने काम के प्रति समर्पित कर्मचारी के रूप में जानते हैं।
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जैसे ही यह मनहूस खबर चांदपुर तहसील और बिजनौर जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट पहुंची, वहां के कर्मचारियों में सन्नाटा छा गया। कई सहकर्मी और अधिकारी अपना काम छोड़कर तुरंत संजीव का हाल जानने के लिए निजी अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। उनके साथ काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि संजीव ने कभी जाहिर नहीं होने दिया कि वह इतने गहरे तनाव में हैं कि इतना बड़ा आत्मघाती कदम उठा लेंगे। तहसील कर्मचारियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि क्या कोई विभागीय दबाव था या फिर कोई पारिवारिक/व्यक्तिगत कारण।
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पुलिस की मुस्तैदी और गहन जांच प्रक्रिया घटना की सूचना मिलते ही बिजनौर पुलिस का उच्चाधिकारी दल और स्थानीय थाना पुलिस की टीम भारी बल के साथ घटनास्थल (इंद्रलोक कॉलोनी) पहुंच गई। पुलिस ने तुरंत संजीव चौधरी के कमरे को सील कर दिया ताकि सबूतों से किसी भी तरह की कोई छेड़छाड़ न हो सके।
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पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फोरेंसिक टीम (एफएसएल) को भी मौके पर बुला लिया गया है। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट्स, खून के नमूने और वह हथियार (पिस्टल या तमंचा) अपने कब्जे में ले लिया है, जिससे गोली चली थी। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि वह हथियार लाइसेंसी था या अवैध। इसके साथ ही, बैलिस्टिक जांच के लिए हथियार को लैब भेजा जा रहा है।
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पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) और थाना प्रभारी ने बताया कि फिलहाल मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। जांच टीम परिजनों, पड़ोसियों और तहसील में संजीव के साथ काम करने वाले कर्मचारियों के बयान दर्ज कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या हाल ही में संजीव का किसी के साथ कोई विवाद हुआ था, या फिर उन पर किसी तरह का कोई वित्तीय या मानसिक दबाव था।
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मानसिक तनाव और सरकारी कर्मचारियों पर बढ़ता दबाव इस घटना ने एक बार फिर से सरकारी महकमों, विशेषकर राजस्व और तहसील जैसे अधिक जनसंपर्क वाले विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और काम के बढ़ते दबाव (Workplace Stress) को लेकर बहस छेड़ दी है। अक्सर देखा गया है कि फाइलों के बोझ, अधिकारियों की फटकार और पब्लिक डीलिंग के चलते कई कर्मचारी गहरे तनाव का शिकार हो जाते हैं।
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हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संजीव चौधरी के इस कदम के पीछे का मुख्य कारण पारिवारिक था या पेशेवर, लेकिन इस घटना ने प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कर्मचारियों की काउंसलिंग और उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए समय-समय पर उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
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अस्पताल का माहौल और आगे की स्थिति निजी अस्पताल के बाहर इस समय भारी भीड़ जमा है। संजीव के परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे भगवान से अपने परिजन की सलामती की प्रार्थना कर रहे हैं। प्रशासन के आला अधिकारी भी अस्पताल के प्रबंधन और डॉक्टरों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और पल-पल की मेडिकल बुलेटिन ले रहे हैं।
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बिजनौर पुलिस का कहना है कि जब तक संजीव चौधरी की स्थिति थोड़ी स्थिर नहीं हो जाती और वे बयान देने की स्थिति में नहीं आ जाते, तब तक इस रहस्य से पूरी तरह पर्दा उठना मुश्किल है। फिलहाल, सभी की नजरें डॉक्टरों की टीम पर टिकी हैं कि वे संजीव चौधरी की जान बचाने में कामयाब हों। पुलिस ने आश्वस्त किया है कि इस घटना के पीछे जो भी असली वजह होगी, जांच के बाद उसे पूरी पारदर्शिता के साथ सामने लाया जाएगा।
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