बिजनौर/नहटौर (ब्यूरो रिपोर्ट)। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से राहत पाने के लिए लोग इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का रुख कर रहे हैं, लेकिन इनकी सुरक्षा को लेकर आए दिन सामने आ रही घटनाओं ने लोगों के दिलों में खौफ पैदा कर दिया है। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से सामने आया है, जहां नहटौर ब्लॉक (Nehtaur Block) परिसर में दिनदहाड़े एक इलेक्ट्रिक स्कूटी चलते-चलते आग का गोला बन गई।READ ALSO:-यूपी में कुदरत का यू-टर्न: पश्चिमी विक्षोभ ने फिर ठिठुराया प्रदेश, मेरठ में बारिश, बागपत में ओले और मथुरा में आंधी के साथ बारिश ने बिगाड़े हालात
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गनीमत यह रही कि चालक ने समय रहते सूझबूझ दिखाई और कूदकर अपनी जान बचा ली, वरना एक बड़ा हादसा हो सकता था।
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क्या है पूरा मामला? (Detailed Incident Report)

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घटना बिजनौर के नहटौर ब्लॉक कार्यालय परिसर की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक युवक अपनी इलेक्ट्रिक स्कूटी से किसी सरकारी काम के सिलसिले में ब्लॉक आया हुआ था। जैसे ही वह ब्लॉक परिसर में पहुंचा, उसकी स्कूटी के बैटरी हिस्से से अचानक धुआं निकलने लगा।
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आग लगने का वो खौफनाक पल

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चालक कुछ समझ पाता, इससे पहले ही धुएं ने आग की लपटों का रूप ले लिया। चालक ने खतरे को भांपते हुए चलती स्कूटी से छलांग लगा दी और दूर हट गया। देखते ही देखते, चंद सेकेंडों के भीतर पूरी स्कूटी आग की लपटों से घिर गई।
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ब्लॉक परिसर में मची अफरातफरी

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अचानक हुई इस घटना से ब्लॉक परिसर में मौजूद कर्मचारियों और फरियादियों में भगदड़ मच गई।
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    धमाके का डर: लोगों को डर था कि कहीं स्कूटी की बैटरी में विस्फोट (Blast) न हो जाए, इसलिए सभी लोग घटनास्थल से दूर भाग खड़े हुए।
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    जलकर खाक हुई गाड़ी: स्थानीय लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग इतनी भयावह थी कि स्कूटी कुछ ही मिनटों में लोहे के ढांचे (Scrap) में तब्दील हो गई।
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प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी

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मौके पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, "सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। लड़का (चालक) अगर एक सेकंड की भी देरी करता, तो वह आग की चपेट में आ सकता था। स्कूटी ऐसे जल रही थी जैसे उसमें पेट्रोल भरा हो।"
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बड़ा सवाल: आखिर क्यों सुलग रही हैं इलेक्ट्रिक गाड़ियां?

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बिजनौर की यह घटना कोई पहली नहीं है। देश भर में गर्मियों की शुरुआत और तापमान बढ़ने के साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की घटनाएं आम हो रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई तकनीकी और पर्यावरणीय कारण हो सकते हैं:
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    थर्मल रनअवे (Thermal Runaway): लिथियम-आयन बैटरी में जब एक सेल अधिक गर्म हो जाता है, तो वह बगल के सेल को भी गर्म कर देता है, जिससे चेन रिएक्शन शुरू होता है और आग लग जाती है।
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    ओवरहीटिंग और शॉर्ट सर्किट: गर्मियों में तापमान अधिक होने के कारण बैटरी जल्दी गर्म होती है। अगर कूलिंग सिस्टम सही न हो, तो आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
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    लोकल मैन्युफैक्चरिंग: बाजार में सस्ती और बिना उचित टेस्टिंग वाली बैटरियों की भरमार है, जो सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरतीं।
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ईवी मालिकों के लिए जरूरी सुरक्षा टिप्स (Safety Guidelines)

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इस घटना से सबक लेते हुए, इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को कुछ विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए:
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    धूप में पार्किंग से बचें: अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ी को कभी भी सीधी धूप में लंबे समय तक पार्क न करें।
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    चार्जिंग के तुरंत बाद न चलाएं: चार्जिंग से हटाने के तुरंत बाद गाड़ी न चलाएं, बैटरी को ठंडा होने का समय दें।
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    असामान्य गंध या आवाज: अगर गाड़ी चलाते समय जलने की गंध आए या बैटरी से कोई आवाज आए, तो तुरंत गाड़ी रोक दें और दूर हट जाएं।
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    सस्ती बैटरियों से बचें: हमेशा कंपनी द्वारा प्रमाणित (Certified) बैटरियों का ही उपयोग करें।
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नहटौर ब्लॉक की इस घटना ने एक बार फिर इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा (Safety Standards) पर बहस छेड़ दी है। हालांकि, चालक की जान बच गई, यह राहत की बात है, लेकिन प्रशासन और वाहन निर्माता कंपनियों को इन घटनाओं को गंभीरता से लेना होगा।
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बिजनौर प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने वाहनों की समय-समय पर सर्विसिंग कराएं और किसी भी तकनीकी खराबी को नजरअंदाज न करें।
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