नई दिल्ली: भारत में तेजी से पैर पसार रहे साइबर अपराध (Cyber Crime) के खिलाफ मोदी सरकार ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. डिजिटल दुनिया में सेंध लगाने वाले ठगों की अब खैर नहीं है. इसी कड़ी में मंगलवार (10 फरवरी 2026) को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की नई साइनर क्राइम ब्रांच (Cyber Crime Branch) का उद्घाटन किया. इसके साथ ही उन्होंने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के अत्याधुनिक S4C डैशबोर्ड को भी राष्ट्र को समर्पित किया.READ ALSO:-महंगाई की मार या निवेश का मौका? सोना ₹1.55 लाख के पार, चांदी ने भी तोड़े रिकॉर्ड; जानिए 10 फरवरी का ताजा हाल
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गृह मंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो साइबर क्राइम आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती नहीं, बल्कि एक गंभीर संकट (Crisis) बन जाएगा. नई दिल्ली में आयोजित इस उच्च स्तरीय कार्यक्रम में अमित शाह ने पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा की गई डिजिटल स्ट्राइक के आंकड़े भी पेश किए, जो बताते हैं कि कैसे सरकार ने ठगों के मुंह से 8,000 करोड़ रुपये छीनकर आम जनता की गाढ़ी कमाई बचाई है.
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अमित शाह सीबीआई साइबर क्राइम ब्रांच: ठगों के खिलाफ नया हथियार

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गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि अमित शाह सीबीआई साइबर क्राइम ब्रांच का गठन समय की मांग थी. यह सिर्फ एक नई शाखा नहीं है, बल्कि यह देश की सुरक्षा को डिजिटल घुसपैठियों से बचाने का एक मजबूत किला है. उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने डिजिटल क्षेत्र में जो क्रांति की है, उसे सुरक्षित रखना हमारी प्राथमिकता है.
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उन्होंने I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) और सीबीआई (CBI) को बधाई देते हुए कहा, "यह एक ऐसी यूनिट है जहां कई अलग-अलग विभाग और एजेंसियां एक ही प्लेटफॉर्म पर साइबर अपराध को रोकने के लिए एकजुट होकर प्रयास कर रही हैं. जब सभी के प्रयास एक दिशा में होते हैं, तभी इच्छित और सकारात्मक परिणाम मिलते हैं."
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डिजिटल क्रांति और सुरक्षा की चुनौती

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गृह मंत्री ने भारत की डिजिटल यात्रा का जिक्र करते हुए कुछ चौंकाने वाले और गर्व करने वाले आंकड़े साझा किए. उन्होंने बताया कि कैसे भारत ने पिछले एक दशक में दुनिया को डिजिटल लेन-देन का रास्ता दिखाया है:
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    इंटरनेट यूजर: पहले देश में महज 25 हजार इंटरनेट यूजर्स थे, जो आज बढ़कर 100 करोड़ के पार पहुंच चुके हैं.
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    सस्ता डेटा: भारत में 1 GB डेटा की कीमत में 97 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है, जिससे इंटरनेट गांव-गांव तक पहुंचा है.
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    डिजिटल ट्रांजेक्शन: आज दुनिया का हर दूसरा डिजिटल ट्रांजेक्शन (Digital Transaction) भारत में हो रहा है.
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    जनधन खाते: 97 करोड़ से अधिक जनधन खाते खोले गए हैं, जिन्हें सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है.
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अमित शाह ने जोर देकर कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल बैंक खातों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन चुका है. उन्होंने कहा, "साइबर सिक्योरिटी अब हमारे देश के रणनीतिक संगठनों के डेटा से भी जुड़ी है. हमारे देश का डेटा चुराकर उसे दुश्मनों को बेचने की कोशिशें हो रही हैं, जिसे हमें हर हाल में रोकना होगा."
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8,000 करोड़ रुपये फ्रीज: सरकार की बड़ी सफलता

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साइबर ठगों के खिलाफ सरकार की सख्ती के सबूत पेश करते हुए अमित शाह ने बताया कि 'सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम' के तहत बड़ी सफलता मिली है.
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    रिकवरी: 20,000 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड (Bank Fraud) के मामलों में से सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 8,000 करोड़ रुपये फ्रीज किए हैं. यानी यह पैसा ठगों के हाथों में जाने से रोक लिया गया और पीड़ितों को वापस मिलने की उम्मीद जगी है.
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    सिम कार्ड ब्लॉक: फर्जी दस्तावेजों पर लिए गए और साइबर अपराध में इस्तेमाल हो रहे करीब 12 लाख सिम कार्ड को रद्द (Block) किया गया है.
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    गिरफ्तारियां: वर्ष 2025 के अंत तक 20,853 साइबर अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया है.
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यह आंकड़े बताते हैं कि अमित शाह सीबीआई साइबर क्राइम ब्रांच और I4C के प्रयासों से ठगी के ईकोसिस्टम (Ecosystem) पर गहरी चोट पहुंची है.
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'म्यूल अकाउंट हंटर ऐप': अब नहीं बचेंगे किराए के खाते

