बिजनौर (क्राइम रिपोर्टर): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में धर्मांतरण का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। कोतवाली शहर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले घनुवाला गांव (Ghanuwala Village) में नए साल की शुरुआत शांति और जश्न के बजाय तनाव और पुलिस के सायरनों के साथ हुई। 25 दिसंबर (क्रिसमस) को हुए विवाद की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि 31 दिसंबर की रात गांव में कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है।READ ALSO:-मेरठ: IIMT कॉलेज बना 'जंग का मैदान', कैंटीन के बाहर छात्राओं में हाईवोल्टेज ड्रामा; बॉयफ्रेंड-भाई के चक्कर में सरेआम नोचे बाल, वीडियो ने खोली अनुशासन की पोल
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बुधवार की सुबह जब ग्रामीण अपने खेतों की तरफ गए, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। एक हिंदू परिवार की जमीन पर रातों-रात लोहे के सरिये से बना ईसाई धर्म का चिन्ह (Cross) लगा दिया गया था। इतना ही नहीं, वहां बाकायदा पूजा-पद्धति की तरह फूल और जली हुई मोमबत्तियां भी मिलीं। इस घटना ने गांव में धर्मांतरण की साजिश की आशंकाओं को यकीन में बदल दिया है।
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1. वह सुबह जब खेत में दिखा 'नया धर्म'

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घटनाक्रम के अनुसार, घनुवाला गांव निवासी शिवचरन सिंह का परिवार खेती-किसानी से जुड़ा है। 1 जनवरी की सुबह जब शिवचरन और अन्य ग्रामीण जंगल और खेतों की ओर गए, तो उनकी नजर जमीन पर गड़े एक अजीबोगरीब ढांचे पर पड़ी। पास जाकर देखा तो वह लोहे के सरिये को वेल्डिंग करके बनाया गया ईसाई धर्म का प्रतीक चिन्ह (क्रॉस) था।
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चिन्ह के ठीक नीचे ताजे फूल और आधी जली हुई मोमबत्तियां रखी थीं, जो इशारा कर रही थीं कि 31 दिसंबर की रात, जब दुनिया नए साल का जश्न मना रही थी, तब यहां गुपचुप तरीके से किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान को अंजाम दिया जा रहा था। देखते ही देखते यह खबर जंगल की आग की तरह पूरे गांव में फैल गई। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौके पर इकट्ठा हो गए और आक्रोशित होकर नारेबाजी शुरू कर दी।
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ग्रामीणों का आरोप है कि यह कृत्य गांव के उन लोगों का है जिन्होंने हाल ही में कथित तौर पर धर्म परिवर्तन किया है और अब वे दूसरों की जमीनों पर भी कब्जा करने या अपना धार्मिक वर्चस्व कायम करने की कोशिश कर रहे हैं।
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2. पुलिस प्रशासन में हड़कंप: एसपी सिटी ने संभाली कमान

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मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बिजनौर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। सूचना मिलते ही जिले के आला अधिकारी मौके पर दौड़ पड़े।
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    एसपी सिटी (SP City) डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह
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    सीओ सिटी (CO City) संग्राम सिंह
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    शहर कोतवाल (Kotwal) धर्मेंद्र सिंह
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भारी पुलिस बल के साथ ये अधिकारी घनुवाला गांव पहुंचे। पुलिस ने सबसे पहले भीड़ को नियंत्रित किया और विवादित स्थल को अपने घेरे में लिया। फॉरेंसिक टीम की मदद से मौके से साक्ष्य जुटाए गए। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया और आश्वासन दिया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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3. क्रिसमस विवाद से जुड़े हैं तार: 'इनसाइड स्टोरी'

