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बिजनौर, उत्तर प्रदेश: बिजनौर जिले में आदमखोर गुलदारों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। नजीबाबाद क्षेत्र के नागल ग्राम तिसोतरा में एक दर्दनाक बिजनौर गुलदार हमला सामने आया है, जहां तीन दिन से लापता एक युवक का शव जंगल से सटे इलाके में पाया गया। प्रथम दृष्टया यह गुलदार का हमला प्रतीत हो रहा है, जिसने युवक के गले पर हमला किया था। इस घटना के बाद मृतक के परिवार में मातम छा गया है, वहीं पूरे क्षेत्र के ग्रामीण दहशत में हैं।READ ALSO:-सरधना पुलिस ने किया मेरठ तमंचा फैक्ट्री खुलासा: ट्यूबवेल में चल रही थी फैक्ट्री, 2 आरोपी गिरफ्तार; 250 से ज्यादा अवैध तमंचे बेचने का शक
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नजीबाबाद क्षेत्र में लगातार हो रही इन घटनाओं से वन विभाग और स्थानीय प्रशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शाम होते ही वे गुलदार के खौफ से अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
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 मृतक का शव । - Dainik Bhaskar

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तीन दिन से लापता युवक का शव बरामद

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स्थानीय पुलिस सूत्रों के अनुसार, नागल ग्राम तिसोतरा का निवासी यह युवक पिछले तीन दिनों से अपने घर से लापता था। परिवार और ग्रामीण लगातार उसकी तलाश कर रहे थे। आज जंगल के किनारे उसका शव बरामद हुआ। शव की हालत देखकर साफ पता चल रहा था कि किसी जंगली जानवर ने उस पर हमला किया है।
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युवक की मृत्यु की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। गांव में शोक का माहौल है और साथ ही गुलदार के दोबारा हमले के डर से ग्रामीण सहमे हुए हैं।
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गले पर गहरे घाव, गुलदार के हमले का संदेह

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घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। नजीबाबाद क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी (CO) ने मीडिया को बताया कि शव की स्थिति, विशेषकर गले पर मिले गहरे घावों को देखते हुए, प्रथम दृष्टया यह बिजनौर गुलदार हमला ही प्रतीत हो रहा है।
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मृत्यु के सही कारण का पता लगाने और अन्य पहलुओं की जांच के लिए शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की सही वजह की पुष्टि हो पाएगी और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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बिजनौर में गुलदार का खौफ: बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष

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बिजनौर जिला लंबे समय से गुलदार के आतंक का सामना कर रहा है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, यह इलाका मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) के सबसे गंभीर क्षेत्रों में से एक है।
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    नजीबाबाद, चांदपुर और कोतवाली देहात क्षेत्र गुलदार के हमलों से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
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    पिछले कुछ सालों में जिले में 35 से अधिक लोगों की जान गुलदार के हमले में जा चुकी है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। 
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    नांगल के तिसोतरा से गौसपुर जाने वाले मार्ग पर पहले भी गुलदार के दिखने और बाइक सवारों पर हमले की सूचनाएं मिलती रही हैं।
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ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग गुलदार को पकड़ने या जंगल के किनारे बाड़ लगाने के लिए कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठा रहा है। किसानों और मजदूरों को खेतों पर जाने से डर लग रहा है। 
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ग्रामीणों की मांग, प्रशासन की कार्रवाई

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इस नई घटना के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि हमलावर गुलदार को पकड़ने के लिए तत्काल बड़े पिंजरे लगाए जाएं और वन विभाग की टीमें रात में गश्त करें।
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वन विभाग के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि क्षेत्र में सक्रिय गुलदार की पहचान कर उसे पकड़ने के लिए अभियान तेज किया जाएगा। हालांकि, बिजनौर गुलदार हमला की लगातार बढ़ती घटनाओं ने जिले की कानून व्यवस्था के साथ-साथ वन्यजीव प्रबंधन पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
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