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अपने संबोधन में गृह मंत्री ने "म्यूल अकाउंट्स" (Mule Accounts) को साइबर अपराध की सबसे बड़ी जड़ बताया. म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं जिन्हें अपराधी किराए पर लेते हैं या धोखे से किसी और के नाम पर खुलवाते हैं, ताकि ठगी का पैसा इधर-उधर किया जा सके.
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अमित शाह ने कहा, "आज के दौर में म्यूल अकाउंट किसी सर्विस की तरह खरीदे और बेचे जा रहे हैं. यह लोन वुल्फ (अकेले अपराधी) का काम नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध है."
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इस समस्या से निपटने के लिए RBI और गृह मंत्रालय ने मिलकर 'म्यूल अकाउंट हंटर ऐप' (Mule Account Hunter App) तैयार किया है. अमित शाह ने देश के सभी सरकारी और प्राइवेट बैंकों से अपील की कि वे इस ऐप को जल्द से जल्द अपनाएं (Adopt करें). इस ऐप के जरिए संदिग्ध खातों की पहचान तुरंत हो सकेगी और पैसे की निकासी रोकी जा सकेगी.
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1930 हेल्पलाइन: 'गोल्डन ऑवर' का महत्व

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साइबर फ्रॉड होने पर सबसे बड़ी समस्या समय पर शिकायत दर्ज न होना है. गृह मंत्री ने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया.
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उन्होंने कहा, "हर 1 घंटे में करीब 100 लोग साइबर अपराध के शिकार हो रहे हैं. ऐसे में 1930 हेल्पलाइन का रिस्पांस टाइम (Response Time) कम करना हमारी प्राथमिकता है."
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शाह ने राज्य पुलिस बलों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि अगर कोई पीड़ित 1930 पर कॉल करता है और इमरजेंसी में कोई कॉल रिसीव नहीं करता, और इस देरी की वजह से पीड़ित का पैसा निकल जाता है, तो इससे हेल्पलाइन की विश्वसनीयता (Image) खराब होती है. उन्होंने कहा कि हमें ऐसी व्यवस्था बनानी होगी कि शिकायत मिलते ही कुछ मिनटों के भीतर बैंक खाते फ्रीज हो जाएं.
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बैंकों को नसीहत: सिर्फ मुनाफा नहीं, सुरक्षा भी देखें

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कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने बैंकिंग सेक्टर को भी खरी-खोटी सुनाई और नसीहत दी. उन्होंने कहा कि बैंकों का ध्यान अक्सर अपने एनपीए (Non-Performing Assets) को कम करने पर रहता है, जो कि सही भी है. लेकिन उन्हें कस्टमर सर्विस और साइबर सुरक्षा पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए.
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"5 साल के बाद मैं देख रहा हूं कि अगर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए तो साइबर क्राइम एक बड़ा 'क्राइसेज' बन जाएगा. बैंकों को चाहिए कि वे अपने सिस्टम को फुलप्रूफ बनाएं और संदिग्ध ट्रांजेक्शन को रियल टाइम में ट्रैक करें."
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S4C डैशबोर्ड: साइबर सुरक्षा का नया कवच

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अमित शाह सीबीआई साइबर क्राइम ब्रांच के उद्घाटन के साथ ही S4C (Cyber Crime Prevention against Women and Children) डैशबोर्ड की लॉन्चिंग भी एक महत्वपूर्ण कदम है. यह डैशबोर्ड विभिन्न एजेंसियों के बीच डेटा साझा करने और रियल टाइम में अपराध के ट्रेंड्स (Trends) को समझने में मदद करेगा.
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अब तक I4C नेटवर्क से 795 वित्तीय संस्थान और एजेंसियां जुड़ चुकी हैं. अमित शाह ने कहा कि जब सभी संस्थान मिलकर काम करेंगे, तभी हम इस अदृश्य दुश्मन को हरा पाएंगे. यह डैशबोर्ड डेटा एनालिटिक्स (Data Analytics) का उपयोग करके यह भविष्यवाणी करने में भी मदद करेगा कि साइबर अपराधी अगला हमला किस तरीके से कर सकते हैं.
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साइबर अपराध के बदलते तरीके और चुनौतियां

