उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में गंगा नदी की पवित्रता और स्वच्छता को लेकर एक अनूठा और प्रेरणादायक अभियान चलाया गया है। बुधवार को, जिला गंगा समिति बिजनौर के तत्वावधान में, ग्राम नई बस्ती सिमली में 'मेरा कर्तव्य = गंगा की स्वच्छता अभियान' का नारा गूंजा। इस अभियान का उद्देश्य लोगों में यह भावना जगाना था कि गंगा की स्वच्छता हर नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है। अधिकारियों, गंगा के सेवकों और ग्रामीणों ने मिलकर घर-घर जाकर स्वच्छता का संदेश दिया।READ ALSO:-बिजनौर: नेशनल हाईवे पर भीषण टक्कर! डीसीएम और ट्रैक्टर-ट्रॉली की आमने-सामने की भिड़ंत, डीसीएम चालक की दर्दनाक मौत, ट्रैक्टर के उड़े परखच्चे
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जनसहभागिता और गंगा अग्रदूतों की पहल

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गंगा स्वच्छता के प्रयास केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रहें, इसके लिए जिला गंगा समिति बिजनौर ने जनसहभागिता को केंद्र में रखा। इस अभियान में गंगा के अग्रदूतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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    नेतृत्व: इस पूरे संदेश और अभियान का नेतृत्व जिला परियोजना अधिकारी पुलकित अग्रवाल ने किया।
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    उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करना कि वे प्लास्टिक के उपयोग से बचें, जो सीधे गंगा को प्रदूषित करता है।
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    जागरूकता: गंगा के सेवक घर-घर गए और ग्रामीणों को सरल भाषा में समझाया कि नदी को स्वच्छ रखने के लिए प्लास्टिक का बहिष्कार करना कितना जरूरी है।
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'मेरा थैला, मेरी स्वच्छता' अभियान

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इस अवसर पर एक और महत्वपूर्ण पहल 'मेरा थैला, मेरी स्वच्छता' अभियान के रूप में शुरू की गई। इस अभियान का उद्देश्य प्लास्टिक के स्थान पर कपड़े के थैलों (Cloth Bags) के उपयोग को बढ़ावा देना था।
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    पॉलिथीन का विकल्प: अधिकारियों ने सभी ग्रामीणों को समझाया कि दैनिक खरीदारी और अन्य कार्यों के लिए पॉलिथीन के स्थान पर कपड़े के थैलों का प्रयोग करना चाहिए।
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    निःशुल्क वितरण: इस अभियान के अंतर्गत सभी ग्रामीणों को कपड़े के निशुल्क थैले वितरित किए गए, ताकि वे तुरंत प्लास्टिक का उपयोग छोड़ सकें और इस नेक पहल को अपना सकें।
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    व्यक्तिगत जिम्मेदारी: पुलकित अग्रवाल ने ग्रामीणों को समझाया कि जब तक हर व्यक्ति अपने 'थैले' को अपनी 'स्वच्छता' की जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक गंगा को स्वच्छ रखना संभव नहीं होगा।
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बिजनौर पुलिस का प्रेरणादायक कदम

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जिला परियोजना अधिकारी पुलकित अग्रवाल ने कहा कि गंगा स्वच्छता का असली अर्थ है जनसहभागिता।
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    सफलता का प्रमाण: उन्होंने जोर देकर कहा कि बिजनौर में चला यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि जब व्यक्ति अपने स्तर पर संकल्प लेता है, तो इस तरह की भावना देश में समाज को स्वच्छ व स्वस्थ बनाने में अग्रसर होती है।
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    भविष्य की योजना: समिति की योजना है कि इस अभियान को बिजनौर के अन्य गंगा किनारे वाले गाँवों तक भी पहुंचाया जाए।
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ग्रामीणों का समर्थन

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ग्राम नई बस्ती सिमली के ग्रामीणों ने इस पहल का गर्मजोशी से स्वागत किया। कपड़े के निशुल्क थैले मिलने से उन्हें प्लास्टिक छोड़ने में आसानी हुई है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से गंगा की स्वच्छता के लिए प्रतिबद्धता जताई है।
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देश के लिए मिसाल

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बिजनौर का यह अभियान दिखाता है कि छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। यह देश के अन्य जिलों के लिए एक मिसाल है कि कैसे लोगों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी और थोड़े से प्रोत्साहन से बड़ी राष्ट्रीय परियोजनाओं (जैसे नमामि गंगे) को सफल बनाया जा सकता है।
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