उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में एक और दिल दहला देने वाला बिजनौर गुलदार हमला सामने आया है। बिजनौर के थाना अफजलगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मुरलीवाला फार्म में खेत पर काम कर रही एक महिला पर घात लगाए बैठे गुलदार (तेंदुए) ने जानलेवा हमला कर दिया। महिला के शोर मचाने और आसपास काम कर रहे ग्रामीणों की बहादुरी के कारण महिला की जान तो बच गई, लेकिन वह इस बिजनौर गुलदार हमला में गंभीर रूप से घायल हो गई है।READ ALSO:-यमुना एक्सप्रेस-वे पर 'मौत का ओवरटेक': होली की खुशियां मातम में बदलीं, डबल डेकर बस ने वैन को रौंदा, 6 की दर्दनाक मौत
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घायल महिला को आनन-फानन में उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) अफजलगढ़ में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी हालत नाजुक देखते हुए उसे बिजनौर के जिला अस्पताल (District Hospital Bijnor) के लिए रेफर कर दिया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और ग्रामीण वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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अफजलगढ़ के मुरलीवाला फार्म की घटना का विस्तृत विवरण
\r\n\r\nसोमवार की सुबह जब गांव के लोग अपनी दिनचर्या के अनुसार खेतों में काम करने पहुंचे थे, तब यह खौफनाक बिजनौर गुलदार हमला हुआ। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव हिदायतपुर की रहने वाली मोमिना खातून (50 वर्ष) पत्नी मोहम्मद सुक्खे अन्य महिलाओं के साथ गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर जीवन सिंह के मुरलीवाला फार्म में गन्ना छीलने के लिए गई थीं।
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खेत में गन्ने की फसल काफी घनी थी, जो अक्सर गुलदार जैसे जंगली जानवरों के लिए छिपने का एक आदर्श स्थान बन जाती है। जब मोमिना अपने काम में व्यस्त थीं, तभी गन्ने के खेत में पहले से घात लगाकर बैठे एक विशालकाय गुलदार ने अचानक उन पर पीछे से झपट्टा मार दिया। गुलदार ने सीधे महिला की गर्दन पर वार किया और उसे दबोच लिया।
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साथी महिलाओं और ग्रामीणों का अदम्य साहस
\r\n\r\nइस बिजनौर गुलदार हमला में मोमिना खातून की जान केवल इसलिए बच पाई क्योंकि उनके साथ काम कर रही अन्य महिलाओं ने अदम्य साहस का परिचय दिया। जैसे ही गुलदार ने मोमिना पर हमला किया, उनके साथ मौजूद मिंद्रो बाई, शरण जीत और मनजीत कौर ने अपनी जान की परवाह किए बिना शोर मचाना शुरू कर दिया। उन्होंने हाथ में मौजूद गन्ने से ही गुलदार पर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए।
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महिलाओं के इस रौद्र रूप और भारी शोर-शराबे को सुनकर गुलदार घबरा गया और उसकी पकड़ ढीली पड़ गई। इसी बीच, आसपास के खेतों में काम कर रहे अन्य ग्रामीण, जिनमें राजू, जसपाल और प्रवीण शामिल थे, भी मदद के लिए दौड़ पड़े। इन ग्रामीणों ने भी हिम्मत दिखाते हुए गुलदार को घेरकर दबोचने का प्रयास किया, लेकिन फुर्तीला जानवर चकमा देकर वापस घने जंगल और गन्ने के खेतों की ओर भाग निकलने में सफल रहा।
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अस्पताल में देरी और एंबुलेंस न मिलने पर ग्रामीणों का आक्रोश
\r\n\r\nगुलदार के भागने के बाद, खून से लथपथ मोमिना को तुरंत सीएससी (CHC) अफजलगढ़ ले जाया गया। महिला की गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों पर गुलदार के पंजों और दांतों के गहरे घाव थे। वहां के डॉक्टरों ने महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत उच्च चिकित्सा केंद्र (हायर सेंटर) यानी जिला अस्पताल बिजनौर रेफर कर दिया।
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लेकिन यहाँ सिस्टम की एक और बड़ी लापरवाही सामने आई। सीएससी से रेफर किए जाने के बाद भी लगभग दो घंटे तक घायल महिला के लिए कोई सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। इस देरी के कारण मोमिना के शरीर से काफी खून बह गया। एंबुलेंस में हुई इस देरी को लेकर परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि आपातकालीन स्थिति में भी स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं रहता है, जिससे घायल की जान पर बन आती है। दो घंटे के कड़े विरोध और इंतजार के बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंची, तब जाकर महिला को बिजनौर जिला अस्पताल रवाना किया जा सका।
\r\n\r\nबिजनौर में क्यों बढ़ रहे हैं गुलदार के हमले?
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बिजनौर गुलदार हमला कोई नई या छिटपुट घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में, विशेषकर अफजलगढ़, नगीना और रेहड़ क्षेत्रों में, तेंदुओं के हमलों में बेतहाशा वृद्धि देखी गई है। बिजनौर जिला शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी और कॉर्बेट नेशनल पार्क (Corbett National Park) तथा अमानगढ़ टाइगर रिजर्व (Amangarh Tiger Reserve) के करीब स्थित है। इसके कारण यहां वन्यजीवों की आवाजाही आम बात है। लेकिन जंगलों से निकलकर खेतों और आबादी वाले इलाकों में गुलदारों के पहुंचने के कई मुख्य कारण हैं:
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- \r\n गन्ने के खेत बने नए जंगल: बिजनौर को गन्ने का बेल्ट कहा जाता है। यहां मीलों तक फैले गन्ने के खेत गुलदार को छिपने, शिकार करने और यहां तक कि प्रजनन करने के लिए एक सुरक्षित वातावरण (Safe Haven) प्रदान करते हैं। गन्ने की ऊंचाई और सघनता के कारण ग्रामीणों को अंदर छिपे जानवर का पता नहीं चल पाता।\r\n \r\n
- \r\n जंगलों में प्राकृतिक शिकार की कमी: जंगलों में अतिक्रमण और शिकार की कमी के कारण गुलदार आसान शिकार (जैसे कुत्ते, बकरियां और मवेशी) की तलाश में गांवों का रुख कर रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n मानव बस्तियों का विस्तार: जैसे-जैसे कृषि भूमि और रिहायशी इलाके जंगलों के करीब खिसक रहे हैं, मानव और वन्यजीवों के बीच का बफर जोन (Buffer Zone) खत्म होता जा रहा है।\r\n \r\n
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पिछले खौफनाक आंकड़े: दहशत में जीने को मजबूर ग्रामीण
\r\n\r\nबिजनौर में गुलदार का आतंक इस कदर फैल चुका है कि लोग दिन के उजाले में भी घर से निकलने में कतराते हैं। आंकड़ों की बात करें तो, बिजनौर में आदमखोर हो चुके गुलदारों के हमलों में अब तक 28 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा पूरे उत्तर प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष की भयावहता को दर्शाता है।
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हाल ही के महीनों में बिजनौर गुलदार हमला की कई घटनाएं सुर्खियों में रही हैं। अभी कुछ समय पहले ही अफजलगढ़ के हिदायतपुर टांडा गांव में 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला आशा देवी पर भी चारा काटते समय गुलदार ने हमला किया था, लेकिन उस साहसी महिला ने दरांती से गुलदार का डटकर मुकाबला किया और उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। इसी तरह, एक अन्य दुखद घटना में एक 35 वर्षीय महिला को गुलदार ने अपना निवाला बना लिया था, जिसका क्षत-विक्षत शव कई दिन बाद खेतों से बरामद हुआ था।
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लगातार हो रही इन घटनाओं के कारण ग्रामीणों में न केवल डर है, बल्कि भारी गुस्सा भी है। कई बार ग्रामीण रेलवे ट्रैक जाम करने और वन विभाग के कार्यालयों का घेराव करने जैसे कदम उठा चुके हैं।
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वन विभाग की भूमिका और प्रशासनिक कदम
\r\n\r\nमुरलीवाला फार्म में हुए इस ताजा बिजनौर गुलदार हमला के बाद वन विभाग एक बार फिर हरकत में आ गया है। स्थानीय रेंजर प्रदीप शर्मा ने घटना का संज्ञान लेते हुए कहा है कि वन विभाग के नियमों के तहत पीड़ित महिला को हर संभव उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। इसके साथ ही, हमलावर गुलदार को पकड़ने के लिए घटनास्थल और उसके आसपास के संभावित इलाकों में पिंजरे लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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हालांकि, ग्रामीण वन विभाग की इन कार्रवाइयों को 'नाकाफी' मानते हैं। उनका कहना है कि वन विभाग केवल घटना के बाद जागता है। ग्रामीणों की मांग है कि:
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- \r\n संवेदनशील इलाकों में नियमित पेट्रोलिंग (गश्त) बढ़ाई जाए।\r\n \r\n
- \r\n आदमखोर हो चुके गुलदारों को चिन्हित कर उन्हें ट्रेंकुलाइज (Tranquilize) कर चिड़ियाघर या गहरे जंगलों में शिफ्ट किया जाए।\r\n \r\n
- \r\n खेतों के आसपास सोलर फेंसिंग (Solar Fencing) और चेतावनी अलार्म सिस्टम लगाए जाएं।\r\n \r\n
- \r\n गुलदार के हमले में जान गंवाने वाले या घायल होने वाले लोगों के लिए मुआवजा राशि बढ़ाई जाए और उसका भुगतान त्वरित गति से किया जाए।\r\n \r\n
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ग्रामीणों के लिए सुरक्षा के उपाय और सुझाव
\r\n\r\nचूंकि कृषि कार्य ग्रामीण जीवन की रीढ़ है, इसलिए किसान खेतों में जाना बंद नहीं कर सकते। लेकिन इस तरह के बिजनौर गुलदार हमला से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरती जा सकती हैं:
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- \r\n समूह में कार्य करें: खेतों में अकेले जाने से बचें। हमेशा 4-5 लोगों के समूह में जाएं। जैसा कि इस घटना में देखा गया, समूह में होने के कारण अन्य महिलाओं ने शोर मचाकर मोमिना खातून की जान बचा ली।\r\n \r\n
- \r\n शोर मचाते हुए चलें: खेतों की ओर जाते समय और वहां काम करते समय आपस में जोर-जोर से बातें करें या कोई ध्वनि उत्पन्न करने वाला उपकरण (जैसे रेडियो या लाउडस्पीकर) साथ रखें। जंगली जानवर आमतौर पर मानव के शोर से दूर भागते हैं।\r\n \r\n
- \r\n पालतू कुत्तों को साथ रखें: कुत्ते गुलदार की आहट को बहुत पहले पहचान लेते हैं और भौंककर मालिक को सतर्क कर सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n पीठ न दिखाएं: यदि कभी गुलदार सामने आ जाए, तो उसकी आंखों में आंखें डालकर धीरे-धीरे पीछे हटें। उसे पीठ दिखाकर भागने की गलती न करें, क्योंकि भागने पर वह आपको शिकार समझकर झपट्टा मार सकता है।\r\n \r\n
- \r\n हथियार साथ रखें: खेतों में काम करते समय हमेशा एक मजबूत लाठी या डंडा अपने साथ अवश्य रखें।\r\n \r\n
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बिजनौर के अफजलगढ़ क्षेत्र में खेत पर काम कर रही महिला पर हुआ यह जानलेवा बिजनौर गुलदार हमला राज्य में बढ़ती मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या को एक बार फिर से उजागर करता है। जहां एक ओर जंगलों का सिकुड़ना और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का असंतुलन वन्यजीवों को रिहायशी इलाकों की ओर धकेल रहा है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं (जैसे एंबुलेंस) की कमी पीड़ितों के लिए स्थिति को और भी बदतर बना रही है। प्रशासन और वन विभाग को इस समस्या का कोई स्थायी और ठोस समाधान निकालना होगा। महज घटना के बाद पिंजरा लगा देना या कुछ मुआवजा दे देना इस समस्या का अंत नहीं है। वन्यजीवों का संरक्षण भी जरूरी है, लेकिन मानव जीवन की कीमत पर नहीं। जब तक गन्ने के खेतों और जंगलों के बीच एक सुरक्षित बफर जोन स्थापित नहीं किया जाता, तब तक इस तरह के बिजनौर गुलदार हमला की खबरें हमें यूं ही डराती रहेंगी।
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बिजनौर जिले के अफजलगढ़ थाना क्षेत्र स्थित मुरलीवाला फार्म में गन्ना छील रही मोमिना खातून (50) पर एक गुलदार ने जानलेवा हमला कर दिया। महिला की गर्दन पर गंभीर चोटें आई हैं। साथ काम कर रही अन्य महिलाओं के साहस और शोर मचाने के कारण गुलदार महिला को छोड़कर भाग गया। घायल अवस्था में मोमिना को सीएससी अफजलगढ़ लाया गया, जहां से हालत नाजुक होने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस मिलने में हुई दो घंटे की देरी से ग्रामीणों में भारी रोष है। वन विभाग ने मौके पर पिंजरा लगाने और पीड़िता को नियमानुसार मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। यह घटना बिजनौर में लगातार बढ़ रहे गुलदार के खौफ को एक बार फिर प्रमाणित करती है।
Sabse pehle comment karne wale banein.