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अपने भाषण में गृह मंत्री ने साइबर अपराध की बदलती प्रकृति पर भी चिंता जाहिर की. 30 नवंबर 2025 तक देश में 23 लाख 61 हजार से अधिक साइबर शिकायतें दर्ज की गई थीं. इनमें से एक लाख 85 हजार मामलों में एफआईआर दर्ज हो चुकी है.
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आजकल अपराधी नए-नए पैंतरे अपना रहे हैं:

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    डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest): खुद को सीबीआई या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर डराना.
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    निवेश के नाम पर ठगी: शेयर बाजार या क्रिप्टो में मोटे मुनाफे का लालच देना.
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    एआई का दुरुपयोग: डीपफेक (Deepfake) वीडियो और वॉइस क्लोनिंग के जरिए ठगी.
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    अंतर्राष्ट्रीय गिरोह: विदेशों में बैठकर भारत में ठगी करने वाले कॉल सेंटर्स.
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अमित शाह ने कहा कि हमें विदेशों में मौजूद इन कॉल सेंटर्स की पहचान करनी होगी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए उन्हें ध्वस्त करना होगा. पीड़ित से लेकर सीबीआई और एनआईए (NIA) तक, सभी को एक संवाद तंत्र (Communication Channel) स्थापित करना होगा.
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भविष्य की रणनीति: 2026 और उससे आगे

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अमित शाह सीबीआई साइबर क्राइम ब्रांच की स्थापना 2026 में सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत भारत को 'साइबर सुरक्षित राष्ट्र' बनाना है. गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि डिजिटल ट्रांजेक्शन के साथ रिस्क बढ़ा है, लेकिन हमारी तैयारी उस रिस्क से भी बड़ी है.
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सरकार की भविष्य की योजनाओं में शामिल हैं:

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    फास्ट ट्रैक कोर्ट: साइबर अपराधों के लिए विशेष अदालतें.
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    जागरूकता अभियान: गांव और कस्बों तक साइबर दोस्त (Cyber Dost) मुहीम को पहुंचाना.
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    तकनीकी अपग्रेडेशन: पुलिस थानों को साइबर फॉरेंसिक लैब से लैस करना.
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    अंतर्राष्ट्रीय संधि: साइबर अपराधियों के प्रत्यर्पण के लिए दूसरे देशों के साथ संधियां करना.
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आम जनता के लिए अमित शाह का संदेश

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गृह मंत्री के संबोधन का सार यही था कि तकनीक वरदान है, लेकिन सतर्कता ही सुरक्षा है. उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे लालच में न आएं और अपनी निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें. 'म्यूल अकाउंट हंटर ऐप' और अमित शाह सीबीआई साइबर क्राइम ब्रांच जैसे कदम तभी सफल होंगे जब जनता भी जागरूक रहेगी.
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सीबीआई की नई साइबर क्राइम ब्रांच और S4C डैशबोर्ड का उद्घाटन भारत की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर है. 8,000 करोड़ रुपये की रिकवरी और लाखों सिम कार्ड का ब्लॉक होना यह दर्शाता है कि सरकार की नियत और नीति दोनों साफ हैं.
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हालांकि, जैसा कि अमित शाह ने चेतावनी दी है, यह लड़ाई लंबी है. ठग हर दिन नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में अमित शाह सीबीआई साइबर क्राइम ब्रांच को न केवल अपराधियों से एक कदम आगे रहना होगा, बल्कि बैंकों, पुलिस और जनता के बीच एक मजबूत समन्वय भी स्थापित करना होगा. अगर हम 'डिजिटल इंडिया' को सफल बनाना चाहते हैं, तो हमें 'सुरक्षित डिजिटल इंडिया' की नींव को और गहरा करना होगा.
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए नई दिल्ली में सीबीआई की विशेष साइबर क्राइम ब्रांच और I4C के S4C डैशबोर्ड का उद्घाटन किया. उन्होंने खुलासा किया कि सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 8,000 करोड़ रुपये की ठगी की रकम फ्रीज की है और 12 लाख से अधिक फर्जी सिम कार्ड ब्लॉक किए हैं. शाह ने बैंकों को 'म्यूल अकाउंट हंटर ऐप' अपनाने और पुलिस को 1930 हेल्पलाइन का रिस्पांस टाइम सुधारने का कड़ा निर्देश दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अभी नहीं चेते तो साइबर क्राइम भविष्य में एक बड़ा संकट बन जाएगा.
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