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यह घटना कोई अचानक हुई वारदात नहीं है, बल्कि पिछले एक हफ्ते से चल रहे तनाव का ही विस्तार है। सूत्रों और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी घनुवाला गांव में 25 दिसंबर (क्रिसमस) को भी भारी बवाल हुआ था।
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उस समय ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि गांव के कुछ परिवारों ने पैसों का लालच देकर और बहला-फुसलाकर ईसाई धर्म अपना लिया है। आरोप था कि ये परिवार अब अन्य हिंदू परिवारों को भी धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उस विवाद के दौरान भी ग्रामीणों ने शहर कोतवाली पहुंचकर हंगामा किया था और पुलिस को तहरीर दी थी कि "धर्मांतरित लोग उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी देते हैं"।
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पुलिस ने उस समय मामले को शांत करा दिया था, लेकिन नए साल की रात खेत में धार्मिक चिन्ह मिलने से यह साफ हो गया है कि अंदरखाने खिचड़ी अभी भी पक रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह हरकत उन्हें उकसाने और उनकी जमीनों पर दावा ठोकने की एक सुनियोजित साजिश है।
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4. हिंदू संगठनों का जमावड़ा और आरोप-प्रत्यारोप
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घटना की सूचना मिलते ही हिंदू संगठनों के दर्जनों कार्यकर्ता भी घनुवाला गांव पहुंच गए। उन्होंने पुलिस प्रशासन के सामने जमकर नारेबाजी की और धर्मांतरण गिरोह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
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क्या कह रहे हैं दोनों पक्ष? पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है। दिलचस्प बात यह है कि थाने में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं:
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    हिंदू पक्ष का आरोप: धर्मांतरित लोगों ने जानबूझकर जमीन पर कब्जा करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए यह चिन्ह लगाया है।
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    दूसरे पक्ष का दावा: वहीं, जिन पर आरोप है, उनका कहना है कि उन्हें फंसाने के लिए दूसरे पक्ष ने खुद ही यह चिन्ह लगाकर ड्रामा रचा है।
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पुलिस अब इस पहेली को सुलझाने में जुटी है कि आखिर रात के अंधेरे में सरिये का क्रॉस और मोमबत्तियां वहां कौन लाया? क्या यह आस्था का प्रदर्शन था या फिर कोई गहरी साजिश?
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5. उत्तर प्रदेश धर्मांतरण कानून: क्या हो सकती है कार्रवाई?

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उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर कानून बेहद सख्त है। 'उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम' (UP Unlawful Conversion of Religion Act) के तहत:
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    जबरन, धोखे से, या लालच देकर (Allurement) धर्म परिवर्तन कराना गैर-जमानती अपराध है।
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    दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
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    अगर धर्मांतरण अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) के व्यक्ति का किया गया हो, तो कानून और भी सख्त हो जाता है।
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एसपी सिटी डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह ने स्पष्ट किया है कि पुलिस "वैज्ञानिक साक्ष्यों" और "सर्विलांस" के आधार पर जांच कर रही है। अगर यह साबित होता है कि यह कृत्य किसी प्रलोभन या साजिश का हिस्सा है, तो आरोपियों पर एनएसए (NSA) या गैंगस्टर एक्ट जैसी धाराओं में भी कार्रवाई हो सकती है।
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6. जांच के प्रमुख बिंदु

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पुलिस की जांच अब तीन मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित है:
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    चिन्ह का स्रोत: वह लोहे का सरिया और मोमबत्तियां कहां से खरीदी गईं? क्या गांव के किसी लुहार ने उसे बनाया था?
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    फंडिंग एंगल: क्या धर्मांतरण के लिए बाहर से कोई फंडिंग आ रही है? ग्रामीणों के आरोपों की जांच की जा रही है कि क्या सच में पैसे का लालच दिया गया था।
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    जमीन विवाद: क्या यह पूरा मामला वाकई धर्म का है या फिर धर्म की आड़ में जमीनी रंजिश निकाली जा रही है?
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7. गांव में दहशत और अपील

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फिलहाल घनुवाला गांव में तनावपूर्ण शांति है। एहतियात के तौर पर पीएसी (PAC) और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। शहर कोतवाल धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है और शरारती तत्वों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि वे कानून को अपने हाथ में न लें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
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तहसील प्रशासन के अधिकारी भी गांव में डेरा जमाए हुए हैं ताकि राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाया जा सके कि जिस जमीन पर चिन्ह मिला, वह वास्तव में किसकी है और क्या उस पर कोई पुराना विवाद चल रहा था।
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प्रशासन के लिए चुनौती

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बिजनौर का घनुवाला कांड प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। यह घटना साबित करती है कि ग्रामीण इलाकों में धर्मांतरण का मुद्दा कितना संवेदनशील हो चुका है। पुलिस को अब न केवल दोषियों को पकड़ना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि इस चिंगारी से कोई बड़ी आग न भड़क उठे।
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आने वाले दिनों में फॉरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस की पूछताछ से कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। क्या यह सच में आस्था का बदलाव है या कोई बड़ी साजिश? इस पर हमारी नजर बनी रहेगी